झाँसी की रानी — प्रश्न-अभ्यास
कवयित्री: सुभद्रा कुमारी चौहान | पाठ्यपुस्तक: गंगा | कक्षा 9
रचना से संवाद — मेरे उत्तर मेरे तर्क (वस्तुनिष्ठ प्रश्न)
5 प्रश्न
🔥 बार-बार पूछा गया
‘झाँसी की रानी’ कविता की पंक्ति “बूढ़े भारत में भी आई फिर से नई जवानी थी” में ‘नई जवानी’ शब्द किस भाव को व्यक्त करता है?
कारण: 1857 के विद्रोह में पूरे भारत में अंग्रेज़ों के विरुद्ध क्रांति की भावना जाग उठी थी। यह “नई जवानी” युवा उत्साह नहीं, बल्कि विद्रोह की चिंगारी थी। बूढ़े और जर्जर हो रहे भारत में एक नई चेतना और संघर्ष की भावना उत्पन्न हुई, इसीलिए यह उत्तर सही है।
⭐ अति महत्वपूर्ण
लक्ष्मीबाई को ‘छबीली’ कहना उनके व्यक्तित्व की किस विशेषता को दर्शाता है?
कारण: ‘छबीली’ शब्द का अर्थ है — तेजस्वी, सुंदर, सजीली, छबिवाली। यह शब्द लक्ष्मीबाई के रूप, तेज और आभामंडल की ओर संकेत करता है। उनका व्यक्तित्व शोभायुक्त और आकर्षक था, जो इस उपनाम से प्रकट होता है।
🔥 बार-बार पूछा गया
“बुझा दीप झाँसी का” पंक्ति का भावार्थ है —
कारण: राजा गंगाधर राव की निःसंतान मृत्यु के बाद डलहौजी ने ‘लैप्स की नीति’ के अंतर्गत झाँसी को हड़प लिया। “बुझा दीप झाँसी का” — यह झाँसी रियासत की स्वतंत्रता का अंत और अंग्रेज़ी राज की स्थापना का प्रतीक है।
✅ निश्चित प्रश्न
“इस स्वतंत्रता-महायज्ञ में कई वीरवर आए काम” पंक्ति में स्वतंत्रता आंदोलन की किस ऐतिहासिक घटना की ओर संकेत किया गया है?
कारण: यह कविता 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि पर लिखी गई है। इसमें नाना धुंधूपंत, तांतिया, अजीमुल्ला, अहमद शाह मौलवी, कुँवरसिंह जैसे वीरों का उल्लेख है जिन्होंने 1857 की क्रांति में भाग लिया था। अतः यह 1857 की क्रांति की ओर संकेत है।
⭐ अति महत्वपूर्ण
“व्यापारी बन दया चाहता था जब यह भारत आया” पंक्ति में ‘यह’ शब्द किसके लिए कहा गया है?
कारण: अंग्रेज़ पहले ‘ईस्ट इंडिया कंपनी’ के रूप में व्यापार करने के बहाने भारत आए। धीरे-धीरे उन्होंने अपना साम्राज्य फैला लिया। इसलिए ‘यह’ शब्द ब्रिटिश राज (अंग्रेज़ी हुकूमत) के लिए प्रयुक्त हुआ है, न कि किसी एक व्यक्ति के लिए।
मेरी समझ मेरे विचार (विचार-प्रश्न)
5 प्रश्न
🔥 बार-बार पूछा गया
‘झाँसी की रानी’ कविता के आधार पर बताइए कि लक्ष्मीबाई के प्रिय खेल कौन-कौन से थे? उनका बचपन दूसरों से किस प्रकार भिन्न था?
कविता के अनुसार लक्ष्मीबाई के प्रिय खेल सामान्य बच्चों से बिल्कुल अलग थे। वे नाना धुंधूपंत पेशवा के साथ पढ़ती और खेलती थीं।
लक्ष्मीबाई के प्रिय खेल:
- नकली युद्ध करना — युद्ध का अभ्यास करना
- व्यूह की रचना — सेना की रणनीति बनाना
- शिकार खेलना — जंगल में शिकार करना
- सैन्य घेरना और दुर्ग तोड़ना — किले पर आक्रमण का अभ्यास
- बरछी, ढाल, कृपाण, कटारी — ये शस्त्र उनकी सहेलियाँ थीं
बचपन की भिन्नता: सामान्य बच्चे गुड्डे-गुड़िया, गिल्ली-डंडा जैसे खेल खेलते हैं, जबकि लक्ष्मीबाई बचपन से ही वीर शिवाजी की गाथाएँ सुनती थीं और शस्त्र-संचालन में रुचि रखती थीं। उनका बचपन वीरता की भावना से पूर्ण था।
✅ निश्चित प्रश्न
“किंतु कालगति चुपके-चुपके काली घटा घेर लाई” पंक्ति के माध्यम से किस घटना की ओर संकेत किया गया है?
