घर की याद — प्रश्न-अभ्यास
कवि: भवानीप्रसाद मिश्र | कविता (पद्य) | कक्षा 9 हिंदी
मेरे उत्तर मेरे तर्क (वस्तुनिष्ठ प्रश्न)
8 प्रश्न
मेरी समझ मेरे विचार (लघु/दीर्घ उत्तरीय)
5 प्रश्न
🔥 बार-बार पूछा गया
कवि भवानीप्रसाद मिश्र ने अपनी कविता में पिताजी के व्यक्तित्व के अनेक पहलू उजागर किए हैं जो उन्हें बहुआयामी बनाते हैं:
- शारीरिक दृढ़ता: “वज्र-भुज” — उनकी भुजाएँ वज्र के समान कठोर और शक्तिशाली हैं।
- कोमल हृदय: “नवनीत-सा उर” — हृदय ताजे मक्खन जैसा कोमल और भावुक है।
- ऊर्जावान वृद्धावस्था: बुढ़ापे में भी वे दौड़ लगाते और खिलखिलाते हैं — बुढ़ापा उन्हें छू नहीं सका।
- अनुशासित दिनचर्या: “आज गीता-पाठ करके, दंड दो सौ साठ करके, खूब मुगदर हिला लेकर” — स्वास्थ्य के प्रति सजग।
- निडर और साहसी: “मौत के आगे न हिचकें, शेर के आगे न बिचकें।”
- भावुक पिता: “एक पत्ता टूट जाए, बस कि धारा फूट जाए” — पाँचवें बेटे (कवि) का नाम सुनकर रो पड़ते हैं।
⭐ अति महत्वपूर्ण
कवि भवानीप्रसाद मिश्र जेल की कठिन परिस्थितियों में भी टूटते नहीं, बल्कि धैर्य, साहस और त्याग के साथ खड़े रहते हैं:
- धैर्य: कवि परिवार को दुखी न करने के लिए अपनी पीड़ा छिपाते हैं। वे बादल से कहते हैं कि परिवार को सांत्वना दो, उनकी कठिनाइयाँ मत बताओ।
- साहस: “दुख डटकर ठेलता हूँ, कूदता हूँ, खेलता हूँ” — वे जेल के दुख से न घबराकर उसका साहस से सामना करते हैं।
- त्याग: स्वतंत्रता संग्राम के लिए घर-परिवार का सुख छोड़कर जेल में रहना ही उनका सबसे बड़ा त्याग है।
- देशप्रेम: माँ के शब्दों की कल्पना करते हैं — “पाँव जो पीछे हटाता, कोख को मेरी लजाता” — माँ भी उनके संघर्ष को सही मानती हैं।
🔥 बार-बार पूछा गया
इस कविता में वर्षा केवल एक प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि कवि के अंतर्मन का दर्पण है:
- विरह और याद का प्रतीक: जब-जब पानी गिरता है, कवि को घर याद आ जाता है। वर्षा उनके मन में घर की तस्वीर जगाती है।
- बेचैनी का चित्रण: “काँपते हैं प्राण थर-थर” — लगातार बरसता पानी उनकी आत्मिक बेचैनी और पीड़ा को व्यक्त करता है।
- संवेदना का माध्यम: “अभी पानी थम गया है, मन निहायत नम गया है” — जब वर्षा रुकती है, मन भावनाओं से भीगा हुआ है।
- बादल — संदेशवाहक: कवि सावन के बादल को दूत बनाकर परिवार तक संदेश भेजना चाहते हैं।
- पिता की स्मृति: पिताजी को बरसात बहुत प्रिय थी, वे नंगे बदन बाड़े में बीज बोने जाते थे — यह याद कवि को भावुक कर देती है।
⭐ अति महत्वपूर्ण
माँ की भावनात्मक दृढ़ता दर्शाने वाली पंक्तियाँ:
वह तुम्हारा मन समझकर, और अपनापन समझकर,
