दो बैलों की कथा — प्रश्न-अभ्यास
लेखक: प्रेमचंद | विधा: कहानी | गद्य खंड
रचना से संवाद — मेरे उत्तर मेरे तर्क
6 प्रश्न
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?
🔥 बार-बार पूछा गया
कहानी में हीरा और मोती का आपसी संबंध किस गुण को मुख्य रूप से दर्शाता है?
हीरा और मोती दोनों बैल सदैव एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करते थे। जब गाड़ी में जोते जाते, तो हर एक की यही कोशिश रहती थी कि अधिक-से-अधिक बोझ मेरी गरदन पर रहे। काँजीहौस में दीवार तोड़ना, साँड़ से मिलकर लड़ना — ये सभी उदाहरण उनकी एकता और सहयोग के प्रमाण हैं। जब मोती भाग सकता था, उसने हीरा को अकेला नहीं छोड़ा — यह उनके गहरे भाईचारे को दर्शाता है।
⭐ अति महत्वपूर्ण
हीरा-मोती ने नया स्थान स्वीकार क्यों नहीं किया?
जब बैलों को गया के घर भेजा गया, तो उन्हें लगा कि झूरी ने उन्हें बेच दिया। इस विचार से उनका दिल भारी हो गया। वे जिसे अपना घर समझते थे, वह उनसे छूट गया था। नए घर, नए गाँव, नए आदमी — सब उन्हें बेगाने लगे। अपमान की भावना और झूरी के घर की याद ने उन्हें नया स्थान स्वीकार नहीं करने दिया।
⭐ अति महत्वपूर्ण
बैलों ने रस्सी तोड़कर घर लौटने का निर्णय क्यों लिया?
बैलों ने रस्सी इसलिए नहीं तोड़ी कि वे कष्टों से डरे थे, बल्कि इसलिए तोड़ी क्योंकि वे झूरी के घर की आत्मीयता और अपनेपन को महसूस करना चाहते थे। नए स्थान पर उन्हें सब बेगाना लगता था। झूरी के घर की यादें उन्हें बुलाती थीं। अपनापन और लगाव की यह भावना उनकी मुख्य प्रेरणा थी।
🔥 बार-बार पूछा गया
गया द्वारा डंडे से मारने पर मोती का आक्रोश किस मानवीय मनोवृत्ति का द्योतक है?
जब गया ने हीरा की नाक पर खूब डंडे जमाए, तो मोती का गुस्सा काबू के बाहर हो गया और वह हल लेकर भागा। यह क्रोध कायरता नहीं, बल्कि स्वाभिमान की भावना का प्रकटीकरण था। मोती अपने साथी पर अत्याचार सहन नहीं कर सका। यह प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि अन्याय के विरुद्ध खड़े होना स्वाभिमान की निशानी है।
⭐ अति महत्वपूर्ण
कहानी में बैलों की ‘मूक-भाषा’ का प्रयोग लेखक ने किस लिए किया?
प्रेमचंद ने ‘मूक-भाषा’ का प्रयोग यह दिखाने के लिए किया कि पशुओं में भी भावनाएँ, विचार और चेतना होती है — जो कभी-कभी मनुष्यों से भी श्रेष्ठ होती है। हीरा-मोती बिना शब्दों के एक-दूसरे के मन की बात समझ लेते थे। इस प्रकार लेखक ने यह संदेश दिया कि पशु भी बुद्धिमान होते हैं और उनमें भी आत्मीयता, निष्ठा और साहस होता है।
✅ निश्चित प्रश्न
‘दो बैलों की कथा’ को यदि स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ें, तो हीरा और मोती किसके प्रतीक हो सकते हैं?
