समितियां — लोक लेखा, प्राक्कलन, सरकारी आश्वासन
राजस्थान सरकारी परीक्षा तैयारी के लिए विस्तृत अध्ययन सामग्री
विधानसभा समितियों का परिचय
राजस्थान विधानसभा की समितियां विधायकों द्वारा गठित विशेष निकाय हैं जो विधानसभा के कार्यों को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाते हैं। ये समितियां सरकारी कार्यों की जांच, बजट विश्लेषण और विधायकों के आश्वासनों की निगरानी करती हैं।
समितियों का वर्गीकरण
- वित्तीय समितियां: लोक लेखा समिति, प्राक्कलन समिति, सरकारी आश्वासन समिति
- स्थायी समितियां: नियमित रूप से कार्य करने वाली समितियां जो विधानसभा के नियमों द्वारा स्थापित होती हैं
- तदर्थ समितियां: विशेष उद्देश्यों के लिए गठित अस्थायी समितियां
- संयुक्त समितियां: विधानसभा और विधान परिषद के सदस्यों से गठित समितियां
समितियों के मुख्य कार्य
- सरकारी व्यय की जांच और नियंत्रण
- बजट प्रस्तावों का विश्लेषण
- विधायकों के आश्वासनों की पूर्ति की निगरानी
- सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करना
- विधानसभा के कार्यों को अधिक प्रभावी बनाना

लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee – PAC)
लोक लेखा समिति (PAC) राजस्थान विधानसभा की सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय समिति है जो सरकारी धन के उपयोग की जांच करती है और लेखा परीक्षा रिपोर्टों का विश्लेषण करती है।
संरचना और गठन
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| सदस्य संख्या | 15-17 सदस्य |
| अध्यक्ष | विपक्ष के सदस्य (परंपरागत नियम) |
| कार्यकाल | 1 वर्ष |
| गठन | विधानसभा के सभी दलों से प्रतिनिधित्व |
| रिपोर्ट प्रस्तुति | विधानसभा में प्रत्येक सत्र में |
मुख्य कार्य और शक्तियां
- लेखा परीक्षा रिपोर्ट की जांच: नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्टों का विश्लेषण
- सरकारी व्यय की समीक्षा: राजस्व और पूंजीगत व्यय की जांच
- सार्वजनिक धन का उपयोग: सरकारी निधियों के सदुपयोग की निगरानी
- अनियमितताओं की जांच: वित्तीय अनियमितताओं और दुरुपयोग की जांच
- सिफारिशें: सुधार के लिए सरकार को सिफारिशें प्रस्तुत करना
- चरण 1: CAG की रिपोर्ट प्राप्त करना और उसका अध्ययन
- चरण 2: संबंधित विभागों से जानकारी मांगना
- चरण 3: अधिकारियों और मंत्रियों से सुनवाई करना
- चरण 4: साक्ष्य का विश्लेषण और निष्कर्ष निकालना
- चरण 5: विधानसभा में रिपोर्ट प्रस्तुत करना
- चरण 6: सरकार द्वारा कार्रवाई की निगरानी
राजस्थान में PAC की भूमिका
राजस्थान विधानसभा की लोक लेखा समिति राज्य के सभी विभागों के वित्तीय लेनदेन की जांच करती है। यह समिति विशेष रूप से बड़ी परियोजनाओं, सार्वजनिक निर्माण कार्यों और विकास योजनाओं के खर्चों की जांच करती है।
प्राक्कलन समिति (Estimates Committee)
प्राक्कलन समिति सरकार के बजट प्रस्तावों का विश्लेषण करती है और यह सुनिश्चित करती है कि सरकारी व्यय आर्थिक और कुशल है। यह समिति बजट के विभिन्न मदों की व्यावहारिकता की जांच करती है।
संरचना और विशेषताएं
मुख्य कार्य
- बजट विश्लेषण: सरकार के बजट प्रस्तावों की विस्तृत जांच
- आर्थिकता की समीक्षा: सरकारी व्यय की आर्थिकता और दक्षता का मूल्यांकन
- बचत के सुझाव: सरकारी खर्चों में बचत के लिए सुझाव
- नीति समीक्षा: सरकारी नीतियों की व्यावहारिकता की जांच
- विभागीय कार्यक्षमता: विभिन्न विभागों की कार्यक्षमता का मूल्यांकन
PAC और Estimates Committee में अंतर
| पहलू | लोक लेखा समिति (PAC) | प्राक्कलन समिति |
|---|---|---|
| फोकस | व्यतीत व्यय की जांच | भविष्य के बजट का विश्लेषण |
| समय | खर्च के बाद | खर्च से पहले |
| अध्यक्ष | विपक्ष का सदस्य | सत्तारूढ़ दल का सदस्य |
| उद्देश्य | जवाबदेही सुनिश्चित करना | भविष्य की योजना में सुधार |
| आधार | CAG की रिपोर्ट | बजट अनुमान |