गया है सो ठीक ही है यह तुम्हारी लीक ही है,
पाँव जो पीछे हटाता, कोख को मेरी लजाता,
इस तरह होओ न कच्चे, रो पड़ेंगे और बच्चे”
भाव: माँ बच्चों को रोते देख उन्हें समझाती हैं और कहती हैं कि भवानी (कवि) जहाँ है वह ठीक है। जो काम उसने किया वह उसके स्वभाव और मार्ग के अनुकूल है। अगर वह पीछे हटता तो माँ की कोख को लज्जित करता। माँ कमजोर नहीं पड़तीं — वे स्वयं दुखी होते हुए भी परिवार को सँभालती हैं।
⭐ अति महत्वपूर्ण
कविता का सबसे अधिक भावनात्मक और प्रभावी अंश वह है जिसमें कवि सावन के बादल से परिवार के लिए संदेश भेजने का आग्रह करता है:
तुम बरस लो वे न बरसें, पाँचवें को वे न तरसें,
मैं मजे में हूँ सही है, घर नहीं हूँ बस यही है,
किंतु यह बस बड़ा बस है, इसी बस से सब विरस है”
प्रभावी क्यों है:
- इसमें कवि का परिवार के प्रति गहरा प्रेम झलकता है।
- “मैं मजे में हूँ” कहना और साथ ही “यह बस बड़ा बस है” कहना — यह अंतर्द्वंद्व मन को छू जाता है।
- कवि झूठी खुशी दिखाकर परिवार को दुखी नहीं करना चाहते — यह निःस्वार्थ प्रेम अद्भुत है।
- प्रकृति (बादल) को संदेशवाहक बनाना अत्यंत काव्यात्मक और मार्मिक है।
कविता का सौंदर्य (विधा से संवाद)
1 प्रश्न
🔥 बार-बार पूछा गया
बह रही है हवा सर-सर, काँपते हैं प्राण थर-थर”
उपर्युक्त पंक्तियों में रेखांकित शब्दों को ध्यानपूर्वक पढ़िए। यहाँ शब्दों का चयन और संयोजन इस प्रकार किया गया है कि कविता में ध्वन्यात्मकता और नाद सौंदर्य की सृष्टि हुई है। शब्दों के ऐसे प्रयोग से कविता आकर्षक बनती है। कविता में ऐसी अनेक विशेषताएँ हैं जो इसे जीवंत और प्रभावपूर्ण बनाती हैं। ऐसी कुछ विशेषताओं की सूची नीचे दी गई है। कविता से ऐसी विशेषताओं वाली पंक्तियों को ढूँढकर लिखिए।
| विशेषता | कविता से उदाहरण |
|---|---|
| स्मृति और दृश्य बिंब | “खुले सिर नंगे बदन वह, घूमता फिरता मगन वह, बड़े बाड़े में कि जाता, बीज लौकी का लगाता” — पिताजी की बचपन की स्मृति का जीवंत चित्र। |
| लोकभाषा की सहजता | “एक छिन सौ बरस है रे”, “हाय कैसा तरस है रे”, “भुजा भाई प्यार बहिनें” — सहज बोलचाल की भाषा। |
| पंक्तियों का दोहराव | “बहुत पानी गिर रहा है, घर नजर में तिर रहा है” — यह पंक्ति बार-बार दोहराई गई है। “हे सजीले हरे सावन, हे कि मेरे पुण्य पावन” — अंत में फिर आई। |
| आलंकारिक प्रयोग | “वज्र-भुज नवनीत-सा उर” (विरोधाभास + उपमा), “मन कि बड़ का झाड़ जैसे” (उपमा), “देह एक पहाड़ जैसे” (उपमा)। |
| प्राकृतिक दृश्यों और भावों का संयोजन | “लग रहे हैं वे मुझे यों, माँ कि आँगन लीप दे ज्यों” — बादलों का माँ के समान आँगन लीपना। वर्षा और मन की बेचैनी का संयोजन पूरी कविता में। |
