जीव जगत का स्वरूप – विविधता एवं वर्गीकरण
( Short Questions )
1. प्रश्न: जैविक वर्गीकरण क्या है?
उत्तर: सजीवों को उनकी समानताओं और भिन्नताओं के आधार पर समूहों में बाँटने की वैज्ञानिक पद्धति को जैविक वर्गीकरण कहते हैं।
2. प्रश्न: जीवों के वर्गीकरण की आवश्यकता क्यों होती है?
उत्तर: जीवों का व्यवस्थित अध्ययन करने, उनकी पहचान करने तथा उनके आपसी संबंधों को समझने के लिए वर्गीकरण आवश्यक है।
3. प्रश्न: द्विजगत वर्गीकरण प्रणाली में कितने जगत थे?
उत्तर: द्विजगत वर्गीकरण प्रणाली में दो जगत थे— पादप जगत (Plantae) और जंतु जगत (Animalia)।
4. प्रश्न: पाँच जगत वर्गीकरण प्रणाली किसने प्रस्तुत की?
उत्तर: पाँच जगत वर्गीकरण प्रणाली रॉबर्ट एच. व्हिटेकर ने प्रस्तुत की।
5. प्रश्न: पाँच जगतों के नाम लिखिए।
उत्तर: मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई (कवक), प्लांटी और एनिमेलिया।
6. प्रश्न: मोनेरा जगत के जीव कैसे होते हैं?
उत्तर: मोनेरा जगत के जीव एककोशिकीय पूर्वकेंद्रकी (प्रोकैरियोटिक) होते हैं।
7. प्रश्न: प्रोटिस्टा जगत के जीव कैसे होते हैं?
उत्तर: प्रोटिस्टा जगत के जीव एककोशिकीय सुकेंद्रकी (यूकैरियोटिक) होते हैं।
8. प्रश्न: कवकों की कोशिका भित्ति किसकी बनी होती है?
उत्तर: कवकों की कोशिका भित्ति काइटिन की बनी होती है।
9. प्रश्न: पादप अपना भोजन किस प्रक्रिया द्वारा बनाते हैं?
उत्तर: पादप प्रकाश संश्लेषण द्वारा अपना भोजन बनाते हैं।
10. प्रश्न: थैलोफाइटा का एक उदाहरण लिखिए।
उत्तर: स्पाइरोगाइरा।
11. प्रश्न: ब्रायोफाइट को पादप जगत का उभयचर क्यों कहा जाता है?
उत्तर: क्योंकि इनके जनन के लिए जल आवश्यक होता है।
12. प्रश्न: टेरिडोफाइट में कौन-से संवहनी ऊतक पाए जाते हैं?
उत्तर: जाइलम और फ्लोएम।
13. प्रश्न: जिम्नोस्पर्म के बीज कहाँ पाए जाते हैं?
उत्तर: जिम्नोस्पर्म के बीज शंकुओं पर अनावृत रहते हैं।
14. प्रश्न: एंजियोस्पर्म किसे कहते हैं?
उत्तर: पुष्प एवं फल उत्पन्न करने वाले पौधों को एंजियोस्पर्म कहते हैं।
15. प्रश्न: एंजियोस्पर्म के बीज कहाँ रहते हैं?
उत्तर: एंजियोस्पर्म के बीज फल के भीतर आवृत रहते हैं।
( Long Questions )
1. प्रश्न: जैविक वर्गीकरण क्या है? इसकी आवश्यकता एवं महत्व बताइए।
उत्तर:
जैविक वर्गीकरण वह वैज्ञानिक पद्धति है जिसके द्वारा सजीवों को उनकी समानताओं और भिन्नताओं के आधार पर विभिन्न समूहों में रखा जाता है। इससे जीवों का अध्ययन सरल और व्यवस्थित हो जाता है। वर्गीकरण जीवों के बीच संबंध समझने, नए जीवों की पहचान एवं नामकरण करने तथा जैव विविधता के संरक्षण में सहायता करता है। साथ ही यह विश्वभर के वैज्ञानिकों को एक समान प्रणाली उपलब्ध कराता है।
2. प्रश्न: वर्गीकरण प्रणालियों के विकास का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
समय के साथ वैज्ञानिकों ने विभिन्न वर्गीकरण प्रणालियाँ विकसित कीं।
- अरस्तू ने जीवों का वर्गीकरण उनके आवास एवं बाहरी लक्षणों के आधार पर किया।
- बाद में द्विजगत प्रणाली में सभी जीवों को प्लांटी और एनिमेलिया में बाँटा गया।
- इसके बाद प्रोटिस्टा को जोड़कर तीन जगत प्रणाली बनाई गई।
- जीवाणुओं के लिए मोनेरा जगत जोड़कर चार जगत प्रणाली बनी।
- अंत में रॉबर्ट एच. व्हिटेकर ने पाँच जगत वर्गीकरण प्रणाली प्रस्तुत की, जिसमें मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लांटी और एनिमेलिया सम्मिलित हैं।
3. प्रश्न: पाँच जगत वर्गीकरण के आधार लिखिए।
उत्तर:
पाँच जगत वर्गीकरण निम्नलिखित आधारों पर किया गया है—