हीरा और मोती उस भारतीय जनता के प्रतीक हैं जो विदेशी शासन (या अत्याचारी मालिकों) की दासता में जकड़ी थी, लेकिन बार-बार संघर्ष करके स्वतंत्रता पाने की कोशिश करती रही। जिस प्रकार बैल काँजीहौस की दीवार तोड़कर आजाद हुए, उसी प्रकार भारतीय जनता ने ब्रिटिश शासन की बेड़ियाँ तोड़ीं। बार-बार पड़ने वाले बंधन के बावजूद संघर्ष न छोड़ना — यही इस कहानी का मूल संदेश है।
मेरी समझ मेरे विचार
7 प्रश्न
🔥 बार-बार पूछा गया
“दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता, पर इन दोनों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।” जब बैल नए मालिक के यहाँ गए, तो उन्होंने काम करने से इनकार क्यों कर दिया था?
बैलों ने नए मालिक के यहाँ काम करने से इनकार इसलिए किया क्योंकि:
- अपमान की भावना: उन्हें लगा कि झूरी ने उन्हें बेच दिया, जिससे उनका दिल टूट गया था।
- घर की याद: वे झूरी के घर और उसकी ममता को नहीं भूल पाए।
- दुर्व्यवहार का विरोध: गया ने उन्हें मारा-पीटा और केवल सूखा भूसा दिया, जबकि झूरी उन्हें फूल की छड़ी से भी नहीं छूता था।
- निष्क्रिय प्रतिरोध: काम न करना उनका विरोध का एक रूप था — वे अपने अधिकारों के लिए मूक संघर्ष कर रहे थे।
✅ निश्चित प्रश्न
“गाँव के इतिहास में यह घटना अभूतपूर्व न होने पर भी महत्वपूर्ण थी।” बैलों का घर लौट आना कोई साधारण घटना नहीं है। कैसे? (संकेत– वे क्यों लौट आए, उनके और झूरी के मन में कौन-कौन से भाव रहे होंगे, क्या वास्तविक जीवन में भी ऐसा होता है आदि।)
बैलों का घर लौटना कई कारणों से असाधारण था:
- बैलों के भाव: वे झूरी के प्रति अगाध प्रेम और आत्मीयता रखते थे। नए घर में सूखा भूसा, मार-पीट और अपमान सहकर भी उन्होंने अपने ‘अपने घर’ का रास्ता ढूँढ़ लिया। यह उनकी विलक्षण स्मरण-शक्ति और स्नेह का प्रमाण है।
- झूरी के भाव: झूरी बैलों को देखकर स्नेह से गदगद हो गया और दौड़कर उन्हें गले लगा लिया। उसकी आँखों में खुशी के आँसू थे — यह उसके पशुओं के प्रति प्रेम को दर्शाता है।
- वास्तविक जीवन में प्रासंगिकता: हाँ, वास्तविक जीवन में भी पशु अपने पुराने घर और मालिक को याद रखते हैं। कुत्ते, गाय, घोड़े अपने मालिकों के प्रति असाधारण निष्ठा दिखाते हैं।
- सामाजिक संदेश: यह घटना यह सिखाती है कि प्रेम और अपनापन किसी भी कठिनाई से बड़ा है।
🔥 बार-बार पूछा गया
“मोती ने मूक-भाषा में कहा— अब तो नहीं सहा जाता, हीरा!” ‘कभी-कभी संघर्ष करना आवश यक हो जाता है’ इस कथन को कहानी के उदाहरणों से सिद्ध कीजिए।
कहानी में संघर्ष की आवश्यकता कई प्रसंगों में सिद्ध होती है:
- गया के घर से पलायन: जब गया ने उन्हें मारा और सूखा भूसा दिया, तो बैलों ने रस्सी तोड़कर भागने का संघर्ष किया। यह संघर्ष न करते, तो वे कभी घर न लौट पाते।
- साँड़ से मुकाबला: जब विशाल साँड़ उनकी ओर आया, तो भागना संभव नहीं था। दोनों ने मिलकर साँड़ से लड़ाई की और उसे भगा दिया — संघर्ष ही उनकी रक्षा का एकमात्र उपाय था।
