जितना बाँटेंगे उतना बढ़ेगा
परिचय
📌 इस अध्याय का नाम है — “जितना बाँटेंगे उतना बढ़ेगा”, जो वितरण गुणधर्म (Distributive Property) की ओर इशारा करता है।
बीजगणित में हम अक्षर प्रतीकों का उपयोग करके गुणन के विभिन्न प्रतिरूपों का अन्वेषण करते हैं। यह अध्याय हमें सिखाता है कि कैसे वितरण गुणधर्म का उपयोग करके बड़ी संख्याओं को आसानी से गुणा किया जा सकता है।
इस अध्याय में हम तीन महत्वपूर्ण सर्वसमिकाएँ सीखेंगे जो परीक्षा में बहुत काम आती हैं। साथ ही 11, 101, 1001 जैसी संख्याओं से शीघ्र गुणन करने की मजेदार विधियाँ भी जानेंगे।
🎯 यह अध्याय बीजगणितीय व्यंजकों को सरल बनाने और मानसिक गणना कौशल को बढ़ाने में बहुत सहायक है।
मुख्य अवधारणाएँ
वितरण गुणधर्म (Distributive Property)
गुणनफलों में वृद्धि के प्रतिरूप
सर्वसमिका 1: (a+m)(b+n) = ab+mb+an+mn
सर्वसमिका 1A: (a+b)² = a²+2ab+b²
सर्वसमिका 1B: (a−b)² = a²−2ab+b²
सर्वसमिका 1C: (a+b)(a−b) = a²−b²
11, 101, 1001 से शीघ्र गुणन विधि
बीजीय व्यंजकों का विस्तार
समान पद और सरलीकरण
त्रुटि पहचान और सुधार
विस्तृत नोट्स
⚙️ 6.1 गुणन के कुछ गुणधर्म
🔹 वितरण गुणधर्म (Distributive Property)
यदि a, b, c तीन संख्याएँ हैं, तो a(b + c) = ab + ac होता है। इसे योग पर गुणन का वितरण गुणधर्म कहते हैं।
उदाहरण: 23 × (27 + 1) = 23 × 27 + 23
वितरण गुणधर्म का ज्यामितीय चित्र
🔹 गुणनफलों में वृद्धि
यदि b में 1 की वृद्धि की जाए: a(b+1) = ab + a → गुणनफल में a की वृद्धि होती है।
यदि a और b दोनों में 1 की वृद्धि की जाए: (a+1)(b+1) = ab + (b+a+1) → गुणनफल में (a+b+1) की वृद्धि होती है।
यदि a में 1 की वृद्धि और b में 1 की कमी की जाए: (a+1)(b−1) = ab + (b−a−1)
🏆 सर्वसमिका 1 — मुख्य सर्वसमिका
(a+m)(b+n) का ज्यामितीय प्रतिनिधित्व
दो गणितीय व्यंजकों की समानता व्यक्त करने वाले कथनों को सर्वसमिकाएँ (Identities) कहते हैं। ये सभी संख्याओं के लिए सत्य होती हैं।
📐 6.2 वितरण गुणधर्म की विशेष स्थितियाँ
🔹 सर्वसमिका 1A — दो संख्याओं के योग का वर्ग
(a+b)² = a² + 2ab + b² का ज्यामितीय प्रमाण
65² = (60+5)² = 60² + 2×60×5 + 5² = 3600 + 600 + 25 = 4225
🔹 सर्वसमिका 1B — दो संख्याओं के अंतर का वर्ग
55² = (60−5)² = 60² − 2×60×5 + 5² = 3600 − 600 + 25 = 3025
(a−b)² = (a + (−b))² → सर्वसमिका 1A में b की जगह (−b) लिख दें।
🔹 सर्वसमिका 1C — वर्गों का अंतर
98 × 102 = (100−2)(100+2) = 100² − 2² = 10000 − 4 = 9996
9×9 − 1×1 = 10×8 → यह सर्वसमिका 1C पर आधारित है: a² − b² = (a+b)(a−b)
⚡ वितरण गुणधर्म से शीघ्र गुणन
🔹 11 से गुणन
किसी भी संख्या को 11 से गुणा करने की शीघ्र विधि:
4 अंकीय संख्या dcba × 11 का परिणाम:
अंतिम अंक = a, फिर (a+b), फिर (b+c), फिर (c+d), पहला अंक = d
3874 × 11 = 42614 (चरणबद्ध तरीके से पड़ोसी अंकों को जोड़ें)
3874 × 11 = 42614 (पड़ोसी अंक जोड़ते हैं, carry ध्यान में रखते हैं)
🔹 101 से गुणन
dcba × 101 = dcba × (100+1) = dcba × 100 + dcba
परिणाम में: d, c, (b+d), (a+c), b, a → 3874 × 101 = 391274
उदाहरण (हल सहित)
उदाहरण 1 — व्यंजक का विस्तार
प्रश्न: 3a/2 × (a − b + 1/5) को विस्तारित रूप में लिखिए।
उदाहरण 2 — (a+b)² का विस्तार
प्रश्न: (a + b)(a + b) का विस्तार कीजिए।
उदाहरण 3 — 65² की गणना
प्रश्न: सर्वसमिका 1A का उपयोग करके 65² ज्ञात कीजिए।
उदाहरण 4 — 98 × 102 की गणना
प्रश्न: सर्वसमिका 1C का उपयोग करके 98 × 102 ज्ञात कीजिए।
उदाहरण 5 — 197² की गणना (श्रीधराचार्य विधि)
प्रश्न: 197² ज्ञात कीजिए।
उदाहरण 6 — (6x+5)² का विस्तार
प्रश्न: (6x + 5)² का विस्तारित रूप लिखिए।
उदाहरण 7 — (a+b)(a²+2ab+b²) का विस्तार
प्रश्न: (a+b)(a² + 2ab + b²) का विस्तार कीजिए।
याद रखें — मुख्य बिंदु
🌟 ज़रूर याद करें!
