नगरीकरण (Urbanization) — उत्तर प्रदेश
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परिचय एवं अवधारणा (Introduction & Concept)
नगरीकरण (Urbanization) एक ऐसी बहुआयामी प्रक्रिया है जिसमें जनसंख्या का ग्रामीण क्षेत्रों से नगरीय क्षेत्रों की ओर स्थानान्तरण होता है। UPPSC परीक्षा में यह विषय उत्तर प्रदेश की आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति के अन्तर्गत अत्यन्त महत्वपूर्ण है।
भारत की जनगणना के अनुसार किसी स्थान को नगर (Urban Area) तभी माना जाता है जब — (1) उसकी जनसंख्या 5,000 या उससे अधिक हो, (2) पुरुष कार्यशील जनसंख्या का 75% से अधिक गैर-कृषि कार्यों में लगा हो, तथा (3) जनसंख्या घनत्व 400 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी से अधिक हो। इसके अतिरिक्त Statutory Towns जैसे — नगर पालिका, नगर पंचायत, नगर निगम आदि भी नगरीय क्षेत्र में आते हैं।
नगरीकरण के प्रकार (Types of Urbanization)
नगरीकरण को मुख्यतः तीन श्रेणियों में विभाजित किया जाता है — प्राकृतिक नगरीकरण (नगरों में जन्म-मृत्यु अन्तर से), प्रवासी नगरीकरण (ग्रामीण-नगरीय प्रवास से), तथा वर्गीकरण नगरीकरण (ग्रामीण क्षेत्रों का नगरीय क्षेत्र में पुनर्वर्गीकरण)। UP में मुख्यतः प्रवासी नगरीकरण प्रमुख रहा है।
Urbanization की माप (Measurement)
नगरीकरण की माप नगरीकरण अनुपात (Urbanization Ratio) द्वारा की जाती है — अर्थात् कुल जनसंख्या में नगरीय जनसंख्या का प्रतिशत। UP में यह दर 2001 में 20.78% से बढ़कर 2011 में 22.28% हो गई। यद्यपि यह राष्ट्रीय औसत से काफी कम है, किन्तु निरपेक्ष संख्या में UP सर्वाधिक नगरीय जनसंख्या वाला राज्य है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Historical Background)
उत्तर प्रदेश का नगरीकरण का इतिहास अत्यन्त प्राचीन है। वैदिक काल से लेकर मध्यकाल तक यहाँ अनेक महत्वपूर्ण नगर केन्द्र विकसित हुए। गंगा-यमुना दोआब क्षेत्र में नगरीय सभ्यता का विकास भारत की प्राचीनतम परम्परा में से एक है।
ब्रिटिश काल में नगरीकरण की विशेषताएँ
ब्रिटिश काल में UP का नगरीकरण Colonial Pattern पर आधारित था। रेलवे नेटवर्क (1853 के बाद) ने कानपुर को भारत का “Manchester” बना दिया। कानपुर में वस्त्र उद्योग, चमड़ा उद्योग; इलाहाबाद में उच्च न्यायालय एवं प्रशासनिक केन्द्र; मेरठ में सैन्य छावनी। इस काल में नगरीय विकास असमान था — कुछ ही नगर विकसित हुए जबकि परम्परागत उद्योग नष्ट हुए।
नगरीकरण की वर्तमान स्थिति — आँकड़े (Current Status — Statistics)
Census 2011 के अनुसार उत्तर प्रदेश में 4.44 करोड़ नगरीय जनसंख्या है जो देश की कुल नगरीय जनसंख्या का लगभग 11.8% है। यद्यपि नगरीकरण की प्रतिशत दर कम है, किन्तु निरपेक्ष आँकड़ों में UP सर्वोच्च स्थान पर है।
| जनगणना वर्ष | कुल जनसंख्या (करोड़) | नगरीय जनसंख्या (करोड़) | नगरीकरण दर (%) | वृद्धि दशक |
|---|---|---|---|---|
| 11951 | 6.32 | 0.73 | 11.8% | — |
| 21961 | 7.38 | 0.97 | 13.1% | +1.3% |
