क्रियाशील ऊतक
1. ऊतक (Tissue) क्या है?
- समान संरचना वाली तथा समान कार्य करने वाली कोशिकाओं का समूह ऊतक कहलाता है।
- बहुकोशिकीय जीवों में संगठन का क्रम:
कोशिका → ऊतक → अंग → अंग तंत्र → जीव
ऊतकों का महत्व
- शरीर में श्रम विभाजन (Division of Labour) होता है।
- प्रत्येक ऊतक विशेष कार्य करता है।
- इससे शरीर की कार्यक्षमता बढ़ती है।
- जटिल जैविक कार्य आसानी से संपन्न होते हैं।
2. पादप एवं जंतु ऊतक अलग क्यों होते हैं?
पादपों में
- अधिकांश पादप एक स्थान पर स्थिर रहते हैं।
- कोशिका भित्ति होने के कारण दृढ़ता एवं सहारा मिलता है।
- प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन बनाते हैं।
- जल एवं खनिजों के परिवहन के लिए विशेष ऊतक होते हैं।
जंतुओं में
- अधिकांश जंतु गतिशील होते हैं।
- कोशिका भित्ति नहीं होती, इसलिए कोशिकाएँ अधिक लचीली होती हैं।
- भोजन का पाचन करने वाले विशेष ऊतक होते हैं।
- शरीर में विभिन्न कार्यों के लिए अलग-अलग ऊतक पाए जाते हैं।
3. पादपों में वृद्धि के लिए ऊतक
पौधों में वृद्धि तीन प्रकार की होती है:
- लंबाई में वृद्धि
- तने की मोटाई (परिधि) में वृद्धि
- कटने या चरने के बाद पुनः वृद्धि
इन कार्यों के लिए सक्रिय रूप से विभाजित होने वाली कोशिकाओं वाला ऊतक आवश्यक होता है जिसे विभज्योतक ऊतक (Meristematic Tissue) कहते हैं।
4. विभज्योतक ऊतक (Meristematic Tissue)
विशेषताएँ
- कोशिकाएँ छोटी होती हैं।
- कोशिका भित्ति पतली होती है।
- केंद्रक बड़ा एवं स्पष्ट होता है।
- कोशिकाद्रव्य सघन होता है।
- रसधानियाँ सामान्यतः अनुपस्थित होती हैं।
- कोशिकाओं के बीच अंतरकोशिकीय स्थान बहुत कम या नहीं होते।
- कोशिकाएँ लगातार विभाजन करती रहती हैं।
4.1 शीर्षस्थ विभज्योतक (Apical Meristem)
स्थान
- जड़ के अग्रभाग पर
- प्ररोह (Shoot) के अग्रभाग पर
कार्य
- पौधे की लंबाई बढ़ाता है।
- जड़ों को गहराई तक बढ़ने में सहायता करता है।
4.2 पार्श्व विभज्योतक (Lateral Meristem)
स्थान
- तने के पार्श्व भागों में
कार्य
- तने की मोटाई (परिधि) बढ़ाता है।
- वार्षिक वृद्धि वलयों (Annual Rings) के निर्माण में सहायता करता है।
महत्व
- वृक्ष की आयु का अनुमान वार्षिक वलयों से लगाया जा सकता है।
4.3 अंतर्वेशी विभज्योतक (Intercalary Meristem)
स्थान
- पर्व (Internode) या पर्वसंधि के निकट
कार्य
- कटने के बाद पुनः वृद्धि कराता है।
- घास के दोबारा उगने में सहायता करता है।
- नई शाखाओं के निर्माण में सहायक है।
5. स्थायी ऊतक (Permanent Tissue)
जब विभज्योतक कोशिकाएँ विभाजन की क्षमता खो देती हैं और किसी विशेष कार्य के लिए विशेषीकृत हो जाती हैं, तब वे स्थायी ऊतक कहलाती हैं।
प्रकार
- सरल स्थायी ऊतक
- जटिल स्थायी ऊतक
6. सुरक्षात्मक ऊतक – बाह्यत्वचा (Epidermis)
विशेषताएँ
- पौधे की सबसे बाहरी परत।
- एकल परत वाली कोशिकाओं से बनी होती है।
- क्यूटिन नामक मोमी पदार्थ से ढकी रहती है।
- इस परत को उपत्वचा (Cuticle) कहते हैं।
कार्य
- पौधे की सुरक्षा करना।
- जल की हानि कम करना।
- रोगाणुओं से रक्षा करना।
- जड़ों में मूलरोम बनाकर जल एवं खनिजों का अवशोषण बढ़ाना।
- रंध्रों द्वारा गैसीय विनिमय एवं वाष्पोत्सर्जन कराना।
7. सरल स्थायी ऊतक (Supporting Tissues)
7.1 मृदूतक (Parenchyma)
विशेषताएँ
- जीवित कोशिकाएँ।
- पतली कोशिका भित्ति।
- कोशिकाओं के बीच पर्याप्त अंतरकोशिकीय स्थान।
कार्य
- भोजन का भंडारण।
- प्रकाश संश्लेषण।
- जलीय पौधों में वायु गुहिकाएँ बनाकर तैरने में सहायता।
