1. प्रकृति में सामंजस्य (Nature in Harmony)
प्रकृति के सभी घटक एक-दूसरे से जुड़े हुए होते हैं।
पौधे, जानवर, मनुष्य, जल, वायु, मिट्टी और तापमान सभी मिलकर एक संतुलित व्यवस्था बनाते हैं।
यदि इनमें से किसी एक में परिवर्तन होता है तो उसका प्रभाव अन्य सभी घटकों पर पड़ता है।
उदाहरण – हाथियों का गाँवों में प्रवेश
भारत के कई राज्यों जैसे:
- ओडिशा
- झारखंड
- पश्चिम बंगाल
- असम
- छत्तीसगढ़
में हाथी कभी-कभी खेतों और गाँवों में आ जाते हैं।
इसके कारण
- वनों का कटना
- जंगलों में भोजन की कमी
- जल स्रोतों का सूख जाना
- सड़क और भवन बनाने के लिए पेड़ों की कटाई
जब जंगलों में भोजन नहीं मिलता तो हाथी केले और गन्ने की खोज में खेतों में आ जाते हैं।
इससे:
- फसलों को नुकसान होता है
- मनुष्यों और जानवरों को भी खतरा हो सकता है
इस समस्या को कम करने के लिए वन्यजीव गलियारे (Wildlife Corridors) बनाए जाते हैं ताकि जंतु सुरक्षित रूप से एक जंगल से दूसरे जंगल में जा सकें।
यह उदाहरण दिखाता है कि प्रकृति के सभी घटक आपस में जुड़े होते हैं।
12.1 हम अपने परिवेश को कैसे समझते हैं
हमारे आस-पास के वातावरण को पर्यावास कहा जाता है।
पर्यावास (Habitat)
पर्यावास वह स्थान है जहाँ कोई जीव रहता है और अपनी जीवन क्रियाएँ करता है।
उदाहरण
- तालाब
- जंगल
- खेत
- पेड़
हर पर्यावास में दो प्रकार के घटक होते हैं।
1. जैविक घटक (Biotic Components)
ये जीवित घटक होते हैं।
उदाहरण
- पौधे
- जानवर
- सूक्ष्मजीव
2. अजैविक घटक (Abiotic Components)
ये निर्जीव घटक होते हैं।
उदाहरण
- जल
- वायु
- मृदा
- सूर्य का प्रकाश
- तापमान
पर्यावास में जीवों की आवश्यकताएँ
किसी जीव को जीवित रहने के लिए चाहिए:
- भोजन
- ऑक्सीजन
- आश्रय
- वृद्धि के लिए स्थान
तालाब का उदाहरण
तालाब में पाए जाने वाले जीव:
जंतु
- मछली
- मेंढक
- कछुआ
- साँप
- मच्छर
- घोंघा
- बत्तख
पादप
- शैवाल
- डायटम
- डकवीड
- कमल
ये सभी जीव एक-दूसरे और अपने पर्यावरण के साथ परस्पर क्रिया करते हैं।
12.2 प्रकृति में कौन-कौन से जीव एक साथ रहते हैं
समष्टि (Population)
एक ही प्रकार के जीवों का समूह जो एक ही स्थान पर रहते हैं समष्टि कहलाता है।
उदाहरण
तालाब में एक ही प्रकार की मछलियों का समूह।
समुदाय (Community)
एक ही पर्यावास में रहने वाली विभिन्न समष्टियों का समूह समुदाय कहलाता है।
उदाहरण
तालाब का समुदाय:
- मछलियाँ
- मेंढक
- पौधे
- सूक्ष्मजीव
परागण (Pollination)
फूलों में दो मुख्य जनन अंग होते हैं:
- पुंकेसर (नर भाग)
- अंडप (मादा भाग)
जब परागकण पुंकेसर से अंडप तक पहुँचते हैं तो इसे परागण कहते हैं।
परागण में सहायक
- हवा
- कीट
- पक्षी
- चमगादड़
परागण से फल और बीज बनते हैं।
12.3 क्या समुदाय में प्रत्येक जीव महत्वपूर्ण होता है
प्रकृति में हर जीव की एक विशेष भूमिका होती है।
तालाब का अध्ययन