तीर चलाने वाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भाईं,
रानी विधवा हुई हाय! विधि को भी नहीं दया आई,
निःसंतान मरे राजाजी रानी शोक-समानी थी।
इस पंक्ति के माध्यम से राजा गंगाधर राव की असामयिक मृत्यु की ओर संकेत किया गया है।
विवाह के बाद झाँसी में सुख और समृद्धि थी, परंतु “कालगति” (भाग्य/काल) ने चुपके से दुर्भाग्य ला दिया। राजा गंगाधर राव निःसंतान ही मृत्यु को प्राप्त हो गए। रानी को विधवा होना पड़ा। जो हाथ तीर चलाते थे, उनमें अब चूड़ियाँ पहनने की बारी आई। यह पंक्ति दुःख और पीड़ा की अभिव्यक्ति है।
ऐतिहासिक संदर्भ: राजा गंगाधर राव ने मृत्यु से पूर्व एक पुत्र गोद लिया था, जिसे अंग्रेज़ों ने अस्वीकार कर दिया और लैप्स की नीति से झाँसी को हड़प लिया।
🔥 बार-बार पूछा गया
“महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी” पंक्ति समाज के विभिन्न वर्गों की एकता को दर्शाती है, इस एकता का स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में क्या महत्व है?
यह स्वतंत्रता की चिनगारी अंतरतम से आई थी।
इस पंक्ति में कवयित्री ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में समाज के सभी वर्गों की एकता को दर्शाया है।
- महलों ने दी आग — अर्थात राजे-रजवाड़े, अमीर और शासक वर्ग ने विद्रोह में योगदान दिया।
- झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई — अर्थात गरीब, किसान, आम जनता ने भी इस संघर्ष में भाग लिया।
स्वतंत्रता संग्राम में एकता का महत्व:
- जब समाज के हर वर्ग — अमीर-गरीब, राजा-प्रजा — एकजुट हो जाते हैं, तो कोई भी शक्ति उन्हें नहीं रोक सकती।
- यह एकता राष्ट्रीय चेतना की अभिव्यक्ति है जो भीतर से उठी थी।
- 1857 की क्रांति इसीलिए इतनी व्यापक थी क्योंकि यह केवल सिपाहियों का विद्रोह नहीं, बल्कि जन-आंदोलन था।
⭐ अति महत्वपूर्ण
“सरे-आम नीलाम छापते थे अंग्रेजों के अखबार” पंक्ति में ‘नीलाम छापते’ शब्द किसकी ओर संकेत करता है? यह भी बताइए कि किसकी नीलामी की जाती थी और क्यों?
उनके गहने-कपड़े बिकते थे कलकत्ते के बाजार,
सरे-आम नीलाम छापते थे अंग्रेजों के अखबार,
‘नागपूर के जेवर ले लो’, ‘लखनऊ के लो नौलख हार’।
‘नीलाम छापते’ का संकेत: इस शब्द से अंग्रेज़ों की उस नीति की ओर संकेत है जिसमें वे भारतीय राजे-रजवाड़ों की रियासतें हड़पने के बाद उनकी संपत्ति और आभूषणों को सार्वजनिक नीलामी में बेच देते थे।
किसकी नीलामी होती थी:
- भारतीय रानियों और बेगमों के गहने-कपड़े
- नागपूर की जेवर-संपदा
- लखनऊ का नौलख हार (नौ लाख का हार)
- भारतीय रजवाड़ों की बहुमूल्य वस्तुएँ
क्यों: अंग्रेज़ भारतीय राज्यों को हड़पकर उनकी संपत्ति को अपना मानते थे। वे कलकत्ते के बाज़ार में इन्हें बेचते थे और अखबारों में सरेआम नीलामी की घोषणा प्रकाशित करते थे। इससे भारतीयों की आत्मसम्मान की भावना को ठेस पहुँचती थी।
🔥 बार-बार पूछा गया
“अभी उम्र कुल तेइस की थी, मनुज नहीं अवतारी थी” पंक्ति में ‘अवतारी’ शब्द व्यक्ति के विशेष गुणों की ओर इंगित कर रहा है। कविता के आधार पर बताइए कि लक्ष्मीबाई के किन गुणों के कारण उनको ‘अवतारी’ कहा गया है?
