1. भूमिका (प्रस्तावना)
हम अपने आसपास विभिन्न प्रकार के दर्पण देखते हैं। सामान्यतः हम समतल दर्पण का उपयोग करते हैं जिसमें प्रतिबिंब सीधा और वस्तु के बराबर आकार का दिखाई देता है।
लेकिन कुछ दर्पण ऐसे होते हैं जिनमें प्रतिबिंब बड़ा, छोटा या उल्टा भी दिखाई दे सकता है। ये दर्पण वक्रित दर्पण होते हैं जिन्हें गोलीय दर्पण कहा जाता है।
विज्ञान केंद्र में मीना ने ऐसे ही वक्रित दर्पण देखे जिनमें उसका चेहरा कभी बड़ा, कभी छोटा और कभी उल्टा दिखाई दे रहा था। बाद में उसे बताया गया कि ये समतल दर्पण नहीं बल्कि गोलीय दर्पण हैं।
2. गोलीय दर्पण क्या हैं?
ऐसे दर्पण जिनका परावर्तक पृष्ठ गोलाकार (वक्रित) होता है उन्हें गोलीय दर्पण कहते हैं।
इनकी आकृति किसी खोखले गोले के एक भाग जैसी होती है।
गोलीय दर्पण दो प्रकार के होते हैं:
- अवतल दर्पण (Concave Mirror)
- उत्तल दर्पण (Convex Mirror)
3. अवतल दर्पण
जिस गोलीय दर्पण का परावर्तक पृष्ठ अंदर की ओर वक्रित होता है उसे अवतल दर्पण कहते हैं।
निर्माण
यदि काँच के वक्रित पृष्ठ के बाहरी भाग पर एल्यूमिनियम जैसी परावर्तक परत चढ़ाई जाए तो उसका भीतरी पृष्ठ परावर्तक बन जाता है और वह अवतल दर्पण कहलाता है।
4. उत्तल दर्पण
जिस गोलीय दर्पण का परावर्तक पृष्ठ बाहर की ओर वक्रित होता है उसे उत्तल दर्पण कहते हैं।
निर्माण
यदि काँच के अंदर वाले पृष्ठ पर परावर्तक परत चढ़ाई जाए तो बाहर की ओर उभरा पृष्ठ परावर्तक बन जाता है और वह उत्तल दर्पण कहलाता है।
5. अवतल और उत्तल दर्पण की पहचान
दर्पण को पार्श्व से देखने पर पता लगाया जा सकता है कि:
- पृष्ठ अंदर की ओर वक्रित है → अवतल दर्पण
- पृष्ठ बाहर की ओर उभरा है → उत्तल दर्पण
6. गोलीय दर्पणों द्वारा बने प्रतिबिंब के गुण
जब वस्तु को अवतल और उत्तल दर्पण के सामने रखा जाता है तो उनके प्रतिबिंब के गुण अलग-अलग होते हैं।
अवतल दर्पण के प्रतिबिंब
जब वस्तु दर्पण के पास होती है:
- प्रतिबिंब सीधा बनता है
- आकार में बड़ा (आवर्धित) होता है
जब वस्तु को दूर ले जाते हैं:
- प्रतिबिंब उल्टा हो जाता है
- प्रारंभ में बड़ा
- बाद में छोटा हो जाता है
उत्तल दर्पण के प्रतिबिंब
उत्तल दर्पण में:
- प्रतिबिंब सदैव सीधा होता है
- आकार में छोटा (लघुकृत) होता है
जब वस्तु दूर जाती है:
- प्रतिबिंब और छोटा हो जाता है।
7. समतल दर्पण और गोलीय दर्पण का अंतर
| दर्पण | प्रतिबिंब |
|---|---|
| समतल दर्पण | सीधा और वस्तु के बराबर |
| अवतल दर्पण | बड़ा, छोटा या उल्टा हो सकता है |
| उत्तल दर्पण | हमेशा छोटा और सीधा |
तीनों दर्पणों में पार्श्व परिवर्तन (left-right change) होता है।
8. अवतल दर्पण के उपयोग
अवतल दर्पण का उपयोग उन स्थानों पर किया जाता है जहाँ बड़ा प्रतिबिंब या प्रकाश का संकेंद्रण चाहिए।
मुख्य उपयोग:
- टॉर्च लाइट
- कार और स्कूटर की हेडलाइट
- दंत चिकित्सक के दर्पण
- परावर्तक दूरदर्शक यंत्र
9. उत्तल दर्पण के उपयोग
उत्तल दर्पण का उपयोग वहाँ किया जाता है जहाँ बड़ा क्षेत्र देखना आवश्यक हो।
