अध्याय 11 – जनन: जीवन की निरंतरता
1. जनन (Reproduction)
परिभाषा
जनन वह जैविक प्रक्रिया है जिसके द्वारा जीव अपने समान नई संतति उत्पन्न करते हैं।
महत्व
- पृथ्वी पर जीवन की निरंतरता बनी रहती है।
- प्रत्येक जीव का जीवनकाल सीमित होता है, इसलिए नई संतति का जन्म आवश्यक है।
- एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में गुणों का स्थानांतरण होता है।
2. जनन के प्रकार
जनन मुख्यतः दो प्रकार का होता है—
(i) अलैंगिक जनन
- केवल एक जनक भाग लेता है।
- युग्मकों (Gametes) की आवश्यकता नहीं होती।
- संतति अपने जनक के लगभग समान होती है।
(ii) लैंगिक जनन
- दो जनक भाग लेते हैं।
- नर एवं मादा युग्मकों का संयोग होता है।
- संतति में दोनों जनकों के गुण पाए जाते हैं।
इस भाग में केवल अलैंगिक जनन का अध्ययन किया गया है।
3. अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction)
परिभाषा
जिस जनन प्रक्रिया में केवल एक जनक से बिना युग्मकों के नई संतति बनती है, उसे अलैंगिक जनन कहते हैं।
कहाँ पाया जाता है?
एककोशिकीय जीव
- जीवाणु
- अमीबा
- यीस्ट
सरल बहुकोशिकीय जीव
- हाइड्रा
- स्पंज
पौधों में
अनेक पौधों में भी अलैंगिक जनन होता है।
4. अलैंगिक जनन की विशेषताएँ
- केवल एक जनक होता है।
- युग्मकों का निर्माण नहीं होता।
- निषेचन नहीं होता।
- संतति आनुवंशिक रूप से लगभग समान होती है।
- नई संतति जल्दी बनती है।
- कम समय में अधिक संख्या में जीव उत्पन्न हो सकते हैं।
5. कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation)
परिभाषा
जब पौधे के वर्धनशील (कायिक) भागों जैसे—
- जड़
- तना
- पत्ती
से नया पौधा बनता है, तो इसे कायिक प्रवर्धन कहते हैं।
उदाहरण
| पौधा | नया पौधा किस भाग से बनता है? |
|---|---|
| आलू | भूमिगत तना |
| अदरक | भूमिगत तना |
| गन्ना | तने की कर्तन |
| मनीप्लांट | तने की कर्तन |
| ब्रायोफिलम | पत्तियों पर बनने वाले छोटे पादप |
6. कृषि में कायिक प्रवर्धन का महत्व
वैज्ञानिकों और बागवानी विशेषज्ञों ने प्राकृतिक कायिक प्रवर्धन को विकसित करके कई तकनीकें बनाई हैं।
मुख्य विधियाँ—
- कर्तन (Cutting)
- कलम बाँधना (Grafting)
- परतन (Layering)
- ऊतक संवर्धन (Tissue Culture)
इनसे—
- अच्छी गुणवत्ता वाले पौधे तैयार होते हैं।
- इच्छित किस्में सुरक्षित रहती हैं।
- कम समय में अधिक पौधे प्राप्त होते हैं।
- कृषि एवं बागवानी में उत्पादन बढ़ता है।
7. कर्तन (Cutting)
अर्थ
पौधे के तने या शाखा का एक भाग काटकर मिट्टी में लगाने से नया पौधा तैयार करना।
विशेषताएँ
- स्वस्थ शाखा चुनी जाती है।
- उसमें पर्वसंधियाँ (Nodes) होती हैं।
- उचित नमी मिलने पर जड़ें विकसित हो जाती हैं।
- धीरे-धीरे नया पौधा बन जाता है।
8. कलम बाँधना (Grafting)
अर्थ
दो अलग-अलग पौधों के भागों को जोड़कर एक नया पौधा तैयार करना।
प्रक्रिया
- स्वस्थ मूल पौधा चुना जाता है।
- दूसरे पौधे की स्वस्थ कलम ली जाती है।
