अदृश्य जीव-जगत – हमारी आँखों की क्षमता से परे
जिज्ञासा बनाए रखें
1. कोशिका के विभिन्न भागों के नाम निम्नलिखित हैं। इन्हें निम्नांकित आरेख में उपयुक्त स्थानों पर लिखिए।
केंद्रक कोशिकाद्रव्य
हरित लवक कोशिका भित्ति
कोशिका झिल्ली केंद्रकाभ
उत्तर:
2. आनंदी ने दो परखनली लीं एवं उन्हें ‘क’ और ‘ख’ से चिह्नित किया। उसने प्रत्येक परखनली में दो चम्मच चीनी का घोल डाला। परखनली ‘ख’ में उसने एक चम्मच खमीर (यीस्ट) डाला। इसके पश्चात उसने प्रत्येक परखनली के मुँह पर दो कम फूले हुए गुब्बारे लगाए। उसने इस व्यवस्थापन को धूप से दूर गरम स्थान पर रखा।
(i) क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि 3-4 घंटे के पश्चात क्या होगा? उसने देखा कि परखनली ‘ख’ से जुड़ा गुब्बारा फूला हुआ था। इसका संभावित स्पष्टीकरण क्या हो सकता है?
(क) परखनली ‘ख’ में पानी वाष्पित हो गया और गुब्बारे में जलवाष्प भर गई।
(ख) गरम वातावरण ने परखनली ‘ख’ के भीतर की हवा को फैला दिया जिससे गुब्बारा फूल गया।
(ग) यीस्ट ने परखनली ‘ख’ के भीतर एक गैस उत्पन्न की जिससे गुब्बारा फूल गया।
(घ) चीनी ने गरम हवा के साथ अभिक्रिया की जिससे गैस उत्पन्न हुई और अंततः गुब्बारा फूल गया।
उत्तर: 3–4 घंटे बाद परखनली ‘ख’ (जिसमें यीस्ट डाला गया था) से जुड़ा गुब्बारा फूल जाएगा, जबकि परखनली ‘क’ का गुब्बारा फूला हुआ नहीं होगा।
(ग) यीस्ट ने परखनली ‘ख’ के भीतर एक गैस उत्पन्न की जिससे गुब्बारा फूल गया।
(ii) आनंदी ने एक और परखनली ली जो चूने के पानी से 1/4 भरी थी। उसने परखनली ‘ख’ से गुब्बारे को इस तरह निकाला कि गुब्बारे में भरी हुई गैस बाहर न निकले। उसने गुब्बारे को चूने के पानी वाली परखनली से जोड़ा और उसे अच्छी तरह हिलाया। आपके विचार से वह क्या जानना चाहती है?
उत्तर: आनंदी यह जाँचना चाहती है कि परखनली ‘ख’ में बनी गैस कार्बन डाइऑक्साइड है या नहीं।
खमीर चीनी के घोल में किण्वन करके कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनाता है। यदि यह गैस चूने के पानी में प्रवाहित की जाए तो चूने का पानी दूधिया हो जाता है।
इससे सिद्ध होता है कि उत्पन्न गैस कार्बन डाइऑक्साइड है।
3. एक किसान अपने खेत में गेहूँ की फसल की बुवाई कर रहा था। उसने फसल की अच्छी उपज पाने के लिए मिट्टी में नाइट्रोजन समृद्ध उर्वरक डाला। पड़ोस के खेत में एक और किसान सेम की फसल उगा रहा था परंतु उसने स्वस्थ फसल प्राप्त करने के लिए नाइट्रोजन समृद्ध उर्वरक नहीं डाला। क्या आप इसके कारणों पर विचार कर सकते हैैं?
उत्तर: सेम एक फलीदार फसल है जिसकी जड़ों में मूल ग्रंथिकाएँ होती हैं। इन ग्रंथिकाओं में राइजोबियम जीवाणु पाए जाते हैं।
ये जीवाणु वायु से नाइट्रोजन अवशोषित करके उसे पौधों के लिए उपयोगी रूप में बदल देते हैं। इसलिए सेम की फसल को अतिरिक्त नाइट्रोजन उर्वरक की आवश्यकता नहीं होती, जबकि गेहूँ जैसी फसल में यह जीवाणु नहीं होते, इसलिए उसमें नाइट्रोजन उर्वरक डाला जाता है।
4. स्नेहल ने अपने बगीचे में दो गड्ढे ‘क’ और ‘ख’ खोदे। गड्डा ‘क’ में उसने फलों और सब्जियों के छिलके डाले और उन्हें सूखे पत्तों के साथ मिला दिया। गड्डा ‘ख’ में उसने उसी तरह के कचरे को सूखे पत्तों के साथ मिलाए बिना डाल दिया। उसने दोनों गड्डों को मिट्टी से ढक दिया और 3 सप्ताह बाद देखा। वह क्या जाँचने का प्रयास कर रही है?
