3.1 स्वास्थ्य – क्या रोग का नहीं होना ही मात्र स्वास्थ्य है?
स्वास्थ्य का अर्थ
विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) के अनुसार –
“स्वास्थ्य पूर्ण शारीरिक, मानसिक और सामाजिक कल्याण की स्थिति है, न कि केवल रोगों की अनुपस्थिति।”
अर्थात् –
- केवल बीमार न होना ही स्वास्थ्य नहीं है।
- शारीरिक रूप से तंदुरुस्त होना
- मानसिक रूप से प्रसन्न और सकारात्मक रहना
- समाज में अच्छे संबंध बनाए रखना
उदाहरण (क्रियाकलाप 3.1 से)
एक विद्यार्थी नए विद्यालय में अकेलापन महसूस करता है।
- अधिक स्क्रीन टाइम
- नींद की कमी
- सिरदर्द
- वजन कम होना
इससे स्पष्ट है कि मानसिक और सामाजिक स्थिति भी स्वास्थ्य को प्रभावित करती है।
हमारी वैज्ञानिक परंपरा – आयुर्वेद का दृष्टिकोण
आयुर्वेद के अनुसार –
- शरीर, मन और परिवेश का संतुलन ही सच्चा स्वास्थ्य है।
- दिनचर्या और ऋतुचर्या का पालन आवश्यक है।
- योग, ध्यान, प्राणायाम, संतुलित आहार और पर्याप्त नींद जरूरी हैं।
3.2 हम स्वस्थ कैसे रह सकते हैं?
अच्छी आदतें
- व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखना
- संतुलित एवं पौष्टिक भोजन लेना
- नियमित व्यायाम
- पर्याप्त नींद
- सकारात्मक सोच
- परिवार व मित्रों के साथ समय बिताना
बुरी आदतें
- अधिक स्क्रीन टाइम
- जंक फूड का सेवन
- देर रात तक जागना
- नाश्ता न करना
3.2.1 स्वस्थ जीवनशैली अपनाएँ
- फल, सब्जियाँ और साबुत अनाज खाएँ
- शारीरिक रूप से सक्रिय रहें
- योग और प्राणायाम करें
- तंबाकू, मद्य, नशीले पदार्थों से दूर रहें
- पर्याप्त विश्राम करें
3.2.2 पर्यावरण को स्वच्छ रखें
- स्वच्छ वायु और जल आवश्यक है
- प्रदूषण से दमा और खाँसी जैसी समस्याएँ हो सकती हैं
- AQI (वायु गुणवत्ता सूचकांक) वायु की गुणवत्ता बताता है
- गंदगी से मच्छर और मक्खियाँ बढ़ती हैं
3.3 हम कैसे जानें कि हम अस्वस्थ हैं?
लक्षण (Symptoms)
जो हम महसूस करते हैं –
- दर्द
- थकान
- चक्कर
संकेत (Signs)
जो देखे या मापे जा सकते हैं –
- ज्वर
- दाने
- सूजन
- उच्च रक्तचाप
3.4 रोगों के कारण और प्रकार
रोग क्या है?
रोग वह स्थिति है जिसमें शरीर या मन के सामान्य कार्य प्रभावित हो जाते हैं।
रोगों के दो मुख्य प्रकार
1. असंचरणीय रोग
- एक व्यक्ति से दूसरे में नहीं फैलते
- कारण – जीवनशैली, आहार, पर्यावरण
उदाहरण:
- कैंसर
- मधुमेह
- अस्थमा
- स्कर्वी
- एनीमिया
- घेघा
2. संचरणीय रोग
- रोगजनकों से होते हैं
- एक व्यक्ति से दूसरे में फैलते हैं
रोगजनक:
- जीवाणु
- विषाणु
- कवक
- प्रोटोजोआ
- कृमि
उदाहरण:
- टाइफॉइड
- डेंगू
- फ्लू
- चेचक
- कोविड-19
3.4.1 संचरणीय रोग कैसे फैलते हैं?
फैलने के माध्यम
- हवा (खाँसी, छींक)
- दूषित जल व भोजन
- संक्रमित वस्तुएँ
- मच्छर (वेक्टर)
बचाव के उपाय
- साबुन से हाथ धोना
- मास्क पहनना
- स्वच्छ जल का उपयोग
- व्यक्तिगत वस्तुएँ साझा न करना
- घर पर आराम करना
3.4.2 असंचरणीय रोगों के कारण
- अस्वस्थ खानपान
- व्यायाम की कमी
- अधिक वजन
- हार्मोन असंतुलन
दीर्घकालिक रोग
जो 3 महीने से अधिक समय तक रहते हैं।
जैसे – मधुमेह, कैंसर, अस्थमा
3.5 रोगों का निवारण और नियंत्रण
“रोकथाम उपचार से बेहतर है।”
स्वच्छता अभियान उदाहरण
ओडिशा में शौचालय निर्माण से अतिसार कम हुआ।
शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता
प्रतिरक्षा (Immunity)
शरीर की रोगों से लड़ने की शक्ति।
प्रतिरक्षा प्रणाली
विशेष तंत्र जो रोगाणुओं से रक्षा करता है।
टीके (Vaccines)
- शरीर को रोगाणुओं से लड़ने के लिए प्रशिक्षित करते हैं।
- मृत या कमजोर रोगाणु से बनाए जाते हैं।
- रोकथाम के लिए होते हैं, इलाज के लिए नहीं।
एडवर्ड जेनर और चेचक का टीका
Edward Jenner ने चेचक के टीके की खोज की।
- गौशीतला से संक्रमित लोगों को चेचक नहीं हुआ।
- इससे पहला टीका बना।
पेनिसिलिन की खोज
Alexander Fleming ने 1928 में पेनिसिलिन की खोज की।
- यह पहला प्रतिजैविक था।
- जीवाणु संक्रमण के उपचार में उपयोगी।
प्रतिजैविक केवल जीवाणु संक्रमण में प्रभावी हैं, विषाणु में नहीं।
प्रतिजैविक प्रतिरोध
- जब जीवाणु दवा के प्रति प्रतिरोधी हो जाते हैं।
- अनियंत्रित उपयोग से समस्या बढ़ती है।
✔ केवल चिकित्सक की सलाह से दवा लें।
✔ पूरी अवधि तक दवा लें।
पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियाँ
भारत में –
- आयुर्वेद
- सिद्ध
- यूनानी
इनमें जड़ी-बूटियों का उपयोग होता है।
स्मरणीय बिंदु
- स्वास्थ्य = शारीरिक + मानसिक + सामाजिक कल्याण
- संचरणीय रोग फैलते हैं, असंचरणीय नहीं प्रतिरक्षा प्रणाली रक्षा करती है
- टीके रोकथाम के लिए हैं
- प्रतिजैविक का सही उपयोग आवश्यक

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