1. प्रस्तावना
हमारे चारों ओर अनेक प्रकार की वस्तुएँ दिखाई देती हैं जैसे – पत्थर, रेत, जल, वायु आदि। इन सभी को द्रव्य (पदार्थ) कहा जाता है।
कभी आपने सोचा होगा कि:
- पत्थर या रेत का ढेर बनाया जा सकता है पर जल का क्यों नहीं?
- हाथ में पानी लेने पर वह हाथ का आकार क्यों ले लेता है?
- हम वायु को देख नहीं सकते फिर भी गुब्बारे का वजन क्यों बढ़ जाता है?
इन प्रश्नों से हमें यह समझने में सहायता मिलती है कि द्रव्य की प्रकृति क्या है और यह किससे बना है।
पर्वतों से रेत और मिट्टी का निर्माण
पर्वतों की चट्टानें धीरे-धीरे टूटती रहती हैं। इस प्रक्रिया को अपरदन कहते हैं।
नदियाँ इन टूटे हुए टुकड़ों को अपने साथ बहाकर मैदानों में ले जाती हैं।
समय के साथ ये चट्टानें छोटे-छोटे कंकड़, पत्थर, रेत और मिट्टी में बदल जाती हैं।
प्रश्न यह है कि:
क्या रेत और मिट्टी के कण ही चट्टान की सबसे छोटी इकाई हैं?
इस प्रश्न का उत्तर हमें आगे के प्रयोगों से मिलता है।
7.1 द्रव्य किससे बना होता है?
क्रियाकलाप – चॉक का प्रयोग
एक चॉक का टुकड़ा लें और उसे बार-बार तोड़ें।
फिर:
- छोटे टुकड़ों को ओखल-मूसल में पीसें।
- चूर्ण को आवर्धक लेंस से देखें।
अवलोकन
- चॉक छोटे-छोटे कणों में बदल जाता है।
- लेकिन वह अभी भी चॉक ही रहता है।
निष्कर्ष
यह एक भौतिक परिवर्तन है क्योंकि नया पदार्थ नहीं बनता।
इससे पता चलता है कि:
द्रव्य छोटे-छोटे कणों से बना होता है जिन्हें घटक कण कहते हैं।
घटक कण (Constituent Particles)
घटक कण वे मूल इकाइयाँ हैं जिनसे कोई पदार्थ बना होता है।
उदाहरण:
- चॉक के कण
- रेत के कण
- मिट्टी के कण
लेकिन ये भी अंतिम इकाइयाँ नहीं हैं। इनसे भी छोटे कण हो सकते हैं।
चीनी और जल का प्रयोग
गिलास में पानी लेकर उसमें चीनी डालते हैं।
अवलोकन
- चीनी दिखाई नहीं देती।
- पानी का स्वाद मीठा हो जाता है।
निष्कर्ष
- चीनी के कण बहुत छोटे हो जाते हैं।
- वे जल के कणों के बीच चले जाते हैं।
इन स्थानों को अंतराकणीय स्थान कहते हैं।
महत्वपूर्ण निष्कर्ष
क्रियाकलाप 7.1 और 7.2 से हमें पता चलता है कि:
- सभी पदार्थ अत्यंत सूक्ष्म कणों से बने होते हैं।
- कणों के बीच खाली स्थान होता है।
- कण इतने छोटे होते हैं कि सामान्य सूक्ष्मदर्शी से भी नहीं दिखाई देते।
7.2 द्रव्य की विभिन्न अवस्थाएँ कैसे निर्धारित होती हैं?