उत्तर: स्नेहल यह जाँचने का प्रयास कर रही थी कि फलों-सब्जियों के कचरे को सूखे पत्तों के साथ मिलाने पर वह जल्दी और अच्छी तरह खाद में बदलता है या नहीं।
वह देखना चाहती थी कि सूक्ष्मजीवों द्वारा विघटन की प्रक्रिया में सूखे पत्तों का क्या प्रभाव पड़ता है और किस गड्ढे में बेहतर खाद बनती है।
5. निम्नलिखित सूक्ष्मजीवों की पहचान करें-
(i) मैं प्रत्येक प्रकार के वातावरण में और आपकी आँत में रहता हूँ।
(ii) मैं पावरोटी और केक को मुलायम और फूला हुआ बनाता हूँ।
(iii) मैं दलहनी (फलीदार) फसलों की जड़ों में रहता हूँ और उनकी वृद्धि के लिए पोषक तत्व प्रदान करता हूँ।
उत्तर:
(i) जीवाणु – ये प्रत्येक प्रकार के वातावरण में तथा हमारी आँत में पाए जाते हैं।
(ii) खमीर (यीस्ट) – यह पावरोटी और केक को मुलायम और फूला हुआ बनाता है।
(iii) राइजोबियम जीवाणु – यह दलहनी (फलीदार) फसलों की जड़ों में रहता है और उन्हें नाइट्रोजन प्रदान करता है।
6. यह जाँचने के लिए एक प्रयोग अभिकल्पित कीजिए कि सूक्ष्मजीवों को अपनी वृद्धि के लिए इष्टतम तापमान, वायु और नमी की आवश्यकता होती है।
उत्तर:
प्रयोग अभिकल्पना —
- तीन ब्रेड के टुकड़े लीजिए।
- पहला टुकड़ा गरम और नम स्थान पर खुला रखिए।
- दूसरा टुकड़ा सूखे स्थान पर रखिए।
- तीसरा टुकड़ा रेफ्रिजरेटर (ठंडे स्थान) में रखिए।
कुछ दिनों बाद अवलोकन कीजिए।
परिणाम:
गरम और नम स्थान पर रखा ब्रेड जल्दी फफूँद से ढक जाएगा, जबकि सूखे या ठंडे स्थान पर रखा ब्रेड कम प्रभावित होगा।
निष्कर्ष:
इससे सिद्ध होता है कि सूक्ष्मजीवों की वृद्धि के लिए उचित तापमान, वायु और नमी आवश्यक होती है।
7. ब्रेड के 2 स्लाइस लीजिए। एक स्लाइस को सिंक के पास एक प्लेट में रखिए। दूसरे स्लाइस को रेफ्रिजरेटर में रखिए। तीन दिन पश्चात दोनों स्लाइस की तुलना कीजिए। अपने अवलोकनों को अभिलेखित कीजिए। अपने अवलोकनों के कारण बताइए।
उत्तर:
अवलोकन:
- सिंक के पास रखा ब्रेड का स्लाइस 3 दिन बाद फफूँद (हरी/काली रूई जैसी परत) से ढक जाता है।
- रेफ्रिजरेटर में रखा स्लाइस या तो बिल्कुल नहीं बदलता या बहुत कम फफूँद दिखाई देती है।
कारण:
सिंक के पास का वातावरण गरम और नम होता है, जो सूक्ष्मजीवों की वृद्धि के लिए उपयुक्त है।
रेफ्रिजरेटर का ठंडा तापमान सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को धीमा कर देता है, इसलिए वहाँ फफूँद कम लगती है।
8. एक विद्यार्थी अवलोकन करता है कि जब दही को एक दिन के लिए बाहर रखा जाता है तो वह अधिक खट्टा हो जाता है। है। इस अवलोकन के दो संभावित स्पष्टीकरण क्या हो सकते हैं?
उत्तर:
दो संभावित स्पष्टीकरण —
- दही में उपस्थित लैक्टोबैसिलस जीवाणु अधिक समय तक बाहर रहने पर दूध की शर्करा (लैक्टोज) को अधिक मात्रा में लैक्टिक अम्ल में बदल देते हैं, जिससे दही अधिक खट्टा हो जाता है।
- बाहर का गरम तापमान जीवाणुओं की वृद्धि को बढ़ाता है, जिससे किण्वन की प्रक्रिया तेज होती है और दही अधिक खट्टा बन जाता है।
9. चित्र 2.15 में दिए गए व्यवस्थापन का अवलोकन कीजिए और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
(i) फ्लास्क ‘क’ में चीनी के घोल का क्या होता है?
(ii) चार घंटे पश्चात आप परखनली ‘ख’ में क्या देखते हैं? आपके विचार से ऐसा क्यों हुआ?
(iii) यदि फ्लास्क ‘क’ में यीस्ट न डाला जाए तो क्या होगा?
उत्तर:
(i) फ्लास्क ‘क’ में उपस्थित यीस्ट चीनी के घोल का किण्वन करता है। इस प्रक्रिया में चीनी टूटकर अल्कोहल (एथेनॉल) और कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनाती है।
(ii) चार घंटे बाद परखनली ‘ख’ में चूने का पानी दूधिया (मिल्की) हो जाता है।
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि फ्लास्क ‘क’ में किण्वन के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनती है। यह गैस नली से होकर परखनली ‘ख’ में जाती है और चूने के पानी के साथ अभिक्रिया करके उसे दूधिया बना देती है।
(iii) यदि फ्लास्क ‘क’ में यीस्ट नहीं डाला जाएगा तो किण्वन नहीं होगा, इसलिए कार्बन डाइऑक्साइड गैस नहीं बनेगी और परखनली ‘ख’ में चूने का पानी दूधिया नहीं होगा।




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