उत्तर प्रदेश में अशोक के शिलालेख
शिलालेखों के प्रकार: प्रमुख शिलालेख, लघु शिलालेख एवं स्तंभ लेख — UPPSC Prelims + Mains
परिचय एवं पृष्ठभूमि
उत्तर प्रदेश में अशोक के शिलालेख UPPSC Prelims और Mains दोनों की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। मौर्य सम्राट अशोक (269–232 ईपू) ने अपने साम्राज्य भर में शिलाओं, स्तंभों और गुफाओं पर धम्म-सन्देश उत्कीर्ण करवाए, जिन्हें सामूहिक रूप से अशोक के अभिलेख (Ashokan Inscriptions) कहा जाता है।
अशोक के अभिलेखों की खोज और पाठ-विश्लेषण का श्रेय James Prinsep को जाता है, जिन्होंने 1837 ई. में ब्राह्मी लिपि को पढ़ा। इससे पहले ये अभिलेख अपठित थे। उत्तर प्रदेश में सारनाथ, कौशाम्बी, लुम्बिनी (अब नेपाल सीमा पर), मेरठ, टोपरा जैसे स्थलों पर महत्वपूर्ण अभिलेख मिले हैं।
अभिलेखों की सामान्य विशेषताएँ
- प्रथम पुरुष में: अशोक ने स्वयं को “देवानांप्रिय पियदस्सी” (देवताओं के प्रिय, प्रियदर्शी) कहा
- धम्म-प्रचार: नैतिकता, अहिंसा, सत्य, दान — इन सिद्धांतों का प्रचार
- लोक-भाषा: प्राकृत भाषा एवं ब्राह्मी, खरोष्ठी, यूनानी, अरामाइक लिपियों का उपयोग
- प्रशासनिक सूचनाएँ: राज्य-नीति, पशु-हत्या पर प्रतिबंध, चिकित्सा व्यवस्था
- स्थान-चयन: व्यापार मार्गों, धार्मिक स्थलों एवं प्रमुख नगरों के निकट
शिलालेखों का वर्गीकरण — एक दृष्टि में
अशोक के समस्त अभिलेखों को मुख्यतः तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है: प्रमुख शिलालेख (Major Rock Edicts), लघु शिलालेख (Minor Rock Edicts) और स्तंभ लेख (Pillar Edicts)। इनके अतिरिक्त कुछ गुफा-लेख (Cave Inscriptions) भी हैं।
| श्रेणी | संख्या | माध्यम | UP में उपस्थिति | मुख्य विषय |
|---|---|---|---|---|
| प्रमुख शिलालेख | 14 | विशाल चट्टान | नगण्य (सीमावर्ती) | धम्म के 14 नियम, प्रशासन |
| लघु शिलालेख | ~15 | छोटी शिला/स्तंभ | सारनाथ, कौशाम्बी | बौद्ध धर्म, नैतिकता |
| 7 बड़े स्तंभ-लेख | 7 | पॉलिश स्तंभ | मेरठ, टोपरा (दिल्ली), प्रयागराज | धम्म-नियम VII तक |
| 3 छोटे स्तंभ-लेख | 3 | स्तंभ | सारनाथ, कौशाम्बी, सांची | संघ-भेद निषेध |
| गुफा लेख | 3 | गुफा दीवार | नहीं | आजीवक भिक्षुओं को दान |
प्रमुख शिलालेख (Major Rock Edicts) — विस्तृत विवेचन
प्रमुख शिलालेख अशोक के सबसे लंबे और विस्तृत अभिलेख हैं जो 14 अभिलेखों के समूह में पाए जाते हैं। ये साम्राज्य के दूरस्थ एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में विशाल चट्टानों पर उत्कीर्ण हैं। भारत में इनके 8 स्थल ज्ञात हैं।
