गति पर बलों का प्रभाव
1. बल (Force) की अवधारणा
बल वह भौतिक राशि है जो किसी वस्तु की:
- विराम अवस्था को गति में ला सकती है।
- चाल बदल सकती है।
- गति की दिशा बदल सकती है।
- आकार में परिवर्तन कर सकती है।
बल की विशेषताएँ
- बल का परिमाण (Magnitude) और दिशा (Direction) दोनों होते हैं।
- केवल परिमाण बताना पर्याप्त नहीं है।
- बल का SI मात्रक न्यूटन (N) है।
बल का प्रभाव
यदि किसी बल का:
- परिमाण बदल जाए,
- दिशा बदल जाए,
- अथवा दोनों बदल जाएँ,
तो उसका प्रभाव भी बदल जाता है।
2. बल का मापन
- बल का मापन कमानीदार तुला (Spring Balance) से किया जा सकता है।
- किसी वस्तु का भार भी एक बल है।
- कमानीदार तुला भार तथा अन्य बलों के परिमाण को मापने के लिए उपयोग की जाती है।
3. संतुलित एवं असंतुलित बल
अधिकांश स्थितियों में किसी वस्तु पर एक से अधिक बल कार्य करते हैं।
(क) संतुलित बल (Balanced Forces)
जब:
- दो बल परिमाण में बराबर हों,
- तथा दिशा में विपरीत हों,
तो वे संतुलित बल कहलाते हैं।
परिणाम
- वस्तु की अवस्था में परिवर्तन नहीं होता।
- परिणामी बल शून्य होता है।
(ख) असंतुलित बल (Unbalanced Forces)
जब दो बल:
- बराबर न हों,
- अथवा उनका कुल प्रभाव शून्य न हो,
तो वे असंतुलित बल कहलाते हैं।
परिणाम
- वस्तु अधिक बल की दिशा में विस्थापित होती है।
- परिणामी बल शून्य नहीं होता।
4. परिणामी बल (Net Force)
किसी वस्तु पर लगने वाले सभी बलों का कुल प्रभाव परिणामी बल कहलाता है।
नियम
समान दिशा में बल
परिणामी बल = दोनों बलों का योग
उदाहरण:
10 N + 6 N = 16 N
विपरीत दिशा में बल
परिणामी बल = दोनों बलों का अंतर
उदाहरण:
10 N – 6 N = 4 N
दिशा
परिणामी बल की दिशा उस बल की दिशा में होती है जिसका परिमाण अधिक हो।
5. घर्षण बल (Frictional Force)
घर्षण बल वह बल है जो वस्तु की गति या गति करने की प्रवृत्ति का विरोध करता है।
घर्षण बल की दिशा
- सदैव गति की विपरीत दिशा में कार्य करता है।
वस्तु कब गति करती है?
- जब लगाया गया बल घर्षण बल से अधिक हो जाए।
- तब वस्तु पर उसकी गति की दिशा में परिणामी बल कार्य करता है।
6. वस्तु पर कार्य करने वाले प्रमुख बल
जब किसी वस्तु को सतह पर धकेला जाता है, तब उस पर:
- प्रयुक्त बल (Applied Force)
- घर्षण बल (Friction Force)
- गुरुत्वाकर्षण बल (Weight)
- अभिलंब बल (Normal Force)
कार्य कर सकते हैं।
अभिलंब बल
- सतह द्वारा लगाया जाने वाला बल।
- यह सतह के लंबवत दिशा में लगता है।
गुरुत्वाकर्षण एवं अभिलंब बल
- ये दोनों सामान्यतः संतुलित होते हैं।
7. घर्षण बल का प्रभाव
यदि किसी गतिमान वस्तु पर बल लगाना बंद कर दिया जाए:
- उसका वेग धीरे-धीरे कम होता है।
- अंततः वह रुक जाती है।
उदाहरण:
- साइकिल
- गेंद
- धकेली गई पेटिका
8. घर्षण बल और सतह की प्रकृति
क्रियाकलापों से यह निष्कर्ष निकाला गया कि:
- विभिन्न सतहों पर घर्षण बल अलग-अलग होता है।
- कम घर्षण होने पर वस्तु अधिक दूरी तय करती है।
- अधिक घर्षण होने पर वस्तु कम दूरी तय करती है।
कमानीदार तुला का पाठ्यांक
- कम पाठ्यांक → कम घर्षण बल
- अधिक पाठ्यांक → अधिक घर्षण बल
9. गैलीलियो का विचार
गैलीलियो ने बताया कि यदि:
- किसी वस्तु की गति में आने वाली सभी बाधाएँ हटा दी जाएँ,
तो वह वस्तु अनिश्चित समय तक गतिमान रह सकती है।
10. जड़त्व (Inertia)
- जड़त्व किसी वस्तु की वह प्रवृत्ति है जिसके कारण वह अपनी वर्तमान अवस्था (विराम या गति) में परिवर्तन का विरोध करती है।
11. न्यूटन का प्रथम गति नियम
कथन
यदि कोई वस्तु:
- विराम अवस्था में है तो विराम अवस्था में ही रहेगी।
- गति की अवस्था में है तो नियत वेग से चलती रहेगी।
जब तक उस पर कोई परिणामी बल कार्य न करे।
महत्वपूर्ण बातें
- यदि परिणामी बल शून्य है, तो वस्तु के वेग में परिवर्तन नहीं होगा।
- ऐसी स्थिति में त्वरण शून्य होता है।
- नियत वेग का अर्थ है कि वेग के परिमाण तथा दिशा में कोई परिवर्तन न हो।
12. प्रथम नियम के निष्कर्ष
यदि किसी वस्तु पर कोई परिणामी बल नहीं है:
स्थिति 1
वस्तु विराम अवस्था में है
→ वह विराम अवस्था में ही रहेगी।
स्थिति 2
वस्तु पहले से गतिमान है
→ वह नियत वेग से चलती रहेगी।
विशेष तथ्य
यदि घर्षण बल शून्य हो:
- वस्तु को गति देने के लिए केवल प्रारम्भिक परिणामी बल चाहिए।
- एक बार गति में आने के बाद उसे नियत वेग से चलाए रखने के लिए अतिरिक्त बल की आवश्यकता नहीं होती।
लेकिन
वेग (चाल या दिशा) बदलने अथवा वस्तु को रोकने के लिए बल आवश्यक है।

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