- वितरण गुणधर्म: a(b+c) = ab + ac — यह गुणन और योग के बीच संबंध दर्शाता है
- सर्वसमिका 1A: (a+b)² = a² + 2ab + b² — योग का वर्ग
- सर्वसमिका 1B: (a−b)² = a² − 2ab + b² — अंतर का वर्ग
- सर्वसमिका 1C: (a+b)(a−b) = a² − b² — वर्गों का अंतर
- मुख्य सर्वसमिका: (a+m)(b+n) = ab + mb + an + mn
- 11 से गुणन: पड़ोसी अंकों को जोड़ें, पहला और आखिरी अंक वही रहता है
- समान पद वे होते हैं जिनकी चर संख्याएँ समान हों — केवल उन्हें ही जोड़ा जा सकता है
- 2(a²+b²) = (a+b)² + (a−b)² — एक महत्वपूर्ण परिणाम
सूत्र सूची
| सर्वसमिका | सूत्र | उदाहरण |
|---|---|---|
| वितरण गुणधर्म | a(b+c) = ab + ac | 3(4+5) = 12+15 = 27 |
| सर्वसमिका 1 | (a+m)(b+n) = ab+mb+an+mn | (2+3)(4+5) = 8+12+10+15 = 45 |
| सर्वसमिका 1A | (a+b)² = a²+2ab+b² | (3+4)² = 9+24+16 = 49 |
| सर्वसमिका 1B | (a−b)² = a²−2ab+b² | (7−3)² = 49−42+9 = 16 |
| सर्वसमिका 1C | (a+b)(a−b) = a²−b² | (5+3)(5−3) = 25−9 = 16 |
| 11 से गुणन | पड़ोसी अंक जोड़ें | 3874 × 11 = 42614 |
| वर्गों का योग | 2(a²+b²) = (a+b)²+(a−b)² | 2(9+16) = (3+4)²+(3−4)² |
| श्रीधराचार्य विधि | a² = (a+b)(a−b) + b² | 31² = 32×30+1 = 961 |
अभ्यास प्रश्न
(a+b)² का सही विस्तार कौन-सा है?
(a+b)(a−b) = ?
54² = (50+4)² = 50² + _____ + 4² = _____ (उत्तर: 400, 2916)
3874 × 11 = _____ (उत्तर: 42614)
सर्वसमिका 1A का उपयोग करके 104² का मान ज्ञात कीजिए।
निम्नलिखित का विस्तार कीजिए: (3+u)(v−3)
यदि (a+b)² = 100 और ab = 20, तो a²+b² = ?
(a−b)² = (a+b)² − _____ (उत्तर: 4ab)
सर्वसमिका 1C का उपयोग करके 45 × 55 ज्ञात कीजिए।
(a−b)² और (b−a)² में से कौन-सा बड़ा है? कारण सहित बताइए।
परीक्षा उपयोगी प्रश्न
निम्नलिखित का विस्तार कीजिए: (5m+6n)²
सर्वसमिका का उपयोग करके 397 × 403 ज्ञात कीजिए।
सिद्ध कीजिए: 2(a²+b²) = (a+b)² + (a−b)²
सत्यापित कीजिए: (m+n)² − 4mn = (m−n)²
(a+b)(a²+2ab+b²) = a³+3a²b+3ab²+b³ सिद्ध कीजिए।
शब्द संग्रह (Glossary)
वितरण गुणधर्म का स्पष्ट कथन सर्वप्रथम ब्रह्मगुप्त ने अपनी रचना ब्राह्मस्फुटसिद्धांत (628 सामान्य संवत्) में दिया था। उन्होंने इसे ‘खंड गुणनम’ (भागों से गुणा) कहा था। श्रीधराचार्य (750 सामान्य संवत्) और भास्कराचार्य (लीलावती, 1150 सामान्य संवत्) ने भी इन विधियों पर विस्तार से चर्चा की। यूनानी गणितज्ञ यूक्लिड ने ज्यामितीय रूप में और आर्यभट्ट ने बीजगणितीय रूप में इसका उपयोग किया।

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