प्रमुख शिलालेखों के भौगोलिक स्थल
14 प्रमुख शिलालेखों की विषयवस्तु (UPPSC Prelims के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण)
विषय: पशु-बलि का निषेध। अशोक ने राज्य-रसोई में पशु-वध बंद किया। पहले प्रतिदिन लाखों पशु भोजन के लिए मारे जाते थे; इस लेख के बाद केवल 2 मोर और 1 हिरण के लिए अनुमति रही, वह भी अल्पकालिक। पशु-हत्या का प्रथम ऐतिहासिक प्रतिबंध।
विषय: मानव और पशु दोनों के लिए चिकित्सा सुविधाएँ। औषधीय पौधों का रोपण, कुओं की खुदाई, सड़कों पर वृक्षारोपण। प्रजा-कल्याण की पहली लिखित सरकारी नीति। यूनानी (Yavana), कम्बोज, नाभक, भोज राज्यों तक विस्तार।
विषय: राजुक, युक्त और प्रादेशिक अधिकारियों को प्रत्येक 5 वर्ष में दौरे का आदेश। धम्म प्रचार का राजकीय कर्तव्य। मौर्य प्रशासनिक व्यवस्था की जानकारी का प्रमुख स्रोत।
विषय: भेरी-घोष (युद्ध-नगाड़े) के स्थान पर धम्म-घोष की नीति। देवताओं के दर्शन, जीवों के प्रति दया की वृद्धि। मनुष्यों और पशुओं के प्रति नैतिक व्यवहार।
विषय: धम्म-महामात्रों (Dhamma Mahamatras) की नियुक्ति। राज्याभिषेक के 13वें वर्ष में की गई। ये अधिकारी सभी धर्मों के अनुयायियों की देखभाल करते थे। धर्मनिरपेक्ष प्रशासन का प्राचीनतम प्रमाण।
विषय: प्रतिवेदक (reporters) की नियुक्ति — अशोक किसी भी समय, कहीं भी राज्य की जानकारी चाहते थे। “मैं सदैव जनता के कार्यों में लगा रहूँगा।” प्रजा की समस्याओं के त्वरित समाधान की नीति।
सप्तम: सभी सम्प्रदायों में सहिष्णुता की इच्छा। अष्टम: धम्म-यात्रा की अवधारणा — राज्याभिषेक के 10वें वर्ष बोधगया यात्रा। शिकार और मनोरंजन-यात्रा के बजाय धार्मिक यात्रा। बौद्ध तीर्थ-यात्रा की परम्परा का प्रारंभ।
नवम: मंगल-समारोहों की आलोचना; धम्म-मंगल को श्रेष्ठ बताया। दशम: कीर्ति और यश से ऊपर धम्म की महत्ता। “लोक में धम्म से बड़ा कोई दान नहीं।” सात्विक जीवन की प्रेरणा।
एकादश: धम्म की व्याख्या — माता-पिता की सेवा, मित्रों से उचित व्यवहार, ब्राह्मणों-श्रमणों को दान। द्वादश: सभी सम्प्रदायों के प्रति सहिष्णुता — ब्राह्मण, बौद्ध, जैन, आजीवक सभी का सम्मान। धार्मिक एकता का आदर्श।
सबसे महत्वपूर्ण और लंबा शिलालेख। कलिंग युद्ध का पश्चाताप — “1,50,000 बंदी, 1,00,000 मृत, कई गुना अधिक मारे गए।” धम्म-विजय को श्रेष्ठ बताया। पड़ोसी राज्यों — चोल, पाण्ड्य, सातियपुत्र, केरलपुत्र, यूनानी राजा (एंटियोकस, टॉलेमी) का उल्लेख। UPPSC में सर्वाधिक पूछा गया।
संक्षिप्त एवं अपूर्ण। अशोक ने कहा कि उन्होंने धम्म के लेख विभिन्न स्थानों पर लिखवाए हैं। कुछ स्थानों पर संक्षिप्त, कुछ पर विस्तृत। स्थान के अनुसार विषय-चयन का उल्लेख।
