Short Questions
1. चंद्रमा की कलाएँ किस कारण दिखाई देती हैं?
उत्तर: चंद्रमा की कलाएँ उसके द्वारा पृथ्वी की परिक्रमा करने के कारण दिखाई देती हैं।
2. पूर्णिमा किसे कहते हैं?
उत्तर: जिस दिन चंद्रमा पूर्ण गोल दिखाई देता है उसे पूर्णिमा कहते हैं।
3. अमावस्या के दिन चंद्रमा क्यों नहीं दिखाई देता?
उत्तर: अमावस्या के दिन चंद्रमा का अदीप्त भाग पृथ्वी की ओर होता है।
4. चंद्रमा का एक पूरा चक्र कितने दिनों में पूरा होता है?
उत्तर: चंद्रमा का एक पूरा चक्र लगभग 29.5 दिनों में पूरा होता है।
5. कृष्ण पक्ष किसे कहते हैं?
उत्तर: जब चंद्रमा का चमकीला भाग घटता है उसे कृष्ण पक्ष कहते हैं।
6. शुक्ल पक्ष किसे कहते हैं?
उत्तर: जब चंद्रमा का चमकीला भाग बढ़ता है उसे शुक्ल पक्ष कहते हैं।
7. सौर वर्ष कितने दिनों का होता है?
उत्तर: सौर वर्ष लगभग 365 दिन और 6 घंटे का होता है।
8. अधिवर्ष में फरवरी में कितने दिन होते हैं?
उत्तर: अधिवर्ष में फरवरी में 29 दिन होते हैं।
9. कृत्रिम उपग्रह किसके चारों ओर घूमते हैं?
उत्तर: कृत्रिम उपग्रह पृथ्वी के चारों ओर घूमते हैं।
10. दिन और रात किस कारण होते हैं?
उत्तर: दिन और रात पृथ्वी के घूर्णन के कारण होते हैं।
11. चंद्र कालदर्शक किस पर आधारित होता है?
उत्तर: चंद्र कालदर्शक चंद्रमा की कलाओं पर आधारित होता है।
12. सौर कालदर्शक किस पर आधारित होता है?
उत्तर: सौर कालदर्शक पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर परिक्रमा पर आधारित होता है।
13. उत्तरायण किसे कहते हैं?
उत्तर: सूर्य की उत्तर दिशा की ओर दिखाई देने वाली गति को उत्तरायण कहते हैं।
14. दक्षिणायन किसे कहते हैं?
उत्तर: सूर्य की दक्षिण दिशा की ओर दिखाई देने वाली गति को दक्षिणायन कहते हैं।
15. नवचंद्र को और किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर: नवचंद्र को अमावस्या भी कहते हैं।
Long Questions
1. चंद्रमा का आकार प्रतिदिन बदलता हुआ क्यों दिखाई देता है?
उत्तर: चंद्रमा स्वयं प्रकाश नहीं देता बल्कि सूर्य का प्रकाश परावर्तित करता है। जब वह पृथ्वी की परिक्रमा करता है तो पृथ्वी से उसका अलग-अलग प्रकाशित भाग दिखाई देता है। इसी कारण हमें प्रतिदिन उसकी विभिन्न कलाएँ दिखाई देती हैं।
2. चंद्र कालदर्शक और सौर कालदर्शक में क्या अंतर है?
उत्तर: चंद्र कालदर्शक चंद्रमा की कलाओं पर आधारित होता है और इसका एक वर्ष लगभग 354 दिनों का होता है। सौर कालदर्शक पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर परिक्रमा पर आधारित होता है और इसमें 365 दिन होते हैं। दोनों कालदर्शकों का उपयोग समय और ऋतुओं के निर्धारण में किया जाता है।
3. अधिवर्ष की आवश्यकता क्यों पड़ती है?
उत्तर: पृथ्वी को सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करने में 365 दिन और लगभग 6 घंटे लगते हैं। ये अतिरिक्त घंटे चार वर्षों में मिलकर एक दिन के बराबर हो जाते हैं। इसलिए हर चार वर्ष बाद फरवरी में एक अतिरिक्त दिन जोड़कर अधिवर्ष बनाया जाता है।
4. चंद्रमा की कलाओं का समय मापन में क्या महत्त्व है?
उत्तर: चंद्रमा की कलाएँ एक नियमित चक्र में लगभग एक माह में पूरी होती हैं। प्राचीन लोगों ने इस चक्र का उपयोग मास और वर्ष की गणना के लिए किया। इसी आधार पर चंद्र कालदर्शक बनाए गए।
5. दिन और रात का निर्माण कैसे होता है?
उत्तर: पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमती रहती है। जब पृथ्वी का कोई भाग सूर्य की ओर होता है तो वहाँ दिन होता है। जब वही भाग सूर्य से विपरीत दिशा में होता है तो वहाँ रात होती है।
6. कृत्रिम उपग्रहों का क्या उपयोग है?
उत्तर: कृत्रिम उपग्रह पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं और हमें संचार, मौसम पूर्वानुमान तथा आपदा प्रबंधन में सहायता देते हैं। ये वैज्ञानिक अनुसंधान और मानचित्र बनाने में भी उपयोगी हैं। इस प्रकार ये मानव जीवन को सरल और सुरक्षित बनाते हैं।
7. उत्तरायण और दक्षिणायन क्या हैं?
उत्तर: सूर्य वर्ष में कुछ समय उत्तर दिशा की ओर और कुछ समय दक्षिण दिशा की ओर जाता हुआ प्रतीत होता है। सूर्य की उत्तर दिशा की ओर दिखाई देने वाली गति को उत्तरायण कहते हैं। दक्षिण दिशा की ओर दिखाई देने वाली गति को दक्षिणायन कहते हैं।
8. चंद्र-सौर कालदर्शक क्यों बनाए गए?
उत्तर: चंद्र वर्ष और सौर वर्ष में लगभग 11 दिनों का अंतर होता है। इस अंतर को संतुलित करने के लिए कुछ वर्षों बाद एक अतिरिक्त माह जोड़ा जाता है। इस प्रकार चंद्र और सौर दोनों चक्रों को मिलाकर चंद्र-सौर कालदर्शक बनाए गए।
9. पूर्णिमा और अमावस्या में क्या अंतर है?
उत्तर: पूर्णिमा के दिन चंद्रमा का पूरा प्रकाशित भाग पृथ्वी की ओर होता है इसलिए वह पूर्ण गोल दिखाई देता है। अमावस्या के दिन उसका अदीप्त भाग पृथ्वी की ओर होता है इसलिए वह दिखाई नहीं देता। ये दोनों चंद्रमा की मुख्य कलाएँ हैं।
10. पर्वों का संबंध खगोलीय घटनाओं से कैसे है?
उत्तर: अनेक भारतीय पर्व चंद्रमा की कलाओं या सूर्य की स्थिति पर आधारित होते हैं। जैसे कुछ पर्व पूर्णिमा या अमावस्या के दिन मनाए जाते हैं। इस प्रकार हमारे त्योहार आकाशीय घटनाओं से जुड़े होते हैं।

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