मैं हूँ गोल-गोल, ऊपर-नीचे (वृत्त)
कक्षा 9 | NCERT गणित मंजरी | संपूर्ण नोट्स
मनुष्य सदैव अपने आस-पास की वृत्ताकार आकृतियों से आकर्षित रहा है — ओडिशा की गुडाहांडी गुफा चित्रकलाओं में त्रिभुज, वर्ग और वृत्त जैसी ज्यामितीय आकृतियाँ मिलती हैं। जल पर गिरती वर्षा की बूँदों से बनी वृत्ताकार तरंगें, पेड़ के तने की अनुप्रस्थ काट, खिले हुए सूर्यमुखी, तथा पूर्णिमा का चंद्रमा और सूर्य — ये सभी प्रकृति में वृत्त के उदाहरण हैं।
इस अध्याय में हम वृत्त की औपचारिक परिभाषा, उसकी सममिति, जीवा (chord), जीवा द्वारा केंद्र पर अंतरित कोण, जीवा की केंद्र से दूरी, चाप द्वारा अंतरित कोण, संवृत्तीय बिंदु (concyclic points) तथा चक्रीय चतुर्भुज (cyclic quadrilateral) जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाओं और उनसे जुड़ी प्रमेयों (theorems) का अध्ययन करेंगे।
यह अध्याय ज्यामिति (geometry) खंड की नींव है और इसमें उपपत्ति (proof) लिखने तथा रचना (construction) करने वाले प्रश्न परीक्षा में बार-बार पूछे जाते हैं, इसलिए सभी प्रमेयों को समझकर याद रखना आवश्यक है।
📐 सूत्र त्वरित संदर्भ
| सूत्र / गुण | व्याख्या |
|---|---|
| त्रिज्या (Radius) | केंद्र से वृत्त के किसी भी बिंदु की दूरी |
| व्यास = 2 × त्रिज्या | केंद्र से होकर गुजरने वाली जीवा; वृत्त की सबसे बड़ी जीवा |
| जीवा की लंबाई = 2√(r² − d²) | जहाँ r त्रिज्या है और d केंद्र से जीवा की लंबवत दूरी है (बौधायन-पाइथागोरस प्रमेय पर आधारित) |
| चाप द्वारा केंद्र पर अंतरित कोण = 2 × वृत्तखंड कोण | चाप द्वारा केंद्र पर बना कोण, उसी चाप द्वारा शेष भाग के किसी बिंदु पर बने कोण का दोगुना होता है |
| व्यास द्वारा अंतरित कोण = 90° | वृत्त के किसी भी बिंदु पर व्यास द्वारा बना कोण सदैव समकोण होता है |
| चक्रीय चतुर्भुज के सम्मुख कोणों का योग = 180° | यदि चतुर्भुज के शीर्ष एक ही वृत्त पर हों तो उसके सम्मुख कोणों का योगफल सदैव 180° होगा |
🔢 मुख्य अवधारणाएँ
1. वृत्त और उसके मूल भाग (Circle and its Parts)
वृत्त किसी समतल पर उन सभी बिंदुओं का समूह है, जो उस समतल पर स्थित किसी एक दिए गए बिंदु से समान दूरी पर हों। यह दिया गया बिंदु वृत्त का केंद्र (Centre) कहलाता है और केंद्र से वृत्त के किसी भी बिंदु की दूरी को त्रिज्या (Radius) कहते हैं।
जीवा (Chord): वृत्त पर स्थित किन्हीं दो बिंदुओं को मिलाने वाला रेखाखंड जीवा कहलाता है।
व्यास (Diameter): वह जीवा, जो वृत्त के केंद्र से होकर गुजरती है, व्यास कहलाती है।
उदाहरण: यदि किसी वृत्त का केंद्र A है और B, C वृत्त पर स्थित दो बिंदु हैं तो रेखाखंड BC वृत्त की जीवा कहलाएगी और यह जीवा केंद्र पर ∠BAC कोण अंतरित (subtend) करेगी।
2. वृत्त की सममिति (Symmetry of a Circle)
वृत्त पूर्णतः सममित आकृति है। जैसे किसी वाहन के पहिए को घुमाने पर वह हमेशा एक जैसा ही दिखाई देता है, उसी प्रकार वृत्त को केंद्र के चारों ओर किसी भी कोण से घुमाने पर वह पहले जैसा ही दिखाई देता है — इसे घूर्णन सममिति (Rotational Symmetry) कहते हैं।