मिला तेज से तेज, तेज की वह सच्ची अधिकारी थी,
अभी उम्र कुल तेइस की थी, मनुज नहीं अवतारी थी,
हमको जीवित करने आई बन स्वतंत्रता नारी थी।
लक्ष्मीबाई को ‘अवतारी’ (ईश्वर का अवतार) इसलिए कहा गया क्योंकि उनके व्यक्तित्व में कई अलौकिक और असाधारण गुण थे:
- अद्भुत वीरता: मात्र 23 वर्ष की आयु में अंग्रेज़ी सेना से अकेले लड़ना किसी साधारण मनुष्य के बस की बात नहीं थी।
- देवी-स्वरूप: “लक्ष्मी थी या दुर्गा थी वह स्वयं वीरता की अवतार” — वे लक्ष्मी की तरह तेजस्वी और दुर्गा की तरह रण-शूर थीं।
- तेजस्विता: “मिला तेज से तेज” — उनका तेज दिव्य था।
- राष्ट्र-जागरण: वे भारत को स्वतंत्रता के लिए जगाने आई थीं — “हमको जीवित करने आई बन स्वतंत्रता नारी थी।”
- असाधारण साहस: पीठ पर बच्चे को बाँधकर, घायल होते हुए भी लड़ती रहीं।
- बलिदान: वीरगति प्राप्त करने को उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया।
भाषा से संवाद — व्याकरण की बात
2 प्रश्न
✅ निश्चित प्रश्न
शब्द एक अर्थ अनेक — “कानपूर के नाना की मुँहबोली बहन ‘छबीली’ थी” — उपर्युक्त पंक्ति में रेखांकित शब्द पर ध्यान दीजिए। कविता में ‘नाना’ शब्द ‘नाना धुंधूपंत’ के लिए प्रयुक्त हुआ है। लेकिन इस शब्द का प्रयोग संदर्भ के अनुसार अन्य अर्थों में भी होता है। जैसे — माता के पिता के लिए तथा अनेक के अर्थ में। इस प्रकार अनेकार्थी शब्द वह शब्द है जिसके एक से अधिक अर्थ होते हैं। नीचे तालिका में दी गई कविता की पंक्तियों में रेखांकित शब्द अनेकार्थी शब्द हैं। कविता के संदर्भ में उनके सही अर्थ पर घेरा लगाइए।
1. तीर चलाने वाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भाईं
2. रानी विधवा हुई हाय! विधि को भी नहीं दया आई
3. रानी ने तलवार खींच ली, हुआ द्वंद्व असमानों में
4. हो मदमाती विजय, मिटा दे गोलों से चाहे झाँसी
5. मिला तेज से तेज, तेज की वह सच्ची अधिकारी थी
| काव्य-पंक्ति में शब्द | दिए गए विकल्प | कविता में सही अर्थ |
|---|---|---|
| तीर चलाने वाले कर में… | नदी का किनारा, बाण, सीसा | बाण (arrow) — तीर-कमान चलाना |
| हाय! विधि को भी नहीं दया आई | शास्त्र में लिखी व्यवस्था, विधाता, प्रणाली, तरीका | विधाता (ब्रह्मा/भाग्य) — ऊपरवाले को भी दया नहीं आई |
| हुआ द्वंद्व असमानों में | युद्ध, संशय, युग्म | युद्ध (combat) — रानी और वॉकर का असमान युद्ध |
| मिटा दे गोलों से चाहे झाँसी | किसी पदार्थ का गोल पिंड, तोप से दागने वाले गोले, रस्सी/सूत, बर्फ का गोला, नारियल | तोप के गोले (cannon balls) — अंग्रेज़ तोप से मिटाना चाहें |
| मिला तेज से तेज… | आभा, गति, तेज चाकू (धार) | आभा/दिव्य तेज (radiance) — रानी का तेज दिव्य ज्योति से मिल गया |
⭐ अति महत्वपूर्ण
“कानपूर के नाना की मुँहबोली बहन ‘छबीली’ थी” / “मेरठ, कानपुर, पटना ने भारी धूम मचाई थी” — उपर्युक्त पंक्तियों में रेखांकित शब्दों की वर्तनी पर ध्यान दीजिए। दोनों शब्दों की वर्तनी में थोड़ी भिन्नता है। कई बार रचनाकार कविता की लय, अर्थ की लय इत्यादि को ध्यान में रखते हुए भाषा के स्तर पर इस प्रकार का प्रयोग करते रहे हैं। इस कविता में अन्य शब्दों के भी ऐसे प्रयोग मिलते हैं, उन्हें ढूँढ़कर लिखिए और कक्षा में चर्चा कीजिए।
कविता में कई स्थानों पर कवयित्री ने लय और छंद को बनाए रखने के लिए मानक वर्तनी से थोड़ी भिन्न वर्तनी का प्रयोग किया है। ऐसे प्रमुख उदाहरण हैं:
