मरुस्थलीकरण रोकथाम — वृक्षारोपण, शेल्टरबेल्ट, IGNP
मरुस्थलीकरण: परिभाषा और राजस्थान में समस्या
मरुस्थलीकरण (Desertification) वह प्रक्रिया है जिसमें उपजाऊ भूमि धीरे-धीरे रेगिस्तान में परिवर्तित हो जाती है। राजस्थान में मरुस्थलीकरण रोकथाम एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय चुनौती है, जिसके समाधान के लिए वृक्षारोपण, शेल्टरबेल्ट और IGNP जैसी परियोजनाएं चलाई जा रही हैं।
मरुस्थलीकरण के कारण
- जलवायु परिवर्तन: कम वर्षा (150-500 मिमी वार्षिक), उच्च तापमान और सूखे की स्थिति
- अत्यधिक चराई: पशुओं द्वारा वनस्पति का अत्यधिक दोहन
- वनों की कटाई: ईंधन और निर्माण सामग्री के लिए अवैध वृक्षों की कटाई
- खनन गतिविधियां: खनिज खनन से भूमि का क्षरण
- कृषि दबाव: अनुपयुक्त कृषि पद्धतियां और अधिक सिंचाई
वृक्षारोपण कार्यक्रम और तरीके
वृक्षारोपण (Afforestation) मरुस्थलीकरण रोकथाम का सबसे प्रभावी तरीका है। राजस्थान सरकार ने विभिन्न वृक्षारोपण कार्यक्रम शुरू किए हैं जो मरुस्थल को हरा-भरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
राजस्थान में प्रमुख वृक्षारोपण योजनाएं
| योजना का नाम | वर्ष शुरुआत | उद्देश्य | क्षेत्र |
|---|---|---|---|
| राज्य वन नीति | 1952 | वन क्षेत्र में वृद्धि | पूरा राजस्थान |
| राष्ट्रीय वनरोपण कार्यक्रम | 1985 | बंजर भूमि को वन में बदलना | पश्चिमी राजस्थान |
| हरित राजस्थान योजना | 2010 | 2 करोड़ पेड़ लगाना | सभी जिले |
| राजीव गांधी वन मिशन | 1992 | सामाजिक वनिकी | ग्रामीण क्षेत्र |
वृक्षारोपण के तरीके
- सामाजिक वनिकी: ग्रामीण समुदायों को वृक्षारोपण में शामिल करना
- कृषि वनिकी: खेतों की सीमाओं पर पेड़ लगाना
- शहरी वनिकी: शहरों में पार्क और सड़कों के किनारे पेड़ लगाना
- वन पुनर्जनन: क्षतिग्रस्त वनों को पुनः स्थापित करना
राजस्थान में प्रमुख वृक्ष प्रजातियां
शेल्टरबेल्ट (सुरक्षा पट्टियां)
शेल्टरबेल्ट (Shelterbelt) या सुरक्षा पट्टियां वृक्षों की पंक्तियां हैं जो तेज हवाओं, बालू के तूफान और मरुस्थलीकरण से भूमि की रक्षा करती हैं। राजस्थान में ये पट्टियां मरुस्थलीकरण रोकथाम का एक महत्वपूर्ण साधन हैं।
शेल्टरबेल्ट की संरचना और लाभ
तेज हवाओं की गति को 50% तक कम करता है, जिससे बालू का कटाव रुकता है।
वाष्पीकरण को कम करके मिट्टी की नमी को बनाए रखता है।
फसलों की सुरक्षा करके कृषि उत्पादन में 20-30% वृद्धि करता है।
पक्षियों और छोटे जानवरों के लिए आश्रय प्रदान करता है।
शेल्टरबेल्ट की संरचना
राजस्थान में शेल्टरबेल्ट परियोजनाएं
- पश्चिमी राजस्थान शेल्टरबेल्ट परियोजना: जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर जिलों में 1970 के दशक से शुरू
- ग्रीन बेल्ट विकास: मरुस्थल के किनारों पर 50 किमी लंबी पट्टियां
- IGNP शेल्टरबेल्ट: इंदिरा गांधी नहर के साथ 5 किमी चौड़ी सुरक्षा पट्टियां
IGNP — इंदिरा गांधी नहर परियोजना