7.2 श्लेषोतक (Collenchyma)
विशेषताएँ
- जीवित कोशिकाएँ।
- कोनों पर भित्तियाँ मोटी होती हैं।
कार्य
- सहारा प्रदान करना।
- लचीलापन प्रदान करना।
- तने एवं पत्तियों को बिना टूटे मुड़ने में सहायता देना।
7.3 दृढ़ोतक (Sclerenchyma)
विशेषताएँ
- अधिकांश कोशिकाएँ मृत होती हैं।
- लिग्निन युक्त मोटी भित्तियाँ।
कार्य
- दृढ़ता एवं कठोरता प्रदान करना।
उदाहरण
- नारियल के रेशे
- अखरोट का कठोर छिलका
- बीजों का कठोर आवरण
8. जटिल स्थायी ऊतक (Complex Permanent Tissue)
8.1 जाइलम (Xylem)
कार्य
- जड़ों से जल एवं खनिजों का परिवहन।
- पौधे को मजबूती प्रदान करना।
घटक
- वाहिनिकाएँ
- वाहिकाएँ
- जाइलम मृदूतक
- जाइलम तंतु
8.2 फ्लोएम (Phloem)
कार्य
- पत्तियों में बने भोजन को पौधे के अन्य भागों तक पहुँचाना।
घटक
- चालनी नलिकाएँ
- सहचर कोशिकाएँ
- फ्लोएम मृदूतक
- फ्लोएम तंतु
9. पादप ऊतक तंत्र (Plant Tissue Systems)
1. त्वचीय ऊतक तंत्र
- बाहरी आवरण बनाता है।
- सुरक्षा प्रदान करता है।
- जल हानि कम करता है।
2. भरण ऊतक तंत्र
- पौधे के मुख्य भाग का निर्माण करता है।
- इसमें मृदूतक, श्लेषोतक और दृढ़ोतक शामिल होते हैं।
3. संवहन ऊतक तंत्र
- जाइलम एवं फ्लोएम से मिलकर बना होता है।
10. जंतु ऊतक (Animal Tissues)
प्रमुख प्रकार
- उपकला ऊतक
- संयोजी ऊतक
- पेशीय ऊतक
- तंत्रिका ऊतक
11. उपकला ऊतक (Epithelial Tissue)
कार्य
- शरीर की बाहरी सतह का निर्माण।
- आंतरिक अंगों का अस्तर बनाना।
- सुरक्षा, अवशोषण, स्रवण एवं विनिमय करना।
विशेषताएँ
- कोशिकाएँ सघन रूप से व्यवस्थित होती हैं।
- अंतरकोशिकीय स्थान बहुत कम होते हैं।
प्रकार एवं कार्य
(i) विनिमयी उपकला
- गैसों एवं द्रवों के विसरण में सहायता।
(ii) सुरक्षात्मक उपकला
- त्वचा, मुख एवं ग्रासनली की रक्षा।
(iii) स्रावी उपकला
- लार, स्वेद, हार्मोन आदि का स्रवण।
(iv) संवेदी उपकला
- गंध, स्वाद, ध्वनि एवं संतुलन का अनुभव।
(v) अवशोषी उपकला
- छोटी आँत में पोषक तत्वों का अवशोषण।
12. संयोजी ऊतक (Connective Tissue)
कार्य
- विभिन्न ऊतकों और अंगों को जोड़ना।
- सहारा एवं सुरक्षा देना।
प्रकार
1. रक्त
- परिवहन का कार्य करता है।
- लाल रक्त कोशिकाएँ – ऑक्सीजन परिवहन
- श्वेत रक्त कोशिकाएँ – रोगों से रक्षा।
- बिंबाणु (Platelets) – रक्त का थक्का बनाते हैं
2. अस्थि (Bone)
- शरीर को आकार एवं सहारा देती है।
- कैल्सियम एवं फॉस्फोरस युक्त होती है
3. उपास्थि (Cartilage)
- लचीली होती है।
- झटकों को कम करती है।
4. कंडरा (Tendon)
- मांसपेशी को अस्थि से जोड़ती है।
5. स्नायु (Ligament)
- अस्थि को अस्थि से जोड़ता है।
- जोड़ों को स्थिर रखता है।
13. पेशीय ऊतक (Muscular Tissue)
1. कंकाली पेशियाँ (Skeletal Muscles)
- ऐच्छिक (Voluntary) गतियाँ कराती हैं।
- हड्डियों से जुड़ी होती हैं।
- लंबी, बेलनाकार एवं धारियुक्त होती हैं।
2. चिकनी पेशियाँ (Smooth Muscles)
- अनैच्छिक (Involuntary) गतियाँ कराती हैं।
- आमाशय एवं आँतों में पाई जाती हैं।
- धारियाँ नहीं होतीं।
3. हृदय पेशियाँ (Cardiac Muscles)
- केवल हृदय में पाई जाती हैं।
- शाखित एवं धारियुक्त होती हैं।
- जीवन भर बिना थके कार्य करती हैं।
14. तंत्रिका ऊतक (Nervous Tissue)
कार्य
- शरीर का नियंत्रण एवं समन्वय।
- संदेशों का संचार।
- संवेदनाओं का ग्रहण एवं प्रतिक्रिया कराना।
महत्व
- मस्तिष्क नियंत्रण केंद्र का कार्य करता है।
- ऐच्छिक एवं अनैच्छिक दोनों क्रियाओं का समन्वय करता है।

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