| कविता में प्रयुक्त | मानक वर्तनी | कारण |
|---|---|---|
| कानपूर | कानपुर | लय/छंद के लिए |
| नागपूर | नागपुर | लय के लिए |
| लखनऊ (खाई) | लखनऊ | तुकबंदी के लिए |
| बिठूर | बिठूर (बिठुर) | लय के अनुसार |
| मेरठ / मेरट | मेरठ | छंद-व्यवस्था |
कारण: कविता में तुकांत (rhyme) और छंद (rhythm) बनाए रखना बहुत ज़रूरी होता है। इसके लिए कवि कभी-कभी शब्दों की वर्तनी में मामूली परिवर्तन कर देते हैं। यह काव्य की स्वाभाविक प्रवृत्ति है।
मुहावरे — काव्य-पंक्तियों से मुहावरे ढूँढ़िए
5 मुहावरे
मुहावरा: मुँह की खाना | नया वाक्य: मोहन ने सोचा था कि वह आसानी से जीत जाएगा लेकिन अंत में उसे मुँह की खानी पड़ी।
| काव्य पंक्ति | प्रयुक्त मुहावरा | अर्थ | नया वाक्य |
|---|---|---|---|
| अबके जनरल स्मिथ सन्मुख था, उसने मुँह की खाई थी | मुँह की खाना | हार का सामना करना / बुरी तरह असफल होना | परीक्षा में बिना पढ़े जाने वाले विद्यार्थी को मुँह की खानी पड़ी। |
| डलहौजी ने पैर पसारे अब तो पलट गई काया | पैर पसारना | अपना विस्तार करना, फैल जाना | धीरे-धीरे उस व्यापारी ने पूरे शहर में पैर पसार लिए। |
| राजाओं नवाबों को भी उसने पैरों ठुकराया | पैरों ठुकराना | तिरस्कार करना, अपमान से नकारना | उस अहंकारी व्यक्ति ने अपने पुराने मित्रों को पैरों ठुकरा दिया। |
| हुआ यज्ञ प्रारंभ उन्हें तो / सोई ज्योति जगानी थी | सोई ज्योति जगाना | सुप्त चेतना को जागृत करना | गुरुजी के प्रेरणास्पद भाषण ने छात्रों की सोई ज्योति जगा दी। |
| मेरठ, कानपुर, पटना ने भारी धूम मचाई थी | धूम मचाना | हलचल पैदा करना, खलबली मचाना | नए खिलाड़ी ने क्रिकेट के मैदान में भारी धूम मचाई। |
सृजन — रचनात्मक लेखन
2 प्रश्न
✅ निश्चित प्रश्न
लक्ष्मीबाई की सखियों काना तथा मंदरा की ओर से लक्ष्मीबाई को एक पत्र लिखिए जिसमें काना तथा मंदरा द्वारा ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध युद्ध की रणनीति पर चर्चा की गई हो।
दिनांक: सन् 1858परम आदरणीया महारानी लक्ष्मीबाई जी,सादर प्रणाम।
हम आपकी सखियाँ काना और मंदरा आपको यह पत्र लिख रही हैं। हम दोनों अंग्रेज़ी सेना के हर कदम पर नज़र रखे हुए हैं।
महारानी जी, हमने योजना बनाई है कि पूर्व दिशा से हम दोनों अंग्रेज़ी सेना को घेरेंगी जबकि आप पश्चिम से आक्रमण करें। रात के अँधेरे का लाभ उठाकर हम किले के फाटक पर धावा बोलेंगी। हमारी तलवारें तैयार हैं और मन में झाँसी को बचाने का दृढ़ संकल्प है।
हम दोनों आपके साथ जीवन के अंतिम क्षण तक लड़ेंगी। झाँसी की रक्षा हमारा धर्म है।
आपकी विजयकामी सखियाँ,
काना और मंदरा
⭐ अति महत्वपूर्ण
युद्धपूर्व रात्रि में झाँसी की रानी के मन में अगले दिन की संभावनाओं को लेकर कई तरह के भाव और विचार उठ रहे होंगे। आपके जीवन में भी कई ऐसे क्षण आए होंगे जब आपने मानसिक ऊहापोह का अनुभव किया होगा। ऐसी किसी घटना के विषय में अपनी डायरी में लिखिए, जैसे — परीक्षा के एक दिन पूर्व की स्थिति या नौवीं कक्षा में पहला दिन आदि।
प्रिय डायरी,आज परीक्षा से एक दिन पहले मेरे मन में न जाने कितने विचार आ-जा रहे हैं। कभी लगता है सब याद है, कभी लगता है कुछ भी नहीं आता।जैसे महारानी लक्ष्मीबाई युद्ध की पूर्व-रात्रि में अपनी प्रजा और झाँसी के बारे में सोचती रही होंगी — जीत होगी या हार? उसी तरह मेरे मन में भी ऊहापोह है।
