सप्तम चरण — पुनर्गठित राजस्थान (1 नवंबर 1956)
परिचय — सप्तम चरण का महत्व
सप्तम चरण (1 नवंबर 1956) राजस्थान के एकीकरण का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण था, जिसमें अजमेर-मेरवाड़ा और माउंट आबू को राजस्थान में मिलाया गया। यह चरण राजस्थान को वर्तमान भौगोलिक सीमाओं में परिणत करने वाला निर्णायक कदम था।
राजस्थान के एकीकरण की यात्रा 1948 से शुरू हुई थी और 1956 तक पूरी हुई। सप्तम चरण से पहले छः चरणों में विभिन्न रियासतें और क्षेत्र राजस्थान में मिलाए जा चुके थे। लेकिन अजमेर-मेरवाड़ा और माउंट आबू का समावेश राजस्थान को भारतीय संघ में एक पूर्ण और सुसंगत राज्य बनाने के लिए आवश्यक था।

अजमेर-मेरवाड़ा का एकीकरण
अजमेर-मेरवाड़ा एक ब्रिटिश प्रशासित क्षेत्र था जो मध्य भारत में स्थित था। यह क्षेत्र ब्रिटिश राज के अंतर्गत सीधे नियंत्रण में था और किसी रियासत के अधीन नहीं था। अजमेर शहर अपनी धार्मिक महत्ता के लिए प्रसिद्ध था, जहाँ ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह स्थित है।
अजमेर-मेरवाड़ा का भौगोलिक विस्तार
- अजमेर जिला — राजस्थान के मध्य भाग में स्थित, तीन ओर से राजस्थान से घिरा हुआ
- मेरवाड़ा क्षेत्र — अजमेर के आसपास का पहाड़ी इलाका, कृषि के लिए महत्वपूर्ण
- कुल क्षेत्रफल — लगभग 3,200 वर्ग किलोमीटर
- जनसंख्या — लगभग 6 लाख (1956 में)
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| ब्रिटिश नियंत्रण | 1818 से 1947 तक सीधे ब्रिटिश प्रशासन के अंतर्गत |
| मुख्य शहर | अजमेर (धार्मिक केंद्र), किशनगढ़ (कला केंद्र) |
| आर्थिक महत्व | कृषि, पशुपालन, और हस्तशिल्प |
| सांस्कृतिक विरासत | ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह, अजमेर शरीफ |
माउंट आबू का समावेश
माउंट आबू (आबू) राजस्थान का एकमात्र पर्वतीय पर्यटन स्थल है, जो अरावली पर्वत श्रेणी पर स्थित है। यह क्षेत्र गुजरात के साथ सीमा पर स्थित था और पहले बम्बई प्रेसीडेंसी के अंतर्गत आता था। माउंट आबू की ऊँचाई लगभग 1,722 मीटर है, जो राजस्थान का सबसे ऊँचा पर्वत शिखर है।
माउंट आबू की विशेषताएँ
- भौगोलिक स्थिति — राजस्थान के दक्षिण-पश्चिम में, गुजरात की सीमा पर
- जलवायु — ठंडी और सुहावनी, गर्मियों में पर्यटकों के लिए आदर्श
- प्राकृतिक सौंदर्य — घने जंगल, झीलें, और झरने
- धार्मिक महत्व — दिलवाड़ा जैन मंदिर, ब्रह्मकुंड
- प्रशासनिक महत्व — गर्मियों में राजस्थान सरकार का अस्थायी मुख्यालय

पुनर्गठन की प्रक्रिया और चुनौतियाँ
1956 में अजमेर-मेरवाड़ा और माउंट आबू को राजस्थान में मिलाने की प्रक्रिया भारतीय संविधान के 7वें संशोधन के तहत की गई थी। यह संशोधन राज्य पुनर्गठन आयोग (States Reorganisation Commission) की सिफारिशों पर आधारित था।
राज्य पुनर्गठन आयोग (1953-1955)
फजल अली आयोग (Fazal Ali Commission) ने भारत के राज्यों को भाषाई आधार पर पुनर्गठित करने की सिफारिश की थी। इसी आयोग ने अजमेर-मेरवाड़ा और माउंट आबू को राजस्थान में मिलाने की सिफारिश की थी।
- प्रशासनिक समन्वय — अलग-अलग प्रशासनिक व्यवस्था को एकीकृत करना
- राजस्व संग्रहण — अलग-अलग कर व्यवस्था को समान करना
- स्थानीय जनता की सहमति — अजमेर-मेरवाड़ा की जनता को राजस्थान में मिलाने के लिए मनाना
- भाषा और संस्कृति — विभिन्न भाषाई और सांस्कृतिक समूहों को एकीकृत करना
- सीमा निर्धारण — गुजरात और राजस्थान के बीच सीमा का स्पष्ट निर्धारण
राजस्थान का अंतिम रूप
1 नवंबर 1956 को अजमेर-मेरवाड़ा और माउंट आबू को राजस्थान में मिलाने के बाद, राजस्थान अपने वर्तमान भौगोलिक रूप में परिणत हो गया। यह राजस्थान के एकीकरण की यात्रा का अंत था।
सप्तम चरण के बाद राजस्थान की स्थिति
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| कुल जिले | 26 जिले (1956 में) |
| राजधानी | जयपुर |
| प्रमुख शहर | जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, अजमेर, बीकानेर |
| भाषा | हिंदी (राजस्थानी बोली) |
| आर्थिक आधार | कृषि, पशुपालन, खनिज, पर्यटन |



Leave a Reply