अध्याय का परिचय
पृथ्वी हमारे सौरमंडल का एक विशेष ग्रह है क्योंकि यहाँ जीवन संभव है। पृथ्वी पर पर्वत, महासागर, मरुस्थल, जंगल और विभिन्न प्रकार के जीव पाए जाते हैं।
आज उपग्रहों की सहायता से पृथ्वी के चित्र लिए जाते हैं।
इन चित्रों के द्वारा वैज्ञानिक:
- पौधों की स्थिति
- समुद्र के सूक्ष्म जीव
- समुद्र का तापमान
- तेल के रिसाव
- वायु की दिशा
आदि का अध्ययन करते हैं।
पृथ्वी की सतह पर एक बहुत पतली परत है जहाँ सभी जीव, पौधे और मनुष्य रहते हैं। यह परत पृथ्वी के पूरे आकार की तुलना में बहुत छोटी है।
13.1 पृथ्वी एक अद्वितीय ग्रह क्यों है?
ब्रह्मांड में अरबों ग्रह हैं, परन्तु अभी तक केवल पृथ्वी पर ही जीवन के प्रमाण मिले हैं।
पृथ्वी हमें जीवन के लिए आवश्यक चीजें देती है जैसे:
- श्वास लेने के लिए वायु
- पीने के लिए जल
- फसल उगाने के लिए उपजाऊ मृदा
- घर बनाने के लिए लकड़ी और चट्टानें
इसी कारण पृथ्वी को जीवनदायी ग्रह कहा जाता है।
13.2 हमारे सौरमंडल के ग्रह कैसे दिखते हैं?
हमारे सौरमंडल में 8 ग्रह हैं जो सूर्य की परिक्रमा करते हैं।
सूर्य से दूरी के अनुसार ग्रह
- बुध
- शुक्र
- पृथ्वी
- मंगल
- बृहस्पति
- शनि
- यूरेनस
- नेपच्यून
ग्रहों के प्रकार
1. चट्टानी ग्रह
- बुध
- शुक्र
- पृथ्वी
- मंगल
2. गैसीय ग्रह
- बृहस्पति
- शनि
- यूरेनस
- नेपच्यून
सामान्यतः सूर्य के निकट ग्रह अधिक गर्म और दूर ग्रह अधिक ठंडे होते हैं।
लेकिन शुक्र ग्रह सबसे अधिक गर्म है, क्योंकि उसका वायुमंडल बहुत सघन है।
हरितगृह प्रभाव (Greenhouse Effect)
शुक्र ग्रह का वायुमंडल मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड से बना है। यह गैस ऊष्मा को बाहर जाने नहीं देती।
इस प्रक्रिया को हरितगृह प्रभाव कहते हैं।
पृथ्वी पर भी वायुमंडल में कुछ गैसें सूर्य की ऊष्मा को रोककर रखती हैं जिससे पृथ्वी का तापमान जीवन के लिए उपयुक्त बना रहता है।
13.3 पृथ्वी पर जीवन हेतु उपयुक्त कारक
पृथ्वी पर जीवन संभव होने के कई कारण हैं।
13.3.1 पृथ्वी की स्थिति
पृथ्वी सूर्य से ऐसी दूरी पर स्थित है जहाँ जल द्रव अवस्था में रहता है।
यदि पृथ्वी:
सूर्य के पास होती
- तापमान बहुत अधिक होता
- जल वाष्प बन जाता
सूर्य से बहुत दूर होती
- तापमान बहुत कम होता
- जल जम जाता
सूर्य से वह दूरी जहाँ जल द्रव अवस्था में मिलता है उसे वासयोग्य क्षेत्र (Goldilocks Zone) कहते हैं।
पृथ्वी की सतह का लगभग 70% भाग जल से ढका हुआ है, इसलिए इसे नीला ग्रह कहा जाता है।
मंगल ग्रह पर जीवन का प्रश्न
मंगल ग्रह वासयोग्य क्षेत्र के किनारे पर स्थित है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि अतीत में मंगल पर द्रव जल मौजूद रहा होगा , इसलिए वहाँ जीवन होने की संभावना पर शोध जारी है।
13.3.2 पृथ्वी का आकार
पृथ्वी का आकार जीवन के लिए उपयुक्त है।
यदि पृथ्वी बहुत छोटी होती
- गुरुत्वाकर्षण कम होता
- वायुमंडल अंतरिक्ष में चला जाता
यदि पृथ्वी बहुत बड़ी होती
- गुरुत्वाकर्षण बहुत अधिक होता
