झाँसी की रानी — सम्पूर्ण प्रश्न-अभ्यास (क्रमानुसार)
कवयित्री: सुभद्रा कुमारी चौहान | सभी प्रश्न पाठ्यपुस्तक के क्रमानुसार
🎯 MCQ + दीर्घ उत्तर + व्याकरण
✍️ मुहावरे + सृजन
📋 प्रश्नों का क्रम (पाठ्यपुस्तक पृष्ठ 184–189 के अनुसार)
खंड A — रचना से संवाद | मेरे उत्तर मेरे तर्क
प्र. 1–5
🔥 बार-बार पूछा गया
‘झाँसी की रानी’ कविता की पंक्ति “बूढ़े भारत में भी आई फिर से नई जवानी थी” में ‘नई जवानी’ शब्द किस भाव को व्यक्त करता है?
- (क) देश का स्वाभिमान
- (ख) विद्रोह की चिंगारी ✓
- (ग) स्वाधीनता का भय
- (घ) भारत की युवावस्था
कारण: 1857 के संग्राम में अंग्रेजों के विरुद्ध पूरे देश में एक नई चेतना जागी। जो भारत वर्षों से गुलामी में दबा था, वह अचानक विद्रोह की ज्वाला से भर उठा। यही उत्साह और क्रांति-भावना ‘नई जवानी’ है। यह स्वाभिमान या युवावस्था नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष विद्रोह की चिंगारी है।
⭐ अति महत्वपूर्ण
लक्ष्मीबाई को ‘छबीली’ कहना उनके व्यक्तित्व की किस विशेषता को दर्शाता है?
- (क) विनम्रता
- (ख) शोभायुक्त ✓
- (ग) सहिष्णुता
- (घ) कठोरता
कारण: ‘छबीली’ शब्द का अर्थ है — तेजस्वी, सुंदर, छबिवाली, सजीली। यह शब्द लक्ष्मीबाई के बाहरी सौंदर्य एवं आंतरिक तेज दोनों को व्यक्त करता है। नाना पेशवा ने उन्हें स्नेह से यह नाम दिया था। यह नाम उनके शोभायुक्त, ओजस्वी व्यक्तित्व का परिचायक है।
🔥 बार-बार पूछा गया
“बुझा दीप झाँसी का” पंक्ति का भावार्थ है—
- (क) अंग्रेजों का झाँसी पर अधिकार हो जाना ✓
- (ख) झाँसी राज्य की उम्मीदों का नष्ट हो जाना
- (ग) राजा की आकस्मिक मृत्यु होना
- (घ) रानी के जीवन में उदासी होना
कारण: राजा गंगाधर राव के निःसंतान निधन के बाद डलहौजी ने झाँसी पर अंग्रेजी फौज भेजकर अपना झंडा फहरा दिया। इस प्रकार झाँसी की स्वतंत्रता सदा के लिए बुझ गई — यही ‘दीप का बुझना’ है। इस पंक्ति में झाँसी की स्वाधीनता के पूरी तरह समाप्त होने का भाव है।
⭐ अति महत्वपूर्ण
“इस स्वतंत्रता-महायज्ञ में कई वीरवर आए काम” पंक्ति में स्वतंत्रता आंदोलन की किस ऐतिहासिक घटना की ओर संकेत किया गया है?
- (क) असहयोग आंदोलन
- (ख) भारत छोड़ो आंदोलन
- (ग) 1857 की क्रांति ✓
- (घ) सविनय अवज्ञा आंदोलन
कारण: इस पंक्ति के बाद कविता में नाना धुंधूपंत, ताँतिया, अज़ीमुल्ला, अहमद शाह मौलवी, ठाकुर कुँवरसिंह जैसे नायकों के नाम आते हैं — ये सभी 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के योद्धा थे। ‘स्वतंत्रता-महायज्ञ’ इसी क्रांति का प्रतीक है।
⭐ अति महत्वपूर्ण
“व्यापारी बन दया चाहता था जब यह भारत आया” पंक्ति में ‘यह’ शब्द किसके लिए कहा गया है?