| 31971 | 8.83 | 1.30 | 14.9% | +1.8% |
| 41981 | 11.04 | 1.97 | 17.9% | +3.0% |
| 51991 | 13.91 | 2.73 | 19.8% | +1.9% |
| 62001 | 16.61 | 3.44 | 20.8% | +1.0% |
| 72011 | 19.95 | 4.44 | 22.3% | +1.5% |
नगरीय जनसंख्या वितरण — प्रगति पट्टियाँ
नगरों का वर्गीकरण (Classification of Towns — UP 2011)
| श्रेणी (Class) | जनसंख्या सीमा | नगरों की संख्या (UP) | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| Class I (Million+) | 10 लाख से अधिक | 7 | लखनऊ, कानपुर, आगरा, वाराणसी, मेरठ, प्रयागराज, गाजियाबाद |
| Class II | 50,000–1,00,000 | 42 | बरेली, अलीगढ़, मुरादाबाद, सहारनपुर |
| Class III | 20,000–50,000 | 150+ | मध्यम आकार के नगर |
| Class IV–VI | 5,000–20,000 | 400+ | छोटे नगर एवं कस्बे |
प्रमुख नगर एवं नगरीय केन्द्र (Major Cities & Urban Centres)
उत्तर प्रदेश में कई प्रमुख नगर हैं जो विभिन्न कार्यात्मक भूमिकाएँ निभाते हैं — राजनीतिक, औद्योगिक, धार्मिक एवं शैक्षणिक। इन नगरों की UPPSC परीक्षा में अक्सर जनसंख्या, विशेषता एवं स्थान के आधार पर प्रश्न पूछे जाते हैं।
लखनऊ (Lucknow)
राजधानी नगरकानपुर (Kanpur)
औद्योगिक नगरआगरा (Agra)
पर्यटन नगरवाराणसी (Varanasi)
धार्मिक नगरप्रयागराज (Prayagraj)
शिक्षा-न्याय केन्द्रगाजियाबाद (Ghaziabad)
NCR — तेजी से बढ़ता नगरअन्य महत्वपूर्ण नगर
| नगर | विशेषता | स्थान (नदी/क्षेत्र) | प्रसिद्धि |
|---|---|---|---|
| मेरठ | खेल उद्योग, शिक्षा | पश्चिम UP, हिण्डन नदी | क्रीड़ा सामग्री, 1857 की क्रान्ति |
| अलीगढ़ | ताला उद्योग | पश्चिम UP | AMU, ताला निर्माण |
| मुरादाबाद | पीतल उद्योग | पश्चिम UP, रामगंगा | “पीतल नगरी”, निर्यात |
| बरेली | फर्नीचर, जरी | उत्तर UP | बरेली का झुमका, फर्नीचर उद्योग |
| अयोध्या | धार्मिक पर्यटन | सरयू नदी | राम मन्दिर, धार्मिक महत्व |
| सहारनपुर | लकड़ी नक्काशी | उत्तरांचल सीमा | वुडक्राफ्ट उद्योग |
| फिरोजाबाद | काँच उद्योग | मध्य UP | “सुहाग नगरी”, चूड़ी उद्योग |
| मथुरा-वृन्दावन | धार्मिक पर्यटन | यमुना नदी | कृष्ण जन्मभूमि, तेल शोधनागार |
नगरीकरण के कारण एवं प्रेरक शक्तियाँ (Causes & Driving Forces)
उत्तर प्रदेश में नगरीकरण की प्रक्रिया अनेक Push Factors (ग्रामीण क्षेत्रों से धकेलने वाले) और Pull Factors (नगरों की ओर खींचने वाले) कारकों का परिणाम है। UPPSC Mains में इन कारणों का विश्लेषणात्मक उत्तर लिखना आवश्यक होता है।
Push Factors — ग्रामीण क्षेत्रों से विस्थापन के कारण
भूमि जोत का विखण्डन, सिंचाई की कमी, मानसून निर्भरता, किसान ऋणग्रस्तता। UP में औसत जोत 0.7 हेक्टेयर से कम हो गई है जिससे कृषि अव्यावहारिक हो गई।
ग्रामीण क्षेत्रों में गैर-कृषि रोजगार की सीमित उपलब्धता। कृषि का मौसमी स्वभाव और अत्यधिक कृषि पर निर्भरता ने ग्रामीण बेरोजगारी को बढ़ावा दिया।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा संस्थानों एवं बुनियादी ढाँचे का अभाव। बेहतर जीवनस्तर की तलाश में नगरों की ओर पलायन।
