कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनें
1. अध्याय का परिचय
इस अध्याय में हम तीन मुख्य अवधारणाएँ सीखते हैं—
- कार्य (Work)
- ऊर्जा (Energy)
- शक्ति (Power)
- साथ ही सरल मशीनों के बारे में भी जानकारी प्राप्त करते हैं।
दैनिक जीवन में लगभग हर कार्य करने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। चलना, वाहन चलाना, मशीनों का काम करना, बिजली से उपकरण चलना आदि सभी कार्य ऊर्जा के कारण संभव होते हैं।
2. कार्य (Work)
सामान्य अर्थ
सामान्य भाषा में किसी भी काम को कार्य कहा जाता है।
लेकिन विज्ञान में कार्य का विशेष अर्थ होता है।
यदि किसी वस्तु पर बल लगाया जाए और उस बल के कारण वस्तु में विस्थापन हो जाए, तभी कार्य होता है।
वैज्ञानिक परिभाषा
किसी वस्तु पर लगाए गए नियत बल तथा बल की दिशा में हुए विस्थापन के गुणनफल को कार्य कहते हैं।
कार्य का सूत्र
W=F×s
जहाँ—
- W = कार्य
- F = लगाया गया बल
- s = बल की दिशा में विस्थापन
3. कार्य किन-किन बातों पर निर्भर करता है?
कार्य दो बातों पर निर्भर करता है—
(1) लगाए गए बल पर
- जितना अधिक बल होगा,
- उतना अधिक कार्य होगा।
उदाहरण:
यदि एक थैले को उठाने में जितना कार्य होता है, तो तीन समान थैले उठाने में तीन गुना कार्य होगा।
(2) विस्थापन पर
यदि बल समान रहे लेकिन वस्तु अधिक दूरी तक जाए,
तो कार्य भी अधिक होगा।
उदाहरण:
एक ही थैले को 1 m की बजाय 3 m तक उठाने पर कार्य तीन गुना हो जाता है।
4. कार्य का SI मात्रक
SI मात्रक = जूल (Joule)
जिसे J से प्रदर्शित करते हैं।
1 जूल की परिभाषा
यदि
- 1 न्यूटन बल लगाया जाए
- और वस्तु बल की दिशा में 1 मीटर विस्थापित हो,
तो किया गया कार्य 1 जूल होगा।
1J=1N×1m
5. कार्य का ग्राफ
यदि बल नियत हो,
तो बल–विस्थापन (Force–Displacement) ग्राफ में आयत का क्षेत्रफल कार्य के बराबर होता है।
यदि बल नियत न हो,
तब भी ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल कार्य बताता है।
6. कार्य शून्य कब होता है?
कार्य शून्य होने की तीन स्थितियाँ हैं—
(1) जब बल शून्य हो
यदि
F=0
तो
W=0
अर्थात कोई कार्य नहीं होगा।
(2) जब विस्थापन शून्य हो
यदि वस्तु अपनी जगह से हिलती ही नहीं,
तो कार्य शून्य होगा।
उदाहरण
दीवार को पूरी शक्ति से धक्का देने पर भी यदि दीवार नहीं हिलती,
तो वैज्ञानिक दृष्टि से कार्य शून्य माना जाता है।
ध्यान दें: शरीर में ऊर्जा खर्च होने से थकान होती है, लेकिन वस्तु का विस्थापन न होने के कारण कार्य शून्य माना जाता है।
(3) जब बल और विस्थापन एक-दूसरे के लंबवत हों
यदि
- बल ऊपर की ओर हो,
- लेकिन वस्तु क्षैतिज दिशा में चले,
तो बल की दिशा में कोई विस्थापन नहीं होगा।
इसलिए कार्य शून्य होगा।
उदाहरण
एक लड़की सिर पर या हाथ में डिब्बा लेकर सीधी चलती है।
- बल ऊपर की ओर
- विस्थापन आगे की ओर
अतः कार्य शून्य।
7. कार्य की दिशा
बल और विस्थापन दोनों सदिश (Vector) राशियाँ हैं।
लेकिन
कार्य एक अदिश (Scalar) राशि है।
इसकी कोई दिशा नहीं होती।
8. धनात्मक कार्य (Positive Work)
जब
- बल और विस्थापन
- एक ही दिशा में हों,
तब कार्य धनात्मक होता है।
उदाहरण
पहिएदार कुर्सी को आगे धक्का देना।
यहाँ
- बल आगे
- विस्थापन भी आगे
अतः कार्य धनात्मक।
9. ऋणात्मक कार्य (Negative Work)
जब
- बल और विस्थापन
- विपरीत दिशा में हों,
तब कार्य ऋणात्मक होता है।
उदाहरण
गोलरक्षक (Goalkeeper) फुटबॉल को रोकता है।
- गेंद आगे बढ़ती है।
- गोलरक्षक पीछे की ओर बल लगाता है।
अतः कार्य ऋणात्मक होता है।
10. पुस्तक में दिए गए महत्वपूर्ण उदाहरण
(1) डम्बल उठाना
- ऊपर उठाते समय → धनात्मक कार्य
- नीचे लाते समय → ऋणात्मक कार्य
क्योंकि नीचे लाते समय बल और विस्थापन विपरीत दिशा में होते हैं।
(2) गोलरक्षक द्वारा फुटबॉल रोकना
दिया है—
- बल = 200 N
- विस्थापन = 15 cm = 0.15 m
W=200×(−0.15)
W=−30J
ऋण चिह्न बताता है कि कार्य ऋणात्मक है।
इस भाग के महत्वपूर्ण सूत्र
कार्य
W=F×s
1 जूल
1J=1N×1m

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