- (क) नवाबों के लिए
- (ख) जनरल डलहौजी के लिए
- (ग) लेफ्टिनेंट वॉकर के लिए
- (घ) ब्रिटिश राज के लिए ✓
कारण: अंग्रेज पहले व्यापारी (ईस्ट इंडिया कंपनी) बनकर भारत आए और दया की याचना करते रहे, किंतु बाद में उन्होंने पूरे देश पर अपना शासन स्थापित कर लिया। ‘यह’ शब्द ब्रिटिश राज की उस छल-कपट भरी नीति को इंगित करता है।
खंड B — मेरी समझ मेरे विचार
प्र. 1–5
🔥 बार-बार पूछा गया
‘झाँसी की रानी’ कविता के आधार पर बताइए कि लक्ष्मीबाई के प्रिय खेल कौन-कौन से थे? उनका बचपन दूसरों से किस प्रकार भिन्न था?
लक्ष्मीबाई के प्रिय खेल: कविता के अनुसार उनके प्रिय खेल सामान्य बच्चों से सर्वथा भिन्न थे —
- नकली युद्ध करना
- व्यूह की रचना करना (सैन्य रणनीति बनाना)
- शिकार खेलना
- सैन्य घेरना
- दुर्ग (किला) तोड़ना
सैन्य घेरना, दुर्ग तोड़ना, ये थे उसके प्रिय खिलवार।
बचपन की भिन्नता: सामान्य बच्चे जहाँ गुड्डे-गुड़ियों से खेलते हैं, वहीं लक्ष्मीबाई की सखियाँ बरछी, ढाल, कृपाण और कटारी थीं। वह नाना पेशवा के साथ पढ़ती और खेलती थीं। वीर शिवाजी की गाथाएँ उन्हें जुबानी याद थीं। इस प्रकार उनका बचपन वीरता और देशप्रेम की नींव पर टिका था।
⭐ अति महत्वपूर्ण
“किंतु कालगति चुपके-चुपके काली घटा घेर लाई” पंक्ति के माध्यम से किस घटना की ओर संकेत किया गया है?
तीर चलाने वाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भाईं,
रानी विधवा हुई हाय! विधि को भी नहीं दया आई,
निःसंतान मरे राजाजी रानी शोक-समानी थी।
इस पंक्ति के माध्यम से राजा गंगाधर राव की असमय मृत्यु की ओर संकेत किया गया है। विवाह के बाद झाँसी में जब सुख और उल्लास का वातावरण था, तभी धीरे-धीरे दुर्भाग्य ने दस्तक दी। राजा जी निःसंतान ही चल बसे और रानी लक्ष्मीबाई विधवा हो गईं।
‘काली घटा’ यहाँ दुख, वैधव्य और आने वाले संकट का प्रतीक है। जिन हाथों में तीर-धनुष शोभते थे, उन्हें चूड़ियाँ पहननी पड़ रही थीं — यह स्थिति बेहद पीड़ादायक थी।
‘कालगति चुपके-चुपके’ से कवयित्री यह बताती हैं कि दुर्भाग्य ने बिना किसी पूर्व चेतावनी के, चुपचाप आकर झाँसी को घेर लिया।
🔥 बार-बार पूछा गया
“महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी” पंक्ति समाज के विभिन्न वर्गों की एकता को दर्शाती है, इस एकता का स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में क्या महत्व है?
