( Short Questions )
1. कार्य (Work) क्या है?
उत्तर: किसी वस्तु पर लगाए गए बल और बल की दिशा में हुए विस्थापन का गुणनफल कार्य कहलाता है।
2. कार्य का सूत्र क्या है?
उत्तर: कार्य = बल × विस्थापन (W = F × s)
3. कार्य का SI मात्रक क्या है?
उत्तर: जूल (J)
4. 1 जूल कार्य कब होता है?
उत्तर: जब 1 न्यूटन बल से कोई वस्तु बल की दिशा में 1 मीटर विस्थापित हो।
5. कार्य कब शून्य होता है?
उत्तर: जब बल शून्य हो या विस्थापन शून्य हो।
6. दीवार को धक्का देने पर वैज्ञानिक दृष्टि से कार्य क्यों नहीं होता?
उत्तर: क्योंकि दीवार का विस्थापन नहीं होता।
7. बल और विस्थापन एक-दूसरे के लंबवत हों तो कार्य कितना होगा?
उत्तर: शून्य।
8. धनात्मक कार्य कब होता है?
उत्तर: जब बल और विस्थापन एक ही दिशा में हों।
9. ऋणात्मक कार्य कब होता है?
उत्तर: जब बल और विस्थापन विपरीत दिशा में हों।
10. कार्य-ऊर्जा प्रमेय क्या है?
उत्तर: वस्तु पर किया गया कार्य उसकी ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है।
11. ऊर्जा किसे कहते हैं?
उत्तर: कार्य करने की क्षमता को ऊर्जा कहते हैं।
12. यांत्रिक ऊर्जा क्या है?
उत्तर: वस्तु की गति या स्थिति के कारण प्राप्त ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा कहते हैं।
13. गतिज ऊर्जा किसे कहते हैं?
उत्तर: वस्तु की गति के कारण प्राप्त ऊर्जा को गतिज ऊर्जा कहते हैं।
14. गतिज ऊर्जा का सूत्र क्या है?
उत्तर: K = ½mv²
15. स्थितिज ऊर्जा का सूत्र क्या है?
उत्तर: U = mgh
( Long Questions )
1. कार्य (Work) क्या है? इसका सूत्र तथा SI मात्रक लिखिए।
उत्तर:
जब किसी वस्तु पर बल लगाया जाता है और वह बल की दिशा में विस्थापित होती है, तब कार्य होता है।
कार्य का सूत्र:
W = F × s
जहाँ,
W = कार्य
F = बल
s = बल की दिशा में विस्थापन
SI मात्रक: जूल (J)
2. कार्य शून्य कब होता है? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
कार्य निम्न परिस्थितियों में शून्य होता है—
- जब लगाया गया बल शून्य हो।
- जब वस्तु का विस्थापन शून्य हो।
- जब बल और विस्थापन एक-दूसरे के लंबवत हों।
उदाहरण:
दीवार को धक्का देने पर दीवार नहीं हिलती, इसलिए कार्य शून्य होता है।
3. धनात्मक तथा ऋणात्मक कार्य में अंतर लिखिए।
उत्तर:
धनात्मक कार्य
- बल और विस्थापन एक ही दिशा में होते हैं।
- उदाहरण: पहिएदार कुर्सी को आगे धक्का देना।
ऋणात्मक कार्य
- बल और विस्थापन विपरीत दिशा में होते हैं।
- उदाहरण: गोलरक्षक द्वारा फुटबॉल को रोकना।
4. कार्य-ऊर्जा प्रमेय क्या है? समझाइए।
उत्तर:
कार्य-ऊर्जा प्रमेय के अनुसार किसी वस्तु पर किया गया कार्य उसकी ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है।
सूत्र:
कार्य = ऊर्जा में परिवर्तन
यदि किसी वस्तु पर धनात्मक कार्य किया जाता है तो उसकी ऊर्जा बढ़ती है और यदि ऋणात्मक कार्य किया जाता है तो उसकी ऊर्जा घटती है।
5. ऊर्जा क्या है? ऊर्जा के विभिन्न रूप लिखिए।
उत्तर:
कार्य करने की क्षमता को ऊर्जा कहते हैं।
ऊर्जा के प्रमुख रूप हैं—
- यांत्रिक ऊर्जा
- प्रकाश ऊर्जा
- विद्युत ऊर्जा
- रासायनिक ऊर्जा
- तापीय ऊर्जा
- ध्वनि ऊर्जा
- नाभिकीय ऊर्जा
ऊर्जा एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित हो सकती है।
6. गतिज ऊर्जा क्या है? इसका सूत्र लिखिए।
उत्तर:
किसी वस्तु की गति के कारण उसमें जो ऊर्जा होती है उसे गतिज ऊर्जा कहते हैं।
सूत्र:
K = ½mv²
जहाँ,
- K = गतिज ऊर्जा
- m = द्रव्यमान
- v = वेग
गतिज ऊर्जा का SI मात्रक जूल (J) है।
7. वस्तु की गति बढ़ने पर उसकी गतिज ऊर्जा पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
जब किसी वस्तु का वेग बढ़ता है तो उसकी गतिज ऊर्जा भी बढ़ जाती है।
यदि वेग दोगुना हो जाए तो गतिज ऊर्जा चार गुना हो जाती है, क्योंकि गतिज ऊर्जा वेग के वर्ग के समानुपाती होती है।
8. स्थितिज ऊर्जा क्या है? इसके प्रकार बताइए।
उत्तर:
किसी वस्तु में उसकी स्थिति या विकृति के कारण संचित ऊर्जा को स्थितिज ऊर्जा कहते हैं।
स्थितिज ऊर्जा मुख्य रूप से—
- गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा
- विकृति (स्प्रिंग या रबर बैंड) के कारण स्थितिज ऊर्जा
के रूप में प्राप्त होती है।
9. गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा क्या है? इसका सूत्र लिखिए।
उत्तर:
जब किसी वस्तु को पृथ्वी की सतह से ऊपर उठाया जाता है तो उसमें गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा संचित हो जाती है।
सूत्र:
U = mgh
जहाँ,
- U = स्थितिज ऊर्जा
- m = द्रव्यमान
- g = गुरुत्वीय त्वरण
- h = ऊँचाई
ऊँचाई बढ़ने पर स्थितिज ऊर्जा भी बढ़ती है।
10. रबर बैंड या स्प्रिंग में स्थितिज ऊर्जा कैसे संचित होती है?
उत्तर:
जब रबर बैंड को खींचा जाता है या स्प्रिंग को दबाया अथवा खींचा जाता है, तब उस पर कार्य किया जाता है। यह कार्य ऊर्जा के रूप में उसमें संचित हो जाता है।
जब रबर बैंड या स्प्रिंग को छोड़ दिया जाता है, तो वह अपनी संचित ऊर्जा दूसरी वस्तु को गतिज ऊर्जा के रूप में दे देता है और वह वस्तु गति करने लगती है।

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