- काँजीहौस की दीवार तोड़ना: भूख और कैद से मुक्ति के लिए हीरा ने दीवार पर चोट करना शुरू किया, पिटाई खाई पर नहीं रुका। मोती ने भी साथ दिया और दीवार तोड़ी — इससे अन्य पशुओं को भी मुक्ति मिली।
- दाढ़ीवाले से बचाव: झूरी के घर पहुँचकर जब दाढ़ीवाला उन्हें पकड़ने आया, तो मोती ने उसे भगाया — यह संघर्ष न करते तो वे कसाई के हाथ चले जाते।
इस प्रकार कहानी यह सिखाती है कि अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करना न केवल उचित है, बल्कि आवश्यक भी है।
✅ निश्चित प्रश्न
“जब पेट भर गया और दोनों ने आजादी का अनुभव किया…” हीरा एवं मोती ‘स्वतंत्रता’ और ‘अपनापन’ दोनों में से किस भावना से अधिक प्रेरित थे? कारण सहित लिखिए।
हीरा और मोती ‘अपनापन’ की भावना से अधिक प्रेरित थे, न कि केवल स्वतंत्रता से। इसके कारण:
- जब बैल पहली बार गया के घर से भागे, तो वे स्वतंत्र होकर कहीं भी जा सकते थे, लेकिन वे सीधे झूरी के घर की ओर भागे — यह ‘अपनेपन’ की खोज थी।
- काँजीहौस से मुक्त होने के बाद भी वे आवारा नहीं घूमे, बल्कि परिचित रास्ता पहचानकर घर की ओर दौड़ पड़े।
- झूरी को देखते ही उनकी आँखों से आनंद के आँसू बहने लगे — यह भावना स्वतंत्रता की नहीं, अपनेपन की थी।
स्वतंत्रता उन्हें प्रिय थी, परंतु अपनेपन के बिना स्वतंत्रता अधूरी लगती थी।
⭐ अति महत्वपूर्ण
“बैलों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।” ‘अत्याचार सहना भी अन्याय में भागीदारी है’— क्या आप इस कथन से सहमत हैं? अपने उत्तर के कारण भी बताइए।
हाँ, मैं इस कथन से पूरी तरह सहमत हूँ। अत्याचार सहना भी अन्याय में भागीदारी है — यह विचार कहानी में और व्यावहारिक जीवन में भी सत्य है।
- कहानी के संदर्भ में: यदि हीरा-मोती गया के अत्याचार को चुपचाप सहते रहते, तो उनकी दशा और बिगड़ती। उनका विरोध — काम न करना, भागना, दीवार तोड़ना — ने उन्हें और अन्य पशुओं को मुक्त किया।
- सामाजिक दृष्टि से: जब कोई अन्याय होते देखकर चुप रहता है, तो वह अप्रत्यक्ष रूप से अन्यायी का साथ देता है। इससे अत्याचारी और बलवान होता जाता है।
- ऐतिहासिक प्रमाण: भारत की जनता ने जब तक ब्रिटिश शासन का विरोध नहीं किया, तब तक दासता बनी रही। संघर्ष से ही स्वतंत्रता मिली।
इसलिए, चुप रहकर अन्याय सहना उचित नहीं है।
🔥 बार-बार पूछा गया
“बहुत दिनों साथ रहते-रहते दोनों में भाईचारा हो गया था।” हीरा और मोती अभिन्न मित्र थे। कहानी की किन-किन घटनाओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है? कम से कम तीन बिंदु लिखिए।
हीरा और मोती की मित्रता के प्रमाण निम्नलिखित घटनाओं से मिलते हैं:
- नाँद में एक साथ: दोनों साथ उठते, साथ नाँद में मुँह डालते और साथ बैठते थे। एक मुँह हटाता, तो दूसरा भी हटा लेता था।