द्रव्य के कण एक-दूसरे से आकर्षण बल द्वारा जुड़े होते हैं।
इसे अंतराकणीय आकर्षण बल कहते हैं।
यह बल निम्न बातों पर निर्भर करता है:
- पदार्थ की प्रकृति
- कणों के बीच दूरी
कणों के बीच दूरी बढ़ने पर आकर्षण बल कम हो जाता है।
इसी आकर्षण बल के कारण पदार्थ की भौतिक अवस्था निर्धारित होती है।
हमारी वैज्ञानिक परंपरा
प्राचीन भारतीय दार्शनिक आचार्य कणाद ने सबसे पहले परमाणु की अवधारणा दी।
उन्होंने कहा:
द्रव्य सूक्ष्म अविभाज्य कणों से बना होता है जिन्हें परमाणु कहा जाता है।
यह विचार वैशेषिक सूत्र नामक ग्रंथ में वर्णित है।
7.2.1 ठोस अवस्था
ठोस पदार्थों के गुण
- निश्चित आकृति होती है।
- निश्चित आयतन होता है।
- कण बहुत पास-पास होते हैं।
- अंतराकणीय आकर्षण बल बहुत प्रबल होता है।
- कण केवल अपनी जगह पर कंपन करते हैं।
उदाहरण
- पत्थर
- लोहे की कील
- नमक
- लकड़ी
- ऐलुमिनियम
ठोस को गरम करने पर
जब ठोस को गरम किया जाता है:
- कण तेजी से कंपन करते हैं।
- आकर्षण बल कम हो जाता है।
- अंत में ठोस द्रव में बदल जाता है।
गलनांक
वह तापमान जिस पर ठोस पिघलकर द्रव में बदलता है, गलनांक कहलाता है।
उदाहरण:
बर्फ का गलनांक 0°C है।
7.2.2 द्रव अवस्था
द्रव के गुण
- द्रव की निश्चित आकृति नहीं होती।
- द्रव का आयतन निश्चित होता है।
- द्रव पात्र का आकार ले लेता है।
- कण सीमित स्थान में गति कर सकते हैं।
- आकर्षण बल ठोस से कम होता है।
उदाहरण
- जल
- दूध
- तेल
द्रव में उबाल
जब द्रव को गरम किया जाता है तो एक तापमान पर वह उबलने लगता है।
क्वथनांक
वह तापमान जिस पर द्रव उबलकर गैस में बदलता है, क्वथनांक कहलाता है।
वाष्पन
क्वथनांक से कम तापमान पर भी द्रव धीरे-धीरे वाष्प में बदलता है।
इसे वाष्पन कहते हैं।
7.2.3 गैसीय अवस्था
गैसों के गुण
- गैस की निश्चित आकृति नहीं होती।
- गैस का निश्चित आयतन नहीं होता।
- गैस पूरा स्थान भर लेती है।
- कण बहुत दूर-दूर होते हैं।
- आकर्षण बल बहुत कम होता है।
उदाहरण
- वायु
- धुआँ
- गैस
गैसों का फैलना
अगरबत्ती का धुआँ पूरे कमरे में फैल जाता है।
इससे पता चलता है कि:
- गैस के कण सभी दिशाओं में गति करते हैं।
7.3 तीनों अवस्थाओं में अंतराकणीय स्थान
गैस
- सबसे अधिक अंतराकणीय स्थान
- आसानी से संपीडित हो सकती है
द्रव
- मध्यम अंतराकणीय स्थान
ठोस
- सबसे कम अंतराकणीय स्थान
सिरिंज का प्रयोग
जब सिरिंज में हवा को दबाया जाता है तो उसका आयतन कम हो जाता है।
इससे पता चलता है कि गैस में कणों के बीच बहुत स्थान होता है।
लेकिन जल को दबाने पर आयतन नहीं बदलता।
इससे पता चलता है कि द्रव लगभग असंपीड्य होता है।
चीनी और जल का प्रयोग
जब चीनी जल में घुलती है तो जल का स्तर बहुत अधिक नहीं बढ़ता।
इसका कारण है:
- जल के कणों के बीच खाली स्थान होता है।
- चीनी के कण उसी स्थान में चले जाते हैं।
7.4 पदार्थ के कणों की गति
पदार्थ के कण हमेशा गति करते रहते हैं।
पोटैशियम परमैंगनेट का प्रयोग
जब पोटैशियम परमैंगनेट को जल में डालते हैं तो:
- उसका रंग धीरे-धीरे पूरे जल में फैल जाता है।
यह दर्शाता है कि कण लगातार गति करते रहते हैं।
ताप का प्रभाव
गरम जल में कण तेज गति करते हैं।
इसलिए:
- गरम जल में रंग जल्दी फैलता है।
- ठंडे जल में धीरे फैलता है।
अगरबत्ती का उदाहरण
अगरबत्ती जलाने पर उसकी सुगंध पूरे कमरे में फैल जाती है।
यह दर्शाता है कि:
वायु के कण लगातार गति करते रहते हैं।
दैनिक जीवन में कणीय प्रकृति
जब हम साबुन से कपड़े धोते हैं:
- साबुन के कण तेल के कणों को घेर लेते हैं।
- तेल पानी के साथ बह जाता है।
- कपड़े साफ हो जाते हैं।

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