| संबोधनात्मकता | “हे सजीले हरे सावन, हे कि मेरे पुण्य पावन” — बादल को संबोधन। “हवा, उनको धीर देना” — हवा को संबोधन। |
कविता की संरचना
1 प्रश्न
⭐ अति महत्वपूर्ण
‘घर की याद’ कविता प्रकृति के माध्यम से कवि की भावनात्मक यात्रा है। इसके प्रमुख चरण इस प्रकार हैं:
- वर्षा का आरंभ: “आज पानी गिर रहा है, बहुत पानी गिर रहा है” — कविता की शुरुआत रात-भर से गिरते पानी से होती है। बादलों की अँधेरी, प्राणों का घिरना — बेचैनी की शुरुआत।
- घर की याद: लगातार वर्षा देखकर कवि को घर याद आता है — “घर नजर में तिर रहा है।” परिवार के सदस्यों की छवियाँ एक-एक करके मन में आने लगती हैं।
- पिताजी और माँ की स्मृति: पिताजी की वीरता, भावुकता और माँ की ममता और दृढ़ता का चित्रण।
- भाई-बहनों की याद और परिवार का दुख: पाँचवें भाई (कवि) को याद करके परिवार का रोना-बिलखना कवि के मन में आता है।
- वर्षा का थमना और मन का भीगना: “अभी पानी थम गया है, मन निहायत नम गया है।” बादल क्षितिज पर जमे हैं — माँ के आँगन लीपने जैसे।
- बादल को संदेशवाहक बनाना: “हे सजीले हरे सावन” — कवि बादल से परिवार को सांत्वना देने और झूठा आश्वासन देने का आग्रह करता है।
विषयों से संवाद
4 प्रश्न
⭐ अति महत्वपूर्ण
साथ रहने से भावनात्मक सुरक्षा, बड़ों का मार्गदर्शन, बच्चों का सर्वांगीण विकास, एकता की भावना, मुसीबत में सहारा।
कभी-कभी व्यक्तिगत स्वतंत्रता कम होती है, निर्णय लेने में मतभेद, गोपनीयता का अभाव।
व्यक्तिगत स्वतंत्रता, स्वयं निर्णय लेने की क्षमता, शांत वातावरण, आर्थिक नियोजन आसान।
बच्चों को बड़ों का सान्निध्य नहीं, अकेलेपन की समस्या, संकट में कोई सहारा नहीं, रिश्ते कमजोर पड़ते हैं।
कविता में ‘घर’ केवल एक मकान नहीं, बल्कि परिवार के प्रेम, ममता और संबंधों का केंद्र है। यही कारण है कि कवि जेल में बंद होते हुए भी “घर नजर में तिर रहा है” लिखते हैं।
⭐ अति महत्वपूर्ण
खेतों में जलजमाव, फसलें नष्ट होना, कच्चे मकानों का गिरना, रास्ते बंद होना, पशुओं को नुकसान, बाढ़ की स्थिति।
जलभराव और जाम, सीवर उफनना, घरों में पानी घुसना, यातायात ठप होना, बिजली-पानी सेवाएँ प्रभावित होना।
लगातार वर्षा दोनों क्षेत्रों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर देती है और स्वास्थ्य समस्याएँ जैसे डेंगू, मलेरिया भी बढ़ जाती हैं।
🆕 नया पैटर्न
| पुराने संचार माध्यम | नए संचार माध्यम |
|---|---|
| पत्र (डाक) | मोबाइल, स्मार्टफोन |
| तार (टेलीग्राम) | इंटरनेट / ईमेल |
| दूत / संदेशवाहक | सोशल मीडिया (WhatsApp, Instagram) |