- साँड़ से मिलकर लड़ना: विशाल साँड़ के सामने दोनों ने मिलकर रणनीति बनाई और उसे परास्त किया — एकता का सबसे बड़ा उदाहरण।
- मोती का त्याग: काँजीहौस में जब हीरा बँधा था और मोती भाग सकता था, उसने साथी को अकेला नहीं छोड़ा और उसके साथ मार खाई। यह सच्ची मित्रता का प्रमाण है।
- मूक-भाषा में संवाद: दोनों बिना बोले एक-दूसरे के मन की बात समझ लेते थे — यह गहरी आत्मीयता दर्शाता है।
⭐ अति महत्वपूर्ण
“उसी समय मालकिन ने आकर दोनों के माथे चूम लिए।” कहानी में मालकिन और छोटी लड़की, दोनों के व्यवहार की तुलना कीजिए।
| तुलना का आधार | मालकिन (झूरी की पत्नी) | छोटी लड़की (भैरो की बेटी) |
|---|---|---|
| प्रारंभिक व्यवहार | बैलों को ‘नमकहराम’ कहा और सूखा भूसा देने का आदेश दिया। | चुपके से बैलों को रोटियाँ खिलाती थी। |
| भावना | स्वार्थी — बैलों से काम लेना चाहती थी। | निस्वार्थ — दुखी प्राणियों से आत्मीयता थी। |
| अंत में व्यवहार | बैलों के लौटने पर माथे चूम लिए — पश्चाताप का भाव। | बैलों को रस्सी से खोलकर भागने में मदद की। |
| प्रेरणा | सामाजिक दबाव और लज्जा | हृदय का सच्चा स्नेह |
छोटी लड़की का स्नेह अधिक सच्चा और निस्वार्थ था। मालकिन का व्यवहार परिस्थिति के अनुसार बदलता रहा।
मेरी कल्पना मेरे अनुमान
2 प्रश्न
🆕 नया पैटर्न
“उसने उनके माथे सहलाए और बोली– खोले देती हूँ। चुपके से भाग जाओ…” यदि आप वह छोटी लड़की होते, तो बैलों की मदद किस प्रकार करते?
यदि मैं वह छोटी लड़की होता/होती, तो बैलों की मदद निम्नलिखित प्रकार से करता/करती:
- रोज़ाना खाना देना: चोरी-छुपे रोज़ रोटियाँ और थोड़ी खली ले जाती, ताकि बैल कमज़ोर न पड़ें।
- घर वापसी में मदद: जैसे कहानी में किया — सही समय देखकर उनकी रस्सी खोल देती और शोर मचाकर घर वालों का ध्यान भटकाती।
- झूरी को सूचित करना: किसी भरोसेमंद व्यक्ति के ज़रिए झूरी को खबर देती कि उसके बैल यहाँ हैं और उनके साथ बुरा व्यवहार हो रहा है।
- सौतेली माँ से छुपकर: सौतेली माँ की नज़र बचाकर यह सब करती, ताकि न बैलों पर संकट आए, न मुझ पर।
दुखी प्राणियों की मदद करना सबसे बड़ा धर्म है — चाहे हम कितने भी छोटे या कमज़ोर क्यों न हों।
⭐ अति महत्वपूर्ण
“दोनों गधे अभी तक ज्यों-के-त्यों खड़े थे।” भय और संकोच इंसान को अवसर मिलने पर भी जकड़े रखता है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? इस वाक्य के संबंध में कहानी और अपने अनुभवों से उदाहरण लेते हुए अपने विचार लिखिए।
हाँ, मैं इस कथन से पूर्णतः सहमत हूँ। भय और संकोच मनुष्य को अवसर मिलने पर भी निष्क्रिय बना देते हैं।
कहानी के संदर्भ में: काँजीहौस की दीवार टूट जाने पर भी दोनों गधे वहीं खड़े रहे। उन्होंने सोचा — “जो कहीं फिर पकड़ लिए जाएँ!” यह भय उनकी मुक्ति में बाधा बन गया। हीरा-मोती ने साहस दिखाया और स्वतंत्र हुए; गधे डर के कारण वहीं रहे।