लघु शिलालेख (Minor Rock Edicts) — UP में विशेष महत्व
लघु शिलालेख संख्या में अधिक किन्तु आकार में छोटे हैं। इनमें अशोक ने बौद्ध धर्म अपनाने की घोषणा, अपने नाम और निजी धार्मिक अनुभव का उल्लेख किया है। उत्तर प्रदेश में कौशाम्बी का रानी-लेख (Queen’s Edict) और सारनाथ का लघु स्तंभ-लेख सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैं।
लघु शिलालेखों के प्रमुख स्थल
| क्र. | स्थल | राज्य | विशेषता |
|---|---|---|---|
| 1 | मस्की | कर्नाटक | प्रथम लेख जिसमें “अशोक” नाम — 1915 में खोजा |
| 2 | गुर्जरा | मध्य प्रदेश | “अशोक” नाम का दूसरा उल्लेख |
| 3 | ब्रह्मगिरि | कर्नाटक | 3 भागों में — तीन वर्गों का उल्लेख |
| 4 | सिद्धपुर | कर्नाटक | ब्रह्मगिरि से निकट |
| 5 | जटिंग-रामेश्वर | कर्नाटक | तीन स्थलों में एक |
| 6 | सारनाथ (UP) | उत्तर प्रदेश | संघ-भेद निषेध — बौद्ध धर्म का पालन |
| 7 | कौशाम्बी (UP) | उत्तर प्रदेश | रानी-लेख (Queen’s Edict) — अशोक की दूसरी रानी |
| 8 | रूपनाथ | मध्य प्रदेश | बौद्ध-दीक्षा का उल्लेख |
| 9 | सहसराम | बिहार | रूपनाथ प्रकार |
| 10 | बैराट | राजस्थान | 7 बौद्ध ग्रंथों की सूची |
कौशाम्बी का रानी-लेख (Queen’s Edict) — UPPSC Mains
कौशाम्बी (इलाहाबाद/प्रयागराज के निकट) में प्राप्त यह लेख अशोक की दूसरी रानी कारुवाकी (Karuvaki) से सम्बन्धित है। इस लेख में रानी के धार्मिक दान का उल्लेख है — आम के वृक्ष, जामुन के वृक्ष, विश्रामशालाएँ और कुओं की खुदाई। यह लेख महत्वपूर्ण है क्योंकि:
- महिला इतिहास: मौर्यकालीन रानी का नाम और उनके कार्यों का पहला ऐतिहासिक साक्ष्य
- धर्म-दान: स्त्रियों की धार्मिक भूमिका का प्रमाण
- कौशाम्बी का महत्व: वत्स महाजनपद की राजधानी — UP के मौर्यकालीन महत्व का प्रमाण
- व्यक्तिगत लेख: राज्य-नीति नहीं, व्यक्तिगत धार्मिक दान — इसीलिए “लघु” कहलाता है
लघु शिलालेखों की सामान्य विषयवस्तु
अशोक ने बताया कि वे ढाई वर्ष से उपासक हैं, परन्तु पहले उनका धर्म में उत्साह कम था। अब बौद्ध संघ में जाने के बाद उत्साह बढ़ा।
परिवार में, समाज में, राज्य में धम्म का पालन कैसे करें — इसकी व्यावहारिक सीख। माता-पिता की सेवा, सत्य-भाषण, दान-धर्म।
बौद्ध संघ में फूट न पड़े — इसके लिए कड़े आदेश। सारनाथ लेख में यह सर्वाधिक स्पष्ट। अवज्ञाकारी भिक्षु को संघ से निष्कासन।
बैराट लेख में 7 बौद्ध ग्रंथों की सूची दी गई जो भिक्षुओं और उपासकों को पढ़नी चाहिए। बौद्ध साहित्य की जानकारी का महत्वपूर्ण स्रोत।