वृत्ताकार कागज को मोड़ने पर जो रेखा बनती है, वह सदैव वृत्त के केंद्र से होकर गुजरती है और यह रेखा वृत्त का व्यास होती है। अतः वृत्त के सभी व्यास परावर्तन सममिति (Reflection Symmetry) की रेखाएँ हैं।
3. वृत्त और असंरेखीय बिंदु — परिवृत्त (Circumcircle)
दिए गए दो बिंदुओं A और B से अनंत वृत्त बनाए जा सकते हैं, और इन सभी वृत्तों के केंद्र सदैव AB के लंब समद्विभाजक (perpendicular bisector) पर स्थित होते हैं। परंतु जब तीन बिंदु दिए गए हों जो एक ही सरल रेखा पर न हों (अर्थात असंरेखीय हों), तो स्थिति भिन्न होती है।
प्रमेय 1: तीन असंरेखीय बिंदुओं से होकर जाने वाला वृत्त अद्वितीय (unique) होता है।
इस वृत्त को त्रिभुज का परिवृत्त (Circumcircle) कहते हैं और इसके केंद्र को परिकेंद्र (Circumcentre) कहा जाता है। परिकेंद्र, त्रिभुज की तीनों भुजाओं के लंब समद्विभाजकों के प्रतिच्छेद बिंदु पर स्थित होता है।
महत्वपूर्ण गुण:
• न्यूनकोण त्रिभुज (Acute triangle) में — परिकेंद्र त्रिभुज के अंदर स्थित होता है।
• अधिक कोण त्रिभुज (Obtuse triangle) में — परिकेंद्र त्रिभुज के बाहर स्थित होता है।
• समकोण त्रिभुज (Right triangle) में — परिकेंद्र कर्ण के मध्यबिंदु पर स्थित होता है।
4. जीवा से संबंधित प्रमेय (Chord Related Theorems)
वृत्त की जीवाओं के कई रोचक गुण होते हैं जो केंद्र, अंतरित कोण और लंबाई से जुड़े होते हैं:
प्रमेय 2: वृत्त की समान जीवाएँ वृत्त के केंद्र पर समान कोण अंतरित करती हैं।
प्रमेय 3 (विलोम): केंद्र पर समान कोण अंतरित करने वाली जीवाएँ परस्पर समान होती हैं।
प्रमेय 4: किसी वृत्त में केंद्र को जीवा के मध्यबिंदु से मिलाने वाली रेखा उस जीवा पर लंब होती है।
प्रमेय 5 (विलोम): किसी वृत्त के केंद्र से जीवा पर खींचा गया लंब उस जीवा को समद्विभाजित करता है।
प्रमेय 6: किसी वृत्त की समान लंबाई की जीवाएँ वृत्त के केंद्र से समदूरस्थ होती हैं।
प्रमेय 7 (विलोम): वृत्त के केंद्र से समदूरस्थ जीवाएँ समान लंबाई की होती हैं।
प्रमेय 8: दो असमान जीवाओं में से लंबी जीवा केंद्र के अधिक समीप होती है (अर्थात केंद्र से उसकी दूरी कम होती है)।
टिप्पणी: चूँकि केंद्र से समीपस्थ जीवा पर ही केंद्र स्थित होता है, इसलिए उसकी केंद्र से दूरी शून्य होती है। अतः वृत्त का व्यास सबसे बड़ी जीवा होता है।
5. चाप द्वारा अंतरित कोण (Angle Subtended by an Arc)
वृत्त का चाप (Arc) उस वृत्त का एक संबद्ध भाग होता है, जिसे वृत्त पर स्थित दो बिंदुओं (जिन्हें चाप के अंत्य बिंदु कहते हैं) और उन्हें परिधि के अनुदिश जोड़ने वाले वक्र द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। किसी बिंदु A से B तक जाने के दो मार्गों में से बड़ा मार्ग दीर्घ चाप (Major Arc) और छोटा मार्ग लघु चाप (Minor Arc) कहलाता है।
