द्रव्य का परमाण्विक आधार
1. अध्याय का मुख्य विचार
द्रव्य बहुत छोटे-छोटे कणों से बना होता है जिन्हें परमाणु कहते हैं। परमाणु आपस में जुड़कर अणु और यौगिक बनाते हैं। रासायनिक अभिक्रियाओं में परमाणु नष्ट या उत्पन्न नहीं होते, बल्कि उनका केवल पुनर्विन्यास होता है। इसी कारण रासायनिक अभिक्रियाओं में द्रव्यमान के संरक्षण का नियम लागू होता है।
2. द्रव्यमान संरक्षण का नियम
नियम
किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में:
अभिकारकों का कुल द्रव्यमान = उत्पादों का कुल द्रव्यमान
अर्थात् रासायनिक अभिक्रिया के दौरान द्रव्य न तो बनाया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है।
इस नियम को द्रव्यमान संरक्षण का नियम कहते हैं।
इस नियम को आंत्वान लवॉज़िए ने वर्ष 1789 में प्रतिपादित किया। उन्हें आधुनिक रसायन विज्ञान का जनक कहा जाता है।
सरल रूप में:
अभिक्रिया से पहले कुल द्रव्यमान = अभिक्रिया के बाद कुल द्रव्यमान
भौतिक परिवर्तन में द्रव्यमान
जब जल में नमक घोला जाता है, तो यह एक भौतिक परिवर्तन है।
इसमें:
जल का द्रव्यमान + नमक का द्रव्यमान = नमक के विलयन का द्रव्यमान
अर्थात् भौतिक परिवर्तन के दौरान द्रव्यमान में व्यावहारिक रूप से कोई परिवर्तन नहीं होता।
रासायनिक परिवर्तन में द्रव्यमान
सिरके और बेकिंग सोडा को मिलाने पर कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनती है।
यदि यह प्रयोग खुले पात्र में किया जाए, तो गैस बाहर निकल जाती है। इसलिए ऐसा लगता है कि द्रव्यमान कम हो गया है।
लेकिन यदि पूरा प्रयोग बंद निकाय में किया जाए और गैस को बाहर निकलने न दिया जाए, तो:
अभिकारकों का कुल द्रव्यमान = उत्पादों का कुल द्रव्यमान
इससे द्रव्यमान संरक्षण का नियम सिद्ध होता है।
महत्वपूर्ण बात
खुले पात्र में गैस बाहर निकलने के कारण मापे गए द्रव्यमान में अंतर दिखाई दे सकता है, लेकिन वास्तव में कुल द्रव्यमान संरक्षित रहता है।
3. स्थिर अनुपात का नियम
इस नियम को निश्चित अनुपात का नियम या प्राउस्ट का नियम भी कहते हैं।
इस नियम को जोसेफ प्राउस्ट ने प्रतिपादित किया।
नियम
किसी शुद्ध यौगिक में उपस्थित तत्व सदैव द्रव्यमान के एक निश्चित अनुपात में पाए जाते हैं।
यह अनुपात उस यौगिक के स्रोत या उसे बनाने की विधि पर निर्भर नहीं करता।
उदाहरण: जल
जल में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का द्रव्यमान अनुपात हमेशा:
हाइड्रोजन : ऑक्सीजन = 1 : 8
इसलिए 9 g जल के अपघटन से:
- हाइड्रोजन = 1 g
- ऑक्सीजन = 8 g
प्राप्त होती है।
निष्कर्ष
किसी यौगिक की संरचना में उपस्थित तत्वों का द्रव्यमान अनुपात निश्चित रहता है।
यौगिक और मिश्रण में अंतर
यौगिक
- तत्व निश्चित अनुपात में जुड़े होते हैं।
- तत्वों का अनुपात स्थिर होता है।
- उदाहरण: जल में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का अनुपात 1 : 8 होता है।
मिश्रण
- पदार्थ किसी भी अनुपात में मिल सकते हैं।
- घटकों का अनुपात निश्चित नहीं होता।
इसलिए स्थिर अनुपात का नियम यौगिकों पर लागू होता है, मिश्रणों पर नहीं।
