उत्तर प्रदेश : अक्षांशीय प्रभाव तथा ऋतु परिवर्तन
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परिचय — अक्षांश एवं ऋतु परिवर्तन का संबंध
उत्तर प्रदेश की जलवायु और ऋतु-परिवर्तन का मूल नियंत्रक उसकी अक्षांशीय स्थिति है। 23.87°N से 30.41°N के मध्य फैला यह राज्य उपोष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें चारों ऋतुएँ स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती हैं।
पृथ्वी का 23.5° पर झुका हुआ अक्ष (Axial Tilt) और सूर्य की परिक्रमा (Revolution) मिलकर ऋतु परिवर्तन का कारण बनते हैं। उत्तर प्रदेश की अक्षांशीय स्थिति यह निर्धारित करती है कि किस ऋतु में सूर्य की किरणें कितनी सीधी या तिरछी पड़ेंगी — यही ऋतु परिवर्तन का मूल वैज्ञानिक आधार है। राज्य के दक्षिणी जिले कर्क रेखा के निकट होने के कारण उत्तरी जिलों से भिन्न ऋतु-अनुभव करते हैं।
अक्षांशीय स्थिति का वैज्ञानिक आधार
अक्षांश और ऋतु परिवर्तन के बीच का संबंध पूर्णतः वैज्ञानिक है। सूर्य की स्थिति, दिन की लंबाई और सूर्यातप — ये तीनों अक्षांश द्वारा नियंत्रित होते हैं और UP की चारों ऋतुओं को परिभाषित करते हैं।
सूर्य की उत्तरायण-दक्षिणायन गति एवं UP पर प्रभाव
| खगोलीय घटना | दिनांक | सूर्य की स्थिति | UP में प्रभाव |
|---|---|---|---|
| ग्रीष्म अयनांत (Summer Solstice) | 21 जून | कर्क रेखा (23.5°N) पर लंबवत् | दक्षिणी UP में सूर्य लगभग शीर्ष पर; दिन सबसे लंबा; सर्वाधिक गर्मी |
| शीत अयनांत (Winter Solstice) | 22 दिसंबर | मकर रेखा (23.5°S) पर लंबवत् | UP में सूर्य अधिकतम दक्षिण में; रात सबसे लंबी; सर्वाधिक ठंड |
| विषुव (Equinox) | 21 मार्च / 23 सितंबर | भूमध्य रेखा पर लंबवत् | UP में दिन-रात बराबर; मध्यम तापमान; ऋतु-संधि |
| उत्तरायण (Uttarayan) | 22 दिसंबर – 21 जून | सूर्य उत्तर की ओर गतिशील | UP में तापमान क्रमशः बढ़ता; शीत → ग्रीष्म संक्रमण |
| दक्षिणायन (Dakshinayan) | 21 जून – 22 दिसंबर | सूर्य दक्षिण की ओर गतिशील | UP में तापमान क्रमशः घटता; ग्रीष्म → शीत संक्रमण |
दिन की लंबाई एवं अक्षांश-सम्बन्ध (UP संदर्भ)
| स्थान | अक्षांश | 21 जून को दिन | 22 दिसंबर को दिन | प्रभाव |
|---|---|---|---|---|
| पीलीभीत | 28.6°N | ~14 घंटे | ~10 घंटे | लंबे दिन → अधिक सूर्यातप → गर्म ग्रीष्म; लंबी रात → ठंडी शीत |
| लखनऊ | 26.8°N | ~13.7 घंटे | ~10.3 घंटे | मध्यम वार्षिक तापांतर |
| झाँसी | 25.4°N | ~13.5 घंटे | ~10.5 घंटे | कर्क रेखा निकट → सूर्य कोण बड़ा → 48°C तक |
| सोनभद्र | 24.0°N | ~13.3 घंटे | ~10.7 घंटे | दक्षिणतम — सर्वाधिक सीधी किरणें; सर्वाधिक गर्म |
ग्रीष्म ऋतु — अक्षांशीय प्रभाव का विश्लेषण
