संवादहीन — प्रश्न-अभ्यास
लेखक: शेखर जोशी | विधा: कहानी | गंगा पाठ्यपुस्तक — कक्षा 9
रचना से संवाद — मेरे उत्तर मेरे तर्क
5 प्रश्न
🔥 बार-बार पूछा गया
कहानी में ताई और मिट्ठू का संबंध किस भाव को दर्शाता है?
✅ उत्तर: (ख) ममता और स्नेह
कारण: ताई और मिट्ठू के संबंध में गहरी ममता और स्नेह दिखता है। ताई मिट्ठू के लिए नियमपूर्वक दाल-भात बनाती हैं, हरी मिर्चें और अमरूद लाती हैं। मिट्ठू भी ताई को सुबह जगाता है और “खुश रहो!” कहकर उनका मन प्रसन्न करता है। यह परस्पर ममता और स्नेह का भाव है, न कि केवल परोपकार या करुणा।
⭐ अति महत्वपूर्ण
जगन मास्टर द्वारा मिट्ठू को पिंजरे से बाहर निकालना किस भावना या मूल्य का संकेत देता है?
✅ उत्तर: (घ) करुणा और नैतिकता
कारण: जगन मास्टर स्वतंत्र विचारों के आदमी थे। पिंजरे में बंद मिट्ठू को देखकर उन्हें बेचैनी होती थी। उन्होंने मिट्ठू को खुली हवा देने के लिए पिंजरा खोला — यह उनकी करुणा और नैतिकता का संकेत है। वे चाहते थे कि किसी प्राणी को उनके कारण कष्ट न हो।
✅ निश्चित प्रश्न
मिट्ठू का उड़ जाना किस विचार को प्रस्तुत करता है?
✅ उत्तर: (ग) स्वतंत्रता की चाह
कारण: जब जगन मास्टर ने मिट्ठू को खुला छोड़ा, तो उसने रोशनदान से बाहर की दुनिया देखी और उड़ गया। यह स्वतंत्रता की सहज चाह को दर्शाता है। प्रत्येक प्राणी स्वतंत्र रहना चाहता है — पिंजरे का जीवन कृत्रिम है।
🔥 बार-बार पूछा गया
ताई के जीवन के दुख का मुख्य कारण क्या था?
✅ उत्तर: (ख) परिवार से दूरी और संवाद का अभाव
कारण: ताई के बहू-बेटे शहरों में चले गए थे, बेटियाँ अपनी गृहस्थी में रम गई थीं। बड़े घर में “भाँय-भाँय” थी। उनका मुख्य दुख पारिवारिक संवाद का अभाव और अकेलापन था। आर्थिक कठिनाई उनके लिए कभी समस्या नहीं रही।
⭐ अति महत्वपूर्ण
कहानी में मानव-समाज में व्याप्त किस विसंगति को उजागर किया गया है?
✅ उत्तर: (ग) अकेलापन
कारण: कहानी में शहरों की ओर पलायन के कारण गाँव की वृद्धा ताई के अकेलेपन को उजागर किया गया है। परिवार के बिखरने से बड़ा घर सूना खंडहर बन जाता है। यह आज की सबसे बड़ी सामाजिक विसंगति — वृद्धों का एकाकीपन — है।
मेरी समझ मेरे विचार
7 प्रश्न
🔥 बार-बार पूछा गया
“भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?” ताई इस वाक्य में किस ‘नैया’ की बात कर रही हैं? वे यह बात क्यों कह रही हैं?
यहाँ ‘नैया’ का अर्थ है — जीवन-नौका अर्थात् शेष जीवन। ताई अपने बचे हुए जीवन को नैया (नाव) से उपमा देती हैं और ईश्वर से पूछती हैं कि इसे कैसे पार लगाया जाएगा।
ताई वृद्धावस्था में अकेली हैं। बहू-बेटे शहर चले गए, बेटियाँ अपनी गृहस्थी में हैं। बड़ा घर सूना है, कोई सहारा नहीं। इसीलिए वे निराश होकर कहती हैं — “भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?” — अर्थात् इस अकेले जीवन को कैसे बिताऊँगी।
⭐ अति महत्वपूर्ण
“धीरे-धीरे सब पराए हाथ में चला गया।” इस वाक्य में किस घटना की ओर संकेत किया गया है?
