अध्याय 5: समांतर और प्रतिच्छेदी रेखाएँ
रेखाओं के आपसी संबंध, कोणों के नियम और समांतर रेखाओं के गुणधर्म — सभी कुछ सरल भाषा में।
↔️ समांतर रेखाएँ
⊥ लम्ब रेखाएँ
↗ तिर्यक रेखाएँ
∠ संगत कोण
🔀 एकांतर कोण
परिचय — रेखाएँ और उनका संबंध
जब हम कागज पर रेखाएँ खींचते हैं, तो कुछ रेखाएँ आपस में मिलती हैं और कुछ कभी नहीं मिलतीं। इस अध्याय में हम एक समतल सतह पर रेखाओं के बीच इन्हीं संबंधों को समझेंगे।
एक वर्गाकार कागज लीजिए और उसे कई तरह से मोड़िए — हर मोड़ से एक नई रेखा बनती है। इन रेखाओं को देखिए: कुछ आपस में मिलती हैं, कुछ बिल्कुल समांतर (parallel) चलती हैं, और कुछ एक-दूसरे पर बिल्कुल सीधे (लम्ब) होती हैं!
🔵 मुख्य प्रकार की रेखा-स्थितियाँ
जो रेखाएँ एक बिन्दु पर मिलती हैं (काटती हैं) — वे प्रतिच्छेदी (Intersecting) रेखाएँ कहलाती हैं।
जो रेखाएँ कभी नहीं मिलतीं, चाहे उन्हें कितना भी बढ़ा दो — वे समांतर (Parallel) रेखाएँ कहलाती हैं।
जो रेखाएँ 90° पर एक-दूसरे को काटती हैं — वे लम्ब (Perpendicular) रेखाएँ कहलाती हैं।
जो एक रेखा अन्य दो या अधिक रेखाओं को काटती है — वह तिर्यक (Transversal) रेखा कहलाती है।
समतल सतह के उदाहरण: मेज का ऊपरी भाग, कागज का टुकड़ा, श्यामपट्ट (Blackboard), बुलेटिन बोर्ड — ये सब समतल सतह हैं जिन पर हम रेखाओं के संबंध देख सकते हैं।
प्रतिच्छेदी रेखाएँ और बनने वाले कोण
जब दो रेखाएँ एक बिन्दु पर मिलती हैं, तो उस बिन्दु पर चार कोण बनते हैं।

🔑 महत्वपूर्ण परिभाषाएँ
जैसे: ∠a + ∠b = 180°, ∠b + ∠c = 180°
जैसे: ∠a = ∠c और ∠b = ∠d
- रैखिक युग्म — दो प्रतिच्छेदी रेखाओं से बने आसन्न (adjacent) कोण जिनका योग 180° होता है।
- शीर्षाभिमुख कोण — जब दो रेखाएँ प्रतिच्छेद करती हैं, तो आमने-सामने के कोण हमेशा बराबर होते हैं।
- दो सरल रेखाएँ एक-दूसरे को अधिकतम एक बिन्दु पर प्रतिच्छेद कर सकती हैं।
यदि ∠a = 120° हो, तो:
∠b = 180° – 120° = 60° (रैखिक युग्म से)
∠c = 120° (शीर्षाभिमुख कोण, ∠a के बराबर)
∠d = 60° (शीर्षाभिमुख कोण, ∠b के बराबर)
जब हम तर्क (reasoning) की मदद से बिना मापे किसी तथ्य को सिद्ध करते हैं, उसे गणित में उपपत्ति (Proof) कहते हैं। उदाहरण: शीर्षाभिमुख कोणों की समानता हम तर्क से सिद्ध कर सकते हैं।
जब भी दो रेखाएँ प्रतिच्छेद करती हैं, तो हमेशा 4 कोण बनते हैं — और उनका कुल योग सदा 360° होता है! यह नियम दुनिया की किसी भी दो प्रतिच्छेदी रेखाओं के लिए सत्य है।
लम्ब रेखाएँ (Perpendicular Lines)
यदि दो प्रतिच्छेदी रेखाएँ इस प्रकार हों कि उनके बीच बनने वाले सभी चारों कोण समान हों, तो प्रत्येक कोण अवश्य ही 90° (समकोण) होगा।
रेखाओं का वह युग्म जहाँ दोनों रेखाएँ एक-दूसरे को 90° के कोण पर प्रतिच्छेद करती हैं, लम्ब रेखाएँ (Perpendicular Lines) कहलाती हैं।
संकेतन: l ⊥ m (l, m पर लम्ब है)
- लम्ब रेखाओं में सभी चारों कोण 90° होते हैं।
- लम्ब रेखाओं को आरेख में छोटे वर्ग (□) के चिह्न से दर्शाते हैं।
- लम्ब रेखाएँ एक विशेष प्रकार की प्रतिच्छेदी रेखाएँ हैं।
- समकोणक (Set Square) का उपयोग करके लम्ब रेखाएँ खींची जाती हैं।
हर लम्ब रेखा प्रतिच्छेदी होती है, लेकिन हर प्रतिच्छेदी रेखा लम्ब नहीं होती!