पर फिर मैंने सोचा — रानी ने हार नहीं मानी, मैं भी नहीं मानूँगा/मानूँगी। जो पढ़ा है वह काफी है। कल पूरे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा दूँगा/दूँगी।
रात के 10 बज रहे हैं। अब सोना ज़रूरी है ताकि कल तरोताज़ा मन से परीक्षा दे सकूँ।
तुम्हारा/तुम्हारी,
________________________
अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न
8 प्रश्न
🔥 बार-बार पूछा गया
‘झाँसी की रानी’ कविता का प्रतिपाद्य (मूल भाव) अपने शब्दों में लिखिए।
‘झाँसी की रानी’ सुभद्रा कुमारी चौहान की एक अत्यंत प्रसिद्ध कविता है जो 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि पर लिखी गई है।
- इस कविता का मूल भाव रानी लक्ष्मीबाई की वीरता, बलिदान और देशभक्ति को श्रद्धांजलि देना है।
- कविता में लक्ष्मीबाई के बचपन से लेकर वीरगति प्राप्त करने तक की कहानी क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत की गई है।
- यह कविता पाठकों में जोश, साहस और राष्ट्रप्रेम की भावना जगाती है।
- कविता अंग्रेज़ों के अत्याचार और भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को अमर बनाती है।
- इसकी कथात्मक शैली और गेयता इसे और अधिक प्रभावशाली बनाती है।
✅ निश्चित प्रश्न
“लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज्य झाँसी आया” — इस पंक्ति में किस नीति का उल्लेख है?
इस पंक्ति में ‘व्यपगत नीति’ (Doctrine of Lapse / हड़प नीति) का उल्लेख है जिसे लॉर्ड डलहौजी ने लागू किया था।
इस नीति के अनुसार यदि किसी भारतीय राज्य का शासक निःसंतान मर जाए तो ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी उस राज्य को अपने साम्राज्य में मिला लेती थी। गोद लिए हुए पुत्र को उत्तराधिकारी नहीं माना जाता था। इसी नीति से झाँसी, नागपुर, सतारा आदि रियासतें अंग्रेज़ों ने हड़प लीं।
🔥 बार-बार पूछा गया
कविता में लक्ष्मीबाई की तुलना किन देवियों से की गई है और क्यों?
देख मराठे पुलकित होते उसकी तलवारों के वार।
कविता में लक्ष्मीबाई की तुलना दो देवियों से की गई है:
लक्ष्मी धन-ऐश्वर्य और सौभाग्य की देवी हैं। लक्ष्मीबाई भी अपने नाम की तरह तेजस्वी और सौभाग्यशाली थीं।
दुर्गा रण-शक्ति और वीरता की देवी हैं। लक्ष्मीबाई ने युद्धभूमि में दुर्गा की तरह शत्रुओं का संहार किया।
कारण: लक्ष्मीबाई में लक्ष्मी की शोभा और दुर्गा की वीरता — दोनों का अद्भुत संगम था। यही कारण है कि कवयित्री ने उन्हें “स्वयं वीरता की अवतार” कहा।
⭐ अति महत्वपूर्ण
कविता के अंत में कवयित्री ने रानी लक्ष्मीबाई को क्या संदेश दिया है?
यह तेरा बलिदान जगावेगा स्वतंत्रता अविनाशी,
तेरा स्मारक तू ही होगी, तू खुद अमिट निशानी थी।
कविता के अंत में कवयित्री ने रानी लक्ष्मीबाई को यह संदेश दिया है:
- भारत के कृतज्ञ नागरिक उन्हें सदा याद रखेंगे।
- उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा — यह स्वतंत्रता की भावना को अविनाशी बनाएगा।
- रानी का स्मारक किसी इमारत की ज़रूरत नहीं, वे स्वयं ही अपना अमिट स्मारक हैं।
- चाहे इतिहास चुप रहे, चाहे गोलों से झाँसी मिटा दी जाए — रानी की स्मृति अजर-अमर रहेगी।

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