नगर परिषद, नगर पालिका
परिचय एवं परिभाषा
नगर परिषद (Municipal Council) और नगर पालिका (Municipal Corporation) भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243 के तहत स्थानीय शहरी प्रशासन की मूल इकाइयाँ हैं। ये राजस्थान सरकार की परीक्षाओं में महत्वपूर्ण विषय हैं।
नगर परिषद की परिभाषा
नगर परिषद एक स्थानीय निकाय है जो जनसंख्या 20,000 से 1,00,000 तक वाले शहरों में स्थापित किया जाता है। इसे Municipal Council (MC) भी कहा जाता है। यह निकाय नगरीय क्षेत्र के विकास, स्वच्छता, जल आपूर्ति और सड़कों के रखरखाव के लिए जिम्मेदार है।
नगर पालिका की परिभाषा
नगर पालिका (Municipal Corporation) एक बड़ा स्थानीय निकाय है जो जनसंख्या 1,00,000 से अधिक वाले शहरों में स्थापित किया जाता है। इसे MC या नगर निगम भी कहा जाता है। यह अधिक जटिल प्रशासनिक कार्यों को संभालता है।
नगर परिषद की संरचना
नगर परिषद की संरचना सरल और लचीली होती है। इसमें निर्वाचित सदस्य, मनोनीत सदस्य और अधिकारी होते हैं।
नगर परिषद के मुख्य अंग
- अध्यक्ष (Chairman): नगर परिषद का प्रमुख, जनता द्वारा प्रत्यक्ष निर्वाचन से चुना जाता है
- उप-अध्यक्ष (Vice-Chairman): अध्यक्ष की अनुपस्थिति में कार्य संभालता है
- निर्वाचित सदस्य: वार्डों से जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि (सामान्यतः 15-40 सदस्य)
- मनोनीत सदस्य: राज्य सरकार द्वारा नियुक्त विशेषज्ञ (कुल सदस्यों का 1/6 तक)
- आयुक्त (Commissioner): प्रशासनिक प्रमुख, सरकार द्वारा नियुक्त
| पद | चयन विधि | कार्यकाल |
|---|---|---|
| अध्यक्ष | प्रत्यक्ष निर्वाचन | 5 वर्ष |
| उप-अध्यक्ष | सदस्यों द्वारा निर्वाचन | 5 वर्ष |
| निर्वाचित सदस्य | वार्ड से जनता द्वारा | 5 वर्ष |
| मनोनीत सदस्य | राज्य सरकार द्वारा | 5 वर्ष |
| आयुक्त | राज्य सरकार द्वारा | निर्धारित अवधि |
नगर परिषद की समितियाँ
नगर परिषद अपने कार्यों को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए विभिन्न समितियाँ बनाती है:
- स्थायी समिति: नीति निर्माण और पर्यवेक्षण के लिए
- वित्त समिति: बजट और वित्तीय मामलों के लिए
- कार्य समिति: दैनिक प्रशासनिक कार्यों के लिए
- विशेष समितियाँ: शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क आदि के लिए
नगर पालिका की संरचना
नगर पालिका (Municipal Corporation) की संरचना अधिक जटिल और विस्तृत है। इसमें निगम आयुक्त, जिला प्रशासक, निर्वाचित सदस्य और विभिन्न विभाग होते हैं।
नगर पालिका के मुख्य अंग
- महापौर (Mayor): नगर पालिका का संवैधानिक प्रमुख, जनता द्वारा निर्वाचित
- उप-महापौर (Deputy Mayor): महापौर की सहायता के लिए
- निगम आयुक्त (Municipal Commissioner): प्रशासनिक प्रमुख, सरकार द्वारा नियुक्त
- निर्वाचित सदस्य (Corporators): वार्डों से चुने गए (सामान्यतः 50-150 सदस्य)
- मनोनीत सदस्य: विशेषज्ञ और प्रतिनिधि (कुल सदस्यों का 1/6 तक)
- जिला प्रशासक: पदेन सदस्य, जिले का प्रशासनिक प्रमुख
नगर पालिका की विभागीय संरचना
नगर पालिका में विभिन्न विभाग होते हैं जो विशिष्ट कार्यों को संभालते हैं:
- सिविल विभाग: सड़कें, पुल, भवन निर्माण
- स्वास्थ्य विभाग: जनस्वास्थ्य, अस्पताल, टीकाकरण
- शिक्षा विभाग: प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय
- जल आपूर्ति विभाग: पानी की व्यवस्था और सीवरेज
- नगर योजना विभाग: शहरी विकास और भूमि उपयोग
- राजस्व विभाग: कर संग्रह और वित्तीय प्रबंधन
| पद | चयन विधि | कार्यकाल | जिम्मेदारी |
|---|---|---|---|
| महापौर | प्रत्यक्ष निर्वाचन | 5 वर्ष | राजनीतिक नेतृत्व |
| निगम आयुक्त | सरकार द्वारा नियुक्ति | निर्धारित | प्रशासनिक नेतृत्व |
| Corporators | वार्ड से निर्वाचन | 5 वर्ष | जनप्रतिनिधित्व |
| जिला प्रशासक | पदेन सदस्य | निर्धारित | समन्वय |
कार्य एवं शक्तियाँ
