दो बैलों की कथा
— प्रेमचंद
महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)
15 प्रश्न
🔥 अतिमहत्वपूर्ण
हीरा और मोती झूरी काछी के दो बैल थे। दोनों पछाईं जाति के थे — देखने में सुंदर, काम में चौकस और डील में ऊँचे। बहुत दिनों साथ रहने के कारण दोनों में गहरी मित्रता हो गई थी।
⭐ महत्वपूर्ण
झूरी ने अपने बैलों — हीरा और मोती — को अपने साले गया के घर (ससुराल) भेजा। बैलों को लगा कि मालिक ने उन्हें बेच दिया है, इसलिए उन्होंने नई जगह जाने का विरोध किया।
✅ अवश्य पूछा जाता है
जब गाँव में रात को सोता पड़ गया, तो दोनों बैलों ने जोर मारकर पगहे तोड़ डाले और घर की ओर चल पड़े। अगले दिन प्रातःकाल झूरी ने देखा कि दोनों बैल चरनी पर खड़े हैं और उनके घुटने तक पाँव कीचड़ से भरे हैं।
⭐ महत्वपूर्ण
झूरी की पत्नी ने बैलों को “नमकहराम” कहा। उसने कहा कि ये बैल एक दिन भी काम नहीं किया और भाग खड़े हुए। उसने मजूर को आदेश दिया कि बैलों को केवल सूखा भूसा दिया जाए।
🔥 अतिमहत्वपूर्ण
भैरो की छोटी लड़की की माँ मर चुकी थी और सौतेली माँ उसे मारती थी। इसलिए उसे बैलों से आत्मीयता हो गई थी — वह भी दुखी थी, वे भी। वह रोज रात को उन्हें दो रोटियाँ खिलाती थी और अंत में उसने उनकी रस्सी खोल दी।
⭐ महत्वपूर्ण
हीरा ने योजना बनाई — एक आगे से और दूसरा पीछे से मिलकर साँड़ पर चोट करेंगे। जब साँड़ हीरा पर झपटा, मोती ने पीछे से पेट में सींग मारा। इस तरह दोनों मित्रों ने मिलकर साँड़ को हराया और उसे भागने पर मजबूर कर दिया।
✅ अवश्य पूछा जाता है
काँजीहौस वह बाड़ा है जहाँ किसी के खेत आदि खाने वाले या अनाथ जानवरों को बंद किया जाता है। जब मोती मटर के खेत में घुस गया और पकड़ा गया, और हीरा भी अपने साथी के लिए वापस आ गया — तब दोनों को काँजीहौस में बंद कर दिया गया।
⭐ महत्वपूर्ण
काँजीहौस में एक हफ्ते तक न खाना मिला, न चारा। हीरा के मन में विद्रोह की ज्वाला दहक उठी। उसने सोचा कि यदि दीवार टूट जाए तो न केवल वे बल्कि बंद सभी जानवरों की जान बच सकती है — इसलिए उसने दीवार तोड़ने का साहस दिखाया।
🔥 अतिमहत्वपूर्ण
जब दीवार टूटी तो सभी जानवर भाग निकले, पर हीरा बंधा रहा। मोती स्वतंत्र था, फिर भी उसने मित्र को अकेला नहीं छोड़ा। उसने कहा — “हम इतने दिनों एक साथ रहे, आज विपत्ति में तुम्हें छोड़कर कैसे जाऊँ?” और वह बंधु के पास लेट गया।
⭐ महत्वपूर्ण
काँजीहौस की नीलामी में एक दाढ़ीवाले आदमी ने बैलों के कूल्हों में उँगली गोदकर परखा। उसका चेहरा देखकर दोनों बैलों के दिल काँप उठे — उन्हें अंतर्ज्ञान से समझ आ गया कि यह कसाई है और यह छुरी चलाएगा।
✅ अवश्य पूछा जाता है
कसाई के साथ जाते समय रास्ते में बैलों को अपना परिचित खेत, कुआँ और अपना गाँव नजर आया। अपना घर पास देखकर उनकी सारी थकान और दुर्बलता छू-मंतर हो गई और दोनों उन्मत्त होकर अपने थान पर दौड़ पड़े।
⭐ महत्वपूर्ण