प्रमेय 9: वृत्त के चाप द्वारा केंद्र पर अंतरित कोण, चाप के बाहर वृत्त के शेष भाग के किसी बिंदु पर अंतरित कोण का दोगुना होता है।
उपप्रमेय: व्यास द्वारा वृत्त के किसी भी बिंदु पर अंतरित कोण 90° होता है, क्योंकि व्यास द्वारा केंद्र पर अंतरित कोण एक ऋजु कोण (180°) होता है, और वृत्तखंड में बना कोण उसका आधा अर्थात 90° होगा।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि — एक ही चाप के बाहर वृत्त पर स्थित सभी बिंदुओं पर उस चाप द्वारा अंतरित कोण समान होता है। यानी एक ही वृत्तखंड में बने सभी कोण समान होते हैं।
6. संवृत्तीय बिंदु और चक्रीय चतुर्भुज (Concyclic Points and Cyclic Quadrilateral)
एक ही वृत्त पर स्थित बिंदुओं को संवृत्तीय (Concyclic) बिंदु कहते हैं।
प्रमेय 10: यदि दो बिंदुओं A व B को जोड़ने वाला रेखाखंड AB, उसे अंतर्विष्ट करने वाली रेखा के एक ही ओर स्थित दो अन्य बिंदुओं C व D पर समान कोण अंतरित करता है, तो चारों बिंदु एक ही वृत्त पर स्थित होते हैं (अर्थात संवृत्तीय होते हैं)।
जब किसी चतुर्भुज के शीर्ष संवृत्तीय होते हैं, तो वह चतुर्भुज चक्रीय चतुर्भुज (Cyclic Quadrilateral) कहलाता है।
प्रमेय 11: चक्रीय चतुर्भुज के सम्मुख कोणों का योगफल 180° होता है।
प्रमेय 12 (विलोम): यदि किसी चतुर्भुज के सम्मुख कोणों का योगफल 180° हो, तो उस चतुर्भुज के शीर्ष एक ही वृत्त पर स्थित होते हैं अर्थात वह चक्रीय चतुर्भुज होता है।
उदाहरण: यदि ABCD एक चक्रीय चतुर्भुज है और ∠A = 80° है, तो प्रमेय 11 के अनुसार ∠C = 180° − 80° = 100° होगा।
✅ उदाहरण सहित व्याख्या
किसी वृत्त में केंद्र से 5 सेंटीमीटर दूरी पर एक जीवा है। यदि वृत्त की त्रिज्या 13 सेंटीमीटर है तो जीवा की लंबाई क्या है?
एक वृत्त का चाप केंद्र पर 70° कोण अंतरित करता है। इस चाप द्वारा वृत्त के किसी बिंदु पर अंतरित कोण की माप क्या है?
किसी वृत्त का व्यास 26 सेंटीमीटर है। वृत्त में 24 सेंटीमीटर लंबी जीवा बनाई गई है। वृत्त के केंद्र से जीवा की दूरी ज्ञात कीजिए।
किसी वृत्त की त्रिज्या 15 सेंटीमीटर है। वृत्त में एक जीवा बनाई गई है। वृत्त के केंद्र से जीवा की दूरी 9 सेंटीमीटर है। जीवा की लंबाई क्या है?
किसी वृत्त का व्यास AB है। वृत्त की परिधि पर कोई बिंदु C स्थित है। ∠ACB की माप क्या है?
ABCD एक चक्रीय चतुर्भुज है जो एक वृत्त के अंतर्गत बनाया गया है। यदि ∠A की माप 75° है तो ∠C की माप कितनी होगी? यदि ∠B की माप 110° है तो ∠D की माप कितनी होगी?
चतुर्भुज PQRS एक वृत्त के अंतर्गत बनाया गया है। यदि ∠P = (2x + 10)° और ∠R = (3x − 20)° है तो x का मान और ∠P व ∠R की माप ज्ञात कीजिए।
16 सेंटीमीटर लंबी जीवा की वृत्त के केंद्र से दूरी 6 सेंटीमीटर है। वृत्त की त्रिज्या ज्ञात कीजिए।
किसी वृत्त में जिसका केंद्र O है, केंद्रीय कोण AOB की माप 60° है। यदि वृत्त की त्रिज्या 12 सेंटीमीटर है तो जीवा AB की लंबाई क्या है?