(लम्ब ⊂ प्रतिच्छेदी)
समांतर रेखाएँ (Parallel Lines)
जब हम पियानो की चाबियाँ, पार्क की बेंच, या रेलगाड़ी की पटरियाँ देखते हैं — ये सब समांतर रेखाओं के उदाहरण हैं।

रेखाओं का वह युग्म जो एक ही तल (Plane) पर हो और कभी भी एक-दूसरे से न मिले, चाहे उन्हें दोनों दिशाओं में कितना भी बढ़ा दें — वे समांतर रेखाएँ कहलाती हैं।
संकेतन: l ∥ m
🌍 समांतर रेखाओं के वास्तविक उदाहरण
पियानो की काली और सफेद चाबियाँ समांतर रेखाओं का अच्छा उदाहरण हैं।
रेल की दोनों पटरियाँ कभी नहीं मिलतीं — ये समांतर रेखाएँ हैं।
कक्षा की फर्श की टाइलों के किनारे, दरवाजे के दोनों किनारे आदि।
आपकी नोटबुक की क्षैतिज लाइनें सभी एक-दूसरे के समांतर होती हैं।
📝 समांतर रेखाओं का संकेतन
- समांतर रेखाओं को दर्शाने के लिए तीर के चिह्न (→) का उपयोग होता है।
- यदि एक से अधिक समूह हों, तो दूसरे समूह को दो तीर (→→) से दर्शाते हैं।
- समांतर रेखाओं को ∥ चिह्न से भी लिखते हैं: जैसे l ∥ m।
यह महत्वपूर्ण है कि रेखाएँ एक ही तल पर हों। मेज पर खींची एक रेखा और बोर्ड पर खींची एक रेखा कभी न मिलें, परंतु इससे वे समांतर नहीं बनती — क्योंकि वे अलग-अलग तलों पर हैं!
तिर्यक रेखाएँ और संगत कोण
जब एक रेखा दो या अधिक रेखाओं को काटती है, तो वह तिर्यक रेखा (Transversal) कहलाती है।

🎯 संगत कोण (Corresponding Angles)
जब एक तिर्यक रेखा दो रेखाओं को काटती है, तो स्थिति के आधार पर पहले समूह के कोण दूसरे समूह के कोणों के संगत होते हैं।
| संगत कोणों के युग्म | स्थिति |
|---|---|
| ∠1 और ∠5 | दोनों बाईं ओर, ऊपर-ऊपर |
| ∠2 और ∠6 | दोनों दाईं ओर, ऊपर-ऊपर |
| ∠3 और ∠7 | दोनों दाईं ओर, नीचे-नीचे |
| ∠4 और ∠8 | दोनों बाईं ओर, नीचे-नीचे |
जब एक तिर्यक रेखा समांतर रेखाओं के युग्म को काटती है, तो संगत कोण सदैव बराबर होते हैं।
और यदि संगत कोण बराबर हों, तो रेखाएँ समांतर होती हैं।
(l ∥ m ⟺ संगत कोण बराबर)
एक मापक और समकोणक (Set Square) का उपयोग करके: एक रेखा l खींचिए → समकोणक को खिसकाकर l के लम्बवत दो रेखाएँ खींचिए → ये दोनों नई रेखाएँ l के साथ 90° बनाती हैं → संगत कोण (90°=90°) बराबर हैं → इसलिए ये दोनों रेखाएँ समांतर हैं।
तिर्यक रेखा के एक ही ओर बने अत: कोणों (co-interior angles) का योग सदैव 180° होता है।
उदाहरण: ∠3 + ∠6 = 180°, ∠4 + ∠5 = 180° (जब l ∥ m हो)
एकांतर कोण (Alternate Angles)
जब एक तिर्यक रेखा दो रेखाओं को काटती है, तो तिर्यक रेखा के विपरीत दिशाओं में बने कोण एकांतर कोण (Alternate Angles) कहलाते हैं।
🔍 एकांतर कोण कैसे खोजें?
- पहले दिए गए कोण का संगत कोण ज्ञात करें।
- फिर उस संगत कोण का शीर्षाभिमुख कोण ज्ञात करें।
- यही आपका एकांतर कोण है!