पूर्वांचल एवं तराई क्षेत्रों में बाढ़, सूखा जैसी आपदाओं से प्रभावित किसानों का नगरों की ओर पलायन। गोरखपुर, बस्ती, देवरिया आदि जिलों से पलायन।
जाति व्यवस्था, सामाजिक असमानता, भूमि विवाद। दलित एवं पिछड़े वर्ग के लोग नगरों में अपेक्षाकृत अधिक आर्थिक गतिशीलता देखते हैं।
उच्च शिक्षा के लिए युवा वर्ग का नगरों की ओर प्रवास। IIT, BHU, AMU, KGMU जैसे संस्थानों में प्रवेश हेतु नगरों में बसने की प्रवृत्ति।
Pull Factors — नगरों की ओर आकर्षण के कारण
औद्योगिक क्षेत्रों का विकास — NOIDA (New Okhla Industrial Development Authority), UPSIDC (UP State Industrial Development Corporation) द्वारा औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना ने रोजगार के अवसर प्रदान किए। कानपुर में वस्त्र और चमड़ा, आगरा में जूता उद्योग, मुरादाबाद में पीतल उद्योग प्रमुख नियोक्ता हैं।
- NOIDA — IT/BPO, इलेक्ट्रॉनिक्स, मैन्युफैक्चरिंग
- कानपुर — वस्त्र, चमड़ा, इंजीनियरिंग उत्पाद
- लखनऊ — सेवा क्षेत्र, IT, सरकारी रोजगार
- ग्रेटर नोएडा — ऑटोमोबाइल, IT पार्क
नगरों में बेहतर सड़क, रेलवे, मेट्रो, हवाई अड्डे जैसी आधुनिक सुविधाएँ नगरीकरण को प्रोत्साहित करती हैं। लखनऊ मेट्रो (2017), नोएडा-ग्रेटर नोएडा मेट्रो, आगरा मेट्रो (निर्माणाधीन), कानपुर मेट्रो (2021) — ये परियोजनाएँ नगरीय विस्तार में सहायक हैं।
नगरों में उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध हैं। BHU (वाराणसी), AMU (अलीगढ़), KGMU (लखनऊ), IIT कानपुर, IIT (BHU) — ये संस्थान हजारों विद्यार्थियों एवं चिकित्सकों को आकर्षित करते हैं जो अन्ततः नगरीय जनसंख्या का हिस्सा बनते हैं।
नगरीकरण के सामाजिक प्रभाव (Social Impacts of Urbanization)
नगरीकरण का उत्तर प्रदेश के सामाजिक ताने-बाने पर गहरा प्रभाव पड़ा है। एक ओर जहाँ सामाजिक गतिशीलता बढ़ी है, वहीं दूसरी ओर झुग्गी बस्तियाँ, सामाजिक अपराध एवं पारिवारिक विघटन जैसी समस्याएँ भी उत्पन्न हुई हैं।
सकारात्मक सामाजिक प्रभाव
- शिक्षा का प्रसार: नगरों में साक्षरता दर (76.4%) ग्रामीण क्षेत्रों (67.7%) से अधिक। बालिका शिक्षा में सुधार।
- जाति-भेद में कमी: नगरीय वातावरण में जाति आधारित भेदभाव अपेक्षाकृत कम। Economic mobility ने सामाजिक गतिशीलता बढ़ाई।
- महिला सशक्तिकरण: नगरीय क्षेत्रों में महिला कार्यबल भागीदारी अधिक। सेवा क्षेत्र में रोजगार के अवसर।
- स्वास्थ्य सुधार: नगरों में शिशु मृत्यु दर कम, जीवन प्रत्याशा अधिक। बेहतर पोषण एवं स्वास्थ्य सेवाएँ।
- सांस्कृतिक विविधता: विभिन्न क्षेत्रों के लोगों का मिलन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान।
नकारात्मक सामाजिक प्रभाव
- झुग्गी बस्तियाँ (Slums): लखनऊ, कानपुर, आगरा में अनेक अनधिकृत बस्तियाँ। 2011 में UP के नगरों में लगभग 42 लाख लोग झुग्गी बस्तियों में।
- अपराध वृद्धि: नगरीय क्षेत्रों में सम्पत्ति अपराध, नशाखोरी, हिंसा में वृद्धि। सामाजिक नियंत्रण कमजोर होना।