व्यावहारिक जीवन में: कई बार परीक्षा में हम सही उत्तर जानते हुए भी लिखने से डरते हैं। कक्षा में प्रश्न का उत्तर मालूम होने पर भी संकोच के कारण हाथ नहीं उठाते। ऐसे में अवसर हाथ से निकल जाता है।
मेरे अनुभव मेरे विचार
3 प्रश्न
⭐ अति महत्वपूर्ण
“दोस्तों में घनिष्ठता होते ही धौल-धप्पा होने लगता है। इसके बिना दोस्ती कुछ फुसफुसी, कुछ हल्की-सी रहती है, जिस पर ज्यादा विश्वास नहीं किया जा सकता।” क्या आप इस बात से सहमत हैं? आपको ऐसा क्यों लगता है? अपने अनुभवों के आधार पर बताइए।
हाँ, मैं इस बात से काफी हद तक सहमत हूँ। सच्ची दोस्ती में एक सहज आत्मीयता आ जाती है जिससे मज़ाक, छेड़-छाड़ और ‘धौल-धप्पा’ स्वाभाविक रूप से होने लगता है। यह नाराज़गी नहीं, बल्कि प्रेम की अभिव्यक्ति है।
मेरे अनुभव में भी जो मित्र सच्चे होते हैं, वे बिना किसी औपचारिकता के मिलते हैं, खुलकर बोलते हैं और ज़रूरत पड़ने पर बिना माँगे मदद करते हैं। जो मित्रता केवल दिखावे की होती है, वह संकट में साथ नहीं देती।
🔥 बार-बार पूछा गया
“हीरा ने तिरस्कार किया– गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए।” “यह सब ढोंग है। बैरी को ऐसा मारना चाहिए कि फिर न उठे।” आपका इस संबंध में क्या विचार है? आप किसके साथ हैं— हीरा के या मोती के या दोनों के? क्यों?
इस प्रश्न में दोनों दृष्टिकोणों की अपनी-अपनी विशेषता है:
- हीरा का दृष्टिकोण: “गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए” — यह उदारता, क्षमाशीलता और नैतिकता का प्रतीक है। भारतीय संस्कृति में भी कहा गया है कि शरणागत शत्रु पर प्रहार नहीं करना चाहिए।
- मोती का दृष्टिकोण: “बैरी को ऐसा मारना चाहिए कि फिर न उठे” — यह व्यावहारिकता का संकेत है। यदि दुश्मन को छोड़ दिया जाए, तो वह फिर हमला कर सकता है।
मेरा विचार: मैं हीरा के साथ अधिक सहमत हूँ। पराजित शत्रु पर अनावश्यक आक्रमण करना क्रूरता है। क्षमा और उदारता मनुष्य को महान बनाती है। परंतु यदि शत्रु फिर-फिर हमला करे, तो मोती का दृष्टिकोण भी व्यावहारिक रूप से उचित है।
⭐ अति महत्वपूर्ण
“हम और तुम इतने दिनों एक साथ रहे। आज तुम विपत्ति में पड़ गए तो मैं तुम्हें छोड़कर अलग हो जाऊँ?” क्या कभी आपने किसी विपत्ति या चुनौती का सामना अपने किसी मित्र या परिजन के साथ मिलकर किया है? उस घटना के विषय में बताइए।
मोती के इन शब्दों में सच्ची मित्रता का सार छुपा है। विपत्ति में साथ देना ही असली मित्रता की पहचान है।
उदाहरण (नमूना उत्तर): एक बार जब मेरे मित्र की परीक्षा में अचानक तबियत खराब हो गई और वह परीक्षा केंद्र तक पहुँचने में असमर्थ था, तो मैं उसके घर गया, उसे सहारा देकर परीक्षा केंद्र तक ले गया और बाद में उसे घर छोड़ा। उस दिन मुझे समझ आया कि सच्चा मित्र वही है जो कठिन समय में बिना कुछ माँगे साथ खड़ा हो।
कहानी का सौंदर्य — विशेषताएँ
विशेष अभ्यास
✅ निश्चित प्रश्न