इस वाक्य में ताई के परिवार और संपत्ति के बिखरने की ओर संकेत किया गया है। ताई ने अपने जीवन में अच्छे दिन देखे थे — पूत-परिवार, बहू-बेटियाँ, नौकर-चाकर, गाय-ढोर सब कुछ था।
धीरे-धीरे हुआ यह कि:
- बहू-बेटे गाँव का मोह छोड़कर शहरों के होकर रह गए।
- बेटियाँ विवाह के बाद अपनी गृहस्थी में रम गईं।
- खेती-बाड़ी और कारोबार के बिना नौकर-चाकर भी नहीं रहे।
- धीरे-धीरे सारी संपत्ति और संबंध पराए हाथों में चले गए।
यह वाक्य पलायन और संयुक्त परिवार के टूटने की पीड़ादायक सच्चाई को उजागर करता है।
🔥 बार-बार पूछा गया
“ताई की सारी ममता मिट्ठू पर बरस पड़ी।” क्यों?
ताई बिल्कुल अकेली थीं। परिवार से संवाद टूट गया था, सूना घर उन्हें “काटने को दौड़ता” था। ऐसे में गनपत एक प्यारा-सा पहाड़ी तोता ले आया।
ताई की जो ममता परिवार पर बरसनी चाहिए थी, वह अब किसी के लिए बचाए बैठी थी। मिट्ठू के आते ही वह सारी ममता उस पर बरस पड़ी। ताई ने उसके लिए:
- नियमपूर्वक दाल-भात बनाना शुरू किया।
- वक्त-बेवक्त के लिए रोटी बचाकर रखने लगीं।
- हरी मिर्चें और अमरूद की जानकारी रखने लगीं।
मिट्ठू उनके एकाकी जीवन का एकमात्र सहारा और संवाद का केंद्र बन गया।
⭐ अति महत्वपूर्ण
“अब ताई को इस बात की पूरी जानकारी रहने लगी थी कि किसके खेत में हरी मिर्चें तैयार हो गई हैं और किस पेड़ में फसल के आखिरी अमरूद बचे हैं।” इस वाक्य द्वारा ताई के व्यक्तित्व में आए परिवर्तनों के विषय में क्या-क्या पता चलता है?
इस वाक्य से ताई के व्यक्तित्व में आए निम्नलिखित परिवर्तन पता चलते हैं:
- उद्देश्य की प्राप्ति: मिट्ठू के आने से पहले ताई का जीवन उद्देश्यहीन था। अब उनके जीवन में एक लक्ष्य आ गया — मिट्ठू की देखभाल।
- सामाजिक जुड़ाव: ताई अब गाँव में किसके खेत में क्या है, इसकी जानकारी रखने लगीं। यह उनके फिर से समाज से जुड़ने का संकेत है।
- जिम्मेदारी का भाव: जो ताई स्वयं के लिए चूल्हा नहीं जलाती थीं, वे अब मिट्ठू के लिए पूरी तत्परता से काम करने लगीं।
- प्रेम में बदलाव: उनकी सारी ममता और देखभाल की भावना मिट्ठू पर केंद्रित हो गई।
✅ निश्चित प्रश्न
“जगन मास्टर दूसरे मिजाज के आदमी थे।” जगन मास्टर का व्यक्तित्व कैसा था? कहानी में से उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
जगन मास्टर स्वतंत्र, आदर्शवादी और करुणाशील व्यक्ति थे। उनके व्यक्तित्व की विशेषताएँ:
- आदर्शवादी: उन्होंने अपने कुछ नियम-सिद्धांत बना रखे थे और भरसक कोशिश करते थे कि उनके कारण किसी को कष्ट न पहुँचे।
- स्वतंत्र विचारों के: वे दूसरों की स्वतंत्रता पर बाधा नहीं डालना चाहते थे। पिंजरे में बंद मिट्ठू को देखकर उन्हें बेचैनी होती थी।
- करुणाशील: जब मिट्ठू की यातना उनसे असह्य हो गई, तो उन्होंने कमरा बंद करके पिंजरे का दरवाजा खोल दिया ताकि मिट्ठू खुली हवा में आ सके।
- धुन के पक्के: जब मिट्ठू उड़ गया, तो उन्होंने घंटों पिंजरे के सामने बैठकर नए तोते को पाठ रटाया।
व्यंग्यात्मक रूप से कहानी में कहा गया — “अकेले मिट्ठू क्या उड़े, आदर्शवादी जगन मास्टर के हाथों के सभी तोते उड़ गए।” यह उनके आदर्शवाद और व्यावहारिकता के अंतर को उजागर करता है।
🔥 बार-बार पूछा गया
कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ किसके लिए सबसे अधिक सार्थक प्रतीत होता है — ताई, जगन मास्टर, मिट्ठू या नया तोता? कारण सहित स्पष्ट कीजिए।
कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ ताई के लिए सबसे अधिक सार्थक है।
कारण:
- ताई के परिवार ने उन्हें छोड़ दिया — बहू-बेटे शहर गए, बेटियाँ गृहस्थी में रम गईं। परिवार से संवाद टूट गया।
- मिट्ठू उनके संवाद का एकमात्र माध्यम था। उसके उड़ जाने पर वे पूरी तरह संवादहीन हो गईं।
- जब वे कुंभ-स्नान से लौटीं, तो एवजी मिट्ठू ने कोई हरकत नहीं की — ताई उसे गुहारकर थक गईं। उनका संवाद का साथी छिन गया।
- शीर्षक का गहरा अर्थ यह भी है — आधुनिक समाज में बुजुर्गों का अकेलापन और पीढ़ियों के बीच संवाद का टूटना।
⭐ अति महत्वपूर्ण
“अब ये ही दो प्राणी गाँव के बीच में स्थित बड़े घर के उस सूने खंडहर में एक-दूसरे को सहारा देने के लिए रह गए थे।” ताई के बड़े से घर को सूना खंडहर क्यों कहा गया होगा?
