📘 अध्याय 5: मैं हूँ गोल-गोल, ऊपर-नीचे
कक्षा 9 | गणित मंजरी (Ganit Manjari) | महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
🔢 सूत्र/प्रमेय त्वरित संदर्भ
| प्रमेय | कथन |
|---|---|
| प्रमेय 1 | तीन असंरेखीय बिंदुओं से होकर जाने वाला वृत्त अद्वितीय होता है। |
| प्रमेय 2 | वृत्त की समान जीवाएँ वृत्त के केंद्र पर समान कोण अंतरित करती हैं। |
| प्रमेय 3 | केंद्र पर समान कोण अंतरित करने वाली जीवाएँ परस्पर समान होती हैं। |
| प्रमेय 4 | केंद्र को जीवा के मध्यबिंदु से मिलाने वाली रेखा जीवा पर लंब होती है। |
| प्रमेय 5 | केंद्र से जीवा पर खींचा गया लंब उस जीवा को समद्विभाजित करता है। |
| प्रमेय 6 | समान लंबाई की जीवाएँ केंद्र से समदूरस्थ होती हैं। |
| प्रमेय 7 | केंद्र से समदूरस्थ जीवाएँ समान लंबाई की होती हैं। |
| प्रमेय 8 | बड़ी जीवा की केंद्र से दूरी छोटी जीवा से कम होती है। |
| प्रमेय 9 | चाप द्वारा केंद्र पर अंतरित कोण, शेष भाग के किसी बिंदु पर अंतरित कोण का दोगुना होता है। |
| उपप्रमेय | व्यास द्वारा वृत्त के किसी भी बिंदु पर अंतरित कोण 90° होता है। |
| प्रमेय 10 | समान कोण अंतरित करने वाले चार बिंदु एक ही वृत्त पर स्थित होते हैं (संवृत्तीय)। |
| प्रमेय 11 | चक्रीय चतुर्भुज के सम्मुख कोणों का योगफल 180° होता है। |
| प्रमेय 12 | यदि सम्मुख कोणों का योग 180° हो तो चतुर्भुज चक्रीय होता है। |
| जीवा की लंबाई | जीवा की लंबाई = 2√(r² − d²), जहाँ r त्रिज्या और d केंद्र से लंबवत दूरी है। |
🔹 भाग 1: लघु उत्तरीय प्रश्न (15 प्रश्न)
प्रश्न 1: वृत्त की परिभाषा दीजिए।⭐
उत्तर: वृत्त किसी समतल पर उन सभी बिंदुओं का समूह है, जो उस समतल पर किसी दिए गए बिंदु से समदूरस्थ हैं। यह दिया गया बिंदु वृत्त का केंद्र है।
प्रश्न 2: त्रिज्या किसे कहते हैं?⭐
उत्तर: केंद्र से वृत्त के किसी भी बिंदु के मध्य की दूरी वृत्त की त्रिज्या कहलाती है।
प्रश्न 3: जीवा किसे कहते हैं?⭐
उत्तर: वृत्त पर स्थित दो बिंदुओं को मिलाने वाला रेखाखंड जीवा कहलाती है।
प्रश्न 4: व्यास किसे कहते हैं?⭐
उत्तर: वह जीवा, जो वृत्त के केंद्र से होकर गुजरती है, उसे वृत्त का व्यास कहते हैं। वृत्त के सभी व्यास परावर्तन सममिति की रेखाएँ हैं।
प्रश्न 5: परिवृत्त और परिकेंद्र किसे कहते हैं?⭐⭐
उत्तर: त्रिभुज के तीनों शीर्षों से होकर जाते हुए वृत्त को परिवृत्त कहते हैं, और इस वृत्त के केंद्र को त्रिभुज का परिकेंद्र कहते हैं।
प्रश्न 6: प्रमेय 1 के अनुसार तीन असंरेखीय बिंदुओं से होकर कितने वृत्त जाते हैं?⭐
उत्तर: तीन असंरेखीय बिंदुओं से होकर जाने वाला वृत्त अद्वितीय (केवल एक ही) होता है।
प्रश्न 7: वृत्त की समान जीवाओं के संबंध में प्रमेय 2 क्या बताती है?⭐⭐
उत्तर: वृत्त की समान जीवाएँ वृत्त के केंद्र पर समान कोण अंतरित करती हैं।
प्रश्न 8: दीर्घ चाप और लघु चाप में क्या अंतर है?⭐⭐