📖 सूत्रों की व्युत्पत्ति (उपपत्तियाँ)
प्रमेय 4: केंद्र से जीवा के मध्यबिंदु तक की रेखा जीवा पर लंब होती है
दिया गया है: केंद्र C वाला एक वृत्त है। AB कोई जीवा है और M जीवा AB का मध्यबिंदु है।
सिद्ध करना है: CM, AB पर लंब है।
प्रमेय 9: चाप द्वारा केंद्र पर अंतरित कोण, वृत्तखंड कोण का दोगुना होता है
दिया गया है: AFB एक चाप है। ∠ACB चाप AFB द्वारा केंद्र C पर अंतरित कोण है। D, चाप AFB से बाहर वृत्त पर स्थित एक बिंदु है, जहाँ DC को आगे बढ़ाने पर यह चाप AFB के किसी बिंदु E पर वृत्त को प्रतिच्छेद करता है।
सिद्ध करना है: ∠BCA = 2∠BDA
प्रमेय 11: चक्रीय चतुर्भुज के सम्मुख कोणों का योगफल 180° होता है
दिया गया है: A, B, C, D एक चक्रीय चतुर्भुज के शीर्ष हैं और वृत्त का केंद्र O है।
सिद्ध करना है: ∠BAD + ∠BCD = 180°
📐 महत्वपूर्ण आरेख
⚠️ सामान्य भूलें
- ⚠️ जीवा और व्यास में भ्रम: हर जीवा व्यास नहीं होती — केवल वह जीवा जो केंद्र से होकर गुजरे, व्यास कहलाती है। व्यास वृत्त की सबसे बड़ी जीवा है।
- ⚠️ दीर्घ चाप और लघु चाप में भ्रम: चाप द्वारा अंतरित कोण ज्ञात करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि प्रश्न में लघु चाप की बात हो रही है या दीर्घ चाप की, क्योंकि दोनों द्वारा केंद्र पर अंतरित कोण भिन्न होते हैं।
- ⚠️ सम्मुख और आसन्न कोणों में भ्रम: प्रमेय 11 (सम्मुख कोणों का योग 180°) केवल चक्रीय चतुर्भुज के सम्मुख (opposite) कोणों पर लागू होता है, आसन्न (adjacent) कोणों पर नहीं।
- ⚠️ सूत्र में r और d को उलट देना: जीवा की लंबाई = 2√(r² − d²) में त्रिज्या r और केंद्र से लंबवत दूरी d को सही क्रम में रखना आवश्यक है, अन्यथा उत्तर गलत आएगा।
- ⚠️ हर बिंदु पर कोण समान मान लेना: यह याद रखें कि “एक ही चाप द्वारा अंतरित कोण समान होते हैं” यह नियम केवल तभी लागू होता है जब बिंदु उसी चाप के बाहर एक ही वृत्तखंड में स्थित हों।
💡 परीक्षा टिप्स
- 💡 उपपत्ति (Proof) लिखते समय सदैव सबसे पहले “दिया गया है” और “सिद्ध करना है” स्पष्ट रूप से लिखें, फिर तर्क दें — इससे पूरे अंक मिलते हैं।
- 💡 रचना (Construction) वाले प्रश्नों में परिवृत्त बनाते समय लंब समद्विभाजकों की रचना सावधानीपूर्वक करें; यह प्रकार के प्रश्न प्रायः 4-5 अंकों के लिए पूछे जाते हैं।
- 💡 व्यास द्वारा अंतरित कोण सदैव 90° होता है — यह गुण त्रिभुज और चतुर्भुज से जुड़े कई प्रश्नों को सीधे हल करने में उपयोगी है।
- 💡 चक्रीय चतुर्भुज में सम्मुख कोणों का योग 180° प्रयोग करके x जैसे अज्ञात चर या अज्ञात कोण ज्ञात करने वाले प्रश्न बहुत आते हैं — पहले सम्मुख कोण पहचानें।
- 💡 जीवा की लंबाई और केंद्र से दूरी से जुड़े प्रश्नों में बौधायन-पाइथागोरस प्रमेय (r² = (जीवा/2)² + d²) का प्रयोग सीधे करें।