मुख्य उपयोग:
- वाहनों के पार्श्व-दृश्य दर्पण
- सड़क के मोड़ और चौराहे
- बड़े गोदाम और दुकानों में निगरानी
उत्तल दर्पण विस्तृत क्षेत्र दिखाते हैं, इसलिए दुर्घटना से बचाव होता है।
10. परावर्तन के नियम
जब प्रकाश किसी सतह से टकराकर वापस लौटता है तो इसे परावर्तन कहते हैं।
महत्वपूर्ण शब्द
आपतित किरण – दर्पण पर पड़ने वाली किरण
परावर्तित किरण – वापस लौटने वाली किरण
अभिलंब – सतह पर खींची गई 90° रेखा
आपतन कोण – आपतित किरण और अभिलंब का कोण
परावर्तन कोण – परावर्तित किरण और अभिलंब का कोण
11. परावर्तन के दो नियम
नियम 1
आपतन कोण = परावर्तन कोण
नियम 2
आपतित किरण, अभिलंब और परावर्तित किरण एक ही तल में होते हैं।
ये नियम सभी प्रकार के दर्पणों के लिए सही हैं।
12. समांतर प्रकाश किरणों का व्यवहार
जब कई समांतर प्रकाश किरणें दर्पणों पर पड़ती हैं:
समतल दर्पण
परावर्तित किरणें समांतर रहती हैं।
अवतल दर्पण
किरणें एक बिंदु पर मिल जाती हैं (अभिसरण)
उत्तल दर्पण
किरणें फैल जाती हैं (अपसरण)
13. अवतल दर्पण द्वारा सूर्य के प्रकाश का संकेंद्रण
अवतल दर्पण सूर्य के प्रकाश को एक छोटे बिंदु पर केंद्रित कर सकता है।
इससे:
- अधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है
- कागज जल सकता है
14. सौर संकेंद्रक
दर्पण या लेंस से सूर्य के प्रकाश को एक स्थान पर केंद्रित करने वाली युक्ति को सौर संकेंद्रक कहते हैं।
उपयोग:
- पानी गर्म करना
- भाप बनाना
- बिजली बनाना
- बड़े पैमाने पर भोजन पकाना
- सौर भट्टी में धातु पिघलाना
15. लेंस क्या है?
लेंस पारदर्शी पदार्थ (काँच या प्लास्टिक) का बना होता है जिसके पृष्ठ वक्रित होते हैं।
दर्पण से अंतर:
- दर्पण प्रकाश को परावर्तित करते हैं
- लेंस प्रकाश को अपने पार जाने देते हैं
16. लेंस के प्रकार
लेंस दो प्रकार के होते हैं:
- उत्तल लेंस
- अवतल लेंस
17. उत्तल लेंस
जिस लेंस का बीच का भाग मोटा और किनारे पतले होते हैं उसे उत्तल लेंस कहते हैं।
गुण
- पास की वस्तु सीधी और बड़ी दिखती है
- दूरी बढ़ने पर वस्तु उल्टी दिखती है
- पहले बड़ी , बाद में छोटी
18. अवतल लेंस
जिस लेंस का बीच पतला और किनारे मोटे होते हैं उसे अवतल लेंस कहते हैं।
गुण
- प्रतिबिंब सदैव छोटा होता है
- दूरी बढ़ने पर और छोटा हो जाता है
19. लेंस द्वारा प्रकाश किरणों का व्यवहार
उत्तल लेंस
प्रकाश किरणों को एक बिंदु पर मिलाता है
इसे अभिसारी लेंस कहते हैं।
अवतल लेंस
प्रकाश किरणों को फैलाता है
इसे अपसारी लेंस कहते हैं।
20. उत्तल लेंस द्वारा सूर्य का प्रकाश संकेंद्रित करना
उत्तल लेंस से भी सूर्य का प्रकाश एक बिंदु पर केंद्रित किया जा सकता है।
इससे कागज जल सकता है।
21. लेंस के उपयोग
लेंस का उपयोग अनेक यंत्रों में होता है:
- ऐनक
- कैमरा
- दूरदर्शक यंत्र
- सूक्ष्मदर्शी
यहाँ तक कि हमारी आँख में भी एक उत्तल लेंस होता है जो अपनी आकृति बदल सकता है।

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