विद्युत — चुंबकीय एवं तापीय प्रभाव
जिज्ञासा बनाए रखें
1. रिक्त स्थान भरिए-
(i) वोल्टीय सेल में प्रयुक्त होने वाला विलयन ________ कहलाता है।
(ii) एक धारावाही कुंडली _________ की भाँति व्यवहार करती है।
उत्तर:
(i) विद्युत-अपघट्य
(ii) चुंबक
2. सही विकल्प चुनिए-
(i) शुष्क सेल, वोल्टीय सेल की तुलना में कम सुवाह्य है। (सत्य/असत्य)
(ii) कुंडली तभी विद्युत-चुंबक बनती है जब कुंडली से विद्युत धारा प्रवाहित होती है। (सत्य/असत्य)
(iii) एक सेल के उपयोग से बना विद्युत-चुंबक दो सेलों की बैटरी के उपयोग से बने उसी विद्युत-चुंबक की अपेक्षा लोहे के अधिक कागज-क्लिपों को आकर्षित करता है। (सत्य/असत्य)
उत्तर:
(i) असत्य
(ii) सत्य
(iii) असत्य
3. किसी निक्रोम के तार में अल्प समय के लिए विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है।
(i) तार गरम हो जाता है।
(ii) तार के नीचे रखे चुंबकीय दिक्सूचक की सुई विक्षेपित हो जाती है।
सही विकल्प का चयन कीजिए-
(क) केवल विकल्प (i) सही है।
(ख) केवल विकल्प (ii) सही है।
(ग) विकल्प (i) और (ii) दोनों सही हैं।
(घ) विकल्प (i) और (ii) दोनों सही नही हैं।
उत्तर: (ग) विकल्प (i) और (ii) दोनों सही हैं।
4. स्तंभ ‘क’ में दिए गए एकांशों का मिलान स्तंभ ‘ख’ में दिए गए एकांशों से कीजिए।
उत्तर:
| स्तंभ ‘क’ | स्तंभ ‘ख’ |
| (i) वोल्टीय सेल | (घ) रासायनिक अभिक्रियाओं द्वारा विद्युत उत्पन्न करती है। |
| (ii) विद्युत इस्तरी | (ग) विद्युत धारा के तापीय प्रभाव पर कार्य करती है। |
| (iii) निक्रोम तार | (क) विद्युत तापक हेतु सर्वाधिक उपयुक्त। |
| (iv) विद्युत-चुंबक | (ख) विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव पर कार्य करती है। |
5. सामान्यतः विद्युत-तापन युक्तियों में निक्रोम तार का उपयोग किया जाता है क्योंकि यह-
(i) विद्युत का सुचालक है।
(ii) किसी निश्चित परिमाण की विद्युत धारा के लिए अधिक ऊष्मा उत्पन्न करता है।
(iii) ताँबे की अपेक्षा सस्ता है।
(iv) विद्युत का कुचालक है।
उत्तर: (ii) किसी निश्चित परिमाण की विद्युत धारा के लिए अधिक ऊष्मा उत्पन्न करता है।
6. विद्युत-तापन युक्तियों (जैसे- विद्युत कक्ष-तापक अथवा विद्युत हीटर) को प्रायः पारंपरिक तापन विधियों (जैसे- लकड़ी अथवा चारकोल जलाना) की तुलना में अधिक सुविधाजनक माना जाता है। समाज पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखते हुए इस कथन के समर्थन हेतु कारण बताइए।
उत्तर:
- विद्युत-तापन युक्तियाँ पारंपरिक तापन विधियों की तुलना में अधिक सुविधाजनक मानी जाती हैं, क्योंकि—
- इनमें धुआँ और राख नहीं बनती, इसलिए वायु प्रदूषण कम होता है।
- लकड़ी और कोयले की आवश्यकता नहीं होती, जिससे पेड़ों की कटाई कम होती है और पर्यावरण की रक्षा होती है।
- इनका उपयोग करना आसान और सुरक्षित होता है।
- इन्हें स्विच ऑन-ऑफ करके तुरंत नियंत्रित किया जा सकता है।
7. चित्र 4.4 (क) का अवलोकन कीजिए। यदि इसमें कुंडली के समीप रखे दिक्सूचक की सुई में विक्षेपण होता है तो
(i) विद्युत धारा का पथ दर्शाने हेतु आरेख पर तीर का चिह्न लगाइए।
उत्तर:
(ii) स्पष्ट कीजिए कि कुंडली में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर दिक्सूचक सुई क्यों घूमती है?
