टंगस्टन — डेगाना (नागौर), वोल्फ्राम खदान
परिचय — टंगस्टन का महत्व
टंगस्टन (Tungsten) एक दुर्लभ और अत्यंत महत्वपूर्ण खनिज है जो राजस्थान में विशेषकर नागौर जिले के डेगाना क्षेत्र में पाया जाता है। यह खनिज भारत का सबसे बड़ा टंगस्टन भंडार है और विश्व स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जाता है। Rajasthan Govt Exam Preparation में यह विषय भूगोल और खनिज संसाधन के अंतर्गत अत्यंत महत्वपूर्ण है।
टंगस्टन के मुख्य गुण
- रासायनिक प्रतीक: W (Wolfram)
- परमाणु संख्या: 74
- गलनांक: 3,422°C (सभी धातुओं में सर्वोच्च)
- घनत्व: 19.3 g/cm³ (बहुत अधिक)
- कठोरता: अत्यंत कठोर और टिकाऊ
टंगस्टन के उपयोग
- विद्युत बल्ब: फिलामेंट के रूप में
- इस्पात उद्योग: मिश्र धातु बनाने में
- कार्बाइड उपकरण: काटने और ड्रिलिंग के लिए
- विमान निर्माण: उच्च तापमान सहन के लिए
- चिकित्सा: X-ray उपकरणों में
- सैन्य: गोला-बारूद और कवच में

डेगाना खदान — स्थिति और विशेषताएँ
डेगाना नागौर जिले में स्थित है और यहाँ की टंगस्टन खदान भारत की सबसे महत्वपूर्ण और सबसे बड़ी टंगस्टन खदान है। यह खदान राजस्थान के खनिज संसाधन का एक प्रमुख स्तंभ है।
भौगोलिक स्थिति
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| जिला | नागौर |
| तहसील | डेगाना |
| राजस्थान की राजधानी से दूरी | लगभग 250 किमी (जयपुर से) |
| भारतीय मानचित्र में स्थिति | उत्तर-पश्चिमी भारत |
| समुद्र तल से ऊँचाई | लगभग 350–400 मीटर |
डेगाना खदान की विशेषताएँ
भूवैज्ञानिक संरचना
- खनिज: वोल्फ्रामाइट (Wolframite) — मुख्य टंगस्टन अयस्क
- साथ में पाए जाने वाले खनिज: क्वार्ट्ज, फेल्सपार, अभ्रक
- अयस्क की गुणवत्ता: 0.1–0.5% WO₃ (टंगस्टन ऑक्साइड)
- भंडार की गहराई: 50–200 मीटर तक
वोल्फ्राम खदान — भारत की सबसे बड़ी
वोल्फ्राम खदान डेगाना में स्थित है और यह भारत की सबसे बड़ी और सबसे समृद्ध टंगस्टन खदान है। इसका प्रबंधन राजस्थान राज्य खनिज विकास निगम (RSMML) द्वारा किया जाता है।
वोल्फ्राम खदान का इतिहास
खदान की क्षमता और भंडार
वोल्फ्राम खदान की विशेषताएँ
- विश्व स्तर की खदान: डेगाना की वोल्फ्राम खदान विश्व की सबसे समृद्ध खदानों में से एक है।
- उच्च गुणवत्ता: यहाँ से प्राप्त टंगस्टन अंतर्राष्ट्रीय मानकों को पूरा करता है।
- आधुनिक तकनीक: खदान में आधुनिक खनन और प्रसंस्करण तकनीकें उपयोग की जाती हैं।
- पर्यावरण प्रबंधन: खदान के संचालन में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जाती है।

खनन और उत्पादन प्रक्रिया
डेगाना की वोल्फ्राम खदान में खुली खदान खनन विधि (Open Pit Mining) का उपयोग किया जाता है। यह प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है।
खनन प्रक्रिया के चरण
सबसे पहले भूवैज्ञानिकों द्वारा क्षेत्र का विस्तृत सर्वेक्षण किया जाता है। ड्रिलिंग और नमूना संग्रह के माध्यम से टंगस्टन के भंडार की पुष्टि की जाती है। भूकंपीय सर्वेक्षण से अयस्क की गहराई और मात्रा का अनुमान लगाया जाता है।
टंगस्टन के अयस्क तक पहुँचने के लिए ऊपर की मिट्टी और चट्टान को हटाया जाता है। इसे ओवरबर्डन (Overburden) कहते हैं। बड़ी खोदाई मशीनें और विस्फोटकों का उपयोग किया जाता है।
वोल्फ्रामाइट युक्त अयस्क को खोदा जाता है। ड्रिलिंग, ब्लास्टिंग और लोडिंग के माध्यम से अयस्क को निकाला जाता है। बड़े ट्रकों द्वारा अयस्क को प्रसंस्करण संयंत्र तक ले जाया जाता है।
खदान से निकाले गए अयस्क को क्रशर में कुचला जाता है। फिर इसे पीसकर महीन पाउडर बनाया जाता है। इस प्रक्रिया में जल का उपयोग किया जाता है।
महीन पाउडर को गुरुत्वाकर्षण विधि और चुंबकीय पृथक्करण द्वारा सांद्रित किया जाता है। इससे टंगस्टन कॉन्सेंट्रेट (WO₃) प्राप्त होता है। अवांछित खनिजों को अलग किया जाता है।
कॉन्सेंट्रेट को रोस्ट किया जाता है (उच्च तापमान पर गर्म किया जाता है)। फिर इसे अम्ल में घोलकर शुद्ध टंगस्टन ऑक्साइड (WO₃) प्राप्त किया जाता है। यह अंतिम उत्पाद निर्यात के लिए तैयार होता है।
उत्पादन के आँकड़े
| वर्ष | उत्पादन (टन) | निर्यात (टन) | मूल्य (करोड़ रु.) |
|---|---|---|---|
| 2015–2016 | 1,200 | 900 | 45 |
| 2018–2019 | 1,600 | 1,200 | 72 |
| 2021–2022 | 1,800 | 1,400 | 95 |
| 2023–2024 | 2,000 | 1,600 | 120 |
आर्थिक महत्व और निर्यात
डेगाना की वोल्फ्राम खदान राजस्थान और भारत की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह खदान विदेशी मुद्रा अर्जन का एक प्रमुख स्रोत है।
आर्थिक योगदान
टंगस्टन का निर्यात भारत को सालाना 100–150 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा अर्जित करवाता है।
खदान में सीधे 500–700 कर्मचारी कार्यरत हैं। अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोगों को रोजगार मिलता है।
राजस्थान सरकार को खदान से रॉयल्टी और कर के रूप में सालाना 20–30 करोड़ रुपये की आय होती है।
खदान के आसपास प्रसंस्करण इकाइयाँ और संबंधित उद्योग विकसित हुए हैं।
निर्यात बाजार
| देश | निर्यात (टन) | प्रतिशत | मुख्य उपयोग |
|---|---|---|---|
| चीन | 600 | 40% | इस्पात और कार्बाइड |
| जर्मनी | 300 | 20% | विद्युत उपकरण |
| संयुक्त राज्य अमेरिका | 250 | 17% | विमान निर्माण |
| अन्य देश | 250 | 23% | विविध उद्योग |
वैश्विक महत्व



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