सरकारी आश्वासन समिति (Government Assurances Committee)
सरकारी आश्वासन समिति विधानसभा में सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों और प्रतिश्रुतियों की निगरानी करती है। यह समिति सुनिश्चित करती है कि सरकार अपने आश्वासनों को समय पर पूरा करे।
आश्वासन क्या है?
आश्वासन वह प्रतिश्रुति है जो सरकार (मंत्री) विधानसभा में किसी विधायक के प्रश्न के उत्तर में देती है। जब सरकार किसी विशेष कार्य को करने या समस्या को हल करने का वचन देती है, तो वह आश्वासन कहलाता है।
आश्वासन समिति की संरचना
मुख्य कार्य
- आश्वासनों का रिकॉर्ड: विधानसभा में दिए गए सभी आश्वासनों का विस्तृत रिकॉर्ड रखना
- पूर्ति की निगरानी: सरकार द्वारा आश्वासनों की पूर्ति की जांच करना
- समय सीमा: आश्वासनों को पूरा करने के लिए समय सीमा निर्धारित करना
- विभागीय संपर्क: संबंधित विभागों से जानकारी प्राप्त करना
- रिपोर्ट प्रस्तुति: विधानसभा में आश्वासनों की स्थिति की रिपोर्ट प्रस्तुत करना
- अनुवर्ती कार्रवाई: अधूरे आश्वासनों के लिए सरकार को कार्रवाई के लिए कहना
आश्वासन की प्रक्रिया
अन्य महत्वपूर्ण समितियां
राजस्थान विधानसभा में तीन मुख्य वित्तीय समितियों के अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण समितियां भी होती हैं जो विभिन्न विषयों पर कार्य करती हैं।
अन्य प्रमुख समितियां
समितियों की महत्ता
- विशेषज्ञता: समितियां विशेष विषयों पर गहन अध्ययन करती हैं
- विस्तृत जांच: पूरी विधानसभा में संभव नहीं है, समितियां विस्तृत जांच करती हैं
- समय की बचत: समितियां विधानसभा का समय बचाती हैं
- सरकारी जवाबदेही: सरकार को समितियों के सामने जवाबदेह होना पड़ता है
- विधायकों की भागीदारी: सभी विधायकों को समितियों में काम करने का अवसर मिलता है
- पारदर्शिता: समितियों की रिपोर्टें सार्वजनिक होती हैं, जिससे पारदर्शिता आती है
समितियों की शक्तियां
- साक्ष्य लेने की शक्ति: समितियां गवाहों से सवाल पूछ सकती हैं
- दस्तावेज मांगने की शक्ति: सरकारी दस्तावेज मांग सकती हैं
- निरीक्षण की शक्ति: परियोजनाओं और कार्यों का निरीक्षण कर सकती हैं
- रिपोर्ट प्रस्तुत करने की शक्ति: विधानसभा को रिपोर्ट प्रस्तुत कर सकती हैं
- सिफारिशें करने की शक्ति: सुधार के लिए सिफारिशें कर सकती हैं
परीक्षा प्रश्न और सारांश
मुख्य बिंदु स्मरण सूत्र
त्वरित संशोधन तालिका
इंटरैक्टिव प्रश्न – 1
इंटरैक्टिव प्रश्न – 2
इंटरैक्टिव प्रश्न – 3
पिछले वर्षों के परीक्षा प्रश्न (PYQ)
1. लोक लेखा समिति (PAC): इसमें 15-17 सदस्य होते हैं और इसका अध्यक्ष विपक्ष का सदस्य होता है। यह नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्टों का विश्लेषण करती है और सरकारी व्यय की जांच करती है।
2. प्राक्कलन समिति: इसका अध्यक्ष सत्तारूढ़ दल का सदस्य होता है। यह सरकार के बजट प्रस्तावों का विश्लेषण करती है और सरकारी व्यय की आर्थिकता और दक्षता का मूल्यांकन करती है।
3. सरकारी आश्वासन समिति: यह विधानसभा में सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों की निगरानी करती है और सुनिश्चित करती है कि सरकार अपनी प्रतिश्रुतियों को पूरा करे।
ये समितियां विधानसभा की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह बनाती हैं।
B. प्राक्कलन समिति ✓
C. सरकारी आश्वासन समिति
D. कानून और न्याय समिति


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