ताई के घर को ‘सूना खंडहर’ इसलिए कहा गया क्योंकि:
- भौतिक दृष्टि से: जब घर में कोई न रहे, देखभाल न हो, तो घर जर्जर होने लगता है — वह खंडहर जैसा लगने लगता है।
- भावनात्मक दृष्टि से: पूरे परिवार से भरे घर में अब केवल एक बुजुर्ग महिला और एक तोता रह गए थे। यह भावनात्मक रूप से सूनापन और खंडहर जैसी स्थिति है।
- सामाजिक दृष्टि से: जहाँ कभी नौकर-चाकर, गाय-ढोर, बहू-बेटियाँ, तीज-त्योहार होते थे — वह घर अब पूरी तरह निर्जन है।
‘सूना खंडहर’ — यह पलायन की त्रासदी और वृद्धों के एकाकीपन का मार्मिक चित्र है।
मेरे प्रश्न — प्रश्न-पहचान
4 समूह
उत्तर: ताई के अकेलेपन को मिट्ठू ने सहारा दिया।
प्रश्न क: ताई के सूनेपन को किसने सहारा दिया था?
प्रश्न ख: ताई को मिट्ठू किसने भेंट में दिया था?
उपयुक्त प्रश्न: प्रश्न क — “ताई के सूनेपन को किसने सहारा दिया था?”
कारण: उत्तर में कहा गया है कि “ताई के अकेलेपन को मिट्ठू ने सहारा दिया” — यह प्रश्न क से सीधे मेल खाता है। प्रश्न ख गलत है क्योंकि ताई को मिट्ठू गनपत लाया था, मिट्ठू ने नहीं।
उत्तर: ताई के लौटने से पहले मिट्ठू उड़ गया था।
प्रश्न क: ताई के लौटने के बाद मिट्ठू कहाँ चला गया था?
प्रश्न ख: ताई के प्रयागराज से लौटने से पहले क्या अनहोनी हुई?
उपयुक्त प्रश्न: प्रश्न ख — “ताई के प्रयागराज से लौटने से पहले क्या अनहोनी हुई?”
कारण: उत्तर में ‘लौटने से पहले’ और ‘उड़ना’ दोनों बातें हैं, जो प्रश्न ख से मेल खाती हैं। प्रश्न क गलत है क्योंकि मिट्ठू ताई के लौटने के पहले उड़ा था, बाद में नहीं।
उत्तर: गाँववालों को डर था कि ताई को सच्चाई जानकर सदमा लगेगा।
प्रश्न क: गाँववाले ताई की वापसी से क्यों चिंतित थे?
प्रश्न ख: गाँववाले मिट्ठू के उड़ने से खुश क्यों थे?
उपयुक्त प्रश्न: प्रश्न क — “गाँववाले ताई की वापसी से क्यों चिंतित थे?”
कारण: उत्तर में चिंता और सदमे की बात है जो ताई की वापसी से जुड़ी है। प्रश्न ख गलत है — मिट्ठू के उड़ने से गाँववाले खुश नहीं, बल्कि चिंतित थे।
उत्तर: कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ जीवन के मौन का प्रतीक है।
प्रश्न क: कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ क्यों उपयुक्त नहीं है?
प्रश्न ख: शीर्षक ‘संवादहीन’ का क्या भावार्थ है?
उपयुक्त प्रश्न: प्रश्न ख — “शीर्षक ‘संवादहीन’ का क्या भावार्थ है?”