- जीवों के लिए चलना-फिरना कठिन हो जाता
इसलिए पृथ्वी का उचित आकार वायुमंडल को बनाए रखने में मदद करता है।
वायुमंडल और ओजोन परत
पृथ्वी के वायुमंडल में कई गैसें होती हैं।
इनमें प्रमुख है:
- ऑक्सीजन – श्वसन के लिए आवश्यक
कुछ ऑक्सीजन मिलकर ओजोन गैस बनाती है।
ओजोन की परत सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से पृथ्वी की रक्षा करती है।
भारतीय वैज्ञानिक उपलब्धि
भारत ने वर्ष 2013 में मंगलयान मिशन लॉन्च किया।
इस मिशन का उद्देश्य मंगल ग्रह के:
- वायुमंडल
- सतह
- जल के संकेत
का अध्ययन करना था।
13.3.3 पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र
पृथ्वी एक विशाल चुंबक की तरह व्यवहार करती है।
पृथ्वी के अंदर पिघले हुए लोहे की गति से चुंबकीय क्षेत्र बनता है।
अंतरिक्ष से आने वाले हानिकारक कण जैसे:
- कॉस्मिक किरणें
- सौर पवन
पृथ्वी के वायुमंडल को नुकसान पहुँचा सकते हैं।
पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र इन कणों को दूर कर देता है और सुरक्षा कवच की तरह काम करता है।
13.4 पृथ्वी पर जीवन बनाए रखने वाले तंत्र
पृथ्वी पर जीवन सजीव और निर्जीव घटकों के सहयोग से चलता है।
13.4.1 वायु, जल और सूर्य का प्रकाश
वायु
वायुमंडल में ऑक्सीजन होती है जो जीवों के श्वसन के लिए आवश्यक है।
सूर्य का प्रकाश
पौधे सूर्य के प्रकाश की सहायता से प्रकाश संश्लेषण करते हैं।
इस प्रक्रिया में:
- कार्बन डाइऑक्साइड
- जल
का उपयोग होता है और ऑक्सीजन उत्पन्न होती है।
जल
पृथ्वी का लगभग 70% भाग जल से ढका है।
जल के स्रोत:
- नदियाँ
- झीलें
- समुद्र
- झरने
- भूमिगत जल
इन सभी को मिलाकर जलमंडल कहा जाता है।
जल:
- पोषक तत्वों का परिवहन करता है
- शरीर का तापमान नियंत्रित करता है
- पाचन में सहायता करता है
13.4.2 मृदा, चट्टानें और खनिज
पृथ्वी का ठोस भाग भूमंडल कहलाता है।
इसमें शामिल हैं:
- चट्टानें
- मृदा
- खनिज
मृदा पौधों को पोषक तत्व देती है जैसे:
- नाइट्रोजन
- पोटैशियम
भूमंडल से हमें कई खनिज मिलते हैं:
- कोयला
- तेल
- लोहा
- तांबा
इन्हीं से मानव सभ्यता का विकास संभव हुआ है।
भूविविधता (Geodiversity)
पृथ्वी पर विभिन्न प्रकार की भू-आकृतियाँ पाई जाती हैं जैसे:
- पर्वत
- घाटियाँ
- मरुस्थल
इन सभी की विविधता को भूविविधता कहते हैं।
13.4.3 पौधे, जंतु और सूक्ष्मजीव
पृथ्वी पर विभिन्न प्रकार के जीव पाए जाते हैं:
- पौधे
- जंतु
- कीट
- सूक्ष्मजीव
जहाँ जीवन पाया जाता है उसे जैवमंडल कहते हैं।
जीव एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं:
- पौधे → भोजन बनाते हैं
- जंतु → पौधों या अन्य जंतुओं को खाते हैं
- अपघटक → मृत जीवों को विघटित करते हैं
13.4.4 संतुलन का महत्व
पृथ्वी पर जीवन इसलिए संभव है क्योंकि यहाँ प्राकृतिक संतुलन बना रहता है।
यदि किसी एक भाग में परिवर्तन होता है जैसे:
- जंगलों की कटाई
- प्रदूषण
- जल की कमी
तो इसका प्रभाव पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ता है।
13.5 जीवन को लुप्त होने से कौन बचाता है?