उत्तर: वृत्त पर दो बिंदुओं के बीच बड़ा मार्ग दीर्घ चाप और छोटा मार्ग लघु चाप कहलाता है।
प्रश्न 9: संवृत्तीय बिंदु किसे कहते हैं?⭐
उत्तर: एक ही वृत्त पर स्थित बिंदुओं को संवृत्तीय बिंदु कहते हैं।
प्रश्न 10: चक्रीय चतुर्भुज किसे कहते हैं?⭐
उत्तर: जब किसी चतुर्भुज के शीर्ष संवृत्तीय होते हैं (अर्थात एक ही वृत्त पर स्थित होते हैं) तो वह चतुर्भुज चक्रीय चतुर्भुज कहलाता है।
प्रश्न 11: प्रमेय 11 के अनुसार चक्रीय चतुर्भुज के सम्मुख कोणों का योगफल कितना होता है?⭐⭐
उत्तर: चक्रीय चतुर्भुज के सम्मुख कोणों का योगफल 180° होता है।
प्रश्न 12: व्यास द्वारा वृत्त के किसी भी बिंदु पर अंतरित कोण कितना होता है?⭐⭐
उत्तर: व्यास द्वारा वृत्त के किसी भी बिंदु पर अंतरित कोण 90° होता है (उपप्रमेय)।
प्रश्न 13: किसी भी न्यूनकोण त्रिभुज के लिए परिकेंद्र कहाँ स्थित होता है?⭐⭐
उत्तर: किसी भी न्यूनकोण त्रिभुज के लिए परिकेंद्र त्रिभुज के अंदर स्थित होता है।
प्रश्न 14: किसी समकोण त्रिभुज के लिए परिकेंद्र कहाँ स्थित होता है?⭐⭐
उत्तर: किसी भी समकोण त्रिभुज के लिए परिकेंद्र त्रिभुज के कर्ण के मध्यबिंदु पर स्थित होता है।
प्रश्न 15: वृत्त का व्यास सबसे बड़ी जीवा क्यों होता है?⭐⭐
उत्तर: क्योंकि केंद्र से समीपस्थ जीवा वह जीवा होती है जिस पर केंद्र स्थित होता है, अर्थात केंद्र से इसकी दूरी शून्य होती है — और बड़ी जीवा हमेशा केंद्र के अधिक समीप होती है (प्रमेय 8 के अनुसार), इसलिए व्यास सबसे बड़ी जीवा होता है।
🔹 भाग 2: दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (10 प्रश्न)
प्रश्न 1: प्रमेय 1 सिद्ध कीजिए — तीन असंरेखीय बिंदुओं से होकर जाने वाला वृत्त अद्वितीय होता है। ⭐⭐⭐
दिया है: तीन असंरेखीय बिंदु A, B और C
चरण 1: यदि कोई वृत्त है जो A, B, C से होकर जाता है तो इसका केंद्र होगा। इसे बिंदु O कहते हैं। क्योंकि OA = OB है, अतः O, AB के लंब समद्विभाजक पर स्थित है।
चरण 2: क्योंकि OA = OC है, अतः O, AC के लंब समद्विभाजक पर भी स्थित है।
चरण 3: चूँकि A, B, C संरेखीय नहीं हैं, अतः AB और AC के लंब समद्विभाजक केवल एक बिंदु पर प्रतिच्छेद करेंगे (क्योंकि समतल पर दो प्रतिच्छेदी रेखाएँ केवल एक ही बिंदु पर मिलती हैं)। यह प्रतिच्छेद बिंदु O होगा।
∴ O को केंद्र मानते हुए OA की लंबाई के समान त्रिज्या का वृत्त बनाया जा सकता है, जो A, B और C से होकर जाएगा — इस प्रकार यह वृत्त अद्वितीय है (सिद्ध)।
प्रश्न 2: प्रमेय 2 सिद्ध कीजिए — वृत्त की समान जीवाएँ वृत्त के केंद्र पर समान कोण अंतरित करती हैं। ⭐⭐⭐
दिया है: AB = DE (दो समान लंबाई की जीवाएँ), C वृत्त का केंद्र है
सिद्ध करना है: ∠ACB = ∠DCE
चरण 1: CA = CB = r (वृत्त की त्रिज्या), साथ ही CD = CE = r। अतः CA = CD और CB = CE है।
चरण 2: दिया गया है कि AB = DE है।