ग्रीष्म ऋतु (मार्च–जून) में उत्तर प्रदेश का अक्षांशीय प्रभाव सर्वाधिक स्पष्ट होता है। कर्क रेखा के निकट होने के कारण दक्षिणी UP में इस ऋतु की तीव्रता उत्तरी UP से कहीं अधिक होती है।
लू (Loo) — अक्षांश और दिशा का प्रभाव
लू एक गर्म, शुष्क, स्थानीय पवन है जो मई-जून में राजस्थान (थार मरुस्थल) की ओर से उत्तर प्रदेश में प्रवेश करती है। यह मुख्यतः 26°N–30°N की पेटी में अधिक प्रभावशाली होती है। लू का प्रभाव उत्तरी UP में दक्षिणी से भिन्न होता है क्योंकि उत्तर में हिमालय की तलहटी की आर्द्रता इसे कमज़ोर करती है।
| क्षेत्र | अक्षांश | ग्रीष्म तापमान | लू की तीव्रता | विशेषता |
|---|---|---|---|---|
| बुन्देलखण्ड | 24–26°N | 44–48°C | अत्यधिक | कर्क रेखा निकट + चट्टानी भूमि |
| पश्चिमी UP | 27–29°N | 42–46°C | अधिक | थार निकट, शुष्क; आगरा, मथुरा |
| मध्य UP | 25–27°N | 40–44°C | मध्यम | कानपुर, लखनऊ — कुछ नमी |
| पूर्वी UP | 25–27°N | 38–42°C | कम | बंगाल की खाड़ी से आर्द्रता |
| तराई (उत्तर) | 28–30°N | 35–38°C | न्यूनतम | वन आवरण + नमी = शीतलतम ग्रीष्म |
- Heat Stroke (लू-घात) : प्रतिवर्ष सैकड़ों मौतें — विशेषतः बुन्देलखण्ड और पश्चिमी UP
- जलसंकट : भूजल स्तर गिरना; बुन्देलखण्ड में पेयजल का भीषण अभाव
- पशुधन हानि : अत्यधिक गर्मी से पशुओं की मृत्यु; दुग्ध उत्पादन प्रभावित
- बिजली संकट : AC और पंखों की अत्यधिक माँग → लोड शेडिंग
वर्षा ऋतु — मानसून एवं अक्षांश का अन्तर्सम्बन्ध
वर्षा ऋतु (जुलाई–सितंबर) में दक्षिण-पश्चिम मानसून उत्तर प्रदेश में प्रवेश करता है। मानसून का आगमन-क्रम, वर्षा की मात्रा और ऋतु की अवधि — सभी अक्षांशीय स्थिति से प्रभावित होते हैं।
मानसून का UP में प्रवेश-क्रम
वर्षा वितरण — अक्षांश एवं दिशा का प्रभाव
| क्षेत्र | औसत वार्षिक वर्षा | मानसून का आगमन | वर्षा का कारण |
|---|---|---|---|
| तराई (उत्तर) | 1200–1500 mm | 15–20 जून | हिमालय की ढाल + बंगाल शाखा |
| पूर्वी UP | 1000–1200 mm | 15–20 जून | बंगाल की खाड़ी की प्रमुख शाखा |
| मध्य UP | 750–1000 mm | 25 जून – 5 जुलाई | दोनों मानसून शाखाओं का मिलन |
| पश्चिमी UP | 600–800 mm | 5–15 जुलाई | अरब सागर शाखा — कमज़ोर |
| बुन्देलखण्ड (दक्षिण) | 700–900 mm | 20–30 जून | विंध्याचल पठार — वर्षाछाया प्रभाव |
शरद् एवं शीत ऋतु — अक्षांशीय प्रभाव
शरद् ऋतु (अक्टूबर–नवंबर) और शीत ऋतु (दिसंबर–फरवरी) में उत्तरी UP पर अक्षांश का प्रभाव सर्वाधिक स्पष्ट होता है। हिमालय की निकटता और उच्च अक्षांश मिलकर उत्तरी UP में शीत को अत्यंत तीव्र बनाते हैं।
22 सितंबर (शरद् विषुव) के बाद सूर्य दक्षिणायन होता है। मानसून की वापसी पश्चिम से प्रारंभ होती है। तापमान 18–28°C — वर्ष का सर्वाधिक सुखद मौसम। उत्तरी UP में ठंड शुरू होती है, जबकि दक्षिणी UP अभी गर्म रहता है।
- अक्टूबर : मानसून वापसी; आसमान साफ; तापमान 22–28°C; उत्तरी UP में कोहरे की शुरुआत