🧠 माइंड मैप / सारांश तालिका
| वृत्त (Circle) | |
| 5.1 परिभाषाएँ | केंद्र, त्रिज्या, जीवा, व्यास |
| 5.2 सममिति | घूर्णन सममिति + परावर्तन सममिति (व्यास) |
| 5.3 कितने वृत्त? | 2 बिंदु → अनंत वृत्त; 3 असंरेखीय बिंदु → अद्वितीय वृत्त (परिवृत्त/परिकेंद्र) |
| 5.4 जीवा व अंतरित कोण | समान जीवाएँ = समान केंद्रीय कोण (प्रमेय 2, 3) |
| 5.5 मध्यबिंदु व लंब | केंद्र-मध्यबिंदु रेखा ⟂ जीवा (प्रमेय 4, 5) |
| 5.6 केंद्र से दूरी | समान जीवाएँ = समदूरस्थ (प्रमेय 6, 7, 8) |
| 5.7 चाप द्वारा कोण | केंद्रीय कोण = 2 × वृत्तखंड कोण; व्यास ⟹ 90° (प्रमेय 9) |
| 5.8 संवृत्तीयता | चक्रीय चतुर्भुज — सम्मुख कोणों का योग 180° (प्रमेय 10, 11, 12) |
📌 याद रखें
- 📌 वृत्त किसी समतल पर उन सभी बिंदुओं का समूह है जो समतल पर स्थित किसी निश्चित बिंदु (केंद्र) से समान दूरी (त्रिज्या) पर स्थित हों।
- 📌 वृत्त में किसी भी व्यास के सापेक्ष परावर्तन सममिति होती है और केंद्र के सापेक्ष किसी भी कोण में घूर्णन सममिति होती है।
- 📌 दिए गए दो बिंदुओं से होकर जाने वाले अनंत वृत्त बनाए जा सकते हैं, इनके केंद्र सदैव उन दोनों बिंदुओं को मिलाने वाले रेखाखंड के लंब समद्विभाजक पर स्थित होते हैं।
- 📌 यदि तीन बिंदु एक ही सरल रेखा पर स्थित न हों, तो उनसे होकर जाता हुआ केवल एक ही वृत्त बनाया जा सकता है — यह त्रिभुज का परिवृत्त कहलाता है।
- 📌 समान जीवाएँ वृत्त के केंद्र पर समान कोण अंतरित करती हैं, और इसका विलोम भी सत्य है।
- 📌 वृत्त के केंद्र से जीवा के मध्यबिंदु को मिलाने वाली रेखा उस जीवा पर लंब होती है; इसके विपरीत, केंद्र से जीवा पर खींचा गया लंब जीवा को समद्विभाजित करता है।
- 📌 वृत्त में समान जीवाएँ केंद्र से समदूरस्थ होती हैं, और जो जीवाएँ केंद्र से समदूरस्थ होती हैं वे समान लंबाई की होती हैं।
- 📌 दी गई दो असमान जीवाओं में से लंबी जीवा केंद्र के अधिक समीप होती है।
- 📌 किसी चाप द्वारा केंद्र पर अंतरित कोण, उसी चाप द्वारा वृत्त के शेष भाग के किसी बिंदु पर अंतरित कोण का दोगुना होता है।
- 📌 व्यास द्वारा वृत्त के किसी भी बिंदु पर अंतरित कोण 90° होता है।
- 📌 यदि वृत्त के दो बिंदुओं को मिलाने वाला रेखाखंड, उस रेखाखंड के एक ही ओर स्थित दो अन्य बिंदुओं पर समान कोण अंतरित करे तो चारों बिंदु संवृत्तीय होते हैं।
- 📌 किसी वृत्त के अंतर्गत चतुर्भुज चक्रीय चतुर्भुज कहलाता है, और इसके सम्मुख कोणों के प्रत्येक युग्म का योगफल 180° होता है — इसका विलोम भी सत्य है।
📝 अभ्यास के लिए इसी अध्याय की Important Questions फाइल देखें, जिसमें प्रश्नावली 5.1 से 5.6 तथा अंतिम प्रश्नावली के सभी महत्वपूर्ण प्रश्न शामिल हैं। नोट्स और प्रश्न-बैंक दोनों मिलकर वृत्त अध्याय की संपूर्ण तैयारी में सहायक होंगे।

Leave a Reply