पंचम चरण — संयुक्त वृहत् राजस्थान (15 मई 1949)
परिचय — पंचम चरण का महत्व
पंचम चरण (15 मई 1949) राजस्थान के एकीकरण का एक महत्वपूर्ण मोड़ था, जिसमें मत्स्य संघ को संयुक्त वृहत् राजस्थान में मिलाया गया। यह चरण राजस्थान की राजनीतिक एकता की ओर एक बड़ा कदम था और Rajasthan Govt Exam Preparation के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
चतुर्थ चरण (30 मार्च 1949) में जयपुर, जोधपुर, बीकानेर और जैसलमेर को मिलाकर वृहत् राजस्थान बनाया गया था। इसके बाद पंचम चरण में मत्स्य संघ (अलवर, भरतपुर, धौलपुर और करौली) को इसमें मिलाया गया। इस चरण के बाद राजस्थान की क्षेत्रीय विस्तार लगभग पूर्ण हो गया।

मत्स्य संघ का इतिहास और संरचना
मत्स्य संघ का गठन 18 मार्च 1948 को किया गया था। इसमें चार रियासतें शामिल थीं: अलवर, भरतपुर, धौलपुर और करौली। ये सभी रियासतें मथुरा-आगरा क्षेत्र के पास स्थित थीं और ब्रिटिश भारत के उत्तरी भाग में आती थीं।
मत्स्य संघ का नाम प्राचीन भारतीय ग्रंथों में वर्णित मत्स्य देश से लिया गया था। यह नाम इन रियासतों के ऐतिहासिक महत्व को दर्शाता है। मत्स्य संघ की राजधानी अलवर थी।
| रियासत | क्षेत्र (वर्ग मील) | जनसंख्या | मुख्य विशेषता |
|---|---|---|---|
| अलवर | 2,300 | ~5.5 लाख | राजधानी, सबसे बड़ी रियासत |
| भरतपुर | 2,000 | ~4.2 लाख | जाट राज्य, कृषि प्रधान |
| धौलपुर | 900 | ~1.8 लाख | छोटी रियासत, चंबल नदी के किनारे |
| करौली | 900 | ~1.6 लाख | छोटी रियासत, व्यापारिक केंद्र |
- राजप्रमुख: अलवर के महाराजा को राजप्रमुख बनाया गया था
- मुख्यमंत्री: हीरालाल शास्त्री को मत्स्य संघ का पहला मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया
- विधानसभा: 60 सदस्यीय विधानसभा का गठन किया गया
- राजस्व संरचना: प्रत्येक रियासत अपना राजस्व प्रणाली बनाए रखती थी
- सैन्य व्यवस्था: संघीय सेना का गठन किया गया
संयुक्त वृहत् राजस्थान का गठन
15 मई 1949 को मत्स्य संघ को संयुक्त वृहत् राजस्थान में मिलाया गया। इस समय तक वृहत् राजस्थान में पहले से ही जयपुर, जोधपुर, बीकानेर और जैसलमेर शामिल थे। मत्स्य संघ के विलय के बाद राजस्थान का क्षेत्रफल और जनसंख्या दोनों में काफी वृद्धि हुई।
संयुक्त वृहत् राजस्थान की राजधानी जयपुर को बनाया गया। यह निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि जयपुर राजस्थान के मध्य में स्थित था और सबसे बड़ी रियासत थी। संयुक्त वृहत् राजस्थान में अब कुल 9 रियासतें शामिल थीं।

प्रशासनिक संरचना और चुनौतियाँ
संयुक्त वृहत् राजस्थान की प्रशासनिक संरचना काफी जटिल थी। इसमें विभिन्न रियासतों की अलग-अलग प्रशासनिक प्रणालियों को एकीकृत करना पड़ा। हीरालाल शास्त्री को संयुक्त वृहत् राजस्थान का मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया।
प्रशासनिक एकीकरण की प्रक्रिया में कई चुनौतियाँ आईं। विभिन्न रियासतों के बीच राजस्व संग्रहण की प्रणाली अलग थी, न्यायिक व्यवस्था भिन्न थी, और सैन्य संरचना भी अलग-अलग थी। इन सभी को एकीकृत करना एक दुरूह कार्य था।
विभिन्न रियासतों की अलग-अलग प्रशासनिक प्रणालियों को एकीकृत करना मुश्किल था।
प्रत्येक रियासत की अलग राजस्व प्रणाली थी जिसे एकीकृत करना आवश्यक था।
विभिन्न रियासतों में न्यायिक प्रणाली भिन्न थी जिसे समरूप करना पड़ा।
विभिन्न रियासतों की सेनाओं को एकीकृत सैन्य बल में परिवर्तित करना पड़ा।
- राजप्रमुख: सवाई मान सिंह II (जयपुर के महाराजा)
- मुख्यमंत्री: हीरालाल शास्त्री (मत्स्य संघ के पूर्व मुख्यमंत्री)
- विधानसभा: 160 सदस्यीय विधानसभा
- जिले: कुल 26 जिले (विभिन्न रियासतों से)
- राजस्व विभाग: एकीकृत राजस्व प्रणाली स्थापित की गई
- पुलिस: संघीय पुलिस बल का गठन किया गया
ऐतिहासिक महत्व और परिणाम
पंचम चरण (15 मई 1949) राजस्थान के एकीकरण का एक महत्वपूर्ण मोड़ था। इस चरण के बाद राजस्थान लगभग अपने वर्तमान आकार के करीब आ गया। केवल सिरोही और अजमेर-मेरवाड़ा को अभी भी मिलाना बाकी था।
संयुक्त वृहत् राजस्थान का गठन भारतीय राजनीतिक एकीकरण का एक सफल उदाहरण था। इसने दिखाया कि विभिन्न रियासतें, भले ही उनकी अलग-अलग प्रशासनिक व्यवस्थाएँ थीं, एक साथ काम कर सकती हैं। यह एकीकरण प्रक्रिया सरदार वल्लभभाई पटेल और VP मेनन की दूरदर्शिता का परिणाम था।
- तीव्र एकीकरण: मत्स्य संघ के विलय से राजस्थान का एकीकरण तेजी से आगे बढ़ा
- प्रशासनिक सफलता: विभिन्न रियासतों की प्रशासनिक व्यवस्थाओं को सफलतापूर्वक एकीकृत किया गया
- राजनीतिक स्थिरता: संयुक्त वृहत् राजस्थान में राजनीतिक स्थिरता बनी रही
- आर्थिक विकास: एकीकरण के बाद आर्थिक विकास में तेजी आई



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