उदाहरण: ∠f का एकांतर कोण = ∠f का संगत कोण (∠b) का शीर्षाभिमुख कोण = ∠d
समांतर रेखाओं के युग्म को तिर्यक रेखा द्वारा काटने पर बने एकांतर कोण हमेशा बराबर होते हैं।
∠d = ∠f और ∠c = ∠e (जब l ∥ m हो)
| एकांतर कोण युग्म | स्थिति |
|---|---|
| ∠d और ∠f | तिर्यक रेखा के विपरीत ओर, अंदर की ओर |
| ∠c और ∠e | तिर्यक रेखा के विपरीत ओर, अंदर की ओर |
1. संगत कोण = बराबर (Corresponding Angles Equal)
2. एकांतर कोण = बराबर (Alternate Angles Equal)
3. एक ही ओर के अत: कोणों का योग = 180° (Co-interior Angles Supplementary)
हल किए गए उदाहरण
📌 उदाहरण 1
समांतर रेखाएँ l और m को तिर्यक रेखा t काटती है। यदि ∠6 = 135° हो, तो सभी कोणों के मान ज्ञात करो।
∠2 = ∠6 = 135° (संगत कोण, l ∥ m है)
∠4 = ∠8 = 135° (संगत कोण, l ∥ m है)∠5 = 180° – 135° = 45° (रैखिक युग्म: ∠5 + ∠6 = 180°)
∠7 = ∠5 = 45° (शीर्षाभिमुख कोण)
∠1 = ∠5 = 45° (संगत कोण)
∠3 = ∠7 = 45° (संगत कोण)उत्तर: ∠2 = ∠4 = ∠6 = ∠8 = 135° और ∠1 = ∠3 = ∠5 = ∠7 = 45°
📌 उदाहरण 2
रेखाएँ l और m को तिर्यक रेखा t काटती है। यदि ∠a = 120° और ∠f = 70° हो, तो क्या l ∥ m है?
दिया है: ∠a = 120°, ∠f = 70°∠b = 180° – ∠a = 180° – 120° = 60° (रैखिक युग्म से)
जाँच: ∠b, ∠f का संगत कोण है।
यदि l ∥ m होती तो ∠b = ∠f होना चाहिए।
लेकिन ∠b = 60° और ∠f = 70°
60° ≠ 70°
उत्तर: l और m समांतर नहीं हैं — क्योंकि संगत कोण बराबर नहीं हैं।
📌 उदाहरण 3
तिर्यक रेखा t, समांतर रेखाओं l और m को काटती है। यदि ∠3 = 50° हो तो ∠6 का मान ज्ञात करो।
दिया है: l ∥ m, ∠3 = 50°∠2 = 180° – ∠3 = 180° – 50° = 130° (रैखिक युग्म: ∠2 + ∠3 = 180°)
∠2 और ∠6 संगत कोण हैं (l ∥ m)
∴ ∠6 = ∠2 = 130°
उत्तर: ∠6 = 130°
नोट: ∠3 और ∠6 एक ही ओर के अत: कोण हैं।
∠3 + ∠6 = 50° + 130° = 180° ✓
📌 उदाहरण 4 (उन्नत)
AB ∥ CD, AD ∥ BC और ∠ADC = 60°, ∠DAC = 65° हो, तो ∠CAB, ∠ABC और ∠BCD ज्ञात करो।
एक ही ओर के अत: कोणों का योग = 180°
∠ADC + ∠DAB = 180°
60° + ∠DAB = 180°
∠DAB = 120°चरण 2: ∠DAB = ∠DAC + ∠CAB
120° = 65° + ∠CAB
∠CAB = 55°चरण 3: AD ∥ BC में CD तिर्यक रेखा है।
∠ADC + ∠BCD = 180° (एक ही ओर के अत: कोण)
60° + ∠BCD = 180°
∠BCD = 120°चरण 4: समांतरभुज में ∠ABC = ∠ADC = 60° (एकांतर कोण)
∠ABC = 60°अंतिम उत्तर: ∠CAB = 55°, ∠ABC = 60°, ∠BCD = 120°
सामान्य गलतियाँ — इनसे बचें!
शीर्षाभिमुख कोण (Vertically Opposite) — एक ही बिन्दु पर, आमने-सामने।
संगत कोण (Corresponding) — दो अलग-अलग प्रतिच्छेद बिन्दुओं पर, एक ही स्थिति में।
इन दोनों को आपस में मत मिलाइए!
मेज पर खींची रेखा और दीवार पर खींची रेखा कभी न मिलें, तो भी वे समांतर नहीं हैं — क्योंकि वे अलग-अलग तलों (Planes) पर हैं। समांतर रेखाएँ एक ही तल पर होनी चाहिए।
एकांतर कोण सिर्फ तब बराबर होते हैं जब रेखाएँ समांतर हों (l ∥ m)। यदि रेखाएँ समांतर नहीं हैं, तो एकांतर कोण बराबर नहीं होंगे!