नगर परिषद और नगर पालिका के कार्य और शक्तियाँ राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243 द्वारा निर्धारित की गई हैं।
अनिवार्य कार्य (Mandatory Functions)
ये कार्य नगर परिषद और नगर पालिका दोनों को करने अनिवार्य हैं:
- सड़कें और पुल: सड़कों का निर्माण, मरम्मत और रखरखाव
- जल आपूर्ति: पीने योग्य जल की व्यवस्था
- सफाई और स्वच्छता: कूड़े का प्रबंधन और सीवरेज व्यवस्था
- सार्वजनिक स्वास्थ्य: बीमारियों की रोकथाम और स्वास्थ्य सेवाएँ
- प्रकाश व्यवस्था: सड़कों पर बिजली की व्यवस्था
- पशु नियंत्रण: आवारा पशुओं पर नियंत्रण
वैकल्पिक कार्य (Optional Functions)
ये कार्य नगर परिषद और नगर पालिका अपनी क्षमता अनुसार कर सकते हैं:
- शिक्षा: प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय संचालित करना
- पुस्तकालय: सार्वजनिक पुस्तकालय की स्थापना
- पार्क और बाग: सार्वजनिक पार्कों का विकास
- बाजार: सार्वजनिक बाजार और हाट का प्रबंधन
- कला और संस्कृति: सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन
- खेल सुविधाएँ: खेल के मैदान और जिम्नेजियम
- कर लगाने की शक्ति: संपत्ति कर, व्यावसायिक कर आदि लगा सकता है
- बजट बनाने की शक्ति: वार्षिक बजट तैयार करना
- नियम बनाने की शक्ति: स्थानीय नियम बना सकता है
- अनुदान देने की शक्ति: जरूरतमंद व्यक्तियों को अनुदान दे सकता है
- कर्मचारी नियुक्ति: अपने कर्मचारियों की नियुक्ति कर सकता है
- विस्तृत कर शक्ति: अधिक प्रकार के कर लगा सकता है
- बड़े प्रकल्प: बड़े विकास परियोजनाएँ ले सकता है
- उद्योग नियंत्रण: औद्योगिक प्रतिष्ठानों पर नियंत्रण
- पर्यावरण संरक्षण: प्रदूषण नियंत्रण के कड़े नियम बना सकता है
- शहरी योजना: विस्तृत शहरी विकास योजनाएँ बना सकता है
सड़कें, पुल, जल आपूर्ति और सीवरेज का निर्माण और रखरखाव सबसे महत्वपूर्ण कार्य है।
जनस्वास्थ्य, स्वच्छता और बीमारी नियंत्रण कार्यक्रम संचालित करना।
प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय संचालित करना और शिक्षा का प्रसार करना।
कर संग्रह, बजट निर्माण और वित्तीय संसाधनों का सुचारु प्रबंधन।
राजस्थान में नगर परिषद एवं पालिका
राजस्थान में नगर परिषद और नगर पालिका दोनों का विस्तृत नेटवर्क है। ये शहरी प्रशासन की रीढ़ हैं और राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 के तहत काम करते हैं।
राजस्थान में नगर निकायों का वर्गीकरण
| वर्ग | जनसंख्या | प्रकार | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| A वर्ग | 10 लाख से अधिक | नगर निगम | जयपुर, अलवर |
| B वर्ग | 5 लाख – 10 लाख | नगर निगम | जोधपुर, कोटा |
| C वर्ग | 1 लाख – 5 लाख | नगर निगम | अजमेर, बीकानेर, उदयपुर |
| D वर्ग | 20,000 – 1 लाख | नगर परिषद | सीकर, झुंझुनूँ, नागौर |
| E वर्ग | 5,000 – 20,000 | नगर पालिका समिति | छोटे कस्बे |
राजस्थान के प्रमुख नगर निकाय
राजस्थान में नगर परिषदें
राजस्थान में लगभग 100 से अधिक नगर परिषदें हैं जो छोटे और मध्यम आकार के शहरों का प्रशासन संभालती हैं। ये परिषदें स्थानीय विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
- सीकर: D वर्ग नगर परिषद, जनसंख्या 2+ लाख
- झुंझुनूँ: D वर्ग नगर परिषद, जनसंख्या 1.5+ लाख
- नागौर: D वर्ग नगर परिषद, जनसंख्या 1+ लाख
- पाली: D वर्ग नगर परिषद, जनसंख्या 1+ लाख
- सवाई माधोपुर: D वर्ग नगर परिषद, जनसंख्या 80,000+
राजस्थान में नगर निकायों की संख्या
परीक्षा प्रश्न एवं सारांश
इंटरैक्टिव प्रश्न
पिछली परीक्षाओं के प्रश्न (PYQ)
- अनिवार्य कार्य: सड़कें, जल आपूर्ति, सफाई, स्वास्थ्य, प्रकाश व्यवस्था
- वैकल्पिक कार्य: शिक्षा, पुस्तकालय, पार्क, बाजार, सांस्कृतिक कार्यक्रम
- वित्तीय कार्य: कर संग्रह, बजट निर्माण, वित्तीय प्रबंधन


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