आकाशीय परिघटनाएँ और काल – निर्धारण
जिज्ञासा बनाए रखें
1. बताइए कि नीचे दिए गए कथन सत्य हैं या असत्य –
(i) हम चंद्रमा के केवल उस भाग को देख पाते हैं जो सूर्य के प्रकाश को हमारी ओर परावर्तित करता है।
(ii) पृथ्वी की छाया सूर्य के प्रकाश को चंद्रमा तक नहीं पहुँचने देती और चंद्रमा की कलाओं का कारण बनती है।
(iii) कालदर्शक विभिन्न खगोलीय चक्रों पर आधारित होते हैं जो निश्चित क्रम में बारंबार घटित होते हैं।
(iv) चंद्रमा को केवल रात्रि के समय ही देखा जा सकता है।
उत्तर:
(i) सत्य
(ii) असत्य
(iii) सत्य
(iv) असत्य
2. अमोल का जन्म 6 मई को पूर्णिमा के दिन हुआ था। क्या उसका जन्मदिन प्रतिवर्ष पूर्णिमा के दिन ही होता है? अपने उत्तर की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: नहीं, अमोल का जन्मदिन प्रतिवर्ष पूर्णिमा के दिन नहीं होगा।
व्याख्या: पूर्णिमा चंद्रमा की कलाओं के चक्र पर आधारित होती है। चंद्रमा की एक पूर्ण कला से अगली पूर्णिमा तक का समय लगभग 29.5 दिन होता है, जिसे चंद्र मास कहते हैं। जबकि हमारे सामान्य कालदर्शक (ग्रेगोरी कैलेंडर) का वर्ष 365 दिन का होता है।
चंद्र मास और सौर वर्ष की अवधि अलग-अलग होने के कारण पूर्णिमा की तिथि हर वर्ष बदल जाती है। इसलिए 6 मई को हर साल पूर्णिमा नहीं होगी।
3. ऐसी दो बातें बताइए जो चित्र 11.10 में सही नहीं दशाई गई हैं।
उत्तर: चित्र 11.10 में दो बातें सही नहीं दर्शाई गई हैं —
- चंद्रमा को बादलों के साथ दिखाया गया है।
वास्तव में चंद्रमा पृथ्वी से बहुत दूर अंतरिक्ष में होता है और बादल पृथ्वी के वायुमंडल में होते हैं, इसलिए चंद्रमा बादलों के बीच इस प्रकार नहीं होता। - चंद्रमा के चारों ओर तारे दिखाए गए हैं।
वास्तव में जब चंद्रमा चमकता है तो उसकी अधिक चमक के कारण उसके आसपास के तारे सामान्यतः दिखाई नहीं देते।
4. चित्र 11.11 में दर्शाई गई चंद्रमा की कलाओं के चित्रों को देखिए और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
(i) उपर्युक्त चित्र में दर्शाई गई चंद्रमा की कलाओं के संगत सही नामाक्षर लिखिए।
उत्तर:
| चित्र का नामाक्षर (त, थ, द आदि) | चंद्रमा की कलाएँ |
| ध | अमावस्या के तीन दिन बाद |
| न | पूर्णचंद्र |
| त | पूर्णिमा के तीन दिन बाद |
| द | पूर्णिमा के एक सप्ताह बाद |
| थ | अमावस्या का दिन |
(ii) चित्र में दर्शाई गई चंद्रमा की उन कलाओं के नामाक्षर लिखिए जो पृथ्वी से दिखाई नहीं देती। (संकेत- संदर्भ के लिए आप क्रियाकलाप 11.1 के अपने अवलोकनों अथवा चित्र 11.2 का उपयोग कर सकते हैं।)
उत्तर: थ (अमावस्या / नवचंद्र)
5. मालिनी ने सूर्यास्त के समय चंद्रमा को ठीक अपने सिर के ऊपर देखा-
(i) मालिनी द्वारा प्रेक्षित चंद्रमा की कला का चित्र बनाइए।
उत्तर: सूर्यास्त के समय, चंद्रमा केवल प्रथम चौथाई (अमावस्या के एक सप्ताह बाद) के दौरान ही सिर के ऊपर होता है, जब उसका दायाँ आधा भाग प्रकाशित होता है। इसलिए, हमें आधा चंद्रमा (दायाँ आधा भाग चमकीला, बायाँ आधा भाग अंधकारमय) बनाना होगा।
(ii) क्या यह चंद्रमा का वर्धमान काल है या क्षीयमाण काल है?
