1. प्रस्तावना
हम अपने दैनिक जीवन में अनेक प्रकार के मिश्रणों का उपयोग करते हैं। उदाहरण के लिए – चाय में चीनी मिलाना, पानी में नमक घोलना, ओ.आर.एस. बनाना आदि।
जब चीनी और नमक को जल में मिलाया जाता है तो वे जल में पूरी तरह घुलकर एक ऐसा मिश्रण बनाते हैं जिसमें सभी घटक समान रूप से फैले होते हैं। इसलिए हर घूँट का स्वाद एक जैसा होता है।
इसके विपरीत जब चॉक का चूर्ण, रेत या लकड़ी का बुरादा जल में मिलाया जाता है तो वे समान रूप से नहीं फैलते। इससे पता चलता है कि मिश्रण दो प्रकार के हो सकते हैं – समरूप और विषमरूप।
2. मिश्रण के प्रकार
(1) समरूप मिश्रण
जिस मिश्रण में सभी घटक समान रूप से वितरित होते हैं और उन्हें अलग-अलग नहीं देखा जा सकता, उसे समरूप मिश्रण कहते हैं।
उदाहरण
- नमक + जल
- चीनी + जल
- ORS का घोल
इनमें सभी भागों का स्वाद और गुण समान होते हैं।
(2) विषमरूप मिश्रण
जिस मिश्रण में घटक समान रूप से वितरित नहीं होते और अलग-अलग दिखाई देते हैं, उसे विषमरूप मिश्रण कहते हैं।
उदाहरण
- रेत और पानी
- चॉक का चूर्ण और पानी
- लकड़ी का बुरादा और पानी
3. विलेय, विलायक और विलयन
विलयन
समरूप मिश्रण को विलयन कहते हैं।
उदाहरण
नमक + जल = नमक का विलयन
विलेय
जो पदार्थ विलायक में घुलता है, उसे विलेय कहते हैं।
उदाहरण
- चीनी
- नमक
विलायक
जिस पदार्थ में विलेय घुलता है, उसे विलायक कहते हैं।
उदाहरण
- जल
द्रव-द्रव विलयन
यदि दो द्रव मिलाए जाते हैं तो
- कम मात्रा वाला पदार्थ → विलेय
- अधिक मात्रा वाला पदार्थ → विलायक
विशेष उदाहरण
गुलाब जामुन की चाशनी बनाते समय चीनी की मात्रा अधिक होती है और जल कम होता है, फिर भी जल को विलायक माना जाता है।
4. विलायक की घोलने की क्षमता
किसी विलायक की एक निश्चित मात्रा में केवल एक सीमा तक ही विलेय घुल सकता है।
उदाहरण के लिए यदि पानी में बार-बार नमक मिलाया जाए तो एक समय ऐसा आता है जब नमक घुलना बंद कर देता है और तली में बैठने लगता है।
इससे पता चलता है कि विलायक की घोलने की क्षमता सीमित होती है।
5. संतृप्त और असंतृप्त विलयन
असंतृप्त विलयन
जिस विलयन में अभी और विलेय घोला जा सकता है उसे असंतृप्त विलयन कहते हैं।
संतृप्त विलयन
जिस विलयन में एक निश्चित तापमान पर और विलेय नहीं घुलता, उसे संतृप्त विलयन कहते हैं।
इस अवस्था में अतिरिक्त विलेय तली में बैठ जाता है।
6. सांद्रता (Concentration)
किसी विलयन में उपस्थित विलेय की मात्रा को उसकी सांद्रता कहते हैं।
इसके आधार पर विलयन दो प्रकार के होते हैं।
तनु विलयन
जिसमें विलेय की मात्रा कम होती है।
सांद्र विलयन
जिसमें विलेय की मात्रा अधिक होती है।
7. विलेयता (Solubility)
किसी विलायक की निश्चित मात्रा (जैसे 100 mL) में घुलने वाली विलेय की अधिकतम मात्रा को विलेयता कहते हैं।