चरण 3: SSS सर्वांगसमता प्रतिबंध द्वारा ΔCAB, ΔCDE के सर्वांगसम है।
∴ ∠ACB = ∠DCE है, अर्थात केंद्र पर अंतरित कोण समान हैं (सिद्ध)।
प्रश्न 3: प्रमेय 4 सिद्ध कीजिए — किसी वृत्त में केंद्र को जीवा के मध्यबिंदु से मिलाने वाली रेखा जीवा पर लंब होती है। ⭐⭐⭐
दिया है: केंद्र C वाला एक वृत्त, जीवा AB, बिंदु M जीवा AB का मध्यबिंदु है
सिद्ध करना है: CM, AB पर लंब है
चरण 1: CAB एक समद्विबाहु त्रिभुज है, जिसमें CA = CB है, अतः ∠A = ∠B होगा।
चरण 2: M, AB का मध्यबिंदु है, अतः AM = BM है। SAS सर्वांगसमता प्रतिबंध द्वारा ΔCMA, ΔCMB के सर्वांगसम है।
चरण 3: अतः ∠CMB = ∠CMA होगा। किंतु ∠CMB + ∠CMA = 180° (रेखीय युग्म) है।
∴ दोनों कोणों की माप 90° होगी, अर्थात CM, जीवा AB पर लंब है (सिद्ध)।
प्रश्न 4: प्रमेय 8 सिद्ध कीजिए — यदि AB > DE तो C से AB की दूरी, C से DE की दूरी से कम होगी। ⭐⭐⭐
दिया है: AB और DE एक वृत्त की जीवाएँ हैं, केंद्र C है, AB > DE, CF ⊥ AB और CG ⊥ DE
सिद्ध करना है: CF < CG
चरण 1: AC और CD दोनों त्रिज्याएँ हैं, अतः AC = CD। बौधायन-पाइथागोरस प्रमेय द्वारा CD² = CG² + GD² और AC² = CF² + AF²
चरण 2: अतः CF² + AF² = CG² + GD²
चरण 3: AB, DE से बड़ा है, अतः AF, GD से बड़ा होगा (क्योंकि F और G क्रमशः AB और DE के मध्यबिंदु हैं)।
∴ चूँकि AF² > GD² है, अतः CF² < CG² होगा, अर्थात CF < CG (सिद्ध)।
प्रश्न 5: प्रमेय 9 सिद्ध कीजिए — वृत्त के चाप द्वारा केंद्र पर अंतरित कोण चाप के बाहर वृत्त के शेष भाग के किसी बिंदु पर अंतरित कोण का दोगुना होता है। ⭐⭐⭐
दिया है: AFB एक चाप है। ∠ACB चाप AFB द्वारा केंद्र C पर अंतरित कोण है। D, चाप AFB से बाहर वृत्त पर स्थित बिंदु है।
सिद्ध करना है: ∠BCA = 2∠BDA
चरण 1: बिंदु D को C से मिलाइए और DC को आगे बढ़ाइए जो चाप AFB को बिंदु E पर काटता है। ΔDCB समद्विबाहु त्रिभुज है (CB = CD), अतः ∠CBD = ∠CDB। बाह्य कोण प्रमेय द्वारा ∠BCE = ∠CBD + ∠CDB = 2∠BDC
चरण 2: इसी प्रकार, ΔADC समद्विबाहु त्रिभुज है (CA = CD), अतः ∠CAD = ∠CDA। बाह्य कोण प्रमेय द्वारा ∠ACE = ∠CAD + ∠CDA = 2∠CDA
चरण 3: ∠BCA = ∠BCE + ∠ECA और ∠BDA = ∠BDE + ∠EDA है।
∴ ∠BCA = 2(∠BDC + ∠CDA) = 2∠BDA (सिद्ध)
प्रश्न 6: उपप्रमेय सिद्ध कीजिए — व्यास द्वारा वृत्त के किसी भी बिंदु पर अंतरित कोण 90° होता है। ⭐⭐⭐
दिया है: AB एक व्यास है। D वृत्त पर स्थित बिंदु है (उस चाप पर नहीं जिसमें D स्थित है)
सिद्ध करना है: ∠ADB = 90°
चरण 1: A से B तक उस चाप द्वारा केंद्र C पर अंतरित कोण ∠ACB है, जो एक ऋजु कोण (सरल कोण) अर्थात 180° है (क्योंकि AB एक व्यास है)।
चरण 2: प्रमेय 9 के अनुसार, चाप द्वारा केंद्र पर अंतरित कोण, शेष भाग के किसी बिंदु पर अंतरित कोण का दोगुना होता है — अतः ∠ADB = ½ ∠ACB
∴ ∠ADB = ½ × 180° = 90° (सिद्ध)