| प्राकृतिक उपादान (कवि-कल्पना) | वीडियो कॉल / वॉयस मैसेज |
पुराने माध्यम धीमे थे पर भावनाओं से भरे होते थे। कवि के समय (1942) में संचार के साधन सीमित थे, इसलिए उन्होंने बादल को कल्पनाशील संदेशवाहक बनाया। आज संचार तत्काल है पर कभी-कभी भावनाओं की गहराई कम हो गई है।
🔥 बार-बार पूछा गया
भारत का स्वतंत्रता संग्राम
भारत का स्वतंत्रता संग्राम विश्व इतिहास की एक अद्भुत घटना है जिसमें करोड़ों लोगों ने बिना हिंसा के एक शक्तिशाली साम्राज्य से लोहा लिया। लगभग 200 वर्षों की ब्रिटिश दासता के बाद 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ।
- 1857 का विद्रोह: प्रथम स्वतंत्रता संग्राम, जिसमें मंगल पांडे, रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे जैसे वीरों ने अंग्रेजों से लोहा लिया।
- महात्मा गांधी का नेतृत्व: सत्याग्रह, असहयोग आंदोलन (1920), सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930) और भारत छोड़ो आंदोलन (1942)।
- 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन: “करो या मरो” का नारा। भवानीप्रसाद मिश्र ने भी इसमें भाग लिया और कारावास में ‘घर की याद’ लिखी।
- अन्य स्वतंत्रता सेनानी: भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस, बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, सरदार पटेल, जवाहरलाल नेहरू।
इस संग्राम में लेखकों, कवियों और कलाकारों ने भी अपनी लेखनी से लोगों को जागृत किया। भवानीप्रसाद मिश्र की ‘घर की याद’ इसी का प्रमाण है।
सृजन (रचनात्मक लेखन)
3 प्रश्न
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होशंगाबाद,
दिनांक: ________
मेरे प्रिय भवानी,
ईश्वर तुम्हें सदा खुश रखे। तुम्हारी माँ का आशीर्वाद है।
बेटा, तुम्हारी बहुत याद आती है। घर में सब ठीक हैं। तुम्हारे पिताजी हर रोज गीता-पाठ करते हैं और तुम्हारी राह देखते हैं। तुम्हारे भाई-बहन सब मिलकर घर चला रहे हैं।
बेटा, जो काम तुमने किया वह सही है। माँ की कोख को तुमने कभी नहीं लजाया। देश के लिए जो त्याग तुमने किया, उस पर मुझे गर्व है। बस खाना ठीक से खाना, अपना ध्यान रखना।
हम सब तुम्हारी प्रतीक्षा में हैं। शीघ्र लौटकर आओ।
तुम्हारी माँ
⭐ अति महत्वपूर्ण
माँ और पिताजी के बीच संवाद
(पिताजी गीता-पाठ करके बाहर आए। आँखें भरी हुई हैं।)
पिताजी: (भारी आवाज में) आज बहुत याद आ रही है भवानी की। पाँचवाँ मेरा सोने पर सुहागा था… अब उसकी याद सताती है।
माँ: (आँखें पोंछते हुए) आप रोइए मत। भवानी ने जो किया, ठीक किया। वह तुम्हारा बेटा है — डरने वाला नहीं।
पिताजी: लेकिन जेल में होगा, ठीक से खाना मिलता होगा या नहीं?