- नवंबर : तापमान 15–22°C; रबी फसल की बुवाई आरंभ; दक्षिण-उत्तर तापांतर बढ़ने लगता है
- अक्षांश प्रभाव : उत्तरी UP (28–30°N) में ठंड पहले — दक्षिण (24–25°N) में 2–3 सप्ताह बाद
22 दिसंबर (शीत अयनांत) पर सूर्य मकर रेखा पर होता है — UP से अधिकतम दूर। सूर्य की किरणें अत्यंत तिरछी पड़ती हैं। उत्तरी UP (29–30°N) में रातें लंबी → अधिक विकिरण ह्रास → तापमान 0–5°C तक।
- पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) : भूमध्य सागर से आने वाला चक्रवात; शीतकालीन वर्षा (मावठ) लाता है; तापमान और घटता है
- शीतलहर (Cold Wave) : साइबेरिया से आने वाली ठंडी हवाएँ; पीलीभीत, बहराइच, मुज़फ्फरनगर सबसे प्रभावित
- पाला (Frost) : रात्रि तापमान 0°C से नीचे जाने पर; आलू, टमाटर, मटर की फसल नष्ट
- घना कोहरा (Dense Fog) : दिसंबर-जनवरी में उत्तरी UP — रेल, वायु परिवहन बाधित
उत्तर प्रदेश में शीत ऋतु का घना कोहरा मुख्यतः गंगा के मैदानी भाग में उत्पन्न होता है। यह विकिरण कोहरा (Radiation Fog) है जो लंबी रातों में भूमि के तेज़ी से ठंडा होने पर बनता है। उत्तरी अक्षांशों में रात लंबी होती है → अधिक विकिरण → अधिक कोहरा।
- सर्वाधिक कोहरा — उत्तरी UP (लखनऊ, आगरा, इलाहाबाद क्षेत्र)
- कोहरे की अवधि — दिसंबर प्रथम सप्ताह से जनवरी अंत तक
- दृश्यता — कभी-कभी 50 मीटर से भी कम
- आर्थिक प्रभाव — ट्रेन देरी, विमान रद्द, सड़क दुर्घटनाएँ
क्षेत्रवार ऋतु-भिन्नता : एक तुलनात्मक विश्लेषण
UP के विभिन्न क्षेत्र अपनी अक्षांशीय स्थिति और भू-आकृति के कारण एक ही ऋतु में भिन्न-भिन्न मौसम का अनुभव करते हैं। यह भिन्नता कृषि, जन-जीवन और अर्थव्यवस्था को सीधे प्रभावित करती है।
| क्षेत्र | ग्रीष्म (°C) | वर्षा (mm) | शीत (°C) | विशिष्ट ऋतु-लक्षण |
|---|---|---|---|---|
| तराई (उत्तरी) पीलीभीत, बहराइच | 35–38°C | 1200–1500 | 0–5°C | लंबी शीत, भारी वर्षा, घना कोहरा, वन-आच्छादन |
| पश्चिमी UP आगरा, मथुरा, मेरठ | 42–46°C | 600–750 | 4–10°C | लू तीव्र, शुष्क शीत, WD से मावठ, अधिकतम तापांतर |
| मध्य UP लखनऊ, कानपुर | 40–44°C | 800–1000 | 6–12°C | महाद्वीपीय जलवायु, चारों ऋतुएँ संतुलित |
| पूर्वी UP वाराणसी, गोरखपुर | 38–43°C | 1000–1200 | 8–15°C | दीर्घ वर्षा ऋतु, आर्द्र ग्रीष्म, अपेक्षाकृत हल्की शीत |
| बुन्देलखण्ड (दक्षिणी) झाँसी, बाँदा | 44–48°C | 700–900 | 10–18°C | सर्वाधिक गर्म ग्रीष्म, हल्की शीत, अनियमित वर्षा |
ऋतु परिवर्तन के कारण एवं UP पर प्रभाव
उत्तर प्रदेश में ऋतु परिवर्तन केवल खगोलीय कारणों से नहीं, बल्कि कई भौगोलिक, वायुमंडलीय और मानवीय कारकों के संयुक्त प्रभाव से होता है।
सूर्य के चारों ओर पृथ्वी की वार्षिक परिक्रमा से UP में सूर्य की स्थिति बदलती है — उत्तरायण (ग्रीष्म) व दक्षिणायन (शीत) — ऋतु परिवर्तन का मूल कारण।