प्रश्न 7: प्रमेय 10 सिद्ध कीजिए — यदि रेखाखंड AB, उसके एक ही ओर स्थित दो बिंदुओं C व D पर समान कोण अंतरित करता है तो चारों बिंदु एक ही वृत्त पर स्थित होते हैं। ⭐⭐⭐
दिया है: रेखाखंड AB; बिंदु C और D, AB के एक ही ओर स्थित हैं तथा ∠ACB = ∠ADB
सिद्ध करना है: बिंदु A, B, C, D एक ही वृत्त पर स्थित हैं
चरण 1: A, B, C असंरेखीय बिंदु हैं, अतः प्रमेय 1 द्वारा एक वृत्त बिंदुओं A, B, C से होकर जाएगा।
चरण 2: मान लीजिए D इस वृत्त पर स्थित नहीं है; तब यह या तो वृत्त के अंदर होगा या बाहर। दोनों ही स्थितियों में AD को मिलाकर वृत्त से प्रतिच्छेद बिंदु E प्राप्त होता है, जहाँ ∠ACB = ∠AEB (एक ही वृत्तखंड में बने कोण)।
चरण 3: यदि D वृत्त के बाहर है तो ∠AEB, ΔBED का बहिष्कोण होगा, अतः ∠AEB > ∠ADB — लेकिन ∠AEB = ∠ACB = ∠ADB (दिया गया), जिससे ∠ACB स्वयं से बड़ा सिद्ध होता है, जो असंभव है। इसी प्रकार D के अंदर होने पर भी असंभव निष्कर्ष मिलता है।
∴ दोनों विकल्प असंभव हैं, इसलिए D अवश्य ही A, B, C से होकर जाते वृत्त पर स्थित होगा। अर्थात A, B, C, D संवृत्तीय हैं (सिद्ध)।
प्रश्न 8: प्रमेय 11 सिद्ध कीजिए — चक्रीय चतुर्भुज के सम्मुख कोणों का योगफल 180° होता है। ⭐⭐⭐
दिया है: A, B, C, D एक चक्रीय चतुर्भुज के शीर्ष हैं, वृत्त का केंद्र O है
सिद्ध करना है: ∠BAD + ∠BCD = 180°
चरण 1: चाप BCD पर विचार करें; बिंदु A वृत्त पर है और यह चाप BCD के बाहर स्थित है। अतः ∠BAD, चाप BCD द्वारा केंद्र पर अंतरित प्रतिवर्ती कोण BOD का आधा होगा: ∠BAD = ½(प्रतिवर्ती कोण BOD)
चरण 2: इसी प्रकार, ∠BCD चाप BAD द्वारा केंद्र O पर अंतरित कोण BOD का आधा है: ∠BCD = ½(∠BOD)
चरण 3: ∠BAD + ∠BCD = ½(केंद्र O पर संपूर्ण कोण) = ½(360°)
∴ ∠BAD + ∠BCD = 180° (सिद्ध)
प्रश्न 9: किसी वृत्त में, केंद्र से 5 सेंटीमीटर दूरी पर एक जीवा है। यदि वृत्त की त्रिज्या 13 सेंटीमीटर है तो जीवा की लंबाई ज्ञात कीजिए। ⭐⭐⭐
दिया है: त्रिज्या r = 13 सेंटीमीटर, केंद्र से जीवा की लंबवत दूरी d = 5 सेंटीमीटर
सूत्र: जीवा की लंबाई = 2√(r² − d²)
चरण 1: जीवा की लंबाई = 2√(13² − 5²) = 2√(169 − 25)
चरण 2: = 2√144 = 2 × 12
∴ उत्तर = जीवा की लंबाई = 24 सेंटीमीटर
प्रश्न 10: किसी वृत्त का व्यास 26 सेंटीमीटर है। वृत्त में 24 सेंटीमीटर लंबी जीवा बनाई गई है। वृत्त के केंद्र से जीवा की दूरी ज्ञात कीजिए। ⭐⭐⭐
दिया है: व्यास = 26 सेंटीमीटर, अतः त्रिज्या r = 13 सेंटीमीटर, जीवा की लंबाई = 24 सेंटीमीटर
सूत्र: प्रमेय 4 के अनुसार केंद्र से जीवा के मध्यबिंदु तक खींची रेखा जीवा पर लंब होती है, अतः बौधायन-पाइथागोरस प्रमेय से r² = d² + (जीवा/2)²
चरण 1: जीवा का आधा भाग = 24/2 = 12 सेंटीमीटर
चरण 2: 13² = d² + 12², अर्थात 169 = d² + 144, अतः d² = 25
∴ उत्तर = केंद्र से जीवा की दूरी d = 5 सेंटीमीटर

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