( Short Questions )
1. प्रश्न: अर्धसूत्री विभाजन क्या है?
उत्तर: अर्धसूत्री विभाजन एक विशेष प्रकार का कोशिका विभाजन है, जिससे युग्मकों का निर्माण होता है और गुणसूत्रों की संख्या आधी हो जाती है।
2. प्रश्न: मनुष्य में गुणसूत्रों के कितने जोड़े होते हैं?
उत्तर: मनुष्य में गुणसूत्रों के 23 जोड़े होते हैं।
3. प्रश्न: नर युग्मक को क्या कहते हैं?
उत्तर: नर युग्मक को शुक्राणु कहते हैं।
4. प्रश्न: मादा युग्मक को क्या कहते हैं?
उत्तर: मादा युग्मक को अंडाणु कहते हैं।
5. प्रश्न: पुष्पी पौधों में नर युग्मक कहाँ पाए जाते हैं?
उत्तर: नर युग्मक परागकणों में पाए जाते हैं।
6. प्रश्न: एक संपूर्ण पुष्प के कितने मुख्य भाग होते हैं?
उत्तर: एक संपूर्ण पुष्प के चार मुख्य भाग होते हैं।
7. प्रश्न: पुष्प के चार मुख्य भागों के नाम लिखिए।
उत्तर: बाह्यदल, दल, पुंकेसर और स्त्रीकेसर।
8. प्रश्न: पुंकेसर किस प्रकार का भाग है?
उत्तर: पुंकेसर पुष्प का नर जनन भाग है।
9. प्रश्न: स्त्रीकेसर के तीन उपभाग कौन-कौन से हैं?
उत्तर: वर्तिकाग्र, वर्तिका तथा अंडाशय।
10. प्रश्न: परागण किसे कहते हैं?
उत्तर: परागकोश से वर्तिकाग्र तक परागकणों के स्थानांतरण को परागण कहते हैं।
11. प्रश्न: स्व-परागण क्या है?
उत्तर: जब परागकण उसी पुष्प या उसी पौधे के दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र पर पहुँचते हैं, तो उसे स्व-परागण कहते हैं।
12. प्रश्न: पर-परागण क्या है?
उत्तर: जब परागकण एक पौधे के पुष्प से उसी प्रकार के दूसरे पौधे के पुष्प के वर्तिकाग्र पर पहुँचते हैं, तो उसे पर-परागण कहते हैं।
13. प्रश्न: निषेचन किसे कहते हैं?
उत्तर: नर और मादा युग्मकों के मिलन को निषेचन कहते हैं।
14. प्रश्न: युग्मनज (Zygote) क्या होता है?
उत्तर: निषेचन के बाद बनने वाली कोशिका को युग्मनज कहते हैं।
15. प्रश्न: बाह्य निषेचन क्या है?
उत्तर: जब निषेचन शरीर के बाहर होता है, तो उसे बाह्य निषेचन कहते हैं।
( Long Questions )
1. प्रश्न: अर्धसूत्री विभाजन क्या है? इसका महत्व लिखिए।
उत्तर:
अर्धसूत्री विभाजन एक विशेष प्रकार का कोशिका विभाजन है, जिसमें जनक कोशिका की तुलना में संतति कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या आधी हो जाती है। इस विभाजन से युग्मकों का निर्माण होता है। प्रत्येक युग्मक में गुणसूत्रों की आधी संख्या होती है। अर्धसूत्री विभाजन के कारण विभिन्न प्रकार के आनुवंशिक संयोजन बनते हैं, जिससे संतानों में विविधता उत्पन्न होती है। यही विविधता जीवों को बदलते वातावरण के अनुसार अनुकूलन करने तथा विकास में सहायता करती है।
2. प्रश्न: पुष्प के विभिन्न भागों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
एक संपूर्ण पुष्प के चार मुख्य भाग होते हैं— बाह्यदल, दल, पुंकेसर और स्त्रीकेसर।
- बाह्यदल कली तथा पुष्प के अन्य भागों की रक्षा करते हैं।
- दल रंगीन होते हैं तथा परागणकर्ताओं को आकर्षित करते हैं।
- पुंकेसर पुष्प का नर जनन भाग है, जिसमें परागकोश होता है और उसमें परागकण बनते हैं।
- स्त्रीकेसर मादा जनन भाग है। इसके तीन भाग— वर्तिकाग्र, वर्तिका तथा अंडाशय होते हैं। अंडाशय में बीजांड होते हैं जिनमें मादा युग्मक उपस्थित रहता है।
3. प्रश्न: परागण क्या है? इसके प्रकारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
परागकोश से वर्तिकाग्र तक परागकणों के स्थानांतरण को परागण कहते हैं।
परागण दो प्रकार का होता है—