दो तालाबों का अध्ययन किया गया:
तालाब ‘क’
- इसमें मछलियाँ थीं
- अधिक पुष्पीय पौधे थे
तालाब ‘ख’
- इसमें मछलियाँ नहीं थीं
- कम पौधे थे
कारण
- मछलियाँ व्याधपतंग के लार्वा खाती हैं
- इससे व्याधपतंग कम हो जाती हैं
- व्याधपतंग तितलियों और मधुमक्खियों को खाती हैं
- जब व्याधपतंग कम होंगी तो मधुमक्खियाँ और तितलियाँ बढ़ेंगी
- ये फूलों का परागण करती हैं
इससे पौधों में बीज उत्पादन बढ़ जाता है।
12.4 जीवों और परिवेश के बीच परस्पर क्रियाएँ
पर्यावास में कई प्रकार की क्रियाएँ होती हैं।
1. जैविक और अजैविक घटकों के बीच क्रिया
उदाहरण
- पौधे सूर्य के प्रकाश से भोजन बनाते हैं
- पौधे जल और मृदा से पोषक तत्व लेते हैं
- जीव ऑक्सीजन से श्वसन करते हैं
2. अजैविक घटकों के बीच क्रिया
उदाहरण
- वर्षा से मिट्टी की नमी बढ़ती है
- तापमान जल के वाष्पीकरण को प्रभावित करता है
3. जैविक घटकों के बीच क्रिया
उदाहरण
- भोजन संबंध
- परागण
- प्रतिस्पर्धा
पारितंत्र (Ecosystem)
जब जैविक और अजैविक घटक मिलकर एक व्यवस्था बनाते हैं तो उसे पारितंत्र कहते हैं।
पारितंत्र के प्रकार
1. जलीय पारितंत्र
उदाहरण
- तालाब
- झील
- नदी
2. स्थलीय पारितंत्र
उदाहरण
- वन
- खेत
- घास का मैदान
12.5 कौन किसे खाता है
जीवों के बीच भोजन संबंध होते हैं।
उत्पादक (Producers)
जो अपना भोजन स्वयं बनाते हैं।
उदाहरण
पौधे
उपभोक्ता (Consumers)
जो अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते।
शाकाहारी
केवल पौधे खाते हैं।
उदाहरण
- हिरण
- खरगोश
मांसाहारी
केवल जंतु खाते हैं।
उदाहरण
- तेंदुआ
सर्वाहारी
पौधे और जंतु दोनों खाते हैं।
उदाहरण
- कौवा
- लोमड़ी
- चूहा
आहार श्रृंखला (Food Chain)
यह बताती है कि कौन किसे खाता है।
उदाहरण
घास → टिड्डा → मेंढक → साँप → उकाब
पोषी स्तर
आहार श्रृंखला में प्रत्येक स्तर को पोषी स्तर कहते हैं।
- उत्पादक
- शाकाहारी
- छोटे मांसाहारी
- बड़े मांसाहारी
आहार जाल (Food Web)
जब कई आहार श्रृंखलाएँ आपस में जुड़ जाती हैं तो उसे आहार जाल कहते हैं।
12.6 प्रकृति में अपशिष्ट पदार्थों का क्या होता है
मृत जीवों और अपशिष्ट पदार्थों को अपघटक विघटित करते हैं।
अपघटक
उदाहरण
- कवक
- जीवाणु
ये मृत पदार्थों को सरल पदार्थों में बदल देते हैं।
अपघटन के लाभ
- मृदा में पोषक तत्व वापस आते हैं
- पौधों को पोषण मिलता है
- पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण होता है
प्रवासी पक्षी
कुछ पक्षी दूसरे देशों से भारत आते हैं।
कारण
- भोजन की खोज
- मौसम से बचाव
लाभ
- परागण में सहायता
- बीज फैलाना
- कीटों को नियंत्रित करना
12.7 एक परिवर्तन कैसे दूसरे परिवर्तन को जन्म देता है
यदि प्रकृति में एक परिवर्तन होता है तो कई अन्य परिवर्तन भी हो सकते हैं।
उदाहरण
यदि तालाब प्रदूषित हो जाए:
- पौधे मरने लगेंगे
- ऑक्सीजन कम होगी
- मछलियाँ मर जाएँगी
- कीट बढ़ जाएँगे