उत्तर: चंद्रमा बढ़ते चरण में है क्योंकि सूर्यास्त के समय सिर के ऊपर आधा चंद्रमा (प्रथम चौथाई) दिखाई देता है, और ऐसा केवल तभी होता है जब चंद्रमा का चमकीला भाग बढ़ रहा होता है।
6. रवि ने कहा, “मैंने एक बालचंद्र देखा और जब सूर्य अस्त हो रहा था तो यह पूर्व में उदित हो रहा था।” कौशल्या ने कहा, “एक बार मैंने दोपहर के समय पूर्व दिशा में अर्धाधिक चंद्र देखा था।” दोनों में से किसकी बात सत्य है?
उत्तर:
रवि का कथन:
रवि ने कहा कि उसने बालचंद्र (Crescent Moon) देखा और सूर्यास्त के समय वह पूर्व में उदित हो रहा था।
यह गलत है, क्योंकि सूर्यास्त के समय पूर्व में पूर्णिमा के आसपास का चंद्रमा उदित होता है, न कि बालचंद्र।
कौशल्या का कथन:
कौशल्या ने कहा कि उसने दोपहर के समय पूर्व दिशा में अर्धाधिक चंद्र (Gibbous Moon) देखा।
यह सही है, क्योंकि अर्धाधिक चंद्र कभी-कभी दोपहर या दिन के समय भी दिखाई दे सकता है।
7. वैज्ञानिक अध्ययन दर्शाते हैं कि चंद्रमा पृथ्वी से दूर हट रहा है और इसकी परिक्रमण गति कम हो रही है। इससे चंद्र-सौर कालदर्शक में प्रायः अंतर्वेशी मास बढ़ाने की आवश्यकता होगी या घटाने की आवश्यकता होगी।
उत्तर: चंद्रमा के पृथ्वी से दूर जाने और उसकी परिक्रमण गति कम होने का अर्थ है कि चंद्रमा को अपनी कलाओं का एक पूरा चक्र पूरा करने में पहले से अधिक समय लगेगा (अर्थात एक चंद्र मास थोड़ा लंबा हो जाएगा)।
जब चंद्र मास लंबा हो जाएगा, तो 12 चंद्र मासों का कुल समय सौर वर्ष (≈365 दिन) के अधिक निकट हो जाएगा। इसलिए सौर वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच का अंतर कम हो जाएगा।
इसी कारण चंद्र-सौर कालदर्शक में अंतर को ठीक करने के लिए जो अंतर्वेशी मास (अधिक मास) जोड़ा जाता है, उसकी आवश्यकता कम पड़ने लगेगी।
8. किसी सौर कालदर्शक में 3 वर्ष की अवधि में कुल 37 पूर्णिमाएँ आती हैं। दर्शाइए कि इन 37 पूर्णिमाओं में से कम से कम दो पूर्णिमाएँ सौर कालदर्शक के एक ही महीने में आएँगी।
उत्तर: 3 वर्षों में सौर कालदर्शक के कुल महीने =
3 × 12 = 36 महीने
दिया है कि 3 वर्षों में 37 पूर्णिमाएँ आती हैं।
अब यदि हर महीने में केवल 1 पूर्णिमा आए, तो
36 महीनों में अधिकतम 36 पूर्णिमाएँ ही आ सकती हैं।
लेकिन यहाँ 37 पूर्णिमाएँ हैं।
इसका अर्थ है कि एक अतिरिक्त पूर्णिमा किसी एक महीने में आएगी।
इसलिए कम से कम एक महीने में 2 पूर्णिमाएँ अवश्य होंगी।
निष्कर्ष:
37 पूर्णिमाओं में से कम से कम दो पूर्णिमाएँ सौर कालदर्शक के एक ही महीने में आएँगी।
9. किसी विशेष रात्रि में वैशाली ने आकाश में चंद्रमा का सूर्यास्त से सूर्योदय तक अवलोकन किया। उसने चंद्रमा की किस कला का अवलोकन किया होगा?
