( Short Questions )
1. प्रश्न: समांगी मिश्रण किसे कहते हैं?
उत्तर: जिस मिश्रण का संघटन पूरी तरह एकसमान होता है, उसे समांगी मिश्रण कहते हैं।
2. प्रश्न: विलयन क्या होता है?
उत्तर: समांगी मिश्रण को विलयन भी कहा जाता है।
3. प्रश्न: समांगी मिश्रण का एक उदाहरण लिखिए।
उत्तर: चीनी और जल का मिश्रण समांगी मिश्रण का उदाहरण है।
4. प्रश्न: सिरका किस प्रकार का मिश्रण है?
उत्तर: सिरका एक समांगी मिश्रण (विलयन) है।
5. प्रश्न: वातित पेय (सोडा जल) किस प्रकार का मिश्रण है?
उत्तर: वातित पेय समांगी मिश्रण है।
6. प्रश्न: विषमांगी मिश्रण किसे कहते हैं?
उत्तर: जो मिश्रण एकसमान नहीं होता, उसे विषमांगी मिश्रण कहते हैं।
7. प्रश्न: जल और रेत का मिश्रण किस प्रकार का मिश्रण है?
उत्तर: जल और रेत का मिश्रण विषमांगी मिश्रण है।
8. प्रश्न: रेत के कण जल में कुछ समय बाद क्या करते हैं?
उत्तर: रेत के कण तली में बैठ जाते हैं।
9. प्रश्न: समांगी मिश्रण का स्वाद हर भाग में कैसा होता है?
उत्तर: हर भाग में स्वाद समान होता है।
10. प्रश्न: एक विलयन हमेशा कैसा होता है?
उत्तर: विलयन सदैव समांगी होता है।
11. प्रश्न: क्रियाकलाप 5.1 में समूह ‘क’ ने किसका मिश्रण बनाया?
उत्तर: जल और साधारण नमक का मिश्रण।
12. प्रश्न: क्रियाकलाप 5.1 में समूह ‘ख’ ने किसका मिश्रण बनाया?
उत्तर: जल और चॉक चूर्ण का मिश्रण।
13. प्रश्न: क्रियाकलाप 5.1 में समूह ‘ग’ ने किसका मिश्रण बनाया?
उत्तर: जल और दूध का मिश्रण।
14. प्रश्न: लेसर किरण का प्रयोग किस उद्देश्य से किया गया?
उत्तर: मिश्रणों का अवलोकन करने के लिए लेसर किरण का प्रयोग किया गया।
15. प्रश्न: लेसर किरण का प्रयोग करते समय क्या सावधानी रखनी चाहिए?
उत्तर: लेसर किरण को सीधे आँखों में नहीं देखना चाहिए, क्योंकि इससे आँखों को स्थायी क्षति पहुँच सकती है।
( Long Questions )
1. प्रश्न: समांगी मिश्रण क्या है? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: जिस मिश्रण का संघटन पूरी तरह एकसमान होता है, उसे समांगी मिश्रण कहते हैं। ऐसे मिश्रण में प्रत्येक भाग के गुण समान होते हैं। उदाहरण के लिए, जल में घुली चीनी का स्वाद पहले और अंतिम घूँट में समान रहता है। समांगी मिश्रण को विलयन भी कहा जाता है। सिरका तथा सोडा जल इसके अन्य उदाहरण हैं।
2. प्रश्न: विषमांगी मिश्रण क्या है? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: जिस मिश्रण का संघटन एकसमान नहीं होता, उसे विषमांगी मिश्रण कहते हैं। इसमें विभिन्न पदार्थों के कण अलग-अलग दिखाई देते हैं। उदाहरण के लिए, जल और रेत के मिश्रण में रेत के कण स्पष्ट दिखाई देते हैं और कुछ समय बाद तली में बैठ जाते हैं। इसी प्रकार तेल और जल का मिश्रण भी विषमांगी मिश्रण का उदाहरण है।
3. प्रश्न: क्रियाकलाप 5.1 में बनाए गए तीनों मिश्रणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
क्रियाकलाप 5.1 में कक्षा को तीन समूहों में बाँटा गया।
- समूह ‘क’ ने 50 mL जल में साधारण नमक मिलाकर मिश्रण बनाया।
- समूह ‘ख’ ने 50 mL जल में चॉक चूर्ण मिलाकर मिश्रण बनाया।
- समूह ‘ग’ ने 50 mL जल में दूध की कुछ बूँदें मिलाकर मिश्रण बनाया।