यह स्वतंत्रता की चिंगारी अंतरतम से आई थी।
पंक्ति का प्रतीकार्थ:
- महल = राजा-महाराजा, शासक वर्ग — जिन्होंने संसाधन और नेतृत्व दिया।
- झोंपड़ी = सामान्य जनता, किसान, सैनिक — जिन्होंने अपने प्राणों से क्रांति की ज्वाला को जलाए रखा।
एकता का महत्व स्वतंत्रता संग्राम में:
- जब समाज के हर वर्ग ने एक ही लक्ष्य के लिए कदम मिलाया, तो संग्राम अत्यंत शक्तिशाली बन गया।
- इस सर्वव्यापी जन-जागरण ने अंग्रेजों को चौंका दिया — उन्होंने नहीं सोचा था कि राजा और किसान एकजुट होंगे।
- यह एकता सिद्ध करती है कि राष्ट्रीय चेतना जाति, वर्ग और धन-संपत्ति से परे होती है।
- महलों की आग + झोंपड़ी की ज्वाला = एक विशाल जन-आंदोलन, जो 1857 की क्रांति का मूल आधार था।
⭐ अति महत्वपूर्ण
“सरे-आम नीलाम छापते थे अंग्रेजों के अखबार” पंक्ति में ‘नीलाम छापते’ शब्द किसकी ओर संकेत करता है? यह भी बताइए कि किसकी नीलामी की जाती थी और क्यों?
उनके गहने-कपड़े बिकते थे कलकत्ते के बाजार,
सरे-आम नीलाम छापते थे अंग्रेजों के अखबार,
‘नागपुर के जेवर ले लो’ ‘लखनऊ के लो नौलख हार’।
‘नीलाम छापते’ का संकेत: इस पंक्ति में ‘नीलाम छापते’ शब्द अंग्रेजों की उस क्रूर नीति की ओर संकेत करता है जिसके तहत वे भारतीय राजघरानों की बहुमूल्य संपत्ति को सार्वजनिक रूप से नीलाम कर देते थे।
किसकी नीलामी होती थी: भारतीय रानियों और बेगमों के गहने-जेवर, जैसे — नागपुर की रानी के आभूषण और लखनऊ के नवाब का नौलखा हार — कलकत्ते के बाजार में बेचे जाते थे।
क्यों: अंग्रेजों की ‘हड़प नीति’ (Doctrine of Lapse) के तहत वे भारतीय रियासतों को अपने अधीन करते जा रहे थे। इन राज्यों की संपत्ति को लूटकर इंग्लैंड भेजना उनका उद्देश्य था। इससे भारतीय राजघरानों का सम्मान धूल में मिलाया जा रहा था। ‘परदे की इज्जत परदेशी के हाथ बिकानी’ — यह पंक्ति इसी अपमान को व्यक्त करती है।
🔥 बार-बार पूछा गया
“अभी उम्र कुल तेइस की थी, मनुज नहीं अवतारी थी” पंक्ति में ‘अवतारी’ शब्द व्यक्ति के विशेष गुणों की ओर इंगित कर रहा है। कविता के आधार पर बताइए कि लक्ष्मीबाई के किन गुणों के कारण उनको ‘अवतारी’ कहा गया है?