- किसान अधिक कीटनाशक उपयोग करेंगे
- पर्यावरण और प्रदूषित होगा
12.8 पारस्परिक क्रियाएँ पारितंत्र का संतुलन कैसे बनाए रखती हैं
जीव भोजन, जल, स्थान और प्रकाश के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं।
यह प्रतिस्पर्धा:
- जीवों की संख्या नियंत्रित करती है
- पारितंत्र का संतुलन बनाए रखती है
जीवों के बीच संबंध
सहोपकारिता (Mutualism)
दोनों जीवों को लाभ होता है।
उदाहरण
मधुमक्खी और फूल
सहभोजिता (Commensalism)
एक को लाभ होता है दूसरे पर कोई प्रभाव नहीं।
उदाहरण
पेड़ों पर उगने वाले ऑर्किड
परजीविता (Parasitism)
एक को लाभ होता है और दूसरे को हानि।
उदाहरण
कुत्ते के शरीर पर किलनी
वैज्ञानिक परिचय
ए. जे. टी. जॉनसिंह एक प्रसिद्ध भारतीय वन्यजीव वैज्ञानिक थे।
उन्होंने यह अध्ययन किया कि:
- बाघ और तेंदुआ जैसे परभक्षी
- हिरण और जंगली सूअर जैसे शिकार पर निर्भर रहते हैं।
उन्होंने भारत में वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा दिया।
12.9 पारितंत्र के लाभ
पारितंत्र मनुष्यों को कई लाभ देता है।
लाभ
- स्वच्छ वायु
- भोजन
- औषधियाँ
- लकड़ी
- जल
- मनोरंजन स्थल
सुंदरबन का उदाहरण
सुंदरबन विश्व का सबसे बड़ा मैंग्रोव वन है।
यह स्थित है:
- भारत और बांग्लादेश के बीच
- गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों के संगम पर
इसके लाभ
- चक्रवात और बाढ़ से सुरक्षा
- कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषण
- ऑक्सीजन उत्पादन
इसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (1987) घोषित किया गया।
पारितंत्र को खतरे
- वनों की कटाई
- प्रदूषण
- प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक उपयोग
- अवैध शिकार
- आक्रामक प्रजातियाँ
संरक्षित क्षेत्र
वन्यजीवों की रक्षा के लिए बनाए गए क्षेत्र।
उदाहरण
- राष्ट्रीय उद्यान
- वन्यजीव अभयारण्य
- जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र
12.9.1 मानव निर्मित पारितंत्र
मनुष्य भी पारितंत्र बनाते हैं।
उदाहरण
- खेत
- मछली तालाब
- उद्यान
इनकी देखभाल मनुष्यों को करनी पड़ती है।
12.9.2 खेतों के लिए स्वस्थ पारितंत्र
कृषि भारत की मुख्य आजीविका है।
1950–1965 के बीच भारत में खाद्य संकट था।
इसके बाद हरित क्रांति हुई।
इसमें उपयोग हुआ:
- ट्रैक्टर
- मशीनें
- रासायनिक उर्वरक
- कीटनाशक
समस्याएँ
- मृदा की उर्वरता कम होना
- पर्यावरण प्रदूषण
- भूजल का अधिक उपयोग
इसलिए अब संधारणीय कृषि (Sustainable Agriculture) को बढ़ावा दिया जा रहा है।
निष्कर्ष
प्रकृति एक संतुलित प्रणाली है जिसमें:
- जैविक और अजैविक घटक
- जीवों के बीच संबंध
- भोजन संबंध
- अपघटन
सभी मिलकर जीवन को बनाए रखते हैं।
यदि मनुष्य प्रकृति का अत्यधिक दोहन करता है तो पारितंत्र का संतुलन बिगड़ सकता है।

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