- मूल पौधे में चीरा लगाया जाता है।
- कलम को उसमें लगाया जाता है।
- कपड़े या फिल्म से बाँध दिया जाता है।
- नियमित सिंचाई की जाती है।
- दोनों भाग जुड़कर एक पौधा बन जाते हैं।
लाभ
- अच्छी किस्म के फल एवं फूल प्राप्त होते हैं।
- वांछित गुण सुरक्षित रहते हैं।
9. परतन (Layering)
अर्थ
पौधे की टहनी को मिट्टी में दबाकर उसमें जड़ें विकसित कराना।
प्रक्रिया
- लचीली शाखा चुनी जाती है।
- बीच का भाग मिट्टी में दबाया जाता है।
- नियमित पानी दिया जाता है।
- कुछ दिनों बाद जड़ें बन जाती हैं।
- शाखा को जनक पौधे से काट दिया जाता है।
- वह स्वतंत्र नया पौधा बन जाती है।
10. ऊतक संवर्धन (Tissue Culture)
अर्थ
पौधे के छोटे ऊतक (विशेषकर प्ररोह शीर्ष) से प्रयोगशाला में अनेक नए पौधे तैयार करना।
लाभ
- स्वस्थ पौधे प्राप्त होते हैं।
- विषाणु-ग्रस्त पौधों की समस्या कम होती है।
- बड़े स्तर पर पौध तैयार किए जा सकते हैं।
- केले जैसी फसलों में इसका विशेष उपयोग किया जाता है।
11. मुकुलन (Budding)
परिभाषा
जनक शरीर पर एक छोटा उभार (मुकुल) बनता है, जो बढ़कर अलग हो जाता है और नया जीव बन जाता है।
उदाहरण
- यीस्ट
- हाइड्रा
हाइड्रा में
- शरीर पर बार-बार कोशिका विभाजन होता है।
- मुकुल बनता है।
- मुकुल बढ़ता है।
- जनक से अलग होकर स्वतंत्र जीव बन जाता है।
12. बीजाणु निर्माण (Spore Formation)
परिभाषा
कुछ जीव विशेष प्रकार के बीजाणु (Spores) बनाते हैं, जिनसे नए जीव विकसित होते हैं।
उदाहरण
- राइजोपस (ब्रेड मोल्ड)
- ऐस्परजिलस
बीजाणुओं की विशेषताएँ
- संख्या बहुत अधिक होती है।
- हल्के होते हैं।
- वायु द्वारा आसानी से फैल जाते हैं।
- अनुकूल परिस्थितियों में नया जीव बनाते हैं।
13. फफूँद (कवक) की वृद्धि
फफूँद की वृद्धि के लिए आवश्यक—
- नमी
- गर्म तापमान (लगभग 25–35°C)
इसी कारण—
- भोजन जल्दी खराब हो जाता है।
- ब्रेड पर फफूँद लग जाती है।
- नम दीवारों पर काले धब्बे दिखाई देते हैं।
कम तापमान पर इनकी वृद्धि धीमी हो जाती है, इसलिए भोजन को प्रशीतन (Refrigeration) में रखा जाता है।
14. कवकों का महत्व
लाभ
- कार्बनिक अपशिष्टों का अपघटन करते हैं।
- प्रदूषण कम करने में सहायक।
- कुछ कवक भारी धातुओं को हटाने में उपयोगी हैं।
- पेनिसिलिन तथा एमोक्सिसिलिन जैसे प्रतिजैविक प्राप्त होते हैं।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण परिभाषाएँ
जनन
नई संतति उत्पन्न करने की जैविक प्रक्रिया।
अलैंगिक जनन
एक जनक द्वारा बिना युग्मकों के नई संतति उत्पन्न करना।
कायिक प्रवर्धन
पौधे के कायिक भागों (जड़, तना, पत्ती) से नया पौधा बनना।
कर्तन
तने के भाग से नया पौधा तैयार करना।
कलम बाँधना
दो पौधों के भागों को जोड़कर नया पौधा बनाना।
परतन
टहनी को मिट्टी में दबाकर जड़ें विकसित करना।
मुकुलन
जनक शरीर पर बने मुकुल से नया जीव बनना।
बीजाणु निर्माण
बीजाणुओं द्वारा नए जीवों का निर्माण।

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