4. डाल्टन का परमाणु सिद्धांत
जॉन डाल्टन ने परमाणु सिद्धांत प्रस्तुत किया। उनके सिद्धांत ने द्रव्य की संरचना और रासायनिक अभिक्रियाओं को समझने में महत्वपूर्ण आधार प्रदान किया।
डाल्टन के मुख्य अभिगृहीत
1. द्रव्य परमाणुओं से बना है
संपूर्ण द्रव्य अत्यंत सूक्ष्म कणों से बना होता है। इन कणों को परमाणु कहते हैं।
2. परमाणु रासायनिक अभिक्रियाओं में भाग लेते हैं
रासायनिक अभिक्रिया में परमाणु आपस में पुनर्व्यवस्थित होते हैं।
3. परमाणु नष्ट या उत्पन्न नहीं होते
रासायनिक अभिक्रिया में परमाणुओं को न तो बनाया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है।
4. एक ही तत्व के परमाणु समान होते हैं
किसी तत्व के परमाणुओं का द्रव्यमान और रासायनिक गुण समान होते हैं।
5. अलग-अलग तत्वों के परमाणु अलग होते हैं
विभिन्न तत्वों के परमाणुओं के द्रव्यमान और रासायनिक गुण अलग-अलग होते हैं।
6. परमाणु सरल पूर्णांक अनुपात में जुड़ते हैं
परमाणु सरल पूर्णांक अनुपात में संयोजित होकर यौगिक बनाते हैं।
7. यौगिकों में परमाणुओं की संख्या निश्चित होती है
किसी यौगिक में उपस्थित परमाणुओं के प्रकार और उनकी सापेक्ष संख्या निश्चित होती है।
5. परमाणु किस प्रकार संयोजित होते हैं?
परमाणु अधिक स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास प्राप्त करने के लिए आपस में जुड़ते हैं।
परमाणु मुख्यतः दो तरीकों से संयोजित हो सकते हैं:
- इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी
- इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण
परमाणुओं को एक साथ बाँधकर रखने वाले बल को रासायनिक आबंध कहते हैं।
जब परमाणु जुड़ते हैं, तो बनी हुई व्यवस्था अधिक स्थायी हो जाती है।
6. अणु
अणु की परिभाषा
अणु एक विद्युत रूप से उदासीन कण है, जिसमें एक या एक से अधिक परमाणु होते हैं और जो स्वतंत्र रूप से अस्तित्व में रह सकता है।
अणु उस पदार्थ के गुणों को प्रदर्शित करता है।
उदाहरण
- हाइड्रोजन अणु = H₂
- क्लोरीन अणु = Cl₂
- ऑक्सीजन अणु = O₂
- जल अणु = H₂O
ध्यान दें
कुछ तत्व, जैसे हीलियम, केवल परमाणुओं के रूप में ही पाए जाते हैं क्योंकि उनके परमाणु स्थायी होते हैं।
7. सहसंयोजी आबंध
जब दो परमाणु अपने इलेक्ट्रॉनों को साझा करते हैं, तो बनने वाले आबंध को सहसंयोजी आबंध कहते हैं।
7.1 हाइड्रोजन अणु — H₂
हाइड्रोजन के एक परमाणु में K-कोश में एक इलेक्ट्रॉन होता है।
स्थायी होने के लिए उसे एक और इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता होती है।
इसलिए दो हाइड्रोजन परमाणु एक-एक इलेक्ट्रॉन साझा करते हैं।
H + H → H₂
इसे इस प्रकार लिखा जाता है:
H—H
दो परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों के एक साझा युग्म से बनने वाला आबंध एकल सहसंयोजी आबंध कहलाता है।
7.2 क्लोरीन अणु — Cl₂
क्लोरीन के संयोजकता कोश में 7 इलेक्ट्रॉन होते हैं।
स्थायी विन्यास प्राप्त करने के लिए प्रत्येक क्लोरीन परमाणु को 1 इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता होती है।