हमको जीवित करने आई बन स्वतंत्रता नारी थी।
‘अवतारी’ = किसी देवता या ईश्वर का मनुष्य रूप में जन्म लेना। कवयित्री ने लक्ष्मीबाई को ‘अवतारी’ इसलिए कहा है क्योंकि मात्र 23 वर्ष की आयु में उन्होंने जो असाधारण कार्य किए, वे किसी सामान्य मनुष्य के लिए संभव नहीं थे।
लक्ष्मीबाई के वे गुण जो उन्हें ‘अवतारी’ सिद्ध करते हैं:
- देवीय वीरता: वह लक्ष्मी और दुर्गा दोनों का अवतार थीं — उनकी तलवार के वार देखकर मराठे भी पुलकित होते थे।
- असाधारण साहस: पति की मृत्यु, वैधव्य और अंग्रेजों के अत्याचार के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी।
- राष्ट्र के प्रति समर्पण: झाँसी की रक्षा के लिए अपने प्राणों की बाजी लगा दी।
- नेतृत्व क्षमता: केवल 23 वर्ष में पूरी सेना का नेतृत्व किया और अंग्रेजों को बार-बार पराजित किया।
- राष्ट्रीय प्रेरणा: सोए हुए भारत को जगाया और स्वतंत्रता का मार्ग दिखाया — “हमको जीवित करने आई बन स्वतंत्रता नारी थी।”
खंड C — विधा से संवाद | कविता में कहानी
1 गतिविधि
⭐ अति महत्वपूर्ण
यह कविता लक्ष्मीबाई के जीवन की घटनाओं पर आधारित है और अपनी संरचना में एक कथात्मक कविता है। कथात्मक कविता ऐसी कविता को कहते हैं जिसमें कविता और कहानी के तत्व परस्पर जुड़े होते हैं तथा घटनाओं का एक क्रम होता है। इस कविता में भी लक्ष्मीबाई के बचपन से लेकर वीरगति प्राप्त होने तक की कथा क्रम से देखने को मिलती है। पाठ की संरचना को समझते हुए इसमें वर्णित प्रमुख घटनाओं को समय-रेखा (टाइमलाइन) पर दर्शाएँ। (संकेत– लक्ष्मीबाई का बचपन, विवाह, अन्य घटनाएँ आदि।)
- जन्म (1828): लक्ष्मीबाई का जन्म काशी में। कानपुर के नाना पेशवा (नाना धुंधूपंत) की मुँहबोली बहन ‘छबीली’ कहलाईं।
- बचपन: नाना के साथ पढ़ाई, खेल और शस्त्र-विद्या। बरछी, ढाल, कृपाण, कटारी से खेलना। शिवाजी की गाथाएँ कंठस्थ। घुड़सवारी और तीरंदाजी में निपुण।
- विवाह: वीरता की वैभव के साथ सगाई। झाँसी के राजा गंगाधर राव से विवाह। राजमहल में बधाइयाँ बजीं, खुशियाँ छाईं।
- राजा की मृत्यु: राजा गंगाधर राव का निःसंतान निधन। रानी विधवा। दामोदर राव को गोद लिया — अंग्रेजों ने अमान्य किया।
- 1853 — डलहौजी का कब्जा: हड़प नीति के तहत झाँसी पर अंग्रेजी सेना का अधिकार। रानी का ‘मेरी झाँसी नहीं दूँगी’ का संकल्प।
- 1857 — क्रांति का आह्वान: बहिन छबीली (लक्ष्मीबाई) ने रण-चंडी का प्रकट आह्वान किया। देश भर में विद्रोह — झाँसी, दिल्ली, लखनऊ, मेरठ, कानपुर, पटना जागे।
- युद्ध: लेफ्टिनेंट वॉकर से युद्ध — वॉकर जख्मी होकर भागा। कालपी तक 100 मील का निरंतर प्रयाण। यमुना-तट पर अंग्रेजों की पुनः हार। ग्वालियर पर अधिकार।
- 1858 — वीरगति: जनरल ह्यूरोज से घिरने पर, नाले के पास घायल हुईं। मात्र 23 वर्ष की आयु में वीरगति प्राप्त की। “घायल होकर गिरी सिंहनी उसे वीर-गति पानी थी।”