जब दाढ़ीवाला बैलों की रस्सियाँ पकड़ने आगे बढ़ा, तो मोती ने सींग चलाया। दाढ़ीवाला पीछे हटा, मोती ने पीछा किया, वह भागा — मोती गाँव के बाहर तक उसके पीछे दौड़ा। दाढ़ीवाला धमकियाँ देता, पत्थर फेंकता रहा पर मोती विजयी शूर की भाँति खड़ा रहा।
🔥 अतिमहत्वपूर्ण
प्रेमचंद ने ‘मूक-भाषा’ का प्रयोग यह दिखाने के लिए किया कि पशुओं में भी मनुष्य जैसी चेतना, भावना और सोचने-समझने की शक्ति होती है। इससे कहानी में गहराई और मानवीय संवेदना आती है। यह पाठकों को पशुओं के प्रति सहानुभूति महसूस कराता है।
⭐ महत्वपूर्ण
प्रेमचंद कहते हैं कि गधे को उसके सीधेपन और निरापद सहिष्णुता के कारण बेवकूफ कहा जाता है। गधे को कभी क्रोध नहीं आता, कभी असंतोष नहीं दिखाता। लेखक व्यंग्यपूर्वक कहते हैं कि इस संसार में सीधापन उपयुक्त नहीं माना जाता।
✅ अवश्य पूछा जाता है
कहानी के अंत में मालकिन ने आकर दोनों बैलों के माथे चूम लिए। इसका महत्व यह है कि जो पत्नी पहले बैलों को ‘नमकहराम’ कहती थी, वही अब उनसे प्रेम दिखाती है — यह उसके हृदय-परिवर्तन को दर्शाता है और विरोधाभास की एक सुंदर झलक देता है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)
10 प्रश्न
🔥 बहुत बार पूछा गया
हीरा और मोती झूरी काछी के दो पछाईं जाति के बैल थे। बहुत दिनों साथ रहते-रहते दोनों में गहरी मित्रता हो गई थी। वे मूक-भाषा में एक-दूसरे से बातें करते, एक-दूसरे को चाटकर और सूँघकर प्रेम प्रकट करते थे।
- सहयोग: हल या गाड़ी में जुतने पर दोनों यही चाहते कि अधिक बोझ अपनी गर्दन पर रहे।
- त्याग: मोती काँजीहौस में स्वतंत्र होते हुए भी हीरा को नहीं छोड़ा और वहीं रह गया।
- एकता: साँड़ से मुकाबले में दोनों ने मिलकर रणनीति बनाई और जीत हासिल की।
- समर्पण: दोनों हमेशा एक-साथ उठते, साथ नाँद में मुँह डालते, साथ बैठते थे।
✅ परीक्षा में अवश्य आता है
प्रेमचंद की यह कहानी सतह पर पशुओं की कहानी लगती है, परंतु गहराई में यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की भावना को व्यक्त करती है।
- हीरा और मोती भारतीय जनता के प्रतीक हैं जो अत्याचार सहते हुए भी विद्रोह की भावना रखती है।
- गया का घर अंग्रेजी शासन का प्रतीक है — जहाँ शोषण और मार-पीट है।
- “जोर तो मारता ही जाऊँगा, चाहे कितने ही बंधन पड़ते जाएँ” — यह स्वतंत्रता सेनानियों की भावना है।
- “मर जाऊँगा पर उसके काम तो न आऊँगा” — यह असहयोग आंदोलन का प्रतीक है।
- काँजीहौस ब्रिटिश जेल का प्रतीक है और दीवार तोड़ना — विद्रोह और संघर्ष का।
🔥 अतिमहत्वपूर्ण
सहनशील, धैर्यवान, नीतिज्ञ। हमेशा सोच-समझकर काम करता। औरत जात पर सींग न चलाना, गिरे दुश्मन को न मारना — ये उसके मूल्य थे।
साहसी, आवेगी, उत्साही। गया की मार पर गुस्सा होता। साँड़ को मार डालना चाहता था। पर मित्र-प्रेम में हीरा से कम नहीं था।
समानताएँ: दोनों में गहरी मित्रता, अपने मालिक झूरी से प्रेम, अत्याचार का विरोध, और स्वतंत्रता की चाहत — ये गुण समान थे।
अंतर: हीरा नीति और धर्म का पालन करता था, जबकि मोती अधिक साहसी और क्रोधी था। दोनों के भिन्न स्वभाव मिलकर उन्हें अजेय बनाते थे।