उत्तर: जब कुंडली में विद्युत धारा प्रवाहित होती है तो उसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है। यह कुंडली चुंबक की तरह व्यवहार करने लगती है। इसलिए पास रखी दिक्सूचक (कंपास) की सुई इस चुंबकीय क्षेत्र के कारण विक्षेपित होकर घूम जाती है।
(iii) यदि आप बैटरी के सिरों को उल्टा कर देते हैं तो पूर्वानुमान लगाइए कि विक्षेप पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर: यदि बैटरी के सिरों को उल्टा कर दिया जाए तो धारा की दिशा बदल जाएगी। इसके कारण कुंडली के चुंबकीय ध्रुव भी बदल जाएंगे, इसलिए दिक्सूचक सुई का विक्षेप विपरीत दिशा में होगा।
8. मान लीजिए कि अध्याय के आरंभ में उल्लिखित कहानी में सुमना अपने उत्थापक विद्युत-चुंबक प्रदर्श के स्विच को ऑफ करना भूल जाती है। कुछ समय पश्चात लोहे की कील लोहे से बनी कागज-क्लिपों को नहीं उठा पाती है परंतु लोहे की कील के चारों ओर लपेटा गया तार अभी भी गरम है। उत्थापक विद्युत-चुंबक ने क्लिपों को उठाना क्यों बंद कर दिया? संभावित कारण बताइए।
उत्तर:
यदि सुमना स्विच ऑफ करना भूल जाती है, तो लंबे समय तक धारा प्रवाहित होने के कारण सेल/बैटरी कमजोर (डिस्चार्ज) हो सकती है।
जब बैटरी कमजोर हो जाती है, तो कुंडली में पर्याप्त विद्युत धारा नहीं बहती। इसके कारण चुंबकीय क्षेत्र बहुत कमजोर हो जाता है, इसलिए विद्युत-चुंबक कागज-क्लिपों को उठाने में असमर्थ हो जाता है।
हालाँकि तार में धारा अभी भी बह रही होती है, इसलिए तार प्रतिरोध के कारण गरम होता रहता है (विद्युत धारा का तापीय प्रभाव)।
9. चित्र 4.12 (क) और (ख) में से किस चित्र में स्विच बंद (ऑन) होने पर एल.ई.डी. दीप्त होगी?
उत्तर: चित्र 4.12 (क)
कारण:
- चित्र (क) में नींबू का रस है, जो अम्लीय होता है और विद्युत-अपघट्य (electrolyte) की तरह काम करता है। इससे धारा प्रवाहित हो सकती है, इसलिए स्विच ऑन करने पर एल.ई.डी. जल जाएगी।
- चित्र (ख) में शुद्ध जल है, जो बहुत खराब चालक होता है, इसलिए उसमें धारा लगभग नहीं बहती और एल.ई.डी. नहीं जलेगी।
10. नेहा ठीक वैसी ही कुंडली लेती है जैसी क्रियाकलाप 4.4 में ली गई थी किंतु वह इसके भीतर से लोहे की कील को बाहर निकाल देती है जिससे केवल तार से बनी कुंडली ही रह जाती है। क्या कुंडली अभी भी दिक्सूचक सुई को विक्षेपित करेगी? यदि हाँ, तो क्या विक्षेपण पहले की तुलना में अधिक होगा अथवा कम?
उत्तर:
हाँ, कुंडली अभी भी दिक्सूचक सुई को विक्षेपित करेगी, क्योंकि जब कुंडली में विद्युत धारा प्रवाहित होती है तो उसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है।
लेकिन यदि लोहे की कील (लौह क्रोड) निकाल दी जाए, तो चुंबकीय क्षेत्र कमज़ोर हो जाता है। इसलिए दिक्सूचक सुई का विक्षेप पहले की तुलना में कम होगा।
11. चित्र 4.13 में दर्शाए अनुसार हमारे पास लोहा, ताँबा, ऐलुमिनियम एवं निक्रोम की बनी एक जैसी आकृति और आकार की चार कुंडलियाँ है।
जब कुंडलियों से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तो कुंडलियों के समीप रखी दिक्सूचक सुइयाँ विक्षेप दर्शाएँगी-
(i) केवल परिपथ (क) में
(ii) केवल परिपथ (क) और (ख) में
(iii) केवल परिपथ (क), (ख) और (ग) में
(iv) सभी चारों परिपथों में
उत्तर: (iv) सभी चारों परिपथों में।






Leave a Reply