खंड D — विषयों से संवाद | साझा साथ / साझा संघर्ष
प्र. 1–4
🔥 महत्वपूर्ण
“लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज्य झाँसी आया”, ब्रिटिश राज किस नीति के कारण ‘लावारिस का वारिस’ बन जाता था? अपने इतिहास के शिक्षक से पता लगाकर उस नीति के विषय में लिखिए।
ब्रिटिश राज ‘हड़प नीति’ (Doctrine of Lapse) के कारण ‘लावारिस का वारिस’ बन जाता था।
- नीति का नाम: हड़प नीति / व्यपगत का सिद्धांत (Doctrine of Lapse) — लागू की गई लॉर्ड डलहौजी द्वारा, सन् 1848 में।
- नियम: यदि किसी भारतीय राजा की मृत्यु हो और उसका कोई सगा (जैविक) पुत्र न हो, तो उस राज्य को ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया जाएगा। गोद लिए पुत्र को उत्तराधिकारी नहीं माना जाएगा।
- झाँसी में: राजा गंगाधर राव के निःसंतान मरने पर रानी का गोद लिया पुत्र (दामोदर राव) अमान्य करके झाँसी पर अधिकार किया।
- इस नीति से हड़पे गए अन्य राज्य: सतारा, नागपुर, उदयपुर, संबलपुर, बघाट, जैतपुर।
⭐ अति महत्वपूर्ण
इस कविता में लक्ष्मीबाई की जीवन-गाथा के साथ-साथ अनेक वीरों के त्याग और बलिदान का भी उल्लेख है। उनकी सूची बनाइए तथा शिक्षक की सहायता से 1857 की क्रांति में उनके योगदान के विषय में लिखिए।
| वीर का नाम | क्षेत्र | 1857 की क्रांति में योगदान |
|---|---|---|
| नाना धुंधूपंत (पेशवा) | कानपुर / बिठूर | कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व। अंग्रेजों को बड़ी चुनौती दी। |
| ताँतिया टोपे | मराठा सेनापति | नाना साहब के मुख्य सेनापति। झाँसी की रानी का साथ दिया। अंत तक लड़ते रहे। |
| चतुर अज़ीमुल्ला | नाना साहब के सलाहकार | क्रांति की योजना बनाने में बड़ी भूमिका। रणनीति और कूटनीति में कुशल। |
| अहमद शाह मौलवी | फैजाबाद / लखनऊ | अवध में विद्रोह का नेतृत्व। धार्मिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर प्रेरणा दी। |
| ठाकुर कुँवरसिंह | आरा, बिहार | 80 वर्ष की आयु में भी अंग्रेजों से युद्ध किया। बिहार में क्रांति के सूत्रधार। |
✅ निश्चित प्रश्न
यह कविता जिस समय और परिवेश में लिखी गई है, उसमें युद्ध और अन्य साहसिक कार्य करना सामान्यतः पुरुषों का क्षेत्र माना जाता था। वर्तमान में लगभग हर क्षेत्र में महिलाएँ कार्य कर रही हैं। नीचे कुछ ऐसे ही कार्यक्षेत्र दिए गए हैं। इन क्षेत्रों में काम करने वाली स्त्रियों के नाम और उनके विषय में लिखिए। आप चाहें तो इसमें अपनी समझ के अनुसार कुछ और कार्यक्षेत्र भी जोड़ सकते हैं।कार्यक्षेत्र: 1. दमकल केंद्र (फायर ब्रिगेड) 2. रेलगाड़ी चालक 3. खेल के विभिन्न क्षेत्र 4. व्यापार और प्रबंधन 5. विज्ञान और तकनीक
| कार्यक्षेत्र | प्रमुख महिला | संक्षिप्त परिचय |
|---|---|---|