⭐ महत्वपूर्ण
पहली बार जब झूरी के बैल गया के घर से भागकर रात को अपने घर लौटे, तो यह घटना गाँव के इतिहास में महत्वपूर्ण मानी गई।
- यह घटना दर्शाती है कि पशु भी अपने घर और मालिक से प्रेम रखते हैं।
- बैलों ने मोटी रस्सियाँ तोड़ीं — जो सामान्यतः असंभव समझा जाता था। यह उनकी असाधारण शक्ति और इच्छाशक्ति का प्रमाण है।
- गाँव के बच्चों ने तालियाँ बजाईं और उन्हें रोटी-गुड़ दिया — समाज ने उनके संघर्ष को मान्यता दी।
- एक बालक ने कहा “बैल नहीं, उस जनम के आदमी हैं” — यह उनकी मानवीय चेतना को स्वीकृति है।
यह घटना परोक्ष रूप से यह संदेश देती है कि स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वाला हमेशा सम्मान पाता है।
✅ परीक्षा में अवश्य आता है
कहानी के प्रारंभ में प्रेमचंद गधे और बैल की चर्चा करके समाज पर गहरा व्यंग्य करते हैं।
- गधे पर व्यंग्य: गधा सबसे अधिक सहनशील है, कभी क्रोध नहीं करता, फिर भी समाज उसे “बेवकूफ” कहता है। यह उन भारतवासियों का प्रतीक है जो शांत और सीधे हैं।
- सीधेपन पर व्यंग्य: लेखक कहते हैं — “अगर वे भी ईंट का जवाब पत्थर से देना सीख जाते, तो शायद सभ्य कहलाने लगते।” — यह सीधेपन को नुकसानदेह बताता है।
- जापान का उदाहरण: जापान ने एक विजय से सभ्य जातियों में स्थान पाया — यह साहसी प्रतिरोध की महत्ता बताता है।
🔥 अतिमहत्वपूर्ण
इस कहानी में बैल बार-बार अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करते हैं और यह सिद्ध करते हैं कि संघर्ष अनिवार्य है।
- पगहे तोड़ना: गया के घर से रात को पगहे तोड़कर भागना — यह शोषण के विरुद्ध पहला संघर्ष था।
- हल न चलाना: गया के खेत में पाँव न उठाना — यह असहयोग का प्रतीक है।
- साँड़ से युद्ध: अपने से कई गुना बड़े साँड़ से मिलकर लड़ना — यह साहस और एकता का संघर्ष था।
- दीवार तोड़ना: काँजीहौस में दीवार तोड़ने का प्रयास — यह न केवल अपनी बल्कि सबकी स्वतंत्रता के लिए संघर्ष था।
- कसाई को भगाना: मोती का दाढ़ीवाले को सींग चलाकर भगाना — अपनी जान बचाने का आखिरी संघर्ष।
इन सभी घटनाओं से यह स्पष्ट है कि जब अत्याचार सहनशक्ति से परे हो जाए, तो संघर्ष करना न केवल उचित है बल्कि आवश्यक भी है।
⭐ महत्वपूर्ण
बैलों के लौटने पर “नमकहराम” कहा। सूखा भूसा देने का आदेश दिया। क्रोधी और कठोर स्वभाव। अंत में हृदय-परिवर्तन होता है।
दुखी अनाथ बालिका। रोज रात को रोटियाँ खिलाती थी। रस्सी खोलकर भगाया। निःस्वार्थ प्रेम और दया का प्रतीक है।
शिक्षा: मालकिन स्वार्थी और कठोर व्यवहार की प्रतिनिधि है, जबकि बच्ची निःस्वार्थ दया और मानवता की। बच्ची सिखाती है कि दयालुता उम्र की मोहताज नहीं होती। कहानी यह भी बताती है कि जो दुखी हैं वे दूसरे दुखियों की पीड़ा बेहतर समझ सकते हैं।
✅ परीक्षा में अवश्य आता है
जन्म एवं नाम: प्रेमचंद का जन्म सन् 1880 में लमही (वाराणसी), उत्तर प्रदेश में हुआ। उनका मूल नाम धनपत राय था।