कारण: उत्तर शीर्षक के भावार्थ को स्पष्ट करता है (जीवन का मौन)। प्रश्न क गलत है क्योंकि उत्तर शीर्षक की सार्थकता बताता है, न कि अनुपयुक्तता।
मेरे अनुभव मेरे विचार
5 प्रश्न
🆕 नया पैटर्न
“कभी-कभार गाँव में थोड़ी देर के लिए भी न्यौते-बुलावे में जातीं, तो दस बार खिड़की-दरवाजों की साँकलें टोहकर देखतीं…” ताई की तरह जब आप अपने घर या परिवार से दूर होते हैं, तो किसी वस्तु या व्यक्ति की चिंता आपको भीतर से कैसे परेशान करती है?
जब हम घर से बाहर होते हैं, तो हमारे मन में उन चीजों और व्यक्तियों की चिंता होती है जो हमें प्रिय होते हैं — जैसे छोटा भाई-बहन, पालतू जानवर, या घर की चाबी। (यहाँ छात्र अपना व्यक्तिगत अनुभव लिखें।)
जैसे — जब मैं स्कूल की यात्रा पर जाता हूँ तो मुझे अपने पालतू जानवर की चिंता होती है। उसे खाना-पानी मिला या नहीं — यह विचार बार-बार आता है। ताई को भी यही होता था — मिट्ठू उनके लिए परिवार था, इसीलिए वे दस बार साँकल टोहती थीं।
⭐ अति महत्वपूर्ण
“आखिर वह भी तो बोलता-बतियाता प्राणी है।” क्या आप मानते हैं कि पशु-पक्षियों में भी संवेदनाएँ होती हैं? अपने किसी अनुभव का वर्णन करते हुए लिखिए।
हाँ, मैं मानता/मानती हूँ कि पशु-पक्षियों में भी संवेदनाएँ होती हैं। वे खुशी, दुख, प्रेम और भय सभी महसूस करते हैं।
(यहाँ छात्र अपना व्यक्तिगत अनुभव लिखें। उदाहरण के रूप में:) एक बार जब मेरे घर की गाय का बछड़ा बीमार पड़ा, तो वह गाय दिन भर उसके पास खड़ी रही और खाना-पानी छोड़ दिया। उसकी आँखों में जो व्याकुलता थी, वह स्पष्ट रूप से उसकी संवेदना दर्शाती थी। पशु-पक्षी भी प्रेम और पीड़ा को उतनी ही गहराई से महसूस करते हैं।
🔥 बार-बार पूछा गया
“गनपत ने ही एक सुझाव दिया कि मिट्ठू की ही सूरत-शक्ल का एक दूसरा तोता ले आया जाए ताकि ताई को भ्रम में रखा जा सके…” ताई को भ्रम में रखना उचित था या नहीं? तर्क सहित अपने विचार लिखिए।
यह एक विचारणीय प्रश्न है जिसके दो पक्ष हैं:
पक्ष में (उचित था): ताई वृद्धा थीं, तेज स्वभाव की थीं। सच जानकर उन्हें गहरा धक्का लग सकता था जो उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता। गाँव वालों की नीयत ताई की रक्षा करना था।
विपक्ष में (अनुचित था): भ्रम में रखना झूठ पर आधारित है। ताई को सच बताकर उनकी मनोदशा को समझना चाहिए था। असली मिट्ठू और एवजी मिट्ठू में जो अंतर था, वह ताई ने स्वयं महसूस किया — इसलिए भ्रम टिकाऊ नहीं था।
मेरे विचार में: ताई को धीरे-धीरे सच बताना और नया तोता उनका परिचित बनाना अधिक उचित होता।
🆕 नया पैटर्न
“ताई सोच रही थीं कि उन्हें देखते ही मिट्ठू ‘राम राम सीताराम’ की रट लगाकर आसमान सिर पर उठा लेगा।” क्या कभी ऐसा हुआ कि आपने सोचा कुछ और, हुआ कुछ और? उस अनुभव को लिखिए।
हाँ, ऐसा अक्सर होता है जब हमारी अपेक्षाएँ और वास्तविकता में अंतर हो जाता है। (यहाँ छात्र अपना व्यक्तिगत अनुभव लिखें। उदाहरण:)
एक बार मुझे लगा कि परीक्षा में बहुत कठिन प्रश्न आएँगे, परंतु प्रश्न-पत्र बहुत सरल था। इसी प्रकार ताई को लगा था कि मिट्ठू उत्साह से उनका स्वागत करेगा, किंतु एवजी मिट्ठू ने कोई हरकत नहीं की। ऐसे क्षणों में निराशा और अचरज दोनों होते हैं।
⭐ अति महत्वपूर्ण
“मिट्ठू अब पिंजरे में रहने के इतने आदी हो चुके थे कि उन्होंने बाहर आने की कोई इच्छा नहीं प्रकट की।” क्या प्राणी सचमुच पिंजरे में रहने के आदी हो सकते हैं? अपने उत्तर के समर्थन में अपने आस-पास से उदाहरण भी दीजिए।