इन मिश्रणों का अवलोकन किया गया, उन पर लेसर किरण डाली गई तथा बाद में उनका निस्यंदन करके उनके गुणों का अध्ययन किया गया।
4. प्रश्न: विलयन क्या है? विलेय और विलायक को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: विलयन एक समांगी मिश्रण होता है। जब कोई विलेय (जो पदार्थ घुलता है) किसी विलायक (जिसमें विलेय घुलता है) में मिलाया जाता है, तब विलयन बनता है। उदाहरण के लिए, चीनी और जल के मिश्रण में चीनी विलेय तथा जल विलायक है।
5. प्रश्न: विलयन की सांद्रता क्या है? इसका महत्व लिखिए।
उत्तर: विलायक या विलयन में घुले हुए विलेय की मात्रा को विलयन की सांद्रता कहते हैं। विलयन तैयार करते समय पदार्थों को सही अनुपात में लेना आवश्यक होता है। उदाहरण के लिए, ओ.आर.एस. (ORS) बनाने में नमक, चीनी और जल की निश्चित मात्रा का प्रयोग किया जाता है। इसी प्रकार फसलों पर पीड़कनाशी का छिड़काव करते समय भी सही सांद्रता आवश्यक होती है। कम मात्रा से लाभ नहीं मिलता और अधिक मात्रा से फसल, मिट्टी तथा पर्यावरण को हानि हो सकती है।
6. प्रश्न: विलेय और विलायक में क्या अंतर है?
उत्तर: विलयन बनाने में दो मुख्य घटक होते हैं—विलेय और विलायक। जो पदार्थ घुलता है, उसे विलेय कहते हैं तथा जिस पदार्थ में विलेय घुलता है, उसे विलायक कहते हैं। उदाहरण के लिए, चीनी और जल के विलयन में चीनी विलेय तथा जल विलायक है।
7. प्रश्न: विलयन की सांद्रता से क्या तात्पर्य है? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: विलायक या विलयन में घुले हुए विलेय की मात्रा को विलयन की सांद्रता कहते हैं। किसी भी विलयन को तैयार करते समय पदार्थों की सही मात्रा का ध्यान रखना आवश्यक है। उदाहरण के लिए, ओ.आर.एस. घोल बनाते समय नमक, चीनी और जल को निश्चित अनुपात में मिलाया जाता है।
8. प्रश्न: पीड़कनाशी के घोल की सही सांद्रता रखना क्यों आवश्यक है?
उत्तर: फसलों पर पीड़कनाशी का छिड़काव करते समय घोल की सही सांद्रता आवश्यक होती है। यदि घोल बहुत पतला हो, तो कीटों पर प्रभाव कम पड़ता है। यदि घोल बहुत अधिक सांद्र हो, तो फसल, मिट्टी तथा पर्यावरण को हानि पहुँच सकती है। इसलिए उचित मात्रा का प्रयोग करना चाहिए।
9. प्रश्न: क्रियाकलाप 5.1 में लेसर किरण का उपयोग क्यों किया गया? इसके प्रयोग में क्या सावधानी रखनी चाहिए?
उत्तर: क्रियाकलाप 5.1 में विभिन्न मिश्रणों का अवलोकन करने के लिए लेसर किरण का उपयोग किया गया। इससे मिश्रणों के गुणों का अध्ययन करने में सहायता मिलती है। लेसर का प्रयोग करते समय यह विशेष सावधानी रखनी चाहिए कि उसकी किरण सीधे आँखों पर न पड़े, क्योंकि इससे आँखों को स्थायी क्षति हो सकती है।
10. प्रश्न: समांगी और विषमांगी मिश्रण में अंतर लिखिए।
उत्तर:
| समांगी मिश्रण | विषमांगी मिश्रण |
|---|---|
| इसका संघटन हर स्थान पर समान होता है। | इसका संघटन समान नहीं होता। |
| इसके सभी भागों के गुण समान होते हैं। | इसके विभिन्न भागों के गुण अलग हो सकते हैं। |
| इसमें पदार्थ अलग-अलग दिखाई नहीं देते। | इसमें पदार्थों के कण अलग दिखाई दे सकते हैं। |
| उदाहरण – चीनी का विलयन, सिरका, सोडा जल। | उदाहरण – जल और रेत, तेल और जल। |

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