स्तंभ लेख (Pillar Edicts) — उत्तर प्रदेश में
स्तंभ लेख अशोक के सबसे प्रसिद्ध अभिलेख हैं। ये चुनार बलुआ-पत्थर (Chunar sandstone) के पॉलिश किए हुए एकाश्म स्तंभों पर उत्कीर्ण हैं। उत्तर प्रदेश में स्थित सारनाथ स्तंभ-शीर्ष (Lion Capital) आज भारत का राष्ट्रीय चिह्न है। UP में मेरठ, कौशाम्बी और सारनाथ तीन प्रमुख स्तंभ-लेख स्थल हैं।
- 7 अभिलेखों का समूह
- धम्म के विस्तृत नियम
- स्थल: दिल्ली-टोपरा, दिल्ली-मेरठ, लौरिया-नंदनगढ़, लौरिया-अरेराज, रामपुरवा, इलाहाबाद
- मूल स्थान UP/बिहार में थे — दिल्ली के दो स्तंभ बाद में स्थानांतरित
- सारनाथ (UP) — संघ-भेद निषेध
- कौशाम्बी (UP) — संघ-भेद निषेध
- सांची (MP) — संघ-भेद निषेध
- तीनों में एक ही विषय: बौद्ध संघ में एकता बनाए रखने का आदेश
7 बड़े स्तंभ-लेखों की विषयवस्तु
UP के स्तंभों की भौतिक विशेषताएँ
अशोक के स्तंभ अपनी उत्कृष्ट शिल्पकला के लिए विश्वप्रसिद्ध हैं। इन्हें चुनार (मिर्जापुर, UP) की खदानों से निर्मित बलुआ-पत्थर से बनाया गया था, जो विशेष चमक के लिए प्रसिद्ध था।
उत्तर प्रदेश के प्रमुख अभिलेख-स्थल
उत्तर प्रदेश में अशोक के अभिलेखों के तीन सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थल हैं — सारनाथ (वाराणसी), कौशाम्बी (प्रयागराज) और मेरठ। इनके अतिरिक्त लुम्बिनी (अब नेपाल में) का स्तंभ भी UP के निकट है और UPPSC पाठ्यक्रम में सम्मिलित है।
सारनाथ (वाराणसी)
Sarnath Pillar Edictमहत्व: यहाँ बुद्ध ने प्रथम उपदेश दिया था (धर्मचक्रप्रवर्तन)। अशोक ने यहाँ एक विशाल स्तंभ स्थापित किया। इस स्तंभ का शेर-शीर्ष (Lion Capital) आज सारनाथ संग्रहालय में सुरक्षित है और भारत का राष्ट्रीय चिह्न है।
राष्ट्रीय चिह्न संघ-भेद निषेध धर्मचक्र — राष्ट्रीय ध्वजकौशाम्बी (प्रयागराज के निकट)
Kausambi Pillar + Queen’s Edictमहत्व: वत्स महाजनपद की राजधानी। यहाँ दो महत्वपूर्ण अभिलेख हैं — (1) स्तंभ-लेख जिसमें संघ-भेद का निषेध है; (2) रानी-लेख (Queen’s Edict) जो रानी कारुवाकी के दान से सम्बन्धित है।
रानी-लेख वत्स राजधानी महिला इतिहासमेरठ स्तंभ (दिल्ली में स्थानांतरित)
Meerut-Delhi Pillarमहत्व: मूलतः UP के मेरठ में स्थित था। फिरोजशाह तुगलक (1356 ई.) इसे दिल्ली के फिरोज़शाह कोटला ले गया। इस पर 7 बड़े स्तंभ-लेख अंकित हैं। UP की मौर्यकालीन समृद्धि का प्रमाण।
दिल्ली-मेरठ स्तंभ 7 बड़े लेख फिरोजशाह तुगलकइलाहाबाद/प्रयागराज स्तंभ
Allahabad Pillarमहत्व: यह स्तंभ मूलतः कौशाम्बी का माना जाता है। इस पर अशोक के लेखों के अतिरिक्त समुद्रगुप्त (330–375 ई.) की प्रयाग-प्रशस्ति और जहाँगीर (1605 ई.) का लेख भी है — तीन कालों का साक्षी।