हाँ, प्राणी पिंजरे में रहने के आदी हो सकते हैं। यह मनोवैज्ञानिक सत्य है। दीर्घकाल तक बंधन में रहने पर स्वतंत्रता का भय भी उत्पन्न हो जाता है।
उदाहरण: चिड़ियाघर में लंबे समय से रहने वाले जानवरों को यदि जंगल में छोड़ दिया जाए, तो वे वापस पिंजरे की ओर आने की कोशिश करते हैं। इसी प्रकार घर में पले कुत्ते या बिल्ली खुले में जाने से हिचकते हैं।
यह मनुष्यों पर भी लागू होता है — जो लोग वर्षों तक एक ही जगह रहते हैं, वे परिवर्तन से डरते हैं। ‘आदत’ ही एक प्रकार का अदृश्य पिंजरा बन जाती है।
विधा से संवाद — कहानी का सौंदर्य
सारणी + कहानी का अंत
| विशेष बिंदु | अर्थ | पुस्तक में दिया उदाहरण | ✅ अतिरिक्त उदाहरण (कहानी से) |
|---|---|---|---|
| चित्रात्मकता (दृश्य बिंब) | शब्दों के माध्यम से पाठक के मन में स्पष्ट और जीवंत चित्र बनाना। | “मिट्ठू एक डाल से दूसरी डाल पर, एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर अपने पंख तौलने में मशगूल रहे।” | “ताई अचकचाकर उठ बैठतीं। लाड़ से मिट्ठू को निहारकर आशीष देतीं।” |
| संवादात्मकता | कथ्य को आगे बढ़ाने के लिए पात्रों के विचार, भाव आदि व्यक्त करने के लिए बातचीत और संवादों का प्रयोग। | “राम-राम कहो, सीताराम कहो।” | “मिट्ठू! अब कैसे कटेगी?” — “कटेगी! कटेगी!! कटेगी!!!” |
| पुनरुक्ति | शब्दों की बार-बार पुनरावृत्ति से भाव की तीव्रता। | “कटेगी! कटेगी!! कटेगी!!!” | “मर जा! मर जा! मर जा!” — “खुश रहो! खुश रहो!!” |
| अतिशयोक्ति | किसी पात्र, घटना या वस्तु का वर्णन इतना बढ़ाकर करना कि वह असंभव लगे। | “रेलगाड़ी में उसका भी टिकट लगेगा, आखिर वह भी तो बोलता-बतियाता प्राणी है।” | “ताई के सीताराम कहते ही आसमान सिर पर उठा लेगा।” |
| लोकधर्मी भाषा | ग्रामीण, सहज, बोल-चाल की भाषा। | “भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?” | “सूने घर की भाँय-भाँय जैसे उन्हें काटने को दौड़ती थी।” |
| प्रश्नोत्तर शैली | पात्रों या लेखक द्वारा प्रश्न पूछना। | “मिट्ठू! अब कैसे कटेगी?” | “भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?” |
🔥 बार-बार पूछा गया
आपके अनुसार ‘संवादहीन’ कहानी के अंत को किस श्रेणी में रखा जा सकता है? अपने उत्तर के कारण भी बताइए। आप इस कहानी का नया अंत किस प्रकार करना चाहेंगे?
श्रेणी: मुक्त अंत + दुखांत
‘संवादहीन’ कहानी का अंत मुख्यतः मुक्त अंत है क्योंकि कहानी स्पष्ट रूप से समाप्त नहीं होती। पाठक को सोचने के लिए छोड़ दिया जाता है —
यह दुखांत भी है क्योंकि ताई का संवाद का एकमात्र सहारा उनसे छिन गया और एवजी तोता उस रिक्तता को नहीं भर सका।
नया अंत: यदि मैं कहानी का नया अंत लिखूँ तो — एक दिन ताई की गुहार सुनकर मिट्ठू वापस आ जाता है और ताई के कंधे पर बैठकर “राम राम सीताराम” बोलता है। ताई की आँखों में आँसू आ जाते हैं — यह सुखांत होगा जो ताई के एकाकी जीवन में थोड़ी खुशी लाएगा।
विषयों से संवाद
2 प्रश्न
🆕 नया पैटर्न
“अंत में जगन मास्टर की घरवाली ने उनकी चिंता दूर कर दी।” — कहानी में रेखांकित पात्र का नाम नहीं दिया गया है। इसे कहीं ‘मास्टराइन’, तो कहीं ‘जगन मास्टर की घरवाली’ कहा गया है। आपके अनुसार कहानी में ऐसा क्यों किया गया होगा?
