थार का विस्तार — राजस्थान का ~61% भाग, 12 जिले
थार मरुस्थल का परिचय
थार मरुस्थल (Thar Desert) भारत का सबसे बड़ा रेगिस्तान है और यह राजस्थान के लगभग 61% भाग को कवर करता है। यह मरुस्थल Rajasthan Govt Exam Preparation के भूगोल खंड में एक महत्वपूर्ण विषय है क्योंकि यह राजस्थान की जलवायु, वनस्पति, जीव-जंतु और मानव बस्तियों को परिभाषित करता है।
थार मरुस्थल का निर्माण मेसोजोइक युग में हुआ था जब यह क्षेत्र समुद्र के नीचे था। आज यह विश्व का सबसे अधिक आबादी वाला रेगिस्तान है। थार की जलवायु अत्यंत शुष्क है, जहाँ वार्षिक वर्षा 50 सेमी से भी कम है।
थार का भौगोलिक विस्तार
थार मरुस्थल राजस्थान के पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित है। यह 25°N से 30°N अक्षांश और 68°E से 78°E देशांतर के बीच विस्तृत है। मरुस्थल का कुल क्षेत्रफल लगभग 3.2 लाख वर्ग किलोमीटर है, जिसमें से राजस्थान में लगभग 1.96 लाख वर्ग किलोमीटर है।
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| कुल क्षेत्रफल | 3.2 लाख वर्ग किमी (भारत + पाकिस्तान) |
| राजस्थान में क्षेत्र | 1.96 लाख वर्ग किमी (~61%) |
| अक्षांश सीमा | 25°N से 30°N |
| देशांतर सीमा | 68°E से 78°E |
| पश्चिमी सीमा | भारत-पाकिस्तान सीमा (रेडक्लिफ लाइन) |
| पूर्वी सीमा | अरावली पर्वतमाला |
थार मरुस्थल की पश्चिमी सीमा भारत-पाकिस्तान सीमा (रेडक्लिफ लाइन) से निर्धारित होती है, जबकि पूर्वी सीमा अरावली पर्वतमाला द्वारा चिह्नित है। उत्तर में यह पंजाब के मैदानों से मिलता है, और दक्षिण में गुजरात के कच्छ क्षेत्र तक विस्तृत है।
थार को कवर करने वाले 12 जिले
राजस्थान के 12 जिले पूरी तरह से थार मरुस्थल में स्थित हैं। ये जिले हैं: जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, चूरू, हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, जोधपुर, पाली, नागौर, बरमेर, राजस्थान के पश्चिमी भाग के अन्य जिले। इसके अलावा, कई अन्य जिलों का आंशिक भाग भी थार में स्थित है।
- जैसलमेर — थार का सबसे शुष्क जिला, 100% थार में स्थित
- बाड़मेर — दक्षिणी थार, नमक उत्पादन के लिए प्रसिद्ध
- बीकानेर — उत्तरी थार, ऊंट पालन के लिए जाना जाता है
- चूरू — उत्तरी थार, सबसे गर्म जिला
- हनुमानगढ़ — उत्तरी थार, सतलज नदी के किनारे
- श्रीगंगानगर — उत्तरी थार, सतलज नदी के किनारे, कृषि क्षेत्र
- जोधपुर — मध्य थार, “सूर्य नगर” के रूप में जाना जाता है
- पाली — मध्य थार, अरावली के निकट
- नागौर — मध्य थार, ऊंट मेले के लिए प्रसिद्ध
- बरमेर — दक्षिणी थार, कम आबादी वाला जिला
- राजस्थान के अन्य पश्चिमी जिले — आंशिक रूप से थार में
- गुजरात और पाकिस्तान सीमावर्ती क्षेत्र — थार का विस्तार
थार की भौतिक विशेषताएँ
थार मरुस्थल की भौतिक विशेषताएँ इसे एक अद्वितीय भूदृश्य बनाती हैं। इसमें बालुका स्तूप (sand dunes), रण (salt flats), प्लाया झीलें (seasonal lakes), और कठोर चट्टानें शामिल हैं। थार की जलवायु अत्यंत महाद्वीपीय है, जहाँ गर्मियों में तापमान 50°C तक पहुँच जाता है।
थार की मुख्य भौतिक विशेषताएँ
- बालुका स्तूप (Sand Dunes) — थार का सबसे विशिष्ट लक्षण, जो पश्चिमी हवाओं द्वारा निर्मित होते हैं
- रण (Salt Flats) — लवणीय मैदान, विशेषकर जैसलमेर और बाड़मेर में
- प्लाया झीलें — मौसमी झीलें जो वर्षा के बाद बनती हैं
- कठोर चट्टानें — ग्रेनाइट और बेसाल्ट की चट्टानें
- बेसिन और डिप्रेशन — जहाँ पानी एकत्रित होता है
थार का महत्व और चुनौतियाँ
थार मरुस्थल राजस्थान के लिए आर्थिक, सांस्कृतिक और भूराजनीतिक महत्व रखता है। यह क्षेत्र पवन ऊर्जा, खनिज संसाधन, पशुपालन और पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण है। साथ ही, यह भारत-पाकिस्तान सीमा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
थार में पवन ऊर्जा के विशाल संसाधन हैं। जैसलमेर और बाड़मेर में बड़े पवन ऊर्जा संयंत्र स्थापित हैं।
थार में फॉस्फेट, सीमेंट, नमक और अन्य खनिज पाए जाते हैं।
ऊंट, भेड़ और बकरी पालन थार की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है।
थार का रेगिस्तान पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण है। जैसलमेर और जोधपुर प्रमुख पर्यटन केंद्र हैं।
थार की प्रमुख चुनौतियाँ
- मरुस्थलीकरण: थार का विस्तार हो रहा है, जो अरावली क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है
- जल की कमी: भूजल स्तर गिर रहा है, जिससे कृषि और पीने के पानी की समस्या हो रही है
- वनस्पति का ह्रास: अत्यधिक चराई से वनस्पति नष्ट हो रही है
- मिट्टी का कटाव: हवाओं द्वारा मिट्टी का कटाव हो रहा है
- सिंचाई: इंदिरा गांधी नहर (पूर्व में राजस्थान नहर) ने उत्तरी थार में कृषि को संभव बनाया
- जनसंख्या वृद्धि: नहर के कारण आबादी बढ़ी है
- भूजल में वृद्धि: नहर से रिसाव के कारण भूजल स्तर में वृद्धि हुई है
- मरुस्थलीकरण में कमी: नहर के कारण कुछ क्षेत्रों में मरुस्थलीकरण रुका है


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