अपने परिवेश में गति का वर्णन
1. गति (Motion)
प्रकृति में लगभग सभी वस्तुएँ किसी न किसी प्रकार की गति करती हैं। यदि किसी वस्तु की स्थिति समय के साथ बदलती है, तो वह वस्तु गतिशील कहलाती है।
इस अध्याय में मुख्य रूप से:
- सरल रेखीय गति
- एकसमान वृत्तीय गति
- दूरी, विस्थापन
- चाल, वेग
- त्वरण
- गति का आलेखीय निरूपण
का अध्ययन किया गया है।
2. सरल रेखा में गति (Rectilinear Motion)
जब कोई वस्तु सीधी रेखा में गमन करती है तो उसकी गति को सरल रेखीय गति कहते हैं।
उदाहरण
- सीधे मार्ग पर चलती कार
- सीधी पटरी पर चलती रेलगाड़ी
- ऊपर से नीचे गिरती गेंद
- तैराकी प्रतियोगिता में सीधी दिशा में तैरता खिलाड़ी
3. स्थिति (Position) का वर्णन
किसी वस्तु की स्थिति बताने के लिए एक निश्चित संदर्भ बिंदु (Reference Point) चुना जाता है।
स्थिति बताने के लिए दो बातें आवश्यक हैं:
- संदर्भ बिंदु से दूरी
- दिशा
गतिशील वस्तु
यदि समय के साथ संदर्भ बिंदु के सापेक्ष स्थिति बदलती है।
विरामावस्था
यदि समय के साथ स्थिति नहीं बदलती।
4. दिशा का निरूपण
सरल रेखा में वस्तु दो दिशाओं में चल सकती है:
- आगे (+)
- पीछे (−)
सामान्यतः:
- मूल बिंदु के दाहिनी ओर की दिशा धनात्मक (+)
- बाईं ओर की दिशा ऋणात्मक (−)
मानी जाती है।
5. चलित दूरी (Distance Travelled)
किसी वस्तु द्वारा तय किए गए वास्तविक पथ की कुल लंबाई को चलित दूरी कहते हैं।
विशेषताएँ
- केवल परिमाण होता है।
- दिशा की आवश्यकता नहीं होती।
- अदिश राशि है।
- SI मात्रक = मीटर (m)
6. विस्थापन (Displacement)
समय के दो क्षणों के बीच वस्तु की स्थिति में होने वाला सकल परिवर्तन विस्थापन कहलाता है।
विशेषताएँ
- परिमाण तथा दिशा दोनों आवश्यक।
- सदिश राशि है।
- विस्थापन का परिमाण प्रारंभिक और अंतिम स्थिति के बीच की दूरी होता है।
- SI मात्रक = मीटर (m)
महत्वपूर्ण तथ्य
- विस्थापन का परिमाण दूरी से कम या उसके बराबर हो सकता है।
- दूरी कभी भी विस्थापन से कम नहीं होती।
- यदि वस्तु एक ही दिशा में चलती रहे तो दूरी और विस्थापन का परिमाण बराबर होता है।
7. समय का क्षण और समय अंतराल
समय का क्षण
घड़ी का किसी विशेष समय पर पाठ्यांक।
समय अंतराल
दो क्षणों के बीच की अवधि।
8. अदिश और सदिश राशियाँ
अदिश राशि (Scalar Quantity)
जिसे केवल संख्यात्मक मान द्वारा व्यक्त किया जा सके।
उदाहरण:
- दूरी
- चाल
सदिश राशि (Vector Quantity)
जिसके लिए परिमाण तथा दिशा दोनों आवश्यक हों।
उदाहरण:
- विस्थापन
- वेग
- त्वरण
9. माध्य चाल (Average Speed)
किसी वस्तु द्वारा तय की गई कुल दूरी को कुल समय से भाग देने पर माध्य चाल प्राप्त होती है।
सूत्र
माध्य चाल = कुल चलित दूरी / समय अंतराल
विशेषताएँ
- दिशा नहीं होती।
- अदिश राशि है।
10. एकसमान एवं असमान सरल रेखीय गति
एकसमान सरल रेखीय गति
जब वस्तु समान समय अंतरालों में समान दूरी तय करे।
विशेषता
- चाल नियत रहती है।
असमान सरल रेखीय गति
जब समान समय अंतरालों में असमान दूरी तय की जाए।
विशेषता
- चाल बढ़ या घट सकती है।
11. माध्य वेग (Average Velocity)
दिए गए समय अंतराल में विस्थापन को समय अंतराल से भाग देने पर माध्य वेग प्राप्त होता है।
सूत्र
माध्य वेग = विस्थापन / समय अंतराल
विशेषताएँ
- परिमाण और दिशा दोनों होते हैं।
- वेग की दिशा विस्थापन की दिशा होती है
- SI मात्रक = m/s
महत्वपूर्ण तथ्य
यदि वस्तु एक ही दिशा में चल रही हो तो:
माध्य चाल = माध्य वेग का परिमाण
12. तात्क्षणिक वेग (Instantaneous Velocity)
किसी विशेष क्षण पर वस्तु का वेग तात्क्षणिक वेग कहलाता है।
13. त्वरण (Acceleration)
वेग में परिवर्तन की दर को त्वरण कहते हैं।
सूत्र
माध्य त्वरण = वेग में परिवर्तन / समय अंतराल
या
माध्य त्वरण = (अंतिम वेग − प्रारंभिक वेग) / समय अंतराल
प्रतीक
- प्रारंभिक वेग = u
- अंतिम वेग = v
- त्वरण = a
SI मात्रक
m/s²
14. त्वरण की दिशा
जब वेग बढ़ रहा हो
त्वरण की दिशा वेग की दिशा में होती है।
जब वेग घट रहा हो
त्वरण की दिशा वेग के विपरीत होती है।
15. त्वरण के बारे में महत्वपूर्ण बातें
- वस्तु की चाल स्थिर होने पर त्वरण शून्य हो सकता है।
- अधिक वेग होने का अर्थ अधिक त्वरण होना नहीं है।
- त्वरण इस बात पर निर्भर करता है कि वेग कितनी तेजी से बदल रहा है।
16. गुरुत्वीय त्वरण (g)
ऊँचाई से गिरती वस्तु का त्वरण पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण होता है।
मान
g = 9.8 m/s²
विशेषता
- यह नियत त्वरण है।
- इसकी दिशा नीचे की ओर होती है।
17. गति का आलेखीय निरूपण (Graphical Representation)
गति को समझने की उपयोगी विधि उसका आलेखीय निरूपण है।
आलेखों की सहायता से:
- स्थिति का परिवर्तन
- वेग का परिवर्तन
- त्वरण का परिवर्तन
- समान और असमान गति
आसानी से समझे जा सकते हैं।
18. ग्राफ बनाने के मुख्य चरण
- ग्राफ पेपर लें।
- X-अक्ष और Y-अक्ष बनाएं।
- मूल बिंदु (O) निर्धारित करें।
- समय को X-अक्ष पर दर्शाएँ।
- स्थिति को Y-अक्ष पर दर्शाएँ।
- उपयुक्त मापक्रम चुनें।
- बिंदुओं को अंकित करें।
- बिंदुओं को मिलाकर स्थिति-समय ग्राफ बनाएं।

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