लेखक ने ‘मास्टराइन’ को नाम न देकर एक विचारणीय संकेत दिया है। इसके कारण हो सकते हैं:
- सामाजिक यथार्थ: ग्रामीण समाज में स्त्रियों को अक्सर उनके पति के नाम से जाना जाता है। यह परंपरा को दर्शाता है।
- प्रतीकात्मकता: ‘मास्टराइन’ एक विशेष व्यक्ति नहीं, बल्कि उस समाज की हर उस स्त्री का प्रतीक है जो बिना सोचे-समझे दूसरों का भार उठा लेती है।
- आलोचनात्मक दृष्टि: लेखक उसकी बुद्धि पर हल्का व्यंग्य भी करते हैं — “जगन मास्टर अपनी पत्नी की बुद्धि पर तरस खाते।” नाम न देना इस व्यंग्य को तीखा बनाता है।
⭐ अति महत्वपूर्ण
“गाँव के कई लोग कुंभ-स्नान के लिए प्रयागराज जा रहे थे” — (क) ‘कुंभ-स्नान’ एक सुप्रसिद्ध आयोजन है जिसमें करोड़ों लोग भाग लेते हैं। पता लगाइए — इसका आयोजन क्यों किया जाता है? पिछली बार इसका आयोजन कब और कहाँ हुआ था? अगला आयोजन कब और कहाँ होगा?
(ख) मान लीजिए कि ताई आपके मोहल्ले में रहती हैं। वे कुंभ-स्नान के लिए कैसे गई होंगी? उनकी यात्रा का वर्णन लिखिए।
(ग) आपके गाँव या नगर में कौन-सा मेला, उत्सव या पर्व मनाया जाता है? वहाँ का दृश्य, भीड़, श्रद्धा और वातावरण का वर्णन कीजिए।
(क) कुंभ-स्नान के बारे में जानकारी:
- आयोजन का कारण: धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवताओं और असुरों के बीच अमृत के लिए संघर्ष हुआ था। जिन चार स्थानों पर अमृत की बूँदें गिरीं — प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक — वहाँ कुंभ आयोजित होता है। गंगा में स्नान करने से पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष मिलता है — ऐसी श्रद्धा है।
- पिछला आयोजन: महाकुंभ 2025 — प्रयागराज में, जनवरी-फरवरी 2025 में आयोजित हुआ।
- अगला आयोजन: अर्धकुंभ या कुंभ — 2027 में प्रयागराज / हरिद्वार में होगा (प्रत्येक 6 वर्ष में अर्धकुंभ, 12 वर्ष में पूर्ण कुंभ)।
(ख) ताई की यात्रा का वर्णन:
ताई गाँव के साथियों के साथ नजदीकी रेलवे स्टेशन तक बैलगाड़ी या ऑटोरिक्शा से गईं। उन्होंने सामान में थोड़े कपड़े, पूजा की सामग्री और सूखा खाना रखा। ट्रेन में भजन-कीर्तन होता रहा। प्रयागराज उतरकर संगम की ओर चलते हुए उन्होंने “हर हर गंगे” के जयघोष के बीच पवित्र जल में डुबकी लगाई।
(ग) मेले का वर्णन: (छात्र अपने स्थानीय मेले/उत्सव का वर्णन पाँच ज्ञानेंद्रियों — देखना, सुनना, सूँघना, छूना, स्वाद — के आधार पर लिखें।)
उदाहरण — दीपावली पर हमारे नगर में मेला लगता है। रंग-बिरंगी दुकानें, फुलझड़ियों की रोशनी, मिठाइयों की महक, बच्चों की किलकारियाँ और पटाखों की आवाज़ — यह सब मिलकर एक अद्भुत वातावरण बनाते हैं।
सृजन — रचनात्मक लेखन
4 प्रश्न
⭐ अति महत्वपूर्ण
“बहू-बेटे गाँव का मोह छोड़कर शहरों के होकर रह गए।” — अपना घर छोड़कर नए स्थान पर बस जाना आसान नहीं होता है। ताई के बहू-बेटों ने गाँव क्यों छोड़ा होगा? गाँव छोड़ते समय क्या-क्या सोचा होगा? अपना घर छोड़ने के लिए स्वयं को कैसे तैयार किया होगा?