माँ: वह अच्छा है, मजे में है। आप घबराइए नहीं। उसे देश के लिए यह करना था। पाँव जो पीछे हटाता, तो मेरी कोख को लजाता।
पिताजी: हाँ, तुम सही कहती हो। पर मन कहाँ मानता है।
माँ: बच्चों को देखिए — वे भी रो रहे हैं। आप उन्हें समझाइए। भवानी को हमारी जरूरत नहीं, उसे हमारे धैर्य की जरूरत है।
🆕 नया पैटर्न
यदि मुझे किसी प्राकृतिक उपादान को संदेशवाहक बनाना हो, तो मैं हवा (पवन) को चुनूँगा/चुनूँगी।
- कारण 1 — सर्वव्यापी: हवा हर जगह पहुँचती है — पहाड़ हो, नदी हो, जंगल हो या मैदान — कोई सीमा नहीं।
- कारण 2 — तत्काल: हवा बादल से भी तेज चलती है, इसलिए संदेश जल्दी पहुँचेगा।
- कारण 3 — अदृश्य पर अनुभव योग्य: हवा दिखती नहीं पर महसूस होती है — जैसे अपनों का प्रेम।
- संदेश: “हे पवन, जाकर मेरे मित्र से कहो कि उसकी याद आती है और वह जल्दी मिलने आए।”
व्याकरण की बात (भाषा से संवाद)
2 प्रश्न
⭐ अति महत्वपूर्ण
• एक छिन सौ बरस है रे
• तुझे बतलाता कि बेला/ने फलानी फूल झेला
• और भौजी और सरला, सहज पानी सहज तरला
• मन कि बड़ का झाड़ जैसे
| शब्द | अर्थ | नया वाक्य |
|---|---|---|
| छिन | क्षण, पल | उसके जाने के बाद एक-एक छिन पहाड़ जैसा लगता है। |
| फलानी | अमुक (कोई निश्चित वस्तु या व्यक्ति जिसका नाम याद न हो) | उसने फलानी दुकान से किताब खरीदी। |
| तरला | तरल (पानी जैसा बहने वाला, द्रवित हृदय वाली) | उसका मन तरला हो गया जब उसने दुखद समाचार सुना। |
| बड़ | बरगद का वृक्ष (वट वृक्ष) | गाँव के चौराहे पर एक विशाल बड़ का पेड़ है। |
⭐ अति महत्वपूर्ण
(क) “बहुत पानी गिर रहा है” — ‘पानी’ शब्द है — संज्ञा; ‘बहुत’ शब्द है — विशेषण; ‘गिर रहा है’ है — क्रिया
(ख) “पिताजी जिनको बुढ़ापा, एक क्षण भी नहीं व्यापा” — ‘बुढ़ापा’ शब्द है — ? ; ‘व्यापा’ शब्द है — ? ; ‘जिनको’ शब्द है — ?
(ग) “खुले सिर नंगे बदन वह, घूमता फिरता मगन वह” — ‘खुले’ शब्द है — ?; ‘वह’ शब्द है — ?; ‘बदन’ शब्द है — ?; ‘फिरता’ शब्द है — ?
(घ) “एक पत्ता टूट जाए, बस कि धारा फूट जाए” — ‘एक’ शब्द है — ?; ‘फूट जाए’ है — ?; ‘पत्ता’ शब्द है — ?
(ङ) “हे सजीले हरे सावन, हे कि मेरे पुण्य पावन” — ‘सजीले’ शब्द है — ?; ‘मेरे’ शब्द है — ?; ‘सावन’ शब्द है — ?
- ‘बुढ़ापा’ शब्द है — भाववाचक संज्ञा
- ‘व्यापा’ शब्द है — क्रिया (सकर्मक, भूतकाल)
- ‘जिनको’ शब्द है — सर्वनाम (संबंधवाचक)
- ‘खुले’ शब्द है — विशेषण
- ‘वह’ शब्द है — सर्वनाम (अन्य पुरुषवाचक)
- ‘बदन’ शब्द है — जातिवाचक संज्ञा
- ‘फिरता’ शब्द है — क्रिया (वर्तमानकाल)
- ‘एक’ शब्द है — विशेषण (संख्यावाचक)
- ‘फूट जाए’ है — क्रिया (संयुक्त क्रिया, संभावनार्थ)
- ‘पत्ता’ शब्द है — जातिवाचक संज्ञा
- ‘सजीले’ शब्द है — विशेषण (गुणवाचक)
- ‘मेरे’ शब्द है — सर्वनाम (उत्तम पुरुषवाचक / संबंधकारक)
- ‘सावन’ शब्द है — जातिवाचक संज्ञा (ऋतु/मास का नाम)

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