इंदिरा गांधी नहर परियोजना (Indira Gandhi Canal Project — IGNP) राजस्थान की सबसे महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजना है जो मरुस्थलीकरण रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह परियोजना सतलज-व्यास नदियों के जल को राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्रों तक पहुंचाती है।
IGNP की मुख्य विशेषताएं
- स्रोत: हरिके बैराज (पंजाब) से शुरुआत
- मुख्य नहर: 189 किमी (पंजाब और हरियाणा में)
- राजस्थान में: 460 किमी (हनुमानगढ़ से बाड़मेर तक)
- शाखाएं: 8000 किमी से अधिक सहायक नहरें
- सिंचाई क्षमता: 20 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचित करता है
- वृक्षारोपण: नहर के किनारों पर 5 किमी चौड़ी शेल्टरबेल्ट
- भूजल पुनर्भरण: नहर से रिसाव से भूजल स्तर में वृद्धि
- हरित क्षेत्र विस्तार: रेगिस्तान में कृषि योग्य भूमि का निर्माण
- कृषि उत्पादन: गेहूं, कपास, मूंगफली की खेती संभव बनाई
- आय में वृद्धि: किसानों की वार्षिक आय में 300% वृद्धि
- जनसंख्या वृद्धि: नहर क्षेत्र में 50 लाख से अधिक लोग निवास करते हैं
- रोजगार सृजन: कृषि और संबंधित उद्योगों में लाखों रोजगार
IGNP के चरण
| चरण | वर्ष | क्षेत्र | सिंचित क्षेत्र (हेक्टेयर) |
|---|---|---|---|
| चरण I | 1975-1988 | हनुमानगढ़ से सूरतगढ़ | 3.5 लाख |
| चरण II | 1988-2000 | सूरतगढ़ से बीकानेर | 5.5 लाख |
| चरण III | 2000-2020 | बीकानेर से जैसलमेर | 11 लाख |
सरकारी योजनाएं और नीतियां
राजस्थान सरकार ने मरुस्थलीकरण रोकथाम के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं और नीतियां बनाई हैं। ये योजनाएं वृक्षारोपण, शेल्टरबेल्ट और जल संरक्षण पर केंद्रित हैं।
राजस्थान राज्य वन नीति 2010
- लक्ष्य: 2025 तक राज्य में वन क्षेत्र को 33% तक बढ़ाना
- वृक्षारोपण: प्रतिवर्ष 5 करोड़ पेड़ लगाने का लक्ष्य
- सामाजिक वनिकी: ग्रामीण समुदायों को वन संरक्षण में भागीदार बनाना
- जैव विविधता संरक्षण: वन्यजीवों के आवास की सुरक्षा
प्रमुख सरकारी योजनाएं
CAZRI और AFRI की भूमिका
केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (CAZRI) और शुष्क वन अनुसंधान संस्थान (AFRI) दोनों जोधपुर में स्थित हैं। ये संस्थान मरुस्थलीकरण रोकथाम के लिए अनुसंधान करते हैं और किसानों को तकनीकी सहायता प्रदान करते हैं।
परीक्षा प्रश्न और सारांश
इंटरैक्टिव प्रश्न
पिछली परीक्षाओं के प्रश्न (PYQ)
कारण: (1) कम वर्षा (150-500 मिमी), (2) अत्यधिक चराई, (3) वनों की कटाई, (4) खनन गतिविधियां, (5) अनुपयुक्त कृषि पद्धतियां।
उपाय: (1) वृक्षारोपण — खेजड़ी, नीम, बबूल जैसी प्रजातियां, (2) शेल्टरबेल्ट — तीन पंक्तियों में वृक्ष, (3) IGNP — सिंचाई और शेल्टरबेल्ट, (4) जल संरक्षण — तालाब, जोहड़, (5) सरकारी योजनाएं — हरित राजस्थान योजना, राज्य वन नीति 2010।


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