मैं और मेरा देश
कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ | पाठ 7 — गंगा पाठ्यपुस्तक
15 प्रश्न
10 प्रश्न
25 प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)
15 प्रश्न
🔥 Very Frequently Asked
कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ का जन्म सन् 1906 ई. में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में हुआ था। वे हिंदी के प्रसिद्ध निबंधकार थे और उनका मुख्य कार्यक्षेत्र पत्रकारिता था।
⭐ Most Important
लेखक के मानस में लाला लाजपत राय का अनुभव सुनकर ‘भूकंप’ आया था। लालाजी ने कहा था कि अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस जहाँ भी गए — भारत की गुलामी की लज्जा का कलंक उनके माथे पर लगा रहा। इस विचार ने लेखक की पूर्णता के भाव को हिला दिया।
✅ Sure Shot Question
लाला लाजपत राय ‘पंजाब केसरी’ के नाम से प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने भारत की पराधीनता के दौर में देशभक्ति की ज्योति जलाए रखी। उनकी कलम और वाणी दोनों में तेजस्विता थी।
⭐ Most Important
जापान में एक युवक ने स्वामी रामतीर्थ को ताजे फल भेंट किए और बदले में केवल यह माँगा कि वे जापान में वापस जाकर यह न कहें कि ‘जापान में अच्छे फल नहीं मिलते।’ उस युवक की देशभक्ति और स्वाभिमान की भावना देखकर स्वामीजी मुग्ध हो गए।
🔥 Very Frequently Asked
एक विदेशी विद्यार्थी ने जापान के सरकारी पुस्तकालय से दुर्लभ चित्र पुस्तक से निकाल लिए। जापानी विद्यार्थी ने यह देख लिया और पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने चित्र बरामद किए, विद्यार्थी को जापान से निकाला और पुस्तकालय के बाहर लिख दिया गया कि उस देश का कोई भी नागरिक यहाँ प्रवेश नहीं कर सकता।
⭐ Most Important
लेखक के अनुसार देश को दो चीजों की सबसे अधिक जरूरत है — ‘शक्ति-बोध’ (देश की ताकत और आत्मविश्वास की भावना) और ‘सौंदर्य-बोध’ (सुरुचि, स्वच्छता और संस्कृति की भावना)। नागरिकों को ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए जो इन दोनों को नुकसान पहुँचाए।
✅ Sure Shot Question
कमालपाशा तुर्की के राष्ट्रपति थे। एक देहाती बूढ़े किसान ने 30 मील पैदल चलकर उन्हें मिट्टी की हंडिया में पाव भर शहद भेंट किया। कमालपाशा ने यह उपहार इसलिए स्वीकार किया क्योंकि उसके पीछे शुद्ध प्रेम और समर्पण की भावना थी, जो किसी भी भेंट से अधिक कीमती होती है।
⭐ Most Important
लेखक का कहना है कि यह कहावत सौ फीसदी झूठ है। इतिहास में कई बार अकेले व्यक्ति ने भी असंभव काम किए हैं। इसलिए हर नागरिक — चाहे वह कितना भी साधारण हो — देश के सम्मान के लिए कुछ न कुछ जरूर कर सकता है।
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एक किसान रंगीन सुतलियों से बनी खाट लेकर दिल्ली पैदल आया और पंडित नेहरू को भेंट की। नेहरूजी ने उसे खाट स्वीकार करने के साथ अपना दस्तखती फोटो भी उपहार में दिया — क्योंकि वह किसान की सच्ची भावना का सम्मान था।
⭐ Most Important
लेखक के अनुसार देश की उच्चता और हीनता की कसौटी ‘चुनाव’ है। जिस देश के नागरिक सही व्यक्ति को वोट देते हैं, वह देश उच्च है। जहाँ के नागरिक गलत लोगों के उत्तेजक नारों में आकर मत देते हैं, वह देश हीन है।
🆕 New Pattern
लेखक सोचता था कि उसके पास घर, पड़ोस, नगर सब कुछ है — वह पूर्ण है। लेकिन लालाजी की बात सुनकर उसे समझ आया कि देश के गुलाम रहते हुए सारी सुविधाएँ बेकार हैं। यही ‘आनंद की दीवार में दरार’ थी — पूर्णता की भावना पर प्रहार।
⭐ Most Important
कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ को उनकी उत्कृष्ट साहित्यिक रचनाओं के कारण ‘पद्म श्री’ से सम्मानित किया गया। उन्होंने राजनीतिक और सामाजिक जीवन से जुड़े अनेक निबंध लिखे और पत्रकारिता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
🔥 Very Frequently Asked
शल्य कर्ण का सारथी था। वह बार-बार अर्जुन की अजेयता का उल्लेख करके कर्ण के आत्मविश्वास में संदेह डालता था। इससे लेखक यह सिद्ध करना चाहते हैं कि जो नागरिक देश की बुराई करते रहते हैं, वे देश के शक्ति-बोध को नष्ट कर देते हैं।
✅ Sure Shot Question