नीचे इस कहानी में आए कुछ विशेष बिंदुओं को उदाहरण के साथ दिया गया है। आप भी एक-एक उदाहरण खोजकर तालिका में लिखिए—
| विशेषता | उदाहरण 1 (पुस्तक से) | उदाहरण 2 (आपका उत्तर) |
|---|---|---|
| चित्रात्मक भाषा | घुटने तक पाँव कीचड़ से भरे हैं। | दोनों की आँखों में विद्रोहमय स्नेह झलक रहा है। |
| संवादात्मकता | मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा। | हीरा ने कहा— “भागना व्यर्थ है।” / “अबकी बड़ी मार पड़ेगी।” |
| विरोधाभास | झूरी बैलों को देखकर स्नेह से गदगद हो गया। झूरी की स्त्री ने बैलों को द्वार पर देखा, तो जल उठी। | मोती स्वाभिमानी भी था और क्षमाशील भी — दोनों भाव एक साथ। |
| व्यंग्य | भारतवासियों की अफ्रीका में क्या दुर्दशा हो रही है? अगर वे भी ईंट का जवाब पत्थर से देना सीख जाते, तो शायद सभ्य कहलाने लगते। | जापान की मिसाल सामने है — एक ही विजय ने उसे संसार की सभ्य जातियों में गण्य बना दिया। |
| संघर्ष | उससे भिड़ना जान से हाथ धोना है; लेकिन न भिड़ने पर भी जान बचती नहीं नजर आती। (बैल बनाम साँड़) | हीरा ने दीवार में सींग गड़ा दिए और जोर मारा — मार खाई, पर संघर्ष न छोड़ा। |
| अतिशयोक्ति | झूरी इन्हें फूल की छड़ी से भी न छूता था। उसकी टिटकार पर दोनों उड़ने लगते थे। | पगहे बहुत मजबूत थे। अनुमान न हो सकता था कि कोई बैल उन्हें तोड़ सकेगा। |
| संदेह/उलझन | सारा दिन बीत गया और खाने को एक तिनका भी न मिला। समझ ही में न आता था, यह कैसा स्वामी है? | बैलों को क्या मालूम, वे क्यों भेजे जा रहे हैं। समझे, मालिक ने हमें बेच दिया। |
स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ाव — मिलान कीजिए
6 जोड़े
✅ निश्चित प्रश्न
इस कहानी में से कुछ वाक्य चुनकर नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों का मिलान स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े उपयुक्त वाक्यों के साथ कीजिए—
| कहानी में से वाक्य | स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ाव |
|---|---|
| 1. जोर तो मारता ही जाऊँगा, चाहे कितने ही बंधन पड़ते जाएँ। | 6. स्वतंत्रता सेनानी बार-बार जेल गए, फाँसी पर चढ़े, पर संघर्ष छोड़ने को तैयार नहीं हुए। |
| 2. मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा। | 5. स्वतंत्रता के लिए प्राण देना स्वीकार्य था, पर अंग्रेजों की सेवा में लगना अस्वीकार्य। |
| 3. हमारी जान को कोई जान ही नहीं समझता। | 4. दासता के काल में भारतीयों के प्राण, सम्मान और अधिकारों की कोई महत्ता नहीं थी। |
| 4. दोनों मित्रों की आँखों में, रोम-रोम में विद्रोह भरा हुआ था। | 2. भारतीय जनता के मन में ब्रिटिश शासन के प्रति विद्रोह धीरे-धीरे गहराता गया। |
| 5. इतना तो हो ही गया कि नौ-दस प्राणियों की जान बच गई। वे सब तो आशीर्वाद देंगे। | 1. भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों ने बलिदान दिया, जिससे लाखों भारतीयों में आजादी की प्रेरणा जगी। |