| 1. दमकल केंद्र (फायर ब्रिगेड) | हरप्रीत कौर (दिल्ली) | भारत की महिला फायर ऑफिसर; जीवन बचाने के साहसिक कार्यों के लिए प्रसिद्ध। |
| 2. रेलगाड़ी चालक | सुरेखा यादव | भारत की पहली महिला लोको पायलट (ट्रेन चालक); कोंकण रेलवे में उल्लेखनीय सेवा। |
| 3. खेल के विभिन्न क्षेत्र | पी. वी. सिंधु, मैरी कॉम, मिताली राज | सिंधु — बैडमिंटन विश्व चैंपियन; मैरी कॉम — मुक्केबाजी ओलंपिक पदक; मिताली — महिला क्रिकेट टीम की महान कप्तान। |
| 4. व्यापार और प्रबंधन | इंदिरा नूयी | PepsiCo की पूर्व CEO; भारतीय मूल की विश्वस्तरीय व्यावसायिक नेता। |
| 5. विज्ञान और तकनीक | कल्पना चावला, टेस्सी थॉमस | कल्पना — अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय महिला; टेस्सी — ‘मिसाइल वुमेन ऑफ इंडिया’। |
⭐ अति महत्वपूर्ण
कविता में 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित अनेक स्थानों के नाम आए हैं। अपने शिक्षक की सहायता से दिए गए मानचित्र में उन स्थानों/नगरों को चिह्नित करके नाम लिखिए।
कविता में 1857 की क्रांति से संबंधित निम्नलिखित स्थानों / नगरों का उल्लेख हुआ है जिन्हें मानचित्र में चिह्नित किया जाना है:
| क्र. | नगर / स्थान का नाम | राज्य | कविता में उल्लेख |
|---|---|---|---|
| 1 | झाँसी | उत्तर प्रदेश | रानी लक्ष्मीबाई का राज्य; मुख्य युद्धभूमि |
| 2 | कानपुर | उत्तर प्रदेश | नाना पेशवा का केंद्र; क्रांति का प्रमुख स्थान |
| 3 | दिल्ली | दिल्ली | राजधानी — ‘छिनी राजधानी देहली की’ |
| 4 | लखनऊ | उत्तर प्रदेश | ‘लिया लखनऊ बातों-बात’ |
| 5 | बिठूर | उत्तर प्रदेश | नाना साहब कैद — ‘कैद पेशवा था बिठूर में’ |
| 6 | नागपुर | महाराष्ट्र | ‘हुआ नागपुर का भी घात’ |
| 7 | मेरठ | उत्तर प्रदेश | 1857 की क्रांति का पहला विस्फोट |
| 8 | पटना | बिहार | ‘पटना ने भारी धूम मचाई थी’ |
| 9 | जबलपुर / कोल्हापुर | म. प्र. / महाराष्ट्र | हलचल — ‘जबलपुर, कोल्हापुर में भी’ |
| 10 | कालपी / ग्वालियर | उत्तर प्रदेश / म. प्र. | रानी का कालपी तक प्रयाण; ग्वालियर पर अधिकार |
खंड E — भाषा से संवाद | व्याकरण की बात
2 प्रश्न
🔥 बार-बार पूछा गया
“कानपूर के नाना की मुँहबोली बहन ‘छबीली’ थी” — उपर्युक्त पंक्ति में रेखांकित शब्द पर ध्यान दीजिए। कविता में ‘नाना’ शब्द ‘नाना धुंधूपंत’ के लिए प्रयुक्त हुआ है। लेकिन इस शब्द का प्रयोग संदर्भ के अनुसार अन्य अर्थों में भी होता है। जैसे– माता के पिता के लिए तथा अनेक के अर्थ में। इस प्रकार अनेकार्थी शब्द वह शब्द है जिसके एक से अधिक अर्थ होते हैं। नीचे तालिका में दी गई कविता की पंक्तियों में रेखांकित शब्द अनेकार्थी शब्द हैं। कविता के संदर्भ में उनके सही अर्थ पर घेरा लगाइए।
| काव्य-पंक्ति | रेखांकित शब्द | दिए गए अर्थ | ✅ कविता के संदर्भ में सही अर्थ |
|---|---|---|---|