- एकाकी परिवार: संयुक्त परिवार टूट रहे हैं। बुजुर्गों की उपेक्षा, बच्चों पर दबाव।
- मानसिक स्वास्थ्य: नगरीय जीवन का तनाव, प्रतिस्पर्धा, एकाकीपन से मानसिक समस्याएँ।
- सांस्कृतिक ह्रास: परम्परागत हस्तशिल्प, लोक कलाएँ समाप्त होने की कगार पर।
जनसांख्यिकीय परिवर्तन
| संकेतक | नगरीय UP (2011) | ग्रामीण UP (2011) | राष्ट्रीय नगरीय (2011) |
|---|---|---|---|
| साक्षरता दर | 76.4% | 67.7% | 79.9% |
| लिंगानुपात | 909/1000 | 929/1000 | 929/1000 |
| शिशु मृत्यु दर (IMR) | ~45/1000 | ~70/1000 | ~35/1000 |
| प्रजनन दर (TFR) | 2.2 | 3.5 | 1.8 |
| जनसंख्या घनत्व | उच्च (5000+) | मध्यम (800) | विविध |
झुग्गी बस्तियाँ (Slums) — UP की स्थिति
Census 2011 के अनुसार UP में 42.16 लाख लोग Slum Areas में रहते हैं। प्रमुख Slum क्षेत्र — कानपुर (जाजमऊ, सिस्मऊ), लखनऊ (अलीगंज स्लम्स), आगरा (ताज के पास अनधिकृत बस्तियाँ)। Rajiv Awas Yojana एवं PMAY (Urban) के तहत इनके पुनर्विकास के प्रयास जारी हैं।
नगरीकरण के आर्थिक प्रभाव (Economic Impacts of Urbanization)
नगरीकरण एवं आर्थिक विकास के बीच सकारात्मक सम्बन्ध पाया जाता है। नगर आर्थिक गतिविधियों के केन्द्र हैं जो उत्पादन, व्यापार, सेवा एवं नवाचार को बढ़ावा देते हैं। UP के GSDP में नगरीय अर्थव्यवस्था का योगदान लगभग 55-60% है।
नगरीय अर्थव्यवस्था का क्षेत्रवार योगदान
विशेष आर्थिक क्षेत्र एवं औद्योगिक गलियारे
UP में नगरीय आर्थिक विकास को गति देने के लिए अनेक विशेष क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं। दिल्ली-मुम्बई Industrial Corridor (DMIC) UP से होकर गुजरता है — आगरा, मथुरा, हाथरस, इटावा जिले इससे लाभान्वित होंगे। बुन्देलखण्ड Industrial Development Authority (BIDA), Yamuna Expressway Industrial Development Authority (YEIDA) आदि नगरीय औद्योगिक विकास के नए केन्द्र हैं।
| औद्योगिक प्राधिकरण | क्षेत्र | प्रमुख उद्योग |
|---|---|---|
| NOIDA Authority | गौतमबुद्ध नगर | IT, इलेक्ट्रॉनिक्स, Garments |
| Greater NOIDA Authority (GNIDA) | गौतमबुद्ध नगर | ऑटोमोबाइल, IT, Medical Devices |
| YEIDA | यमुना एक्सप्रेसवे | Aviation Hub (जेवर), Logistics |
| UPSIDC | राज्यव्यापी | MSME क्लस्टर्स, विभिन्न उद्योग |
| BIDA | बुन्देलखण्ड | डिफेन्स कॉरिडोर (झाँसी) |
- UP Defence Industrial Corridor: लखनऊ-आगरा के बीच 6 नोड्स — लखनऊ, कानपुर, आगरा, अलीगढ़, चित्रकूट, झाँसी।
- निवेश लक्ष्य: 2025 तक ₹50,000 करोड़ निवेश एवं 2.5 लाख रोजगार।
- महत्व: रक्षा उपकरण निर्माण में UP को आत्मनिर्भर बनाना, नगरीय औद्योगिक विकास।
नगरीय चुनौतियाँ एवं समस्याएँ (Urban Challenges & Problems)