गाँव छोड़ने के कारण:
- शहर में रोजगार और बेहतर आजीविका की तलाश।
- बच्चों की शिक्षा के लिए अच्छे स्कूलों की आवश्यकता।
- गाँव में खेती-बाड़ी से आय कम होना।
- शहरी सुविधाओं और आधुनिक जीवनशैली का आकर्षण।
गाँव छोड़ते समय के विचार: “माँ को छोड़ना ठीक नहीं, पर क्या करें — बच्चों के भविष्य के लिए जाना पड़ेगा। माँ यहाँ गाँव में सुरक्षित हैं, हम कमाकर भेजते रहेंगे।”
स्वयं को तैयार करना: मन में यह विश्वास जमाया होगा कि जाना जरूरी है, लेकिन जल्द लौटेंगे। धीरे-धीरे शहर उनका घर बन गया और लौटने की योजनाएँ अधूरी रह गईं।
🔥 बार-बार पूछा गया
“वहाँ बैठे एवजी मिट्ठू ने उन्हें देखकर कोई हरकत नहीं की” — ताई सोच रही थीं कि मिट्ठू ‘राम राम सीताराम’ कहेगा, लेकिन एवजी मिट्ठू चुप था। कल्पना कीजिए कि एक दिन असली मिट्ठू वापस आ गया। मिट्ठू ने नए तोते को देखकर क्या कहा होगा? आगे की कहानी लिखिए। (संकेत — प्रारंभ कीजिए — “एक दिन आकाश में वही हरे पंख चमके…”)
एक दिन आकाश में वही हरे पंख चमके। मिट्ठू उड़ता-उड़ता ताई के आँगन में उतर आया। उसने देखा — पिंजरे में एक और तोता बैठा है। मिट्ठू ने चकित होकर कहा — “मिट्ठू राम राम! मिट्ठू राम राम!”
एवजी तोता चुपचाप देखता रहा। ताई उस दिन घर में थीं। मिट्ठू की आवाज सुनकर उनके पैर थम गए। वे दौड़ती हुई आईं — “मिट्ठू! मेरा मिट्ठू!” ताई की आँखों से आँसू बह चले।
मिट्ठू उड़कर ताई के कंधे पर बैठ गया और बोला — “सीताराम! सीताराम!” ताई ने उसे लाड़ से निहारा — “जीते रहो बेटा, जुग-जुग जिओ!”
उस दिन से ताई के घर में फिर रौनक आ गई और बड़ा घर फिर से गुलजार हो उठा।
🆕 नया पैटर्न
“अब ये ही दो प्राणी गाँव के बीच में स्थित बड़े घर के उस सूने खंडहर में एक-दूसरे को सहारा देने के लिए रह गए थे।” — आज घर जाकर अपने किसी बड़े या बुजुर्ग से बात कीजिए। उनसे पूछिए — “आप जब मेरी आयु के थे, तब समय कैसे बिताया करते थे; क्या-क्या बातें या काम करते थे? आदि।” उनके कहे हुए अनुभव अपनी पुस्तिका में लिखिए।
(यह एक गतिविधि-आधारित प्रश्न है। छात्र अपने दादा-दादी या नाना-नानी से बात करके उनके बचपन के अनुभव लिखें।)
नमूना उत्तर: मैंने अपनी दादी से पूछा — वे बताती हैं कि उनके समय में खेलने के लिए गुड्डे-गुड़िया, लट्टू और गिल्ली-डंडा था। घर पर ही सब काम होते थे — चक्की पर आटा पीसना, गाय दोहना। पाठशाला दूर होती थी — पैदल जाना पड़ता था। पड़ोसियों से बहुत मेल-जोल था। यह सब सुनकर लगा कि उनका जीवन कठिन था पर मिलनसार था।
🆕 नया पैटर्न
“मिट्ठू ने फिर तिरछी आँख से रोशनदान के बाहर की दुनिया की ओर देखा और ये गए! वो गए!!” — मान लीजिए कि जगन मास्टर ने मिट्ठू की खोज के लिए एक विज्ञापन प्रकाशित किया है। अपनी कल्पना से वह विज्ञापन बनाइए। (संकेत — आप समाचार पत्रों में प्रकाशित खोया-पाया या तलाश संबंधी विज्ञापन देख सकते हैं।)
🦜 खोया-पाया — तोता गुम हो गया
मेरा हरे रंग का पहाड़ी तोता (नाम: मिट्ठू) दिनांक …………… को घर से उड़ गया।
