1. प्रस्तावना
हम अपने दैनिक जीवन में वायु के अनेक प्रभाव देखते हैं।
जैसे –
- पत्तियों का हवा में उड़ना
- पेड़ों का झुकना
- दरवाजों का बंद होना
- खिड़कियों का खड़खड़ाना
- कपड़ों का लहराना
ये सभी प्रभाव वायु द्वारा लगाए गए बल के कारण होते हैं।
वायु द्वारा लगाए गए इस बल को वायु दाब (Air Pressure) कहते हैं।
इस अध्याय में हम जानेंगे –
- दाब क्या है
- द्रव और वायु का दाब
- पवन कैसे बनती है
- तीव्र पवन का प्रभाव
- झंझावात और तड़ित
2. दाब (Pressure)
जब कोई बल किसी सतह पर कार्य करता है, तो वह उस सतह पर दाब उत्पन्न करता है।
दाब की परिभाषा
किसी सतह के प्रति एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाले बल को दाब कहते हैं।
सूत्र
दाब = बल / क्षेत्रफल
SI मात्रक
- बल का मात्रक → न्यूटन (N)
- क्षेत्रफल का मात्रक → मीटर² (m²)
इसलिए दाब का SI मात्रक है
न्यूटन प्रति वर्ग मीटर (N/m²)
इसे पास्कल (Pascal) भी कहते हैं।
प्रतीक → Pa
3. दाब और क्षेत्रफल का संबंध
यदि समान बल को अलग-अलग क्षेत्रफल पर लगाया जाए तो दाब बदल जाता है।
उदाहरण
- संकरी पट्टी वाला बस्ता
- कंधे के कम क्षेत्रफल पर भार पड़ता है
- इसलिए दाब अधिक होता है
- कंधे में दर्द होता है
- चौड़ी पट्टी वाला बस्ता
- भार अधिक क्षेत्रफल में फैल जाता है
- दाब कम हो जाता है
- उठाना आसान होता है
अन्य उदाहरण
- चौड़े हत्थे वाली बाल्टी उठाना आसान होता है
- सिर पर भार रखते समय कपड़े का गोला रखा जाता है
- तेज धार वाला चाकू आसानी से काटता है
- कील को नुकीले सिरे से ठोकना आसान होता है
निष्कर्ष
कम क्षेत्रफल पर बल लगाने से दाब अधिक होता है।
4. द्रव द्वारा लगाया गया दाब
द्रव (जैसे पानी) भी दाब डालते हैं।
प्रयोग से पता चलता है कि:
- द्रव पात्र के तल पर दाब डालता है
- द्रव पात्र की दीवारों पर भी दाब डालता है
- द्रव सभी दिशाओं में दाब डालता है
5. द्रव स्तंभ की ऊँचाई और दाब
यदि किसी पात्र में द्रव की ऊँचाई बढ़ती है तो दाब भी बढ़ जाता है।
निष्कर्ष
द्रव द्वारा लगाया गया दाब द्रव स्तंभ की ऊँचाई पर निर्भर करता है।
6. जल टंकियाँ ऊँचाई पर क्यों रखी जाती हैं?
जल की टंकी को ऊँचाई पर रखने से –
- जल स्तंभ की ऊँचाई बढ़ जाती है
- दाब बढ़ जाता है
- नलों से पानी तेज़ी से निकलता है
इसी कारण घरों की जल टंकियाँ छत पर रखी जाती हैं।
7. बाँध का आधार चौड़ा क्यों होता है?