8. तापमान का विलेयता पर प्रभाव
अधिकांश ठोस पदार्थों की विलेयता तापमान बढ़ने पर बढ़ जाती है।
उदाहरण के रूप में बेकिंग सोडा को पानी में मिलाकर देखा गया कि
- 20°C पर कम घुलता है
- 50°C पर अधिक घुलता है
- 70°C पर और अधिक घुल जाता है
निष्कर्ष
तापमान बढ़ने से ठोस पदार्थों की घुलनशीलता बढ़ जाती है।
9. भारतीय वैज्ञानिक परंपरा
भारत में आयुर्वेद और सिद्ध चिकित्सा पद्धतियों में औषधियाँ बनाने के लिए जल का उपयोग विलायक के रूप में किया जाता था।
इसके अतिरिक्त तेल, घी, दूध और अन्य पदार्थों का भी उपयोग औषधीय संरूपण बनाने में किया जाता रहा है।
10. वैज्ञानिक परिचय – असीमा चटर्जी
असीमा चटर्जी भारत की प्रसिद्ध वैज्ञानिक थीं। उन्होंने औषधीय पौधों पर शोध किया और उनसे महत्वपूर्ण रासायनिक यौगिकों को अलग करने के लिए विलायकों और विलयनों
का उपयोग किया।
उनके प्रमुख योगदान
- मलेरिया-रोधी औषधियों का विकास
- अपस्मार (एपिलेप्सी) की औषधियाँ
उन्हें शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार और पद्मभूषण से सम्मानित किया गया।
11. गैसों की विलेयता
कई गैसें जल में घुल सकती हैं।
उदाहरण
ऑक्सीजन
जल में घुली हुई ऑक्सीजन ही मछलियों और अन्य जलीय जीवों के जीवन के लिए आवश्यक होती है।
जल और गैस का मिश्रण समरूप मिश्रण होता है।
12. तापमान का गैसों की विलेयता पर प्रभाव
गैसों की विलेयता तापमान बढ़ने पर घट जाती है।
इसका अर्थ-
- ठंडे पानी में अधिक ऑक्सीजन घुलती है
- गर्म पानी में कम ऑक्सीजन घुलती है
इसलिए जलीय जीवन के लिए ठंडा पानी अधिक उपयुक्त होता है।
13. वस्तुएँ जल में तैरती या डूबती क्यों हैं
कुछ वस्तुएँ पानी में तैरती हैं जबकि कुछ डूब जाती हैं।
उदाहरण
- भूसी पानी पर तैरती है
- चावल नीचे बैठ जाता है
- तेल पानी के ऊपर तैरता है
यह मुख्य रूप से घनत्व पर निर्भर करता है।
14. घनत्व (Density)
किसी पदार्थ के इकाई आयतन में उपस्थित द्रव्यमान को घनत्व कहते हैं।
सूत्र
घनत्व = द्रव्यमान ÷ आयतन
15. घनत्व के मात्रक
SI मात्रक
kg/m³
अन्य मात्रक
- g/mL
- g/cm³
16. आपेक्षिक घनत्व
किसी पदार्थ के घनत्व की तुलना जल के घनत्व से करने पर जो मान मिलता है उसे आपेक्षिक घनत्व कहते हैं।
इसका कोई मात्रक नहीं होता।
17. घनत्व का निर्धारण
घनत्व ज्ञात करने के लिए दो राशियों की आवश्यकता होती है
- द्रव्यमान
- आयतन
18. द्रव्यमान
किसी वस्तु में उपस्थित पदार्थ की मात्रा को द्रव्यमान कहते हैं।
उपकरण
तुला (Balance)
19. भार
पृथ्वी द्वारा किसी वस्तु को अपनी ओर आकर्षित करने वाले बल को भार कहते हैं।
मात्रक
न्यूटन (N)
दैनिक जीवन में द्रव्यमान और भार शब्द अक्सर एक-दूसरे के स्थान पर उपयोग किए जाते हैं।