| तीर चलाने वाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भाईं | तीर | नदी का किनारा, बाण, सीसा | बाण (लक्ष्मीबाई धनुष-बाण चलाती थीं) |
| रानी विधवा हुई हाय! विधि को भी नहीं दया आई | विधि | शास्त्र में लिखी व्यवस्था, प्रणाली, विधाता, तरीका | विधाता (ईश्वर / भाग्य-निर्माता) |
| रानी ने तलवार खींच ली, हुआ द्वंद्व असमानों में | द्वंद्व | युद्ध, संशय, युग्म | युद्ध (रानी और वॉकर का सीधा आमना-सामना) |
| हो मदमाती विजय, मिटा दे गोलों से चाहे झाँसी | गोलों | किसी पदार्थ का गोल पिंड, रस्सी/सूत, बर्फ का गोला, तोप से दागने वाले गोले, नारियल | तोप से दागने वाले गोले (युद्ध में तोप के गोले) |
| मिला तेज से तेज, तेज की वह सच्ची अधिकारी थी | तेज | आभा, गति, तेज चाकू (धार) | आभा / ओज / दीप्ति (रानी का तेजस्वी, दीप्तिमान व्यक्तित्व) |
✅ निश्चित प्रश्न
“कानपूर के नाना की मुँहबोली बहन ‘छबीली’ थी” — “मेरठ, कानपुर, पटना ने भारी धूम मचाई थी” — उपर्युक्त पंक्तियों में रेखांकित शब्दों की वर्तनी पर ध्यान दीजिए। दोनों शब्दों की वर्तनी में थोड़ी भिन्नता है। कई बार रचनाकार कविता की लय, अर्थ की लय इत्यादि को ध्यान में रखते हुए भाषा के स्तर पर इस प्रकार का प्रयोग करते रहे हैं। इस कविता में अन्य शब्दों के भी ऐसे प्रयोग मिलते हैं, उन्हें ढूँढ़कर लिखिए और कक्षा में चर्चा कीजिए।
कवयित्री ने कविता की लय (rhythm) और तुक (rhyme) बनाए रखने के लिए कुछ शब्दों की मानक वर्तनी से भिन्न वर्तनी का प्रयोग किया है। ऐसे उदाहरण:
| कविता में प्रयुक्त वर्तनी | मानक (शुद्ध) वर्तनी | स्पष्टीकरण |
|---|---|---|
| कानपूर | कानपुर | लय के लिए ‘उ’ की जगह ‘ऊ’ — दीर्घ स्वर से तुक मिलती है |
| बिठूर | बिठूर | ऐतिहासिक नाम (यही प्रचलित है) |
| फिरंगी | फ़िरंगी | बोलचाल का रूप; कविता में लय के लिए |
| सन् सत्तावन | सन् 1857 | अंक की जगह शब्दों में लिखकर गेयता लाई गई |
| जेवर | ज़ेवर / जेवर | आभूषण — बोलचाल का रूप |
खंड F — मुहावरे
5 मुहावरे
‘मुहावरे’ ऐसे वाक्यांश होते हैं जो अपने शाब्दिक अर्थ से भिन्न एक विशेष और लाक्षणिक अर्थ व्यक्त करते हैं। इनके प्रयोग से भाषा में सौंदर्य और प्रभाव उत्पन्न होता है।उदाहरण (पाठ्यपुस्तक से): “दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी” — ‘मन में ठान लेना’ = दृढ़ निश्चय करना।
🔥 परीक्षा में आता है
| क्र. | काव्य-पंक्ति | प्रयुक्त मुहावरा | अर्थ | नया वाक्य |
|---|---|---|---|---|
| 1 (उदाहरण) | अबके जनरल स्मिथ सन्मुख था, उसने मुँह की खाई थी | मुँह की खाना | बुरी तरह पराजित होना | मोहन ने सोचा था कि वह आसानी से जीत जाएगा लेकिन अंत में उसे मुँह की खानी पड़ी। |
| 2 | डलहौजी ने पैर पसारे अब तो पलट गई काया | पैर पसारना | अपना विस्तार / प्रभाव बढ़ाना; अधिकार जमाना | धीरे-धीरे उस व्यापारी ने पूरे बाज़ार में पैर पसार लिए। |