उत्तर प्रदेश के नगर तेजी से बढ़ रहे हैं, किन्तु नगरीय अवसंरचना, प्रशासन एवं सेवाओं का विकास उस गति से नहीं हो पाया है। इसके परिणामस्वरूप अनेक गम्भीर चुनौतियाँ उत्पन्न हुई हैं जो UPPSC Mains में विस्तृत उत्तर के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- आवास संकट: नगरीय क्षेत्रों में आवास की भारी कमी। झुग्गी बस्तियों में 42 लाख से अधिक लोग। भूमि की ऊँची कीमतें आम नागरिकों की पहुँच से बाहर।
- जल आपूर्ति एवं स्वच्छता: कानपुर, आगरा, मथुरा जैसे नगरों में पाइप जलापूर्ति अपर्याप्त। खुले में शौच एवं सीवेज उपचार की समस्या।
- यातायात जाम: लखनऊ, आगरा, कानपुर में भयंकर यातायात जाम। पार्किंग स्थलों का अभाव। पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपर्याप्त।
- प्रदूषण: वायु प्रदूषण (लखनऊ, आगरा AQI अक्सर 300+), जल प्रदूषण (गंगा में औद्योगिक प्रदूषण), ध्वनि प्रदूषण।
- अनधिकृत निर्माण: नगरीय क्षेत्रों में Unauthorized Colonies का प्रसार। Master Plan का उल्लंघन।
- वित्तीय संकट: नगरीय निकायों की कमजोर वित्तीय स्थिति। Tax collection कम, विकास कार्य बाधित।
पर्यावरणीय चुनौतियाँ
नगरीकरण ने UP में गम्भीर पर्यावरणीय समस्याएँ उत्पन्न की हैं। गंगा प्रदूषण सबसे बड़ी समस्या है — कानपुर के चमड़ा उद्योगों से Chromium युक्त अपशिष्ट, आगरा के उद्योगों से ताजमहल को खतरा। भूजल स्तर में गिरावट — अत्यधिक जल दोहन से। हरित क्षेत्रों का ह्रास — कृषि भूमि का आवासीय उपयोग में परिवर्तन।
| समस्या | प्रभावित नगर | कारण | समाधान प्रयास |
|---|---|---|---|
| वायु प्रदूषण | लखनऊ, आगरा, कानपुर | वाहन, उद्योग, निर्माण | BS-VI मानक, CNG बसें, Green Zone |
| गंगा प्रदूषण | कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी | उद्योग, सीवेज | नमामि गंगे मिशन, STP निर्माण |
| ठोस अपशिष्ट | सभी नगर | अपर्याप्त DPR, Dumping Sites | SWM Rules 2016, Waste Processing Plants |
| ध्वनि प्रदूषण | धार्मिक नगर | लाउडस्पीकर, यातायात | NGT आदेश, Time Restrictions |
नगरीय प्रशासन की कमजोरियाँ
UP में नगरीय स्थानीय निकाय (ULBs) कई कमजोरियों से ग्रस्त हैं। 74वें संविधान संशोधन (1992) के बावजूद नगरीय स्वशासन पूरी तरह प्रभावी नहीं हुआ। Devolution of Functions — UP में 18 कार्यों में से अधिकांश अभी भी राज्य सरकार के पास हैं। Tax collection efficiency कम — Property Tax, Professional Tax का संग्रहण अपेक्षित स्तर से नीचे।
सरकारी नीतियाँ एवं योजनाएँ (Government Policies & Schemes)
उत्तर प्रदेश में नगरीय विकास को गति देने के लिए केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा अनेक महत्वाकांक्षी योजनाएँ चलाई जा रही हैं। UPPSC Prelims एवं Mains दोनों में इन योजनाओं की जानकारी अत्यावश्यक है।
केन्द्रीय योजनाएँ — UP में क्रियान्वयन
प्रारम्भ: 2015 | UP के Smart Cities: लखनऊ, आगरा, वाराणसी, कानपुर, प्रयागराज, झाँसी, बरेली, सहारनपुर, मुरादाबाद, अलीगढ़ — कुल 10 शहर UP से चुने गए।
- लखनऊ Smart City: Integrated Command & Control Centre, Smart Pole, Wi-Fi Zones, Heritage Zone Development।