दो क्लोरीन परमाणु एक-एक इलेक्ट्रॉन साझा करते हैं।
Cl—Cl
इसलिए क्लोरीन अणु में एक एकल सहसंयोजी आबंध होता है।
7.3 ऑक्सीजन अणु — O₂
ऑक्सीजन के संयोजकता कोश में 6 इलेक्ट्रॉन होते हैं।
स्थायी विन्यास के लिए प्रत्येक ऑक्सीजन परमाणु को 2 और इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है।
इसलिए दो ऑक्सीजन परमाणु दो-दो इलेक्ट्रॉन साझा करते हैं।
इससे दो साझा इलेक्ट्रॉन युग्म बनते हैं।
इसे इस प्रकार दर्शाया जाता है:
O=O
दो साझा इलेक्ट्रॉन युग्मों से बनने वाला आबंध द्वि-आबंध कहलाता है।
8. सहसंयोजी यौगिक
जब विभिन्न तत्वों के परमाणु इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी द्वारा जुड़ते हैं, तो सहसंयोजी यौगिक बनते हैं।
8.1 हाइड्रोजन क्लोराइड — HCl
हाइड्रोजन को स्थायी होने के लिए 1 इलेक्ट्रॉन चाहिए।
क्लोरीन को स्थायी होने के लिए 1 इलेक्ट्रॉन चाहिए।
दोनों एक-एक इलेक्ट्रॉन साझा करते हैं।
इसलिए:
H—Cl
हाइड्रोजन क्लोराइड एक सहसंयोजी यौगिक है।
8.2 जल — H₂O
प्रत्येक हाइड्रोजन परमाणु को 1 इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता होती है।
ऑक्सीजन को 2 इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है।
ऑक्सीजन दो हाइड्रोजन परमाणुओं के साथ एक-एक इलेक्ट्रॉन साझा करती है।
इसलिए जल का सूत्र:
H₂O
इसका अर्थ है:
2 हाइड्रोजन परमाणु + 1 ऑक्सीजन परमाणु
9. सहसंयोजी यौगिकों का नामकरण
सहसंयोजी यौगिकों के नामकरण में अणु में उपस्थित परमाणुओं की संख्या बताने के लिए उपसर्गों का उपयोग किया जाता है।
कुछ उपसर्ग:
- मोनो- = 1
- डाइ- = 2
यौगिक के दूसरे तत्व के नाम के अंत में सामान्यतः –आइड (-ide) लगाया जाता है।
10. आयनिक यौगिक
कुछ परमाणु स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास प्राप्त करने के लिए इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण करते हैं।
इस प्रक्रिया में:
- एक परमाणु इलेक्ट्रॉन त्याग सकता है।
- दूसरा परमाणु इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर सकता है।
इससे आवेशित कण बनते हैं जिन्हें आयन कहते हैं।
धनायन
इलेक्ट्रॉन खोने पर बनने वाला धनावेशित आयन धनायन कहलाता है।
ऋणायन
इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने पर बनने वाला ऋणावेशित आयन ऋणायन कहलाता है।
धनायन और ऋणायन के बीच आकर्षण के कारण आयनिक यौगिक बनते हैं।
11. आयनिक यौगिकों के रासायनिक सूत्र लिखना
किसी आयनिक यौगिक का सूत्र लिखते समय:
- पहले धनायन का प्रतीक लिखा जाता है।
- उसके बाद ऋणायन का प्रतीक लिखा जाता है।
- आयनों के आवेशों को ध्यान में रखा जाता है।
- आवेशों की संख्याओं का तिर्यक उपयोग करके सूत्र बनाया जाता है।
- प्राप्त अनुपात को सबसे सरल पूर्णांक अनुपात में लिखा जाता है।
रासायनिक सूत्र किसी यौगिक में तत्वों का सरलतम अनुपात दर्शाता है।
12. परमाणु द्रव्यमान
किसी परमाणु का द्रव्यमान बहुत छोटा होता है। इसलिए परमाणुओं के द्रव्यमान को व्यक्त करने के लिए परमाणु द्रव्यमान इकाई (u) का उपयोग किया जाता है।
