तीज (हरियाली/कजली/बड़ी) — सावन, पार्वती पूजा, झूला
तीज का परिचय और महत्व
तीज राजस्थान का एक प्रमुख पारंपरिक त्योहार है जो सावन मास में मनाया जाता है। यह त्योहार पार्वती देवी की पूजा और वैवाहिक जीवन की खुशियों का प्रतीक है। राजस्थान में तीज का त्योहार महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है और यह मानसून ऋतु की आगमन का स्वागत करता है।
तीज शब्द संस्कृत के ‘तृतीया’ से बना है, जिसका अर्थ है तीसरा दिन। यह त्योहार चैत्र मास की तृतीया (गणगौर के बाद) से लेकर श्रावण मास की तृतीया तक मनाया जाता है। राजस्थान में तीज का सांस्कृतिक महत्व अत्यधिक है क्योंकि यह महिलाओं की शक्ति, सौभाग्य और पारिवारिक सुख का प्रतीक है।
तीज के प्रकार और समय
राजस्थान में तीज के तीन मुख्य प्रकार मनाए जाते हैं जो अलग-अलग समय पर आते हैं। प्रत्येक तीज का अपना धार्मिक और सामाजिक महत्व है।
| तीज का नाम | मास और तारीख | विशेषता | मुख्य परंपरा |
|---|---|---|---|
| गणगौर | चैत्र शुक्ल तृतीया | छोटी तीज, वसंत ऋतु | गणगौर की मूर्तियों की पूजा |
| हरियाली तीज | श्रावण शुक्ल तृतीया | बड़ी तीज, मुख्य त्योहार | झूले झूलना, पार्वती पूजा |
| कजली तीज | भाद्रपद कृष्ण तृतीया | तीसरी तीज, वर्षा ऋतु | कजली गीत, सामूहिक गायन |
पार्वती पूजा और धार्मिक महत्व
तीज का त्योहार देवी पार्वती की पूजा के लिए समर्पित है। पार्वती को ‘शिव की पत्नी’, ‘सौभाग्य की देवी’ और ‘वैवाहिक सुख की देवता’ माना जाता है। राजस्थान में महिलाएं तीज पर पार्वती देवी से सुखी वैवाहिक जीवन, पति की लंबी उम्र और परिवार की समृद्धि की कामना करती हैं।
- व्रत रखना: महिलाएं तीज के दिन निर्जल या फलाहार व्रत रखती हैं
- स्नान और पूजा: सुबह जल्दी उठकर स्नान करके पार्वती देवी की मूर्ति की पूजा की जाती है
- सिंदूर और मेहंदी: महिलाएं सिंदूर लगाती हैं और मेहंदी लगवाती हैं
- गीत और नृत्य: तीज के गीत गाए जाते हैं और परंपरागत नृत्य किए जाते हैं
- भोग और प्रसाद: व्रत के बाद खीर, पूरी और अन्य मिठाइयों का भोग लगाया जाता है
महिलाएं पार्वती देवी से अपने और अपने परिवार के सौभाग्य की कामना करती हैं।
विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी जीवन के लिए व्रत रखती हैं।
- शिव-पार्वती का विवाह: तीज पर शिव और पार्वती के विवाह की कथा का स्मरण किया जाता है
- पार्वती की तपस्या: पार्वती ने शिव को पति बनाने के लिए कठोर तपस्या की थी
- आदर्श पत्नी: पार्वती को आदर्श पत्नी और माता का प्रतीक माना जाता है
झूला और परंपरागत उत्सव
झूला तीज का सबसे महत्वपूर्ण और आकर्षक अंग है। राजस्थान में हरियाली तीज पर महिलाएं और लड़कियां सामूहिक रूप से झूले झूलती हैं। झूले झूलने की परंपरा का संबंध वर्षा ऋतु की खुशियों और प्रकृति की हरियाली से है।
झूले को आमतौर पर पीपल, नीम या आम के पेड़ों पर लगाया जाता है। महिलाएं झूले झूलते समय तीज के पारंपरिक गीत गाती हैं। ये गीत प्रेम, विरह, मिलन और प्रकृति के विषयों पर आधारित होते हैं।
राजस्थान में तीज का सांस्कृतिक स्वरूप
राजस्थान में तीज का त्योहार अत्यंत भव्य और रंगीन तरीके से मनाया जाता है। यह त्योहार राजस्थानी संस्कृति, परंपरा और महिलाओं की सामाजिक स्थिति को दर्शाता है। तीज का त्योहार मानसून ऋतु की आगमन का स्वागत करता है और कृषि समृद्धि की कामना करता है।
| सांस्कृतिक पहलू | विवरण | महत्व |
|---|---|---|
| गीत और संगीत | तीज के पारंपरिक गीत, कजली, ढोलक और मंजीरों की संगति | सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण |
| पोशाक और आभूषण | घाघरे-चोली, साड़ियां, मेहंदी, चूड़ियां और बिंदी | राजस्थानी परंपरा का प्रदर्शन |
| खान-पान | खीर, पूरी, मठरी, घारी और अन्य पारंपरिक मिठाइयां | सामूहिक भोज और सामाजिकता |
| सामाजिक मिलन | महिलाओं का सामूहिक इकट्ठा होना, गीत-नृत्य | सामाजिक बंधन को मजबूत करना |


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