- वाराणसी: घाटों का पुनरुद्धार, Heritage Walk, Smart Surveillance।
- आगरा: Tourism Circuit Development, ताज ट्रापेजियम Zone में सुधार।
लक्ष्य: “Housing for All by 2022” — EWS, LIG, MIG वर्गों को किफायती आवास। UP में PMAY Urban के अन्तर्गत लाखों मकान स्वीकृत। चार घटक: In-situ Slum Redevelopment, Credit Linked Subsidy Scheme (CLSS), Affordable Housing in Partnership, Beneficiary-led Individual Construction।
AMRUT 1.0 (2015-2020): UP के 65 शहरों में जल आपूर्ति, सीवेज, हरित क्षेत्र विकास। AMRUT 2.0 (2021-2026): सभी Statutory Towns में 100% पाइप जलापूर्ति एवं सीवेज सुविधा।
UP के नगरीय क्षेत्रों में ODF (Open Defecation Free) लक्ष्य। ODF+ एवं ODF++ के अन्तर्गत शौचालय निर्माण, सफाई। लखनऊ, कानपुर, आगरा में Solid Waste Management में सुधार। Swachh Survekshan में UP के नगरों की स्थिति में क्रमिक सुधार।
UP State Urban Development Schemes
| योजना | उद्देश्य | लाभार्थी/क्षेत्र |
|---|---|---|
| UP Urban Finance & Infrastructure Development Corp. (UPUFIDC) | नगरीय अवसंरचना वित्त पोषण | सभी नगरीय निकाय |
| मुख्यमन्त्री नगर सृजन योजना | मध्यम एवं छोटे नगरों का विकास | Class III-V Towns |
| नगर विकास निधि | नगरीय निकायों को वित्तीय सहायता | ULBs |
| UP Real Estate Regulatory Authority (UPRERA) | रियल एस्टेट नियमन, उपभोक्ता संरक्षण | नगरीय क्रेताओं की रक्षा |
| Transit Oriented Development (TOD) | Metro स्टेशनों के आसपास नगरीय विकास | लखनऊ, नोएडा, आगरा, कानपुर |
| नमामि गंगे — नगरीय घटक | गंगा किनारे नगरों में STP निर्माण | 25+ गंगा तटीय नगर |
Smart Cities
10 Smart Cities में world-class infrastructure — 2027 तक।
Jewar Airport
एशिया का सबसे बड़ा Airport — Noida International Airport, YEIDA क्षेत्र में।
Metro Expansion
लखनऊ, नोएडा, आगरा, कानपुर, मेरठ में Metro Network विस्तार।
Affordable Housing
PMAY Urban — 2027 तक सभी EWS/LIG परिवारों को पक्का मकान।
सारांश एवं परीक्षा प्रश्न (Summary & Exam Questions)
त्वरित पुनरावृत्ति तालिका
🧩 अभ्यास प्रश्न — MCQ
निष्कर्ष — समावेशी नगरीकरण की आवश्यकता
उत्तर प्रदेश में नगरीकरण एक अनिवार्य प्रक्रिया है जो राज्य के आर्थिक एवं सामाजिक विकास के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है। 2011 की 22.28% दर से आगे बढ़ते हुए अनुमानित रूप से 2031 तक यह 28-30% तक पहुँच सकती है। चुनौती यह है कि नगरीकरण समावेशी, टिकाऊ एवं पर्यावरण-अनुकूल हो। झुग्गी बस्तियों में रहने वाले करोड़ों लोगों को मुख्यधारा में लाना, ULBs को सशक्त करना, नगरीय-ग्रामीण असमानता दूर करना — ये लक्ष्य UP के समग्र विकास के लिए अनिवार्य हैं। Smart City Mission, AMRUT, PMAY सही दिशा में प्रयास हैं किन्तु इनके प्रभावी क्रियान्वयन हेतु सुशासन, वित्तीय स्वायत्तता एवं नागरिक भागीदारी आवश्यक है।


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