1. आकाशीय परिघटनाएँ
आकाश में होने वाली प्राकृतिक घटनाओं को आकाशीय परिघटनाएँ कहते हैं।
उदाहरण
- सूर्य का उदय और अस्त होना
- चंद्रमा की कलाएँ बदलना
- ग्रहण
- ऋतुओं का परिवर्तन
मनुष्य ने इन प्राकृतिक चक्रों का उपयोग समय मापने और कालदर्शक (कैलेंडर) बनाने के लिए किया।
2. चंद्रमा का दिखाई देना
कभी-कभी चंद्रमा दिन के समय भी दिखाई देता है।
यह इसलिए होता है क्योंकि चंद्रमा का उदय हमेशा सूर्यास्त के बाद ही नहीं होता।
चंद्रमा प्रतिदिन लगभग 50 मिनट देर से उदित होता है।
3. चंद्रमा क्यों चमकता है
- चंद्रमा स्वयं प्रकाश नहीं देता।
- चंद्रमा सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करता है।
चंद्रमा का केवल वह भाग चमकता है जिस पर सूर्य का प्रकाश पड़ता है।
4. चंद्रमा के रूप में परिवर्तन क्यों होता है
चंद्रमा का आकार वास्तव में नहीं बदलता।
परंतु पृथ्वी से हमें उसका अलग-अलग भाग दिखाई देता है क्योंकि:
- चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर घूमता है
- सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की स्थिति बदलती रहती है
- हमें केवल प्रकाशित भाग दिखाई देता है
5. चंद्रमा की कलाएँ
पृथ्वी से दिखाई देने वाले चंद्रमा के विभिन्न रूपों को चंद्रमा की कलाएँ कहते हैं।
मुख्य कलाएँ
- अमावस्या
- बालचंद्र (क्रीसेंट)
- अर्धचंद्र
- अर्धाधिक (गिब्बस)
- पूर्णिमा
6. पूर्णिमा
जिस दिन चंद्रमा पूरा गोल और चमकीला दिखाई देता है उसे पूर्णिमा कहते हैं।
इस दिन चंद्रमा सूर्य के लगभग विपरीत दिशा में होता है।
7. अमावस्या
जिस दिन चंद्रमा दिखाई नहीं देता उसे अमावस्या कहते हैं।
उस दिन चंद्रमा का अंधेरा भाग पृथ्वी की ओर होता है।
8. चंद्रमा का क्षीयमाण काल
पूर्णिमा के बाद चंद्रमा का चमकीला भाग धीरे-धीरे कम होता है।
इसे क्षीयमाण काल कहते हैं।
भारत में इसे कृष्ण पक्ष कहा जाता है।
9. चंद्रमा का वर्धमान काल
अमावस्या के बाद चंद्रमा का चमकीला भाग धीरे-धीरे बढ़ता है।
इसे वर्धमान काल कहते हैं।
भारत में इसे शुक्ल पक्ष कहा जाता है।
10. चंद्रमा का चक्र
एक पूर्णिमा से अगली पूर्णिमा तक चंद्रमा के रूप बदलने में लगभग 29.5 दिन लगते हैं।
इसे एक चंद्र मास कहा जाता है।
11. चंद्रमा की स्थिति में परिवर्तन
यदि हम रोज एक ही समय पर चंद्रमा देखें तो वह आकाश में अलग-अलग स्थान पर दिखाई देता है।
कारण
- पृथ्वी का घूर्णन
- चंद्रमा की परिक्रमा
इस कारण चंद्रमा अगले दिन लगभग 50 मिनट बाद उसी स्थान पर दिखाई देता है।
12. चंद्रमा की कलाओं का सही कारण
चंद्रमा की कलाएँ इसलिए दिखाई देती हैं क्योंकि:
- चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर परिक्रमा करता है
- सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की स्थिति बदलती रहती है
- हमें केवल प्रकाशित भाग दिखाई देता है
13. सामान्य भ्रांति
कुछ लोग सोचते हैं कि चंद्रमा की कलाएँ पृथ्वी की छाया के कारण होती हैं।
यह गलत है।
पृथ्वी की छाया पड़ने पर चंद्र ग्रहण होता है।
14. चंद्र ग्रहण
जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है तब पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है।
इसे चंद्र ग्रहण कहते हैं।
यह केवल पूर्णिमा के दिन हो सकता है।
15. सूर्य ग्रहण
जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है तो सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक नहीं पहुँचता।
इसे सूर्य ग्रहण कहते हैं।
यह केवल अमावस्या के दिन हो सकता है।
16. समय का निर्धारण
समय मापन प्राकृतिक चक्रों पर आधारित है।
मुख्य चक्र
- दिन-रात
- चंद्रमा की कलाएँ
- ऋतुओं का परिवर्तन
17. दिन का निर्धारण
पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमती है।
