अध्याय 7 : तीन प्रतिच्छेदी रेखाओं की एक कथा
महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर | परीक्षा विशेष | हिंदी माध्यम
📖 अध्याय परिचय
इस अध्याय में हम त्रिभुज के बारे में पढ़ते हैं। हम सीखते हैं कि त्रिभुज की रचना कैसे करें, त्रिभुज असमिका क्या होती है, त्रिभुज के कोणों का योग क्या होता है, शीर्षलम्ब क्या होता है, और त्रिभुज कितने प्रकार के होते हैं। यह अध्याय परीक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
त्रिभुज किसे कहते हैं? इसके कितने शीर्ष और भुजाएँ होती हैं?
समबाहु त्रिभुज (Equilateral Triangle) किसे कहते हैं?
समद्विबाहु त्रिभुज (Isosceles Triangle) किसे कहते हैं?
त्रिभुज असमिका (Triangle Inequality) क्या है?
क्या 10 से.मी., 15 से.मी., और 30 से.मी. भुजाओं वाले त्रिभुज का अस्तित्व संभव है?
किसी त्रिभुज के कोणों का योग कितना होता है?
किसी भी त्रिभुज के तीनों कोणों का योग सदैव 180° होता है। इसे कोण के योग का गुण कहते हैं। इसे समांतर रेखा खींचकर सिद्ध किया जा सकता है।
शीर्षलम्ब (Altitude) किसे कहते हैं?
बहिष्कोण (Exterior Angle) किसे कहते हैं?
समकोण त्रिभुज (Right Triangle) किसे कहते हैं?
न्यून कोण त्रिभुज किसे कहते हैं?
विषमबाहु त्रिभुज किसे कहते हैं?
यदि ΔABC में ∠B = 50° और ∠C = 70° है, तो ∠A ज्ञात कीजिए।
∠A + 50° + 70° = 180°
∠A + 120° = 180°
∴ ∠A = 60°
दो कोणों का योग 180° से कम होने पर क्या होता है?
क्या 4 से.मी., 5 से.मी., और 8 से.मी. भुजाओं वाले त्रिभुज का अस्तित्व है? जाँच कीजिए।
जाँच: 8 < 4 + 5 = 9 ✅
यह त्रिभुज असमिका संतुष्ट करता है, अतः ऐसे त्रिभुज का अस्तित्व है।
परकार की सहायता से समबाहु त्रिभुज की रचना के मुख्य चरण लिखिए।
चरण 2: केंद्र A से त्रिज्या 4 से.मी. का चाप खींचिए।
चरण 3: केंद्र B से त्रिज्या 4 से.मी. का चाप खींचिए जो पहले चाप को काटे।
चरण 4: प्रतिच्छेद बिंदु C है। AC और BC को मिलाने पर समबाहु ΔABC प्राप्त होता है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
परकार की सहायता से 4 से.मी., 5 से.मी. और 6 से.मी. भुजाओं वाले त्रिभुज की रचना के चरण विस्तार से लिखिए।
∴ ΔABC की रचना हो गई जिसमें AB = 4, AC = 5, BC = 6 से.मी. हैं।
त्रिभुज असमिका की परिभाषा दीजिए और बताइए कि 10 से.मी., 15 से.मी., और 30 से.मी. भुजाओं वाले त्रिभुज का अस्तित्व क्यों नहीं है?
तीसरी जाँच में CA = 30 > 25 है, यानी सीधा मार्ग घूमकर जाने वाले मार्ग से बड़ा हो गया जो असंभव है।
∴ 10, 15, 30 की भुजाओं वाले त्रिभुज का अस्तित्व संभव नहीं है।
समांतर रेखा की सहायता से सिद्ध कीजिए कि किसी त्रिभुज के तीनों कोणों का योग 180° होता है।
सिद्ध करना है: ∠A + ∠B + ∠C = 180°
अतः ∠XAB + ∠BAC + ∠YAC = 180°
ΔABC में AB = 5 से.मी., AC = 4 से.मी. और ∠A = 45° दिए हैं। इस त्रिभुज की रचना के चरण लिखिए।
∴ वाँछित ΔABC प्राप्त होता है जिसमें AB = 5 से.मी., AC = 4 से.मी. और ∠A = 45° है।
ΔABC में AB = 5 से.मी., ∠A = 45° और ∠B = 80° दिए हैं। (दो कोण और अंतर्गत भुजा) इस त्रिभुज की रचना के चरण लिखिए और तीसरा कोण ∠C भी ज्ञात कीजिए।
पहले ∠C ज्ञात करें:
रचना के चरण:
∴ ΔABC प्राप्त हुआ जिसमें ∠A = 45°, ∠B = 80°, ∠C = 55°
बहिष्कोण क्या है? ΔABC में ∠A = 50° और ∠B = 60° हो तो बहिष्कोण ∠ACD ज्ञात कीजिए और बहिष्कोण का नियम समझाइए।
दिया है: ∠A = 50°, ∠B = 60°, ∠ACD = ?
