पशुधन — भारत में #1 (2019 पशुगणना)
परिचय — राजस्थान का पशुधन वर्चस्व
राजस्थान भारत में पशुधन (livestock) के क्षेत्र में सर्वोच्च स्थान रखता है। 2019 की पशुगणना के अनुसार, राजस्थान के पास भारत के कुल पशुधन का 13.7% हिस्सा है, जो किसी भी अन्य राज्य से अधिक है। यह राजस्थान की अर्थव्यवस्था में पशुपालन के महत्व को दर्शाता है।
पशुधन में गाय, भैंस, भेड़, बकरी, ऊंट, सूअर, घोड़े, खच्चर और गधे शामिल हैं। राजस्थान की जलवायु, भूगोल और सांस्कृतिक परंपरा पशुपालन के लिए अनुकूल हैं। राजस्थान की 60% आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पशुपालन पर निर्भर है।

2019 पशुगणना — डेटा और आंकड़े
2019 की पशुगणना में राजस्थान के पशुधन के विस्तृत आंकड़े सामने आए। राजस्थान में कुल 5.76 करोड़ पशु (57.6 मिलियन) हैं, जो भारत के कुल 30 करोड़ पशुओं का 19.2% है।
| पशु प्रजाति | राजस्थान में संख्या (लाख में) | भारत में स्थान | भारत के कुल का % |
|---|---|---|---|
| गाय | 1,50,00,000 | #1 | 20.8% |
| भैंस | 80,00,000 | #2 | 13.5% |
| भेड़ | 90,00,000 | #1 | 31.8% |
| बकरी | 1,20,00,000 | #1 | 21.5% |
| ऊंट | 3,50,000 | #1 | 99.5% |
| घोड़े/खच्चर/गधे | 15,00,000 | #1 | 35.2% |
मुख्य आंकड़े
- कुल पशुधन: 5.76 करोड़ (2019)
- भारत में स्थान: #1 (सर्वोच्च)
- भारत के कुल का हिस्सा: 19.2%
- पिछली गणना से वृद्धि: 2014 से 8.3% की वृद्धि
- भेड़ और बकरी: राजस्थान के पास भारत का 1/3 हिस्सा
पशुधन संरचना — प्रजातियाँ और वितरण
राजस्थान के पशुधन में विभिन्न प्रजातियों का विविध मिश्रण है। प्रत्येक प्रजाति का अपना आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व है।
प्रमुख पशु प्रजातियाँ
भौगोलिक वितरण
राजस्थान के विभिन्न जिलों में पशुधन का वितरण अलग-अलग है:
- बीकानेर: ऊंट पालन का प्रमुख केंद्र (40% ऊंट)
- जैसलमेर: ऊंट और भेड़ पालन
- जोधपुर: भेड़ और बकरी पालन
- बाड़मेर: ऊंट और भेड़
- उदयपुर: गाय और भैंस पालन
- अलवर: डेयरी और दूध उत्पादन

आर्थिक महत्व और योगदान
पशुधन राजस्थान की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। यह कृषि GDP का 25-30% योगदान देता है और लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करता है।
आर्थिक योगदान
राजस्थान भारत का दूसरा सबसे बड़ा दूध उत्पादक राज्य है। वार्षिक दूध उत्पादन 1.5 करोड़ टन है।
भारत का 50% ऊन राजस्थान में उत्पादित होता है। वार्षिक ऊन उत्पादन 40,000 टन है।
बकरी और भेड़ के मांस का प्रमुख उत्पादक। वार्षिक मांस उत्पादन 2.5 लाख टन है।
60% ग्रामीण आबादी पशुपालन पर निर्भर है। 50 लाख से अधिक परिवार पशुपालन करते हैं।
खाद (गोबर) और खेती के लिए पशु शक्ति प्रदान करते हैं। जैविक खेती में महत्वपूर्ण।
ऊन, चमड़ा, और पशु उत्पाद निर्यात से विदेशी मुद्रा अर्जन होता है।
RCDF और सरस ब्रांड
राजस्थान सहकारी डेयरी फेडरेशन (RCDF) दूध उत्पादकों को संगठित करता है। सरस ब्रांड दूध और दूध उत्पादों का प्रमुख ब्रांड है जो पूरे भारत में बिकता है।
चुनौतियाँ और विकास रणनीति
राजस्थान के पशुधन क्षेत्र को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन सरकार विकास के लिए कई योजनाएँ चला रही है।
मुख्य चुनौतियाँ
- समस्या: राजस्थान में अनियमित वर्षा और सूखा की स्थिति पशुओं के लिए चारे की कमी करती है
- प्रभाव: पशुओं की मृत्यु दर बढ़ती है और उत्पादकता घटती है
- समाधान: चारागाह विकास और सिंचाई सुविधाएँ
- समस्या: लंपी स्किन डिजीज, ब्रुसेलोसिस, और अन्य संक्रामक रोग
- प्रभाव: बड़े पैमाने पर पशु मृत्यु और आर्थिक नुकसान
- समाधान: पशु चिकित्सा सेवाएँ और टीकाकरण कार्यक्रम
- समस्या: पशु उत्पादों की कीमतों में उतार-चढ़ाव
- प्रभाव: किसानों की आय अनिश्चित रहती है
- समाधान: न्यूनतम समर्थन मूल्य और सहकारी संस्थाएँ
विकास रणनीति
- उद्देश्य: उच्च उत्पादकता वाली नस्लें विकसित करना
- कार्यक्रम: कृत्रिम गर्भाधान और नस्ल सुधार केंद्र
- परिणाम: दूध उत्पादन 30% तक बढ़ा है
- पशु चिकित्सा अस्पताल: हर जिले में 1-2 अस्पताल
- पशु चिकित्सा क्लीनिक: गाँवों में मोबाइल क्लीनिक
- टीकाकरण: नियमित टीकाकरण कार्यक्रम
- लक्ष्य: 50 लाख हेक्टेयर चारागाह विकास
- कार्य: घास और चारे की खेती को बढ़ावा
- लाभ: पशुओं को पूरे साल चारा उपलब्ध
- संगठन: RCDF के तहत 10,000+ दूध सहकारी
- सदस्य: 30 लाख दूध उत्पादक
- लाभ: सरस ब्रांड के माध्यम से सीधा बाजार
- प्रधानमंत्री पशुधन बीमा योजना: पशु मृत्यु पर मुआवजा
- कवरेज: गाय, भैंस, भेड़, बकरी, ऊंट
- प्रीमियम: सरकार द्वारा 50% सब्सिडी
- ऊंट अनुसंधान केंद्र: बीकानेर में स्थापित
- पशु विज्ञान विश्वविद्यालय: बीकानेर में
- प्रशिक्षण: किसानों को आधुनिक पशुपालन तकनीकें सिखाई जाती हैं


Leave a Reply