- नौकरी और त्याग: उन्होंने शिक्षा विभाग में नौकरी की, पर असहयोग आंदोलन में भाग लेने के लिए नौकरी छोड़ दी।
- प्रमुख उपन्यास: सेवासदन, प्रेमाश्रम, रंगभूमि, निर्मला, गबन, गोदान।
- कहानी संग्रह: कहानियाँ ‘मानसरोवर’ के आठ भागों में संकलित हैं।
- पत्रिकाएँ: हंस, जागरण, माधुरी का संपादन किया।
- विषय: किसान, मजदूर, दलित, स्त्री और स्वाधीनता उनकी रचनाओं के मूल विषय हैं।
- भाषा: सरल, जीवंत और मुहावरेदार हिंदी — जिसमें लोक प्रचलित शब्दों का कुशलतापूर्वक प्रयोग है।
सन् 1936 में उनका निधन हुआ। वे ‘कथा सम्राट’ के नाम से जाने जाते हैं।
🔥 अतिमहत्वपूर्ण
यह प्रश्न विचारोत्तेजक है। बैल दोनों भावनाओं — स्वतंत्रता और अपनापन — से प्रेरित थे, परंतु ‘अपनापन’ की भावना अधिक प्रबल दिखती है।
- जब पहली बार भागे, तो मुक्त होने से अधिक झूरी के पास लौटने की चाह थी।
- मोती काँजीहौस में मुक्त हो सकता था, पर हीरा को अकेला नहीं छोड़ा — यह अपनापन था।
- जब घर का रास्ता दिखा तो थकान और दुर्बलता तुरंत मिट गई — अपनेपन की शक्ति थी।
- आजादी का अनुभव करने पर वे खेत में उछले-कूदे — यह स्वतंत्रता की खुशी थी।
निष्कर्ष: हीरा और मोती स्वतंत्रता चाहते थे, परंतु वह स्वतंत्रता अपने घर-परिवार के साथ — इसलिए अपनापन की भावना अधिक प्रेरक थी।
✅ परीक्षा में अवश्य आता है
प्रेमचंद की भाषा सरल, जीवंत और मुहावरेदार है। ‘दो बैलों की कथा’ में कई भाषाई विशेषताएँ हैं।
- चित्रात्मक भाषा: “घुटने तक पाँव कीचड़ से भरे हैं” — इससे दृश्य आँखों के सामने बन जाता है।
- मुहावरेदार भाषा: “दाँतों पसीना आ गया”, “दिल काँप उठे”, “जी तोड़कर काम करना” — ये मुहावरे भाषा को जीवंत बनाते हैं।
- संवादात्मकता: बैलों के बीच संवाद कथानक को आगे बढ़ाते हैं और रोचक बनाते हैं।
- व्यंग्य: गधे और भारतवासियों की तुलना में गहरा व्यंग्य है।
- विरोधाभास: झूरी का प्रेम और पत्नी की कठोरता — एक ही घर में दो विपरीत भाव।
- अतिशयोक्ति: “झूरी इन्हें फूल की छड़ी से भी न छूता था, उसकी टिटकार पर दोनों उड़ने लगते थे।”
इन सभी भाषाई गुणों के कारण यह कहानी पाठक के मन में गहरी छाप छोड़ती है और बैलों के प्रति सहानुभूति जगाती है।
पात्र-परिचय: हीरा और मोती
त्वरित संदर्भ
| पहलू | हीरा | मोती |
|---|---|---|
| स्वभाव | सहनशील, धैर्यवान, नीतिपरक | साहसी, आवेगी, उत्साही |
| मित्रता | अपनी परवाह किए बिना मोती का साथ | हीरा को कभी अकेला नहीं छोड़ा |
| संघर्ष | रणनीति बनाता है, सोचकर काम करता है | तुरंत कार्यवाही करता, बहादुर है |
| नैतिकता | गिरे दुश्मन पर सींग नहीं चलाता | बैरी को पूरी तरह हराना चाहता है |
| प्रतीक | विवेक और नीति | साहस और बल |
कहानी के मुख्य संदेश एवं सारांश
परीक्षा बिंदु
यह कहानी प्रेमचंद ने ‘पंचतंत्र’ और ‘हितोपदेश’ की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए लिखी है — जहाँ पशु-पात्रों के माध्यम से मानवीय मूल्यों की शिक्षा दी जाती है।

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