न लभ्यते चेत्आम्लं द्राक्षाफलम्
शिक्षक – प्रिय छात्रो! यह चित्र देखो । चित्र में क्या-क्या है?
– महोदय! चित्र में वृक्ष है।
– महोदय! सियार है। अंगूर भी हैं।
शिक्षक – बहुत ठीक। सियार क्या कर रहा है?
– आचार्य! सियार अंगूर खाना चाहता है किन्तु नहीं खा सकता है।
शिक्षक – अरे! आप कैसे जानते हो?
शिक्षक – महोदय! हमने इस कथा को मातृभाषा से सुना है।
शिक्षक – बहुत अच्छा। उचित तो संस्कृतभाषा में इस कथा को गीत के रूप से गाते हैं और अभिनय करते हैं।
– अच्छा आचार्य! कृपया पढ़ाइए।
एकः शृगालः वनं गच्छति।
(एक लोमड़ी जंगल में जाती है।)
पिपासा, तस्य बुभुक्षा।
(प्यास, उसकी भूख।)
पिपासया बुभुक्षया वनं गच्छति।
(प्यास और भूख के कारण जंगल में जाती है।)
सः वनं गच्छति, सः वनं गच्छति।
(वह जंगल में जाता है, वह जंगल में जाता है।)
तत्र गच्छति, किमपि न लभते।
(वहाँ जाता है, कुछ भी नहीं पाता।)
इतोऽपि गच्छति, किमपि न लभते।
(यहाँ से भी जाता है, कुछ भी नहीं पाता।)
श्रान्तः जायते, खिन्नः जायते।
(थक जाता है, दुखी हो जाता है।)
सः श्रान्तः जायते, खिन्नः जायते।
(वह थक जाता है, दुखी हो जाता है।)
किं च करोति? सः किं च करोति?
(और क्या करता है? वह और क्या करता है?)
वामतः पश्यति, दक्षिणतः पश्यति।
(बाईं ओर देखता है, दाईं ओर देखता है।)
अग्रतः पश्यति, पृष्ठतः पश्यति।
(आगे देखता है, पीछे देखता है।)
स्वेदः जायते, तृषा जायते।
(पसीना आता है, प्यास लगती है।)
तस्य स्वेदः जायते, तृषा जायते।
(उसका पसीना आता है, प्यास लगती है।)
किं च पश्यति? सः किं च पश्यति?
(और क्या देखता है? वह और क्या देखता है?)
किं च पश्यति? सः किं च पश्यति?
(और क्या देखता है? वह और क्या देखता है?)
पश्यति द्राक्षालताम्।
(वह अंगूर की लता देखता है।)
सः पश्यति द्राक्षाफलम्।
(वह अंगूर का फल देखता है।)
उपरि उपरि लतासु हृष्यते च तत्फलम्।
(ऊपर-ऊपर लताओं में वह फल दिखाई देता है।)
अनुक्षणं तन्मुखे रसः जायते।
(तुरंत उसके मुँह में लार आती है।)
किं च करोति? सः किं च करोति?
(और क्या करता है? वह और क्या करता है?)
एकवारम् उत्पतति, द्विवारम् उत्पतति।
(एक बार कूदता है, दो बार कूदता है।)
त्रिवारम् उत्पतति, पुनः पुनः उत्पतति।
(तीन बार कूदता है, बार-बार कूदता है।)
स्वेदः जायते, तस्य श्रमः जायते।
(पसीना आता है, उसका श्रम होता है।)
किं कथयति? सः किं कथयति?
(क्या कहता है? वह क्या कहता है?)
आक्लं द्राक्षाफलम्, आक्लं द्राक्षाफलम्।
(खट्टा अंगूर, खट्टा अंगूर।)
इत्येवं कथयति, सः पलायते।
(इस प्रकार कहता है, वह भाग जाता है।)
इत्येवं कथयति, सः पलायते।
(इस प्रकार कहता है, वह भाग जाता है।)







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