बाँध की दीवारों पर जल दाब डालता है।
- नीचे की ओर जल का दाब अधिक होता है
- इसलिए बाँध का आधार ऊपर की तुलना में अधिक चौड़ा बनाया जाता है
इससे बाँध मजबूत रहता है।
8. वायु द्वारा लगाया गया दाब (वायुदाब)
पृथ्वी के चारों ओर गैसों का जो आवरण है उसे वायुमंडल कहते हैं।
वायु में मुख्य गैसें होती हैं –
- नाइट्रोजन
- ऑक्सीजन
- आर्गन
- कार्बन डाइऑक्साइड
वायुमंडल की वायु पृथ्वी की सभी वस्तुओं पर दाब डालती है।
इस दाब को वायुमंडलीय दाब कहते हैं।
9. वायु सभी दिशाओं में दाब डालती है
उदाहरण
गुब्बारा
- जब हम गुब्बारे में हवा भरते हैं
- तो हवा गुब्बारे की दीवारों पर दाब डालती है
- इसलिए गुब्बारा फैल जाता है
10. चूषक (Suction Cup) का सिद्धांत
जब चूषक को चिकनी सतह पर दबाते हैं –
- अंदर की हवा निकल जाती है
- अंदर का दाब कम हो जाता है
- बाहर का वायुदाब अधिक होता है
इसलिए चूषक सतह से चिपक जाता है।
11. वायुमंडलीय दाब का परिमाण
वायुमंडलीय दाब बहुत अधिक होता है।
उदाहरण:
15 cm × 15 cm क्षेत्रफल पर वायु का बल लगभग
225 kg के भार के बराबर होता है।
फिर भी हम दबते नहीं हैं क्योंकि –
हमारे शरीर के अंदर का दाब बाहरी वायुदाब को संतुलित कर देता है।
12. पवन का बनना (Formation of Wind)
वायु हमेशा उच्च दाब क्षेत्र से निम्न दाब क्षेत्र की ओर प्रवाहित होती है।
यही प्रवाह पवन (Wind) कहलाता है।
13. समुद्र समीर और स्थल समीर
दिन में (समुद्र समीर)
- स्थल जल्दी गरम हो जाता है
- स्थल की हवा ऊपर उठती है
- निम्न दाब बनता है
समुद्र से हवा स्थल की ओर आती है।
इसे समुद्र समीर कहते हैं।
रात में (स्थल समीर)
- स्थल जल्दी ठंडा हो जाता है
- समुद्र की हवा गर्म होती है
- समुद्र के ऊपर निम्न दाब बनता है
हवा स्थल से समुद्र की ओर जाती है।
इसे स्थल समीर कहते हैं।
14. तीव्रगामी पवन से वायुदाब घटता है
जब हवा बहुत तेज चलती है तो –
- उस क्षेत्र का वायुदाब कम हो जाता है
इसी कारण तेज तूफान में –
- घरों की छतें उड़ सकती हैं
तूफान के समय दरवाजे और खिड़कियाँ खोलना सुरक्षित होता है , क्योंकि इससे अंदर और बाहर का दाब बराबर हो जाता है।
15. झंझावात (Storm)
जब तेज हवा के साथ वर्षा होती है तो उसे झंझावात कहते हैं।
झंझावात के कारण –
- तेज हवा
- वर्षा
- बिजली
- गर्जन
हो सकते हैं।
16. तड़ित (Lightning)
जब बादलों में आवेश उत्पन्न होते हैं और वे अचानक प्रवाहित होते हैं तो तेज प्रकाश उत्पन्न होता है।
इसे तड़ित (Lightning) कहते हैं।
17. तड़ित कैसे बनती है?
प्रक्रिया:
- गरम हवा ऊपर उठती है
- बादल बनते हैं
- बादलों में जल बूँदें और हिम कण टकराते हैं
- घर्षण से विद्युत आवेश बनते हैं
- धन और ऋण आवेश अलग हो जाते हैं
- अचानक आवेश का प्रवाह होता है
इससे तड़ित (बिजली) उत्पन्न होती है।
18. गर्जन (Thunder)
तड़ित के समय –
- हवा बहुत तेजी से गर्म होती है
- हवा फैलती है
- तेज ध्वनि उत्पन्न होती है
इसे गर्जन कहते हैं।
19. तड़ित-झंझावात (Thunderstorm)
जब झंझावात के साथ –
- तड़ित
- गर्जन
होते हैं तो उसे तड़ित-झंझावात कहते हैं।
20. तड़ित से सुरक्षा
तड़ित के समय हमें सावधानियाँ रखनी चाहिए:
- पेड़ों के नीचे खड़े न हों
- खुले मैदान में न रहें
- ऊँची इमारतों से दूर रहें
- जमीन पर सीधे न लेटें
- किसी सुरक्षित स्थान पर बैठ जाएँ

Leave a Reply