- स्व-परागण – जब परागकण उसी पुष्प अथवा उसी पौधे के दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र पर पहुँचते हैं।
- पर-परागण – जब परागकण एक पौधे से उसी प्रकार के दूसरे पौधे के पुष्प के वर्तिकाग्र पर पहुँचते हैं।
फल और बीज बनने के लिए परागण आवश्यक होता है।
4. प्रश्न: परागण के विभिन्न माध्यमों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
परागण विभिन्न बाहरी माध्यमों द्वारा होता है।
- वायु द्वारा – जैसे गेहूँ, चावल और मक्का।
- जल द्वारा – जैसे वैलिसनेरिया और हाइड्रिला।
- कीटों द्वारा – जैसे सूरजमुखी, गेंदा और गुड़हल।
- पक्षियों द्वारा – जैसे कोरल ट्री और गुड़हल।
इन माध्यमों की सहायता से परागकण एक पुष्प से दूसरे पुष्प तक पहुँचते हैं।
5. प्रश्न: निषेचन तथा बीज निर्माण की प्रक्रिया समझाइए।
उत्तर:
परागण के बाद परागकण अंकुरित होकर पराग नलिका बनाता है। यह नलिका वर्तिका से होकर अंडाशय तक पहुँचती है। नर युग्मक पराग नलिका द्वारा बीजांड में पहुँचकर अंडकोशिका से मिल जाता है। इस मिलन को निषेचन कहते हैं। निषेचन के बाद युग्मनज बनता है, जो आगे चलकर भ्रूण बनता है। बीजांड बीज में तथा अंडाशय फल में परिवर्तित हो जाता है।
6. प्रश्न: पौधों में लैंगिक जनन का महत्व लिखिए।
उत्तर:
पौधों में लैंगिक जनन से नए पौधों का निर्माण होता है। इससे संतानों में आनुवंशिक विविधता उत्पन्न होती है। यही विविधता पौधों को बदलते वातावरण के अनुसार अनुकूलित होने में सहायता करती है तथा उनकी उत्तरजीविता बढ़ाती है। बीजों के माध्यम से नई पीढ़ी का निर्माण होता है और प्रजाति की निरंतरता बनी रहती है।
7. प्रश्न: बाह्य निषेचन और आंतरिक निषेचन में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
बाह्य निषेचन में नर और मादा युग्मकों का मिलन शरीर के बाहर होता है। यह सामान्यतः मछलियों और मेंढकों में पाया जाता है।
आंतरिक निषेचन में युग्मकों का मिलन मादा के शरीर के भीतर होता है। यह सरीसृपों, पक्षियों और स्तनधारियों में पाया जाता है। इसमें भ्रूण अधिक सुरक्षित रहता है तथा संतानों के जीवित रहने की संभावना अधिक होती है।
8. प्रश्न: विभिन्न जंतुओं में जनन संबंधी भिन्नताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
विभिन्न जंतुओं में निषेचन की विधि, अंडों की संख्या तथा संतानों की उत्तरजीविता अलग-अलग होती है।
मछली और मेंढक बाह्य निषेचन करते हैं तथा बहुत अधिक अंडे देते हैं।
छिपकली और पक्षियों में आंतरिक निषेचन होता है और अंडों की संख्या कम होती है।
स्तनधारियों में भ्रूण माँ के शरीर के भीतर विकसित होता है, जिससे संतानों की सुरक्षा अधिक होती है।
9. प्रश्न: मानव में जनन परिपक्वता क्या है?
उत्तर:
जब बालक या बालिका के जनन अंग परिपक्व हो जाते हैं और युग्मकों का निर्माण प्रारंभ हो जाता है, तब इस अवस्था को जनन परिपक्वता कहते हैं। इस समय शरीर में शारीरिक तथा भावनात्मक परिवर्तन भी दिखाई देते हैं। मानव जनन तंत्र के विशेष अंग नए जीवन के निर्माण में भाग लेते हैं।
10. प्रश्न: अर्धसूत्री विभाजन से उत्पन्न विविधता का क्या महत्व है?
उत्तर:
अर्धसूत्री विभाजन के समय गुणसूत्रों के विभिन्न संयोजन बनते हैं। इसके कारण प्रत्येक संतान में आनुवंशिक विविधता उत्पन्न होती है। यही विविधता जीवों को बदलते वातावरण के अनुसार अनुकूलन करने, उत्तरजीविता बढ़ाने तथा विकास की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

Leave a Reply