| 6. साँड़ पूरा हाथी है… पर दोनों मित्र जान हथेलियों पर लेकर लपके। | 3. ब्रिटिश साम्राज्य बहुत शक्तिशाली था, फिर भी स्वतंत्रता सेनानियों ने साहसपूर्वक उसका सामना किया। |
भाषा गढ़ते मुहावरे
8 मुहावरे
कहानी में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों में मुहावरों को पहचानकर रेखांकित कीजिए। इन मुहावरों का प्रयोग करते हुए नए वाक्य बनाकर लिखिए—
🔥 बार-बार पूछा गया
| वाक्य | मुहावरा | अर्थ | नया वाक्य |
|---|---|---|---|
| 1. “झूरी के साले गया को घर तक गोईं ले जाने में दाँतों पसीना आ गया।” | दाँतों पसीना आना | बहुत कठिन कार्य करना | इस परीक्षा का प्रश्न-पत्र इतना कठिन था कि हल करने में दाँतों पसीना आ गया। |
| 2. “उसका चेहरा देखकर अंतर्ज्ञान से दोनों मित्रों के दिल काँप उठे।” | दिल काँप उठना | बहुत भयभीत होना | पहाड़ की चोटी से नीचे देखकर मेरा दिल काँप उठा। |
| 3. “झूरी की स्त्री ने बैलों को द्वार पर देखा, तो जल उठी।” | जल उठना | ईर्ष्या या क्रोध से भर जाना | दूसरे की तरक्की देखकर वह जल उठी। |
| 4. “मोती दिल में ऐंठकर रह गया।” | दिल में ऐंठना | मन-ही-मन कुढ़ना, क्रोध को दबाना | अन्याय देखकर भी कुछ न कर सका, इसलिए दिल में ऐंठकर रह गया। |
| 5. “आएगा तो दूर ही से खबर लूँगा।” | दूर ही से खबर लेना | दूर से ही हिसाब चुकाना, सावधान रहना | वह दुश्मन है, आएगा तो दूर ही से खबर लूँगा। |
| 6. “जी तोड़कर काम करते हैं, किसी से लड़ाई-झगड़ा नहीं करते, चार बातें सुनकर गम खा जाते हैं।” | जी तोड़कर काम करना / गम खा जाना | पूरी शक्ति से काम करना / अपमान चुपचाप सहना | उसने जी तोड़कर मेहनत की। / उसने कई अपमान गम खाकर सह लिए। |
| 7. “अगर वे भी ईंट का जवाब पत्थर से देना सीख जाते, तो शायद सभ्य कहलाने लगते।” | ईंट का जवाब पत्थर से देना | अत्याचार का कड़ा जवाब देना | हमें भी अन्याय का ईंट का जवाब पत्थर से देना चाहिए। |
| 8. “तो फिर वहीं मरो। बंदा तो नौ-दो ग्यारह होता है।” | नौ-दो ग्यारह होना | भाग जाना | पुलिस को देखते ही चोर नौ-दो ग्यारह हो गया। |
सृजन — रचनात्मक लेखन
4 प्रश्न
🆕 नया पैटर्न
हीरा और मोती की दैनंदिनी — कहानी में हीरा और मोती आपस में मनुष्यों की तरह बातें करते दिखते हैं। कल्पना कीजिए कि वे लिख-पढ़ भी सकते हैं। हीरा या मोती की नजर से उस दिन की डायरी लिखिए जब उन्हें काँजीहाउस ले जाया गया।
आज का दिन बहुत दुखद रहा। सुबह से ही हम खेत में मटर खा रहे थे कि अचानक दो आदमी लाठियाँ लेकर आए और हमें घेर लिया। मोती निकल गया, पर मैं कीचड़ में फँस गया। मोती ने मुझे अकेला नहीं छोड़ा — वह भी लौट आया। “फँसेंगे तो दोनों फँसेंगे।” यही उसने मूक-भाषा में कहा। सच्चे दोस्त की यही पहचान होती है।