∴ बहिष्कोण ∠ACD = 110° = ∠A + ∠B (50° + 60°)
यह बहिष्कोण का नियम है: बहिष्कोण = दो अनुपस्थित कोणों का योग।
त्रिभुजों का उनके कोणों के माप के आधार पर वर्गीकरण कीजिए। प्रत्येक प्रकार को उदाहरण सहित समझाइए।
नोट: किसी त्रिभुज में एक से अधिक समकोण या अधिक कोण नहीं हो सकता क्योंकि तीनों कोणों का योग 180° होता है।
निम्नलिखित लंबाइयों में से कौन-सी एक त्रिभुज की भुजाएँ हो सकती हैं? त्रिभुज असमिका से जाँच कीजिए: (a) 2, 2, 5 (b) 3, 4, 6 (c) 5, 5, 8
∴ यह त्रिभुज बनाना संभव नहीं
∴ यह त्रिभुज बनाना संभव है
∴ यह त्रिभुज बनाना संभव है
ΔABC में ∠B = ∠C और ∠A = 50° है। ∠B और ∠C ज्ञात कीजिए। साथ ही यह भी बताइए कि यह किस प्रकार का त्रिभुज है?
त्रिभुज का प्रकार: चूँकि ∠B = ∠C (दो कोण बराबर हैं), इसलिए दो भुजाएँ भी बराबर होंगी। यह एक समद्विबाहु त्रिभुज है। साथ ही तीनों कोण 90° से कम हैं, इसलिए यह न्यून कोण त्रिभुज भी है।
समकोणक (Set Square) की सहायता से किसी त्रिभुज में शीर्षलम्ब की रचना के चरण लिखिए। शीर्षलम्ब क्या होता है यह भी समझाइए।
रचना के चरण (ΔABC में A से BC पर शीर्षलम्ब):
∴ AD त्रिभुज ABC का शीर्षलम्ब है, जो A से BC पर लम्बवत है।
💡 परीक्षा टिप्स
💡 त्रिभुज असमिका: हमेशा सबसे बड़ी भुजा को अन्य दोनों के योग से तुलना करें — यही सबसे तेज तरीका है।
💡 कोण योग: ∠A + ∠B + ∠C = 180° — यह सूत्र परीक्षा में बार-बार काम आता है।
💡 बहिष्कोण: याद रखें — बहिष्कोण = दो अनुपस्थित अंतः कोणों का योग।
💡 रचना: दो भुजा + अंतर्गत कोण और दो कोण + अंतर्गत भुजा — दोनों विधियाँ अच्छी तरह सीखें।
💡 सामान्य गलती: त्रिभुज के प्रकार बताते समय — भुजाओं के आधार पर (समबाहु/समद्विबाहु/विषमबाहु) और कोणों के आधार पर (न्यून/समकोण/अधिक कोण) — दोनों वर्गीकरण अलग-अलग हैं।
📌 याद रखें — Key Points
📌 त्रिभुज की तीनों भुजाएँ त्रिभुज असमिका को संतुष्ट करती हैं।
📌 किसी त्रिभुज के तीनों कोणों का योग सदैव 180° होता है।
📌 बहिष्कोण = दो अन्य अंतः कोणों का योग।
📌 समबाहु: तीनों भुजाएँ बराबर | समद्विबाहु: दो भुजाएँ बराबर | विषमबाहु: सभी भिन्न।
📌 दो दिए कोणों का योग < 180° हो तो त्रिभुज बनता है।
📌 शीर्षलम्ब शीर्ष से सम्मुख भुजा पर लम्बवत रेखाखंड होता है।
📌 समकोण त्रिभुज में एक भुजा स्वयं शीर्षलम्ब होती है।

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