| 3 | राजाओं नव्वाबों को भी उसने पैरों ठुकराया | पैरों ठुकराना | अपमानित करना; तिरस्कृत करना; ठोकर मारना | घमंड में आकर उसने अपने सच्चे मित्रों को भी पैरों ठुकरा दिया। |
| 4 | हुआ यज्ञ प्रारंभ उन्हें तो / सोई ज्योति जगानी थी | सोई ज्योति जगाना | सुप्त / निष्क्रिय चेतना को जागृत करना; प्रेरणा देना | उस महान नेता ने देशवासियों की सोई ज्योति जगा दी। |
| 5 | मेरठ, कानपुर, पटना ने भारी धूम मचाई थी | धूम मचाना | बड़ी हलचल / उथल-पुथल मचाना; तूफान लाना | इस बार वार्षिक उत्सव में छोटे बच्चों ने खूब धूम मचाई। |
खंड G — सृजन (रचनात्मक लेखन)
2 प्रश्न
⭐ अति महत्वपूर्ण
लक्ष्मीबाई की सखियों काना तथा मंदरा की ओर से लक्ष्मीबाई को एक पत्र लिखिए जिसमें काना तथा मंदरा द्वारा ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध युद्ध की रणनीति पर चर्चा की गई हो।
ज्येष्ठ शुक्ल, संवत् 1914प्रिय सखी लक्ष्मी,सादर प्रणाम।हम काना और मंदरा — आपकी विश्वासपात्र सखियाँ — इस कठिन घड़ी में आपको यह पत्र लिख रही हैं। झाँसी पर अंग्रेजों की दृष्टि है और हमने मिलकर कुछ रणनीतियाँ सोची हैं —रणनीति-1 (किले की रक्षा): किले के पूर्वी और उत्तरी द्वारों पर ‘दुर्गा दल’ की महिला सैनिकों को तैनात किया जाए। शत्रु को इसकी कम अपेक्षा होगी।रणनीति-2 (सहयोग): नाना साहब और ताँतिया टोपे से तत्काल संपर्क कर सेना की संख्या बढ़ाई जाए। एकजुट होने पर ही विजय संभव है।रणनीति-3 (रसद): किले का अन्न-जल भंडार पहले ही सुरक्षित कर लिया जाए। लंबे घेरे में यह सबसे आवश्यक है।हम दोनों आपके साथ अंतिम साँस तक खड़ी हैं। झाँसी हमारी माँ है — इसे हम किसी को नहीं देंगी!
जय झाँसी! जय भारत!
आपकी सखियाँ,
काना और मंदरा
✅ निश्चित प्रश्न
युद्धपूर्व रात्रि में झाँसी की रानी के मन में अगले दिन की संभावनाओं को लेकर कई तरह के भाव और विचार उठ रहे होंगे। आपके जीवन में भी कई ऐसे क्षण आए होंगे जब आपने मानसिक ऊहापोह का अनुभव किया होगा। ऐसी किसी घटना के विषय में अपनी डायरी में लिखिए, जैसे– परीक्षा के एक दिन पूर्व की स्थिति या नौवीं कक्षा में पहला दिन आदि।
प्रिय डायरी,आज परीक्षा से एक रात पहले मन में अजीब-सी उथल-पुथल मची है। एक तरफ आत्मविश्वास है — मैंने परिश्रम से पढ़ाई की, अभ्यास किया। दूसरी तरफ एक भय भी है — कहीं कुछ छूट तो नहीं गया? कल का प्रश्नपत्र कैसा होगा?आज ‘झाँसी की रानी’ कविता पढ़ी थी। रानी लक्ष्मीबाई ने युद्ध से एक रात पहले क्या सोचा होगा? वह भी तो इसी ऊहापोह में रही होंगी — पर उन्होंने हार नहीं मानी।मैं भी यही सोचती/सोचता हूँ — परीक्षा एक तरह का युद्ध है। डर तो है, पर घबराहट नहीं। कल मैं पूरी तैयारी के साथ परीक्षाकक्ष में जाऊँगा/जाऊँगी।शुभरात्रि,
तुम्हारा/तुम्हारी — ____

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