अब हम काँजीहाउस में बंद हैं। यहाँ कितने बेचारे जानवर हैं! सब कमज़ोर, अधमरे। खाने को एक तिनका नहीं। भूख से पेट जल रहा है। पर विश्वास है कि झूरी काका हमें वापस ले जाएगा। उसने हमें कभी अकेला नहीं छोड़ा।
संकल्प: चाहे जो हो, मैं हार नहीं मानूँगा।
🆕 नया पैटर्न
आज के समाचार — मान लीजिए आप एक स्थानीय समाचार पत्र के संवाददाता हैं। अपने समाचार पत्र के लिए बैलों के काँजीहाउस से भागने का समाचार लिखिए।
स्थान: गाँव का काँजीहाउस | दिनांक: (काल्पनिक)
कल रात एक अभूतपूर्व घटना घटी। काँजीहाउस में बंद दो बैलों — हीरा और मोती — ने मिलकर कच्ची दीवार को सींगों से तोड़ डाला और भाग निकले। इसके साथ-साथ घोड़ियाँ, बकरियाँ और भैंसें भी आजाद हो गईं।
प्रात:काल जब चौकीदार पहुँचा तो वह हैरान रह गया। गाँव में इस खबर ने हलचल मचा दी। दोनों बैल अपने मालिक झूरी के घर पहुँचे, जहाँ उनका भव्य स्वागत हुआ।
लोगों की प्रतिक्रिया: “ऐसे बैल किसी के पास न होंगे।” गाँव में उत्साह का माहौल है।
🆕 नया पैटर्न
कहानी का नया अंत — यदि बैल वापस न लौटते तो कहानी का अंत कैसे होता? कहानी का नया अंत लिखिए। (संकेत– बैलों की नई जगह, झूरी की स्थिति।)
यदि हीरा और मोती वापस नहीं लौटते, तो कहानी का अंत कुछ ऐसा होता:
उधर झूरी महीनों प्रतीक्षा करता रहा। उसकी आँखें रोज बैलों की बाट जोहती थीं। पर वे न आए। एक दिन उसने दूसरे बैल खरीदे, पर उनसे वह आत्मीयता कभी न बन सकी। हीरा-मोती उसके दिल में सदा के लिए बस गए थे।
🆕 नया पैटर्न
चित्रकथा लेखन — नीचे ‘दो बैलों की कथा’ की एक घटना को चित्रकथा के रूप में दिया गया है। इन घटनाओं को पहचानिए। प्रत्येक घटना के लिए उपयुक्त संवाद और घटनाक्रम बताने वाले वाक्य लिखिए। (संकेत– दृश्य का क्रम— बंद करना, भागने की योजना, दीवार तोड़ना, आजादी।)
(काँजीहौस में बंद जानवर)
हीरा: “मोती, यहाँ खाने को कुछ नहीं। क्या करें?”
मोती: “अब तो नहीं रहा जाता, हीरा!”
सभी जानवर थके और भूखे हैं।
(हीरा-मोती सींग से दीवार देख रहे हैं)
हीरा: “आओ दीवार तोड़ डालें।”
मोती: “मुझसे तो अब कुछ नहीं होगा।”
हीरा: “बस इसी बूते पर अकड़ते थे!”
(मोती दीवार में सींग लगाकर जोर लगा रहा है)
मोती: “जोर तो मारता ही जाऊँगा, चाहे कितने ही बंधन पड़ते जाएँ।”
आखिर दीवार गिर पड़ी!
(सभी जानवर भागते हुए, हीरा-मोती खुश)
हीरा: “अब हम आजाद हैं!”
मोती: “घर चलो, झूरी काका इंतज़ार कर रहे होंगे।”
स्वतंत्रता का आनंद!
प्रेमचंद (धनपत राय) | जन्म: 1880, लमही, वाराणसी | मृत्यु: 1936
कहानी (गद्य) | पंचतंत्र-हितोपदेश परंपरा
पशु-मानव संबंध, स्वतंत्रता संघर्ष, मित्रता, अपनापन
हीरा, मोती, झूरी, गया, छोटी लड़की, दाढ़ीवाला
सरल, जीवंत, मुहावरेदार | चित्रात्मक, व्यंग्यात्मक, संवादात्मक
गद्य खंड का प्रथम पाठ | MCQ, लघु एवं दीर्घ उत्तर सभी प्रकार के प्रश्न

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