उत्तर: यदि चंद्रमा सूर्यास्त के समय उदित होता है और सूर्योदय तक दिखाई देता है, तो वह पूरी रात आकाश में रहता है।
ऐसा केवल पूर्णिमा (Full Moon) के दिन होता है, क्योंकि उस दिन चंद्रमा सूर्य के विपरीत दिशा में होता है—
- सूर्यास्त के समय चंद्रोदय होता है
- और सूर्योदय के समय चंद्रास्त होता है।
वैशाली ने पूर्णिमा (पूर्णचंद्र) की कला का अवलोकन किया होगा।
10. यदि हम अधिवर्षों (लीप वर्ष) को गणना में लेना बंद कर दें तो लगभग कितने वर्षों के पश्चात भारत का स्वतंत्रता दिवस शीत ऋतु में पड़ेगा?
उत्तर: एक लीप वर्ष में लगभग हर 4 साल में 1 दिन जुड़ जाता है।
लीप वर्ष के बिना, कैलेंडर हर 4 साल में 1 दिन आगे बढ़ जाता है।
15 अगस्त (मानसून) और शीत ऋतु (मध्य फरवरी) के बीच लगभग 183 दिन होते हैं।
183 दिन × 4 = 732 वर्ष
लगभग 730-732 वर्षों में, 15 अगस्त शीत ऋतु में पड़ेगा।
11. कृत्रिम उपग्रहों के प्रमोचन का उद्देश्य क्या होता है?
उत्तर: कृत्रिम उपग्रहों के प्रमोचन का उद्देश्य पृथ्वी और अंतरिक्ष से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करना और विभिन्न कार्यों में सहायता करना होता है।
मुख्य उद्देश्य:
- संचार (Communication) – टीवी, मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं में सहायता।
- मौसम पूर्वानुमान (Weather forecasting) – मौसम की जानकारी और तूफान आदि की चेतावनी देना।
- यान संचालन / नेविगेशन (Navigation) – जहाज, विमान और GPS की सहायता।
- पृथ्वी का अवलोकन (Earth observation) – मानचित्र बनाना, पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों का अध्ययन।
- आपदा प्रबंधन (Disaster management) – बाढ़, भूकंप, चक्रवात आदि की जानकारी देना।
- वैज्ञानिक अनुसंधान (Scientific research) – अंतरिक्ष और खगोलीय पिंडों का अध्ययन।
कृत्रिम उपग्रहों का प्रमोचन संचार, मौसम पूर्वानुमान, नेविगेशन, पृथ्वी के अवलोकन, आपदा प्रबंधन और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए किया जाता है।
12. समय के निम्नलिखित माप किन आवर्ती परिघटनाओं पर आधारित हैं-
(i) दिवस
(ii) मास
(iii) वर्ष
उत्तर:
(i) दिवस (Day) – पृथ्वी का अपने अक्ष पर घूर्णन (जिससे दिन-रात का चक्र बनता है)।
(ii) मास (Month) – चंद्रमा की कलाओं का चक्र / चंद्रमा का पृथ्वी के चारों ओर परिक्रमण।
(iii) वर्ष (Year) – पृथ्वी का सूर्य के चारों ओर एक परिक्रमा करना (ऋतुओं का चक्र)।






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