लेखक कहते हैं कि युद्ध में केवल लड़ना नहीं होता — किसान रसद उगाता है, आपूर्तिकर्ता पहुँचाता है, दर्शक जय बोलते हैं — सब का महत्व है। इसी तरह हर नागरिक अपनी क्षमता अनुसार देश के लिए कुछ न कुछ योगदान दे सकता है।
⭐ Most Important
लेखक के अनुसार किसी कार्य का महत्व उसकी विशालता में नहीं, बल्कि उसे करने की भावना में है। बड़े से बड़ा कार्य भी हीन है यदि उसके पीछे अच्छी भावना नहीं है, और छोटे से छोटा कार्य भी महान है यदि उसके पीछे सच्ची भावना हो।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)
10 प्रश्न
🔥 Very Frequently Asked
लेखक कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ का जीवन-दर्शन व्यक्ति और देश के अटूट संबंध पर आधारित है।
- व्यक्ति और देश एक हैं: लेखक मानते हैं कि ‘मैं और मेरा देश’ दो अलग नहीं हैं। व्यक्ति का सम्मान और देश का सम्मान जुड़े हुए हैं।
- भावना का महत्व: किसी कार्य की विशालता नहीं, बल्कि उसके पीछे की भावना महत्वपूर्ण है।
- हर नागरिक का योगदान: चाहे वैज्ञानिक हो या साधारण किसान — हर कोई देश के लिए कुछ कर सकता है।
- शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध: नागरिकों को ऐसा काम नहीं करना चाहिए जो देश की ताकत और संस्कृति को नुकसान पहुँचाए।
- सही मताधिकार: चुनाव में सही व्यक्ति को वोट देना हर नागरिक का कर्तव्य है।
✅ Sure Shot Question
स्वामी रामतीर्थ एक बार जापान में रेल यात्रा कर रहे थे। उन दिनों फल ही उनका भोजन था। एक स्टेशन पर फल न मिलने पर उन्होंने कहा — “जापान में शायद अच्छे फल नहीं मिलते।”
एक जापानी युवक प्लेटफार्म पर खड़ा था। उसने यह सुना और तुरंत दूर जाकर एक टोकरी ताजे फल लाया और स्वामीजी को भेंट की। जब स्वामीजी ने दाम पूछे, तो उसने इनकार कर दिया और कहा:
स्वामीजी उस युवक का यह उत्तर सुनकर मुग्ध हो गए।
🔥 Very Frequently Asked
लेखक ने इस सत्य को दो उदाहरणों से स्पष्ट किया है:
- जापानी युवक (सकारात्मक उदाहरण): उसने स्वामी रामतीर्थ को फल देकर और देश की बुराई न करने का वचन माँगकर अपने देश का सिर ऊँचा किया। एक साधारण कार्य से उसने देश का गौरव बढ़ाया।
- विदेशी विद्यार्थी (नकारात्मक उदाहरण): उसने पुस्तकालय से चित्र चुराए। इस एक गलती के कारण उसके पूरे देश के नागरिकों पर पुस्तकालय में प्रवेश की रोक लग गई। एक व्यक्ति की बेईमानी ने पूरे देश को लांछित किया।
लाला लाजपत राय का अनुभव भी यही बताता है — भारत की गुलामी के कारण विदेशों में उनके माथे पर लज्जा का कलंक लगा रहा।
⭐ Most Important
लेखक ने नागरिक के अधिकारों और कर्तव्यों दोनों पर विचार किया है:
नागरिक के कर्तव्य:
- कोई ऐसा काम न करे जिससे देश की स्वतंत्रता या सम्मान को ठेस लगे।
- देश के शक्ति-बोध को कमजोर न करे — अर्थात् देश की बुराई न करे।
- देश के सौंदर्य-बोध को हानि न पहुँचाए — स्वच्छता और सुरुचि बनाए रखे।
- चुनाव में सही व्यक्ति को वोट दे।
नागरिक के अधिकार:
- देश के सम्मान का पूरा-पूरा भाग उसे मिले।
- देश की शक्तियों से अपने सम्मान की रक्षा का भरोसा हो।
- बिना उसके मत लिए कोई भी व्यक्ति किसी पद पर न बैठे।
✅ Sure Shot Question
लेखक अपने घर, पड़ोस और नगर की ममता, ज्ञान और सहारे से स्वयं को पूर्ण मानता था। वह सोचता था — ‘मेरा घर, मेरा पड़ोस, मेरा नगर — मुझे और क्या चाहिए।’
एक दिन उसे लाला लाजपत राय का अनुभव सुनने को मिला। लालाजी ने कहा था कि वे संसार के जितने भी देशों में गए, हर जगह भारत की गुलामी की लज्जा का कलंक उनके माथे पर लगा रहा।
यह सुनकर लेखक का मानस हिल गया — उसे समझ आया कि:
- चाहे व्यक्ति के पास स्वर्ग के सब उपहार हों, लेकिन यदि उसका देश गुलाम हो — तो वे सारे उपहार गौरव नहीं दे सकते।
- व्यक्ति की पूर्णता केवल व्यक्तिगत सुख में नहीं, देश की स्वतंत्रता और सम्मान में है।
इसी ‘मानसिक भूकंप’ के बाद लेखक ने देश के प्रति अपने कर्तव्यों पर गहरा विचार किया।
🔥 Very Frequently Asked
इस निबंध की भाषा-शैली की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- प्रश्नोत्तर शैली: पूरा निबंध प्रश्न-उत्तर के रूप में लिखा गया है, जो पाठक को संवाद में शामिल करता है — जैसे “क्या कोई भूकंप आया था?”
