हमारा आवास — पृथ्वी एक अद्वितीय जीवनदायी ग्रह
जिज्ञासा बनाए रखें
1. ऐसा कौन-सा प्रमुख कारण है जिससे वर्तमान में मंगल ग्रह पर पृथ्वी के समान जीवन संभव नहीं है?
(i) इस पर अनेक ज्वालामुखी हैं।
(ii) यह सूर्य के अधिक निकट है।
(iii) इस पर सघन वायुमंडल और द्रव जल का अभाव है।
(iv) इसका चुंबकीय क्षेत्र अत्यंत प्रबल है।
उत्तर: (iii) इस पर सघन वायुमंडल और द्रव जल का अभाव है।
2. इनमें से कौन-सा भूविविधता का उदाहरण है?
(i) जंगल में विविध पक्षियों की चहचहाहट।
(ii) विभिन्न भू-आकृतियाँ, जैसे- पहाड़, घाटियाँ और मरुस्थल।
(iii) मानसून के समय मौसम में परिवर्तन।
(iv) तालाब में विभिन्न प्रकार की मछलियाँ।
उत्तर: (ii) विभिन्न भू-आकृतियाँ, जैसे- पहाड़, घाटियाँ और मरुस्थल।
3. यदि पृथ्वी अत्यधिक छोटी होती और उसका घनत्व समान होता तो उसके वायुमंडल का क्या होता?
(i) यह अधिक सघन और गरम हो जाता।
(ii) दुर्बल गुरुत्व के कारण यह अंतरिक्ष में चला जाता।
(iii) यह जम जाता।
(iv) इससे प्रबल पवन चलने लगती।
उत्तर: (ii) दुर्बल गुरुत्व के कारण यह अंतरिक्ष में चला जाता।
4. लैंगिक जनन में संतति अपने माता-पिता से भिन्न क्यों होती हैं?
(i) उनकी वृद्धि विभिन्न जलवायु में होती है।
(ii) वह विभिन्न प्रकार का भोजन ग्रहण करते हैं।
(iii) वह जन्म के पश्चात नए आनुवंशिक अनुदेश प्राप्त करते हैं।
(iv) वह माता-पिता दोनों से मिश्रित अनुदेश (जीन) प्राप्त करते हैं।
उत्तर: (iv) वह माता-पिता दोनों से मिश्रित अनुदेश (जीन) प्राप्त करते हैं।
5. आपने मानसून के पश्चात अपने विद्यालय की दीवार की दरारों में छोटे-छोटे हरे पौधे उगते देखे होंगे। आपके अनुसार ये बीज कहाँ से आए? किन परिस्थितियों ने इन पौधों को वहाँ उगने में सहायता की होगी?
उत्तर: मानसून के बाद विद्यालय की दीवारों की दरारों में उगने वाले छोटे-छोटे हरे पौधों के बीज कई स्थानों से आ सकते हैं।
बीज कहाँ से आए होंगे?
- हवा द्वारा – हवा बीजों को उड़ाकर दीवार की दरारों में पहुँचा देती है।
- पक्षियों द्वारा – पक्षी फल या बीज खाते हैं और उनके बीज मल के साथ या चोंच से गिरकर दरारों में पहुँच सकते हैं।
- पानी द्वारा – वर्षा का पानी बहकर मिट्टी और बीजों को दरारों में जमा कर देता है।
- आसपास के पौधों से – पास में लगे पेड़ों या घास के बीज गिरकर वहाँ पहुँच जाते हैं।
किन परिस्थितियों ने पौधों को वहाँ उगने में सहायता की?
- नमी (पानी) – मानसून के बाद दीवार की दरारों में पर्याप्त नमी रहती है, जो बीज के अंकुरण के लिए जरूरी है।
- मिट्टी या धूल का जमा होना – दरारों में थोड़ी मिट्टी या धूल जमा हो जाती है, जिससे पौधों को पोषण मिलता है।
- सूर्य का प्रकाश – दीवार पर पड़ने वाली धूप पौधों के बढ़ने में मदद करती है।
- उचित तापमान – मानसून के बाद का मौसम अंकुरण के लिए अनुकूल होता है।
निष्कर्ष: इस प्रकार हवा, पानी, पक्षियों आदि द्वारा आए बीज जब दरारों में नमी, मिट्टी, धूप और अनुकूल तापमान पाते हैं, तो वहाँ छोटे-छोटे पौधे उगने लगते हैं।
6. कुछ समय पूर्व ही एक शहर में नई सड़कें और भवन बनाने के लिए जंगल का एक बड़ाभाग काट दिया गया। यह स्थानीय जलवायु एवं जैव विविधता को किस प्रकार प्रभावित करेगा? इससे स्थानीय क्षेत्र में जल की उपलब्धता अथवा गुणवत्ता पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
उत्तर: जंगल काटने से स्थानीय जलवायु गर्म और शुष्क हो सकती है तथा वर्षा कम हो सकती है। इससे जैव विविधता घटती है क्योंकि कई पौधे और जानवरों का आवास नष्ट हो जाता है।
इसका प्रभाव जल पर भी पड़ता है—पेड़ों की कमी से वर्षा का पानी जमीन में कम समाता है, जिससे भूजल की मात्रा घट सकती है और पानी की गुणवत्ता भी खराब हो सकती है।
7. एक मित्र कहता है, “पृथ्वी पर अतीत में भी जलवायु परिवर्तन होते रहे हैं इसलिए आज का वैश्विक तापन कोई नई बात नहीं है।” आपने अपनी विज्ञान की पुस्तक के इस अध्याय एवं अन्य अध्यायों में जो सीखा है उसका उपयोग करके आप क्या प्रतिक्रिया देंगे?