परमाणु द्रव्यमान को परमाणु के सापेक्ष द्रव्यमान के रूप में व्यक्त किया जाता है।
13. आण्विक द्रव्यमान
किसी अणु में उपस्थित सभी परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमानों का योग आण्विक द्रव्यमान कहलाता है।
सूत्र
आण्विक द्रव्यमान = अणु में उपस्थित सभी परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमानों का योग
उदाहरण: जल H₂O
जल के एक अणु में:
- 2 हाइड्रोजन परमाणु
- 1 ऑक्सीजन परमाणु
इसलिए:
H₂O का आण्विक द्रव्यमान = (2 × H का परमाणु द्रव्यमान) + (1 × O का परमाणु द्रव्यमान)
14. सूत्र इकाई द्रव्यमान
आयनिक यौगिकों में अलग-अलग अणु नहीं होते। इसलिए उनके लिए सूत्र इकाई का उपयोग किया जाता है।
परिभाषा
आयनिक यौगिक में आयनों की सरलतम पूर्ण संख्या का अनुपात उसकी सूत्र इकाई कहलाता है।
सूत्र इकाई में उपस्थित सभी परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमानों का योग सूत्र इकाई द्रव्यमान कहलाता है।
उदाहरण: Na₂O
- Na = 23 u
- O = 16 u
Na₂O का सूत्र इकाई द्रव्यमान = (23 × 2) + 16 = 62 u
इसी प्रकार Ca(NO₃)₂ का सूत्र इकाई द्रव्यमान 164 u है।
15. अध्याय की महत्वपूर्ण तुलना
| आधार | परमाणु | अणु | यौगिक |
|---|---|---|---|
| अर्थ | द्रव्य का बहुत सूक्ष्म कण | एक या अधिक परमाणुओं से बना कण | विभिन्न तत्वों से बना शुद्ध पदार्थ |
| स्वतंत्र अस्तित्व | कुछ तत्वों में | सामान्यतः हो सकता है | अपने निश्चित रूप में होता है |
| उदाहरण | He | H₂, O₂ | H₂O, HCl |
16. अध्याय के मुख्य नियम और वैज्ञानिक
द्रव्यमान संरक्षण का नियम
वैज्ञानिक: आंत्वान लवॉज़िए
मुख्य विचार: रासायनिक अभिक्रिया में कुल द्रव्यमान समान रहता है।
स्थिर अनुपात का नियम
वैज्ञानिक: जोसेफ प्राउस्ट
मुख्य विचार: किसी शुद्ध यौगिक में तत्व निश्चित द्रव्यमान अनुपात में होते हैं।
परमाणु सिद्धांत
वैज्ञानिक: जॉन डाल्टन
मुख्य विचार: द्रव्य परमाणुओं से बना है और रासायनिक अभिक्रियाओं में परमाणु केवल पुनर्व्यवस्थित होते हैं।
त्वरित पुनरावृत्ति
- द्रव्य परमाणुओं से बना होता है।
- रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान संरक्षित रहता है।
- किसी शुद्ध यौगिक में तत्व निश्चित अनुपात में होते हैं।
- डाल्टन ने परमाणु सिद्धांत दिया।
- परमाणु स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास प्राप्त करने के लिए संयोजित होते हैं।
- इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी से सहसंयोजी आबंध बनता है।
- इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण से आयन बनते हैं।
- हाइड्रोजन का अणु H₂ है।
- क्लोरीन का अणु Cl₂ है।
- ऑक्सीजन का अणु O₂ है।
- जल का सूत्र H₂O है।
- आण्विक द्रव्यमान सभी परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमानों का योग होता है।
- आयनिक यौगिकों के लिए सूत्र इकाई द्रव्यमान का उपयोग किया जाता है।

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