प्रयाग-प्रशस्ति समुद्रगुप्त जहाँगीरलुम्बिनी स्तंभ-लेख (UPPSC के लिए महत्वपूर्ण)
लुम्बिनी (अब नेपाल में, UP सीमा के निकट) में अशोक ने एक विशेष स्तंभ स्थापित किया। इस लेख का महत्व यह है कि इसमें अशोक ने लिखा: “यहाँ बुद्ध भगवान का जन्म हुआ था। मैंने यहाँ पत्थर की बाड़ बनवाई और स्तंभ स्थापित किया। इस गाँव को कर-मुक्त (tax-free) किया और भूमि-राजस्व को आठवें भाग तक घटाया।”
भाषा, लिपि एवं विषयवस्तु का विश्लेषण
अशोक के अभिलेखों की भाषा और लिपि उनके भौगोलिक स्थान के अनुसार भिन्न-भिन्न है। उत्तर प्रदेश के अभिलेखों में मुख्यतः प्राकृत भाषा और ब्राह्मी लिपि का उपयोग हुआ है, जो गंगा के मैदान की जनभाषा थी।
| क्षेत्र | भाषा | लिपि | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| गंगा का मैदान (UP, Bihar) | अर्धमागधी / पूर्वी प्राकृत | ब्राह्मी | सारनाथ, कौशाम्बी, मेरठ |
| पश्चिमोत्तर (पाकिस्तान) | पश्चिमी प्राकृत | खरोष्ठी | शाहबाजगढ़ी, मानसेहरा |
| अफगानिस्तान | यूनानी + अरामाइक | यूनानी / अरामाइक | कंदहार (द्विभाषी) |
| दक्षिण भारत | दक्षिणी प्राकृत | ब्राह्मी | मस्की, गुर्जरा, धौली |
ब्राह्मी लिपि — James Prinsep का योगदान
James Prinsep (1799–1840), एक ब्रिटिश पुरातत्ववेत्ता और एशियाटिक सोसायटी के सदस्य, ने 1837 ई. में ब्राह्मी लिपि का सफलतापूर्वक पाठ किया। उन्होंने सारनाथ और अलाहाबाद स्तंभों का उपयोग तुलनात्मक विश्लेषण के लिए किया। इससे पूर्व ये अभिलेख 1,800 वर्षों तक अपठित रहे थे।
- बाएँ से दाएँ लिखी जाती है
- देवनागरी, बंगाली, तमिल सहित अधिकांश भारतीय लिपियों की जननी
- अशोक के समय सर्वाधिक प्रयुक्त
- UP-Bihar के सभी अभिलेखों में ब्राह्मी
- दाएँ से बाएँ लिखी जाती है (अरामाइक से प्रभावित)
- केवल पश्चिमोत्तर के अभिलेखों में
- UP में उपयोग नहीं हुई
- James Prinsep ने 1838 में पढ़ा
धम्म की अवधारणा — विषयवस्तु का मूल
- अहिंसा (Non-violence): जीवों की हत्या न करना, पशु-बलि का निषेध
- सत्य (Truth): सत्य-भाषण, झूठ से परहेज
- दान (Charity): ब्राह्मणों, श्रमणों और निर्धनों को दान
- शौच (Purity): मन और आचरण की पवित्रता
- सम्प्रदाय-सहिष्णुता: सभी धर्मों का आदर — बौद्ध, जैन, ब्राह्मण, आजीवक
- माता-पिता की सेवा: पारिवारिक नैतिकता का आधार
- गुरु का सम्मान: शिक्षक और वरिष्ठों के प्रति आदर
ऐतिहासिक महत्व एवं आलोचनात्मक विश्लेषण