उत्तर: यह सही है कि पृथ्वी पर पहले भी जलवायु परिवर्तन हुए हैं, लेकिन आज का वैश्विक तापन मुख्यतः मानव गतिविधियों के कारण हो रहा है। उद्योगों, वाहनों और वनों की कटाई से ग्रीनहाउस गैसें बढ़ रही हैं, जिससे पृथ्वी का तापमान तेजी से बढ़ रहा है। इसलिए वर्तमान जलवायु परिवर्तन पहले की तुलना में अधिक तेज़ और चिंताजनक है।
8. कल्पना कीजिए कि यदि पृथ्वी पर उसका चुंबकीय क्षेत्र अचानक लुप्त हो जाए तो पृथ्वी पर जीवन के लिए किस प्रकार की समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं? व्याख्या कीजिए।
उत्तर: यदि पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र अचानक समाप्त हो जाए तो कई समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। चुंबकीय क्षेत्र सूर्य से आने वाले हानिकारक कणों और विकिरण से पृथ्वी की रक्षा करता है। इसके बिना ये विकिरण सीधे पृथ्वी तक पहुँचकर जीवों के लिए हानिकारक हो सकते हैं।
साथ ही, वायुमंडल भी धीरे-धीरे अंतरिक्ष में निकल सकता है और पक्षियों व जानवरों की दिशा पहचानने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इससे पृथ्वी पर जीवन के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
9. मंगल ग्रह पर मनुष्यों के लिए एक नई बस्ती की अभिकल्पना बनाने के कार्य का उत्तरदायित्व दिया गया है। वहाँ मानव जीवन को बनाए रखने के लिए आपको पृथ्वी पर उपलब्ध तीन वस्तुएँ मंगल ग्रह पर पुनः बनानी होंगी। इनमें से किस वस्तु को वहाँ प्रतिकृत करना सबसे कठिन लगता है और क्यों?
उत्तर: मंगल ग्रह पर मानव जीवन के लिए वायु, पानी और उपयुक्त वायुमंडल आवश्यक होंगे। इनमें से पृथ्वी जैसा वायुमंडल बनाना सबसे कठिन होगा, क्योंकि इसके लिए सही गैसों का संतुलन, उचित दाब और तापमान बनाए रखना बहुत जटिल है।
इसके बिना मनुष्यों को साँस लेने और जीवित रहने में कठिनाई होगी।
10. एक गाँव में विगत वर्षों से तापमान में वृद्धि हो रही है एवं वर्षा अप्रत्याशित हो गई है। इस परिवर्तन का क्या कारण हो सकता है? ऐसे दो उपाय बताइए जिन्हें अपना कर यह गाँव उन नई परिस्थितियों के अनुसार अनुकूलन कर सके।
उत्तर: तापमान में वृद्धि और वर्षा के अप्रत्याशित होने का कारण जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई और प्रदूषण हो सकता है।
गाँव इन परिस्थितियों के अनुसार अनुकूलन के लिए:
- वृक्षारोपण बढ़ाना और पर्यावरण की रक्षा करना।
- वर्षा जल संचयन (Rainwater harvesting) करके पानी का संरक्षण करना।
11. यदि पृथ्वी पर वायुमंडल न होता तो क्या यह पृथ्वी पर जीवन, तापमान एवं जल को प्रभावित करता? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: यदि पृथ्वी पर वायुमंडल न होता तो जीवन संभव नहीं होता। वायुमंडल हमें हानिकारक सूर्य किरणों से बचाता है और साँस लेने के लिए आवश्यक गैसें प्रदान करता है।
इसके बिना पृथ्वी का तापमान बहुत अधिक या बहुत कम हो जाता और जल तरल रूप में नहीं रह पाता, इसलिए पृथ्वी पर जीवन नहीं रह पाता।
12. कायिक प्रवर्धन के पाँच उदाहरणों पर चर्चा कीजिए।
उत्तर: कायिक प्रवर्धन (Vegetative propagation) वह प्रक्रिया है जिसमें पौधे अपने किसी भाग (जैसे तना, जड़, पत्ती) से नए पौधे बनाते हैं। इसके पाँच उदाहरण:
- आलू – तने के कंद से नया पौधा उगता है।
- अदरक – भूमिगत तने (राइजोम) से नया पौधा बनता है।
- प्याज – बल्ब से नया पौधा उगता है।
- ब्रायोफिलम – पत्तियों के किनारों से नए पौधे बनते हैं।
- गन्ना – तने के टुकड़ों से नया पौधा उगाया जाता है।

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