- कोशिका का प्रकार (पूर्वकेंद्रकी या सुकेंद्रकी)
- कोशिका की संरचना
- कोशिका भित्ति की उपस्थिति या अनुपस्थिति
- संगठन का स्तर (एककोशिकीय या बहुकोशिकीय)
- पोषण की विधि (स्वपोषी या विषमपोषी)
- पारिस्थितिक भूमिका
इन्हीं विशेषताओं के आधार पर जीवों को पाँच जगतों में विभाजित किया गया है।
4. प्रश्न: मोनेरा जगत की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मोनेरा जगत में एककोशिकीय पूर्वकेंद्रकी जीव पाए जाते हैं। ये मिट्टी, जल, वायु तथा अत्यधिक विषम परिस्थितियों में भी जीवित रह सकते हैं। कुछ जीवाणु रोग उत्पन्न करते हैं, जबकि अनेक जीवाणु लाभदायक होते हैं, जैसे राइजोबियम एवं लैक्टोबैसिलस। कुछ जीवाणु बायोगैस उत्पादन तथा प्रदूषकों के अपघटन में भी सहायक होते हैं।
5. प्रश्न: प्रोटिस्टा जगत की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
प्रोटिस्टा जगत में एककोशिकीय सुकेंद्रकी जीव होते हैं। ये सामान्यतः जल या नम स्थानों में रहते हैं। इनमें कुछ स्वपोषी तथा कुछ विषमपोषी होते हैं। ये जलीय खाद्य श्रृंखलाओं के महत्वपूर्ण भाग हैं। कुछ प्रोटिस्ट ऑक्सीजन उत्पन्न करते हैं तथा कुछ अपघटक के रूप में पोषक तत्वों के चक्रण में सहायता करते हैं।
6. प्रश्न: फंजाई (कवक) जगत की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
कवक अधिकांशतः बहुकोशिकीय सुकेंद्रकी जीव होते हैं। इनकी कोशिका भित्ति काइटिन की बनी होती है। ये अपना भोजन स्वयं नहीं बनाते बल्कि मृत एवं सड़े-गले पदार्थों से पोषक तत्वों का अवशोषण करते हैं। ये अपघटक के रूप में पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कुछ कवक औषधियाँ एवं एंजाइम बनाने में भी उपयोगी हैं।
7. प्रश्न: पादप जगत (Plantae) की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
पादप बहुकोशिकीय एवं स्वपोषी जीव होते हैं। ये प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन बनाते हैं। इनकी कोशिकाओं में सेल्यूलोज की बनी दृढ़ कोशिका भित्ति होती है। ये अधिकांश खाद्य श्रृंखलाओं का आधार हैं तथा ऑक्सीजन का उत्सर्जन करते हैं। पादप जगत को थैलोफाइटा, ब्रायोफाइटा, टेरिडोफाइटा, जिम्नोस्पर्म और एंजियोस्पर्म में विभाजित किया गया है।
8. प्रश्न: ब्रायोफाइट और टेरिडोफाइट में अंतर लिखिए।
उत्तर:
ब्रायोफाइट में वास्तविक जड़, तना और पत्तियाँ नहीं होतीं तथा इनमें संवहनी ऊतक अनुपस्थित होते हैं। इनके जनन के लिए जल आवश्यक होता है।
टेरिडोफाइट में वास्तविक जड़, तना और पत्तियाँ होती हैं। इनमें जाइलम एवं फ्लोएम जैसे संवहनी ऊतक पाए जाते हैं। ये स्थल पर रहने के लिए अधिक अनुकूलित होते हैं, फिर भी इनके जनन के लिए जल की आवश्यकता होती है।
9. प्रश्न: जिम्नोस्पर्म की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
जिम्नोस्पर्म स्थल पर रहने वाले पौधे हैं। इनकी सुई जैसी पत्तियाँ जल की हानि कम करती हैं। इनमें निषेचन के लिए जल की आवश्यकता नहीं होती। ये बीज बनाते हैं, परंतु उनके बीज फल के भीतर बंद न होकर शंकुओं पर अनावृत रहते हैं।
10. प्रश्न: एंजियोस्पर्म की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
एंजियोस्पर्म सबसे विकसित पुष्पीय पौधे हैं। इनमें विकसित जड़, तना और पत्तियाँ होती हैं। ये पुष्प और फल उत्पन्न करते हैं। इनके बीज फल के भीतर सुरक्षित रहते हैं। इनके बीजों का प्रकीर्णन कीटों, पक्षियों, जंतुओं, वायु या जल द्वारा होता है। विकसित जनन तंत्र तथा बीजों की सुरक्षा के कारण ये पृथ्वी पर सबसे अधिक विविधता वाले पौधे हैं।

Leave a Reply