20. आयतन
किसी वस्तु द्वारा घेरा गया स्थान आयतन कहलाता है।
SI मात्रक
घन मीटर (m³)
अन्य मात्रक
- घन सेंटीमीटर (cm³)
- मिलीलीटर (mL)
- लीटर (L)
संबंध
1 cm³ = 1 mL
21. आयतन मापने का उपकरण
द्रवों का आयतन मापने के लिए मापक सिलिंडर का उपयोग किया जाता है।
इसमें माप के चिह्न बने होते हैं जिनसे द्रव का आयतन पढ़ा जाता है।
22. मापक सिलिंडर की न्यूनतम माप
मापक सिलिंडर की क्षमता के आधार पर उसकी न्यूनतम माप अलग-अलग हो सकती है।
उदाहरण
- 100 mL सिलिंडर → 1 mL
- 25 mL सिलिंडर → 0.1 mL
23. नवचंद्रक (Meniscus)
मापक सिलिंडर में द्रव की सतह वक्र होती है जिसे नवचंद्रक कहते हैं।
सही माप के लिए आँख को नवचंद्रक के स्तर के बराबर रखना चाहिए।
24. नियमित आकार की वस्तुओं का आयतन
घनाभ आकृति वाली वस्तुओं का आयतन सूत्र से निकाला जाता है।
सूत्र
आयतन = लंबाई × चौड़ाई × ऊँचाई
25. अनियमित आकार की वस्तुओं का आयतन
पत्थर जैसी अनियमित वस्तुओं का आयतन जल विस्थापन विधि से निकाला जाता है।
विधि
- मापक सिलिंडर में जल का प्रारंभिक आयतन नोट करें
- वस्तु को जल में डालें
- अंतिम आयतन नोट करें
सूत्र
वस्तु का आयतन = अंतिम आयतन − प्रारंभिक आयतन
26. पृथ्वी की परतें और घनत्व
पृथ्वी कई परतों से बनी है
- भू-पर्पटी
- ऊपरी प्रावार
- अधः प्रावार
- बाहरी क्रोड
- आंतरिक क्रोड
पृथ्वी के केंद्र की ओर जाने पर घनत्व बढ़ता जाता है।
27. घनत्व पर तापमान का प्रभाव
जब किसी पदार्थ को गरम किया जाता है तो उसके कण दूर-दूर हो जाते हैं और आयतन बढ़ जाता है।
चूँकि
घनत्व = द्रव्यमान / आयतन
इसलिए आयतन बढ़ने पर घनत्व घट जाता है।
इसी कारण
- गरम हवा ऊपर उठती है
- गरम हवा के गुब्बारे उड़ते हैं
28. घनत्व पर दाब का प्रभाव
दाब का प्रभाव पदार्थ की अवस्था पर निर्भर करता है।
गैस
दाब बढ़ाने पर गैस के कण पास आ जाते हैं और घनत्व बढ़ जाता है।
द्रव
द्रव लगभग असंपीड्य होते हैं इसलिए दाब का प्रभाव कम होता है।
ठोस
ठोस पदार्थों में दाब का प्रभाव बहुत कम होता है।
29. बर्फ पानी पर क्यों तैरती है
जब पानी 0°C पर बर्फ बनता है तो उसके कण अधिक स्थान घेरते हैं और आयतन बढ़ जाता है।
इससे उसका घनत्व कम हो जाता है।
इसलिए बर्फ पानी पर तैरती है।
30. जलीय जीवन का संरक्षण
जब झील या नदी की सतह पर बर्फ जमती है तो वह ऊपर तैरती है और नीचे का पानी पूरी तरह नहीं जमता।
इससे मछलियाँ और अन्य जीव ठंड में भी जीवित रह पाते हैं।
31. प्राचीन समय की नावें
प्राचीन समय में लोग नदी और समुद्र पार करने के लिए
- बाँस
- लकड़ी के लट्ठे
का उपयोग करते थे।
क्योंकि इनका घनत्व कम होता है और वे पानी पर आसानी से तैरते हैं।

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