जीवन की निरंतरता के लिए जनन (Reproduction) आवश्यक है।
जनन से:
- नई संतति उत्पन्न होती है
- प्रजातियाँ बनी रहती हैं
माता-पिता अपने बच्चों को आनुवंशिक निर्देश (Genes) देते हैं।
इन्हीं जीन के कारण बच्चे अपने माता-पिता जैसे दिखते हैं।
जनन के प्रकार
1. अलैंगिक जनन
इसमें केवल एक जनक से नई संतति बनती है।
उदाहरण:
- कायिक प्रवर्धन (पौधों में)
- जीवाणु
- अमीबा
- हाइड्रा
- प्लेनेरिया
कायिक प्रवर्धन
जब पौधे के:
- तना
- जड़
- पत्ती
से नया पौधा उगता है तो इसे कायिक प्रवर्धन कहते हैं।
उदाहरण:
- आलू
- अदरक
- मनी प्लांट
2. लैंगिक जनन
इसमें दो जनक होते हैं:
- नर
- मादा
दोनों के युग्मक मिलकर युग्मज बनाते हैं।
पौधों में लैंगिक जनन
पुष्पीय पौधों में:
- परागकण → नर युग्मक
- बीजांड → मादा युग्मक
परागकण का एक पुष्प से दूसरे पुष्प में जाना परागण कहलाता है।
नर और मादा युग्मकों के मिलने को निषेचन कहते हैं।
इससे:
- युग्मज बनता है
- बीज बनता है
- फल विकसित होता है
जंतुओं में लैंगिक जनन
जंतुओं में:
- नर युग्मक → शुक्राणु
- मादा युग्मक → अंडाणु
दोनों के मिलने से युग्मज बनता है।
उदाहरण
- मछली और मेंढक → निषेचन जल में
- पक्षी → अंडे देते हैं
- स्तनधारी → बच्चे को जन्म देते हैं
13.6 पृथ्वी पर जीवन को खतरे
मानवीय गतिविधियाँ पृथ्वी के संतुलन को बिगाड़ रही हैं।
मुख्य समस्याएँ:
- जलवायु परिवर्तन
- जैव विविधता का हनन
- प्रदूषण
इन तीनों को मिलकर त्रिग्रहीय संकट कहा जाता है।
जलवायु परिवर्तन
जीवाश्म ईंधन जैसे:
- कोयला
- तेल
जलाने से कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन गैसें निकलती हैं।
ये गैसें पृथ्वी की ऊष्मा को रोक लेती हैं जिससे वैश्विक तापन होता है।
इसके परिणाम:
- हिमनद पिघलना
- समुद्र स्तर बढ़ना
- बाढ़
- मौसम में परिवर्तन
प्रदूषण
प्रदूषण के प्रकार:
वायु प्रदूषण
कारखानों और वाहनों से निकलने वाली गैसें।
जल प्रदूषण
प्लास्टिक और रसायनों से जल दूषित होना।
मृदा प्रदूषण
अत्यधिक उर्वरकों और कचरे से मृदा खराब होना।
पर्यावरण संरक्षण
पृथ्वी को सुरक्षित रखने के लिए:
- प्रदूषण कम करना
- नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग
- जल और ऊर्जा की बचत
- पुनर्चक्रण
जैसे उपाय अपनाने चाहिए।

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