यदि पृथ्वी सीधी होती तो UP में ऋतु परिवर्तन नहीं होता। 23.5° के झुकाव के कारण ही UP में 21 जून को दिन सबसे लंबा और 22 दिसंबर को सबसे छोटा होता है।
SW मानसून (जून–सितंबर) और NE मानसून का UP में प्रभाव। पवनों की दिशा-परिवर्तन वर्षा ऋतु लाता है — यह अक्षांशीय ताप अंतर से उत्पन्न दाब-क्षेत्रों का परिणाम है।
हिमालय UP की शीत ऋतु को अत्यधिक ठंडा होने से बचाता है। साथ ही मानसून को UP की ओर मोड़ता है। बिना हिमालय के UP में ऋतु-स्वरूप बिल्कुल भिन्न होता।
भूमध्य सागर से उठकर ईरान-अफगानिस्तान होते हुए UP पहुँचने वाला पश्चिमी विक्षोभ शीत ऋतु में मावठ (शीतकालीन वर्षा) लाता है — गेहूँ की फसल के लिए अत्यंत उपयोगी।
लखनऊ, कानपुर, नोएडा जैसे नगरों में Urban Heat Island Effect — ग्रीष्म ऋतु लंबी, शीत ऋतु छोटी; वर्षा का पैटर्न बदला; ऋतु-परिवर्तन का समय भी प्रभावित।
कृषि पर ऋतु-परिवर्तन एवं अक्षांश का प्रभाव
UP की कृषि पूर्णतः ऋतु-चक्र पर निर्भर है। अक्षांशीय स्थिति से निर्मित ऋतु-भिन्नता यहाँ की फसल-विविधता का मूल कारण है। UP भारत का ‘अन्नदाता’ इसीलिए कहलाता है क्योंकि यहाँ दोनों — रबी और खरीफ — की अनुकूल दशाएँ उपलब्ध हैं।
| फसल-चक्र | ऋतु | आवश्यक तापमान | प्रमुख UP क्षेत्र | अक्षांश-अनुकूलता |
|---|---|---|---|---|
| खरीफ फसलें धान, मक्का, बाजरा | जून–सितंबर (वर्षा ऋतु) | 25–35°C | पूर्वी + तराई UP | निम्न अक्षांश — लंबी वर्षा ऋतु — धान अनुकूल |
| रबी फसलें गेहूँ, मसूर, मटर | नवंबर–मार्च (शीत ऋतु) | 10–20°C | पश्चिमी + मध्य UP | उच्च अक्षांश — लंबी ठंडी रातें — गेहूँ उत्तम |
| जायद फसलें तरबूज, खीरा | मार्च–जून (ग्रीष्म ऋतु) | 30–40°C | गंगा-यमुना का बाढ़ क्षेत्र | मध्य अक्षांश — गर्म शुष्क दशाएँ अनुकूल |
| गन्ना | वर्षभर | 20–35°C | पश्चिमी UP (मेरठ, मुज़फ्फरनगर) | लंबा उच्च-तापमान काल + पर्याप्त वर्षा |
| आम / फलोत्पादन | फूल : फरवरी–मार्च | 24–27°C (फूल) | मलिहाबाद (लखनऊ), सहारनपुर | मध्य अक्षांश — ग्रीष्म-शीत संतुलन अनुकूल |
- दोहरी फसल प्रणाली : UP में रबी + खरीफ दोनों — यह चारों ऋतुओं की स्पष्टता का लाभ
- गेहूँ उत्पादन : UP देश में प्रथम स्थान — शीत ऋतु की अनुकूलता + WD से मावठ
- गन्ना उत्पादन : UP देश में प्रथम — पश्चिमी UP की गर्म-आर्द्र ऋतु संयोजन
- आम उत्पादन : मलिहाबाद — ‘दशहरी आम’ की विश्व-प्रसिद्धि — मध्य अक्षांश की देन
- जलवायु जोखिम : पाला (शीत), सूखा (बुन्देलखण्ड), बाढ़ (पूर्वी UP) — ऋतु-विचलन से
जलवायु परिवर्तन एवं UP में ऋतु विचलन
वैश्विक तापन (Global Warming) के कारण उत्तर प्रदेश में ऋतु-चक्र विचलित हो रहा है। यह UPPSC Mains के लिए अत्यंत प्रासंगिक विषय है।


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