एक घूर्णन में लगभग 24 घंटे लगते हैं।
इसी को एक दिन कहते हैं।
18. सूर्य की उच्चतम स्थिति
जब सूर्य आकाश में सबसे ऊपर होता है तब किसी वस्तु की छाया सबसे छोटी होती है।
इससे दिन का समय पता लगाया जा सकता है।
19. मास (Month)
चंद्रमा की कलाओं के एक चक्र में लगभग 29.5 दिन लगते हैं।
इसी से महीने की अवधारणा बनी।
20. वर्ष
पृथ्वी सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करती है।
एक परिक्रमा में लगभग 365 दिन 6 घंटे लगते हैं।
इसे एक वर्ष कहते हैं।
21. चंद्र कालदर्शक
प्राचीन काल में समय मापन के लिए चंद्रमा की कलाओं का उपयोग किया जाता था।
विशेषताएँ
- 1 चंद्र मास ≈ 29.5 दिन
- 12 चंद्र मास ≈ 354 दिन
22. सौर कालदर्शक
कृषि और ऋतुओं के अनुसार समय को व्यवस्थित करने के लिए सौर कालदर्शक बनाया गया।
विशेषताएँ
- 1 वर्ष = 365 दिन
- कुछ महीने 30 दिन
- कुछ महीने 31 दिन
- फरवरी = 28 दिन
23. अधिवर्ष (Leap Year)
पृथ्वी की परिक्रमा में अतिरिक्त समय (लगभग 6 घंटे) बच जाता है।
4 वर्षों में यह समय लगभग 1 दिन हो जाता है।
इसलिए हर 4 वर्ष में फरवरी में 1 दिन जोड़ा जाता है।
फरवरी = 29 दिन
24. उत्तरायण और दक्षिणायन
सूर्य की उत्तर दिशा की ओर दिखाई देने वाली गति ➡ उत्तरायण
सूर्य की दक्षिण दिशा की ओर दिखाई देने वाली गति ➡ दक्षिणायन
25. चंद्र-सौर कालदर्शक
यह कालदर्शक चंद्रमा और सूर्य दोनों के चक्रों पर आधारित होता है।
विशेषताएँ
- 12 चंद्र महीने = 354 दिन
- सौर वर्ष = 365 दिन
अंतर को ठीक करने के लिए कुछ वर्षों बाद अधिक मास जोड़ा जाता है।
26. भारतीय महीनों के नाम
चंद्र-सौर कालदर्शक में महीनों के नाम:
- चैत्र
- वैशाख
- ज्येष्ठ
- आषाढ़
- श्रावण
- भाद्रपद
- आश्विन
- कार्तिक
- मार्गशीर्ष
- पौष
- माघ
- फाल्गुन
27. अमांत और पूर्णिमांत कालदर्शक
अमांत कालदर्शक
महीना अमावस्या के बाद शुरू होता है।
पूर्णिमांत कालदर्शक
महीना पूर्णिमा के बाद शुरू होता है।
28. भारतीय राष्ट्रीय कालदर्शक
भारत सरकार ने एक राष्ट्रीय कालदर्शक अपनाया।
विशेषताएँ
- यह सौर कालदर्शक है
- वर्ष की शुरुआत 22 मार्च से होती है
- इसमें 365 दिन होते हैं
29. भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिक
मेघनाद साहा
- प्रसिद्ध खगोल भौतिकविद
- साहा समीकरण विकसित किया
विक्रम साराभाई
- भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक
30. पर्व और खगोलीय घटनाएँ
कई भारतीय पर्व चंद्रमा की कलाओं से जुड़े हैं।
उदाहरण
- दीपावली – कार्तिक अमावस्या
- होली – फाल्गुन पूर्णिमा
- बुद्ध पूर्णिमा – वैशाख पूर्णिमा
- ईद-उल-फितर – रमजान के बाद बालचंद्र दिखाई देने पर
31. कृत्रिम उपग्रह
चंद्रमा पृथ्वी का प्राकृतिक उपग्रह है।
मनुष्य द्वारा बनाए गए उपग्रहों को कृत्रिम उपग्रह कहते हैं।
32. कृत्रिम उपग्रहों के उपयोग
- संचार
- मौसम पूर्वानुमान
- आपदा प्रबंधन
- वैज्ञानिक अनुसंधान
- मानचित्र बनाना
33. इसरो के प्रमुख अंतरिक्ष अभियान
- चंद्रयान-1, 2, 3
- मंगलयान
- आदित्य L-1
- एस्ट्रोसैट
34. अंतरिक्ष कचरा
अंतरिक्ष में छोड़े गए पुराने उपग्रह और रॉकेट के टुकड़े अंतरिक्ष कचरा बन जाते हैं।
यह सक्रिय उपग्रहों के लिए खतरा बन सकता है।
35. अध्याय के मुख्य बिंदु
- चंद्रमा सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करता है।
- चंद्रमा की कलाएँ उसके परिक्रमण के कारण दिखाई देती हैं।
- चंद्रमा की कलाओं का एक चक्र लगभग 29.5 दिन का होता है।
- समय मापन प्राकृतिक चक्रों पर आधारित है।
- कालदर्शक तीन प्रकार के होते हैं –
- चंद्र कालदर्शक
- सौर कालदर्शक
- चंद्र-सौर कालदर्शक
- कृत्रिम उपग्रह मानव निर्मित होते हैं और अनेक कार्यों में सहायक होते हैं।

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