अशोक के शिलालेख न केवल मौर्य साम्राज्य का इतिहास जानने के प्रमुख स्रोत हैं, बल्कि ये प्राचीन भारत की सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर अमूल्य प्रकाश डालते हैं। UPPSC Mains में इनके बहुआयामी महत्व को समझना अनिवार्य है।
ऐतिहासिक महत्व के बहुआयाम
राजुक, युक्त, महामात्र जैसे अधिकारियों का उल्लेख — मौर्य प्रशासन की जानकारी। धम्म-महामात्रों की नियुक्ति — धर्मनिरपेक्ष प्रशासन का आदर्श।
13वें शिलालेख में पड़ोसी राज्यों का उल्लेख — मौर्य साम्राज्य की सीमाओं की जानकारी। यूनानी, तमिल, श्रीलंकाई सम्पर्क का प्रमाण।
बौद्ध तीर्थ-स्थलों की पहचान। बुद्ध के जन्म-स्थान का प्रमाण (लुम्बिनी)। सम्प्रदाय-सहिष्णुता का ऐतिहासिक दस्तावेज।
महिला अधिकार (रानी-लेख), पशु-कल्याण, चिकित्सा व्यवस्था, कर-राहत — समाज-कल्याण का प्राचीनतम राज्य-प्रमाण।
मौर्य-कला का सर्वोत्तम उदाहरण — पॉलिश स्तंभ, शेर-शीर्ष। भारतीय राष्ट्रीय चिह्न और ध्वज में धर्मचक्र इन्हीं का प्रतिनिधित्व करते हैं।
बौद्ध धर्म के विस्तार का प्रमाण। श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड में अशोक के मिशनरियों के सन्दर्भ। भारत की प्रथम “Soft Power” diplomacy।
आलोचनात्मक दृष्टिकोण (Mains के लिए)
- आर्थिक प्रभाव: पशु-हत्या पर प्रतिबंध से कृषि और चमड़ा उद्योग प्रभावित हुआ। सेना की उपेक्षा से साम्राज्य कमजोर पड़ा।
- व्यावहारिकता का प्रश्न: क्या अभिलेखों की नीतियाँ वास्तव में लागू हुईं? D.D. Kosambi का मत — ये केवल “प्रचार-सामग्री” थी।
- धम्म की अस्पष्टता: रोमिला थापर के अनुसार “धम्म” किसी एक धर्म से नहीं बंधा था — यह लाभ भी था और कमजोरी भी।
- उत्तराधिकारियों की विफलता: अशोक की मृत्यु के 50 वर्षों में मौर्य साम्राज्य समाप्त हो गया। धम्म-नीति की व्यावहारिक कमजोरी।
सारांश एवं स्मरण-सूत्र
स्मरण-सूत्र (Mnemonic)
परीक्षा प्रश्न — UPPSC Prelims + Mains
नीचे UPPSC Prelims और Mains दोनों के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न दिए गए हैं। MCQ में उत्तर क्लिक करके जाँचें।
निष्कर्ष
अशोक के शिलालेख केवल पत्थर पर उकेरे शब्द नहीं हैं — ये एक साम्राज्य की आत्मा हैं। उत्तर प्रदेश, जो इन अभिलेखों का केंद्र रहा है, आज भी सारनाथ के सिंह-शीर्ष के माध्यम से अशोक की विरासत को जीवित रखे हुए है। UPPSC परीक्षार्थियों के लिए ये अभिलेख — प्रमुख, लघु और स्तंभ — तीनों के विशिष्ट स्थल, विषयवस्तु और महत्व को समझना न केवल परीक्षा की दृष्टि से, बल्कि भारतीय इतिहास की गहरी समझ के लिए अनिवार्य है।


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