- सरल और व्यावहारिक भाषा: आम बोलचाल के शब्दों का प्रयोग — जैसे “दाल-रोटी की फिक्र”, “अकेला चना भाड़ फोड़े।”
- कहावतें और मुहावरे: “अकेला चना क्या भाड़ फोड़े” जैसी कहावतें भाषा को जीवंत बनाती हैं।
- उदाहरण और कहानियाँ: स्वामी रामतीर्थ, जापानी विद्यार्थी, कमालपाशा की घटनाएँ विचारों को सुलभ बनाती हैं।
- प्रेरणात्मकता: भाषा में देशभक्ति और नागरिकता की प्रेरणा स्वाभाविक रूप से आती है।
⭐ Most Important
शक्ति-बोध को हानि:
लेखक के अनुसार यदि कोई नागरिक सार्वजनिक स्थानों पर देश की बुराई करता है, दूसरे देशों से तुलना में अपने देश को हीन बताता है — तो वह देश के शक्ति-बोध को हानि पहुँचाता है। इससे लोगों में हीनभावना आती है।
उदाहरण: शल्य का कर्ण के मन में बार-बार अर्जुन की अजेयता डालना — जो कर्ण की पराजय का कारण बनी।
सौंदर्य-बोध को हानि:
यदि कोई केले का छिलका रास्ते में फेंकता है, घर-दफ्तर-गली गंदी रखता है, होटलों और सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी करता है — तो वह देश के सौंदर्य-बोध और संस्कृति को हानि पहुँचाता है।
✅ Sure Shot Question
तुर्की के राष्ट्रपति कमालपाशा की वर्षगाँठ का उत्सव समाप्त होने के बाद एक देहाती बूढ़ा किसान उपहार लेकर आया। सेक्रेटरी ने कहा — समय बीत गया। बूढ़े ने कहा — मैं तीस मील पैदल चलकर आया हूँ, इसीलिए देर हो गई।
यह सुनकर राष्ट्रपति कमालपाशा विश्राम के वस्त्रों में ही नीचे आए और बूढ़े किसान का उपहार — मिट्टी की हंडिया में पाव भर शहद — सम्मान से स्वीकार किया। उन्होंने स्वयं हंडिया खोली, शहद चखा और एक उँगली बूढ़े के मुँह में दी। फिर कहा:
कमालपाशा ने आदेश दिया कि शाही कार में सम्मान के साथ दादा को गाँव पहुँचाया जाए।
🔥 Very Frequently Asked
1971 में पाकिस्तान ने भारत पर हवाई हमले किए। श्रीनगर की रक्षा के लिए ‘नैट स्क्वाड्रन’ तैनात थी। 14 दिसंबर 1971 को पाकिस्तानी वायुसेना के 6 F-86 सेबर जेट फाइटर ने श्रीनगर हवाई क्षेत्र पर हमला किया।
- फ्लाइंग ऑफिसर सेखों ड्यूटी पर तैनात थे और उन्होंने तुरंत उड़ान भरी।
- उन्होंने अकेले 6 पाकिस्तानी विमानों को रोका, उन पर हमला किया और अधिकांश को नष्ट किया।
- उन्होंने रेडियो पर कहा — “मैं दो सेबर के पीछे लगा हूँ, उन्हें भागने नहीं दूँगा।”
- अंत में एक के विरुद्ध चार विमानों ने उन्हें घेर लिया और वे वीरगति को प्राप्त हुए।
मात्र 26 वर्ष की आयु में उन्होंने मातृभूमि की रक्षा करते हुए प्राण न्यौछावर किए। उन्हें मरणोपरांत परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया।
⭐ Most Important
यह वाक्य इस निबंध का केंद्रीय विचार है। लेखक ने इसे तर्क और उदाहरणों से सिद्ध किया है:
- व्यक्ति की पहचान देश से जुड़ी है: व्यक्ति का व्यक्तित्व उसके परिवार, पड़ोस, नगर और देश की पहचान से बना होता है।
- देश का सम्मान = व्यक्ति का सम्मान: लालाजी विदेशों में भारत की गुलामी की लज्जा के साथ घूमे — यह व्यक्ति और देश की पहचान के जुड़ाव का प्रमाण है।
- नागरिक का कार्य = देश की छवि: जापानी युवक के अच्छे कार्य से जापान का सम्मान बढ़ा, विदेशी विद्यार्थी की चोरी से उसके देश का अपमान हुआ।
- कर्तव्य और अधिकार साथ-साथ: जैसे व्यक्ति अपने सम्मान के लिए जीता है, वैसे ही देश के सम्मान के लिए जीना उसका कर्तव्य भी है और अधिकार भी।

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