जब हम कोणों को मापते हैं तो कभी-कभी माप बिल्कुल सटीक नहीं आते (180° की जगह 179° या 181°)। यह चाँदे का ठीक से उपयोग न करने या रेखाओं की मोटाई के कारण होता है — यह सामान्य है!
| गलत सोच | सही सोच |
|---|---|
| सभी प्रतिच्छेदी रेखाएँ लम्ब होती हैं। | लम्ब रेखाएँ एक विशेष प्रकार की प्रतिच्छेदी रेखाएँ हैं (90° पर)। |
| समांतर रेखाएँ एक-दूसरे से बहुत दूर होती हैं। | समांतर रेखाओं के बीच की दूरी कुछ भी हो सकती है, बस वे मिलती नहीं। |
| संगत कोण हमेशा बराबर होते हैं। | संगत कोण तब बराबर होते हैं जब रेखाएँ समांतर हों। |
| तिर्यक रेखा हमेशा लम्बवत होती है। | तिर्यक रेखा किसी भी कोण पर दो रेखाओं को काट सकती है। |
अध्याय सारांश
एक बिन्दु पर मिलने वाली रेखाएँ। 4 कोण बनते हैं। रैखिक युग्म = 180°। शीर्षाभिमुख कोण = बराबर।
90° पर प्रतिच्छेद करने वाली रेखाएँ। सभी चारों कोण = 90°। चिह्न: l ⊥ m
एक ही तल पर, कभी न मिलने वाली रेखाएँ। चिह्न: l ∥ m. तीर के चिह्न से दर्शाते हैं।
दो रेखाओं को काटने वाली रेखा। दो प्रतिच्छेद बिन्दु → 8 कोण → अधिकतम 4 भिन्न माप।
समांतर रेखाओं में: संगत कोण = बराबर। यदि संगत कोण बराबर हों → रेखाएँ समांतर।
समांतर रेखाओं में: एकांतर कोण = बराबर। एक ही ओर के अत: कोणों का योग = 180°।
परीक्षा प्रश्न एवं उत्तर
उत्तर: जब दो रेखाएँ प्रतिच्छेद करती हैं, तो बनने वाले आमने-सामने के कोण शीर्षाभिमुख कोण कहलाते हैं — ये सदा बराबर होते हैं।
यदि ∠a = 75° हो, तो:
• ∠b = 180° – 75° = 105° (∠a और ∠b रैखिक युग्म हैं)
• ∠c = ∠a = 75° (शीर्षाभिमुख कोण)
• ∠d = ∠b = 105° (शीर्षाभिमुख कोण)
उत्तर: रेखाओं का वह युग्म जो एक ही तल पर हो और कभी भी एक-दूसरे से न मिले — चाहे दोनों दिशाओं में कितना भी बढ़ा दें — समांतर रेखाएँ कहलाती हैं। संकेत: l ∥ m
उदाहरण:
1. रेलगाड़ी की पटरियाँ
2. नोटबुक की क्षैतिज लाइनें
माना संगत कोण = 65°
चूँकि रेखाएँ समांतर हैं:
• संगत कोण = 65° (दिया हुआ)
• एकांतर कोण = संगत कोण = 65°(क्योंकि एकांतर कोण = संगत कोण का शीर्षाभिमुख कोण = संगत कोण = 65°)
उत्तर:
प्रतिच्छेदी रेखाएँ: जो दो रेखाएँ एक बिन्दु पर मिलती हैं, वे प्रतिच्छेदी रेखाएँ हैं। इनके बीच कोई भी कोण हो सकता है।
लम्ब रेखाएँ: जो दो रेखाएँ एक-दूसरे को ठीक 90° के कोण पर काटती हैं, वे लम्ब रेखाएँ हैं।
अंतर: सभी लम्ब रेखाएँ प्रतिच्छेदी होती हैं, लेकिन सभी प्रतिच्छेदी रेखाएँ लम्ब नहीं होती।
उत्तर: जब एक तिर्यक रेखा दो समांतर रेखाओं को काटती है, तो तिर्यक रेखा के एक ही ओर बने अत: कोणों का योग सदैव 180° होता है।
उदाहरण: यदि l ∥ m और तिर्यक रेखा t उन्हें काटे:
• ∠3 = 50° हो, तो ∠6 = 180° – 50° = 130°
• ∠3 + ∠6 = 50° + 130° = 180° ✓
ये ∠3 और ∠6 को “सह-अंत: कोण” (Co-interior Angles) भी कहते हैं।
कभी-कभी जब रेखाओं के बीच में छोटी-छोटी तिरछी रेखाएँ हों, तो समांतर रेखाएँ भी तिरछी दिखने लगती हैं — इसे ज़ोलनर का भ्रम (Zöllner Illusion) कहते हैं। यह हमारे दिमाग की एक मज़ेदार चाल है! पियानो की चाबियाँ इसी भ्रम का उदाहरण हैं।



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