पहचान: हरे पंख, लाल चोंच, गले पर लाल धारी। “राम-राम कहो, सीताराम कहो”, “हर हर गंगे” और “खुश रहो” बोलता है।
पिंजरे का रंग: लकड़ी का भूरा पिंजरा।
जो भी मिट्ठू को सकुशल लौटाएगा, उसे ₹500 का पुरस्कार दिया जाएगा।
📞 संपर्क करें: जगन मास्टर, मकान नं. ……., ग्राम ………
“मिट्ठू को देखे तो तुरंत सूचित करें — ताई बेसब्री से प्रतीक्षा में हैं।”
भाषा से संवाद — व्याकरण की बात
5 अभ्यास
‘मिट्ठू’ शब्द का अर्थ होता है — मधुरभाषी, मीठा बोलने वाला या तोता। इसका प्रयोग मुहावरे में भी होता है — ‘अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना’ जिसका अर्थ है ‘अपनी प्रशंसा आप करना’। आप कुछ ऐसे मुहावरों की सूची बनाइए जिनमें किसी अन्य जीव-जंतु का उल्लेख किया गया हो, जैसे नीचे लिखे इस वाक्य में है — “अकेले मिट्ठू क्या उड़े, आदर्शवादी जगन मास्टर के हाथों के सभी तोते उड़ गए।”
| मुहावरा | अर्थ | वाक्य-प्रयोग |
|---|---|---|
| हाथी के दाँत दिखाने के और, खाने के और | ऊपर कुछ और, भीतर कुछ और | उसकी बातों पर मत जाओ — हाथी के दाँत… |
| बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद | जिसे समझ न हो, उसे अच्छी चीज व्यर्थ | उसे कविता से क्या लेना — बंदर क्या जाने… |
| घोड़े बेचकर सोना | बेफिक्र होकर गहरी नींद लेना | वह परीक्षा के बाद घोड़े बेचकर सो गया। |
| मछली बाजार (होना) | बहुत शोर-गुल होना | उस कमरे में मछली बाजार लगा हुआ था। |
| कुत्ते की मौत मरना | बिना किसी के ध्यान के मरना | — |
| साँप के मुँह में छछूँदर | दुविधा में पड़ना | ताई की स्थिति साँप के मुँह में छछूँदर जैसी थी। |
“जगन मास्टर का ध्यान अचानक ‘गीता-रहस्य’ से हटकर मिट्ठू के पंखों की ‘फड़फड़ाहट‘ पर गया।” — पक्षी के उड़ने पर पंखों के हिलने-डुलने से उत्पन्न ध्वनि ‘फड़फड़ाहट’ कहलाती है। ध्वनियों का आभास कराने वाले कुछ और शब्द लिखिए और उनसे नए वाक्य बनाइए।
| ध्वन्यात्मक शब्द | स्रोत | वाक्य-प्रयोग |
|---|---|---|
| फड़फड़ाहट | पंखों की हलचल | मिट्ठू के पंखों की फड़फड़ाहट से जगन मास्टर चौंक गए। |
| खड़खड़ाहट | दरवाजा/खिड़की | रात में दरवाजे की खड़खड़ाहट से नींद खुल गई। |
| गड़गड़ाहट | बादल / गाड़ी | आसमान में बादलों की गड़गड़ाहट सुनाई दी। |
| सरसराहट | पत्तियाँ / साँप | झाड़ियों में सरसराहट सुनकर हम रुक गए। |
| कलकलाहट | नदी का जल | कलकलाहट करती नदी बड़ी सुंदर लगती है। |
| चहचहाहट | चिड़ियाँ | सुबह पेड़ों में चिड़ियों की चहचहाहट से नींद टूटती है। |
| भाँय-भाँय | सूने स्थान | सूने घर में भाँय-भाँय होती रहती थी। |
✅ निश्चित प्रश्न
“अपनी अकेली जान के लिए ताई दो जून का एक जून चूल्हा फूँक लेतीं, व्रत-उपवास के बहाने चौका-चूल्हा टाल जातीं।” — उपर्युक्त वाक्य में रेखांकित शब्द शब्द-युग्म हैं। पाठ में से चुनकर निम्नलिखित शब्द-युग्मों का अर्थ स्पष्ट करते हुए वाक्य में प्रयोग कीजिए — वक्त-बेवक्त, नियम-सिद्धांत, शादी-ब्याह, तीज-त्योहार
| शब्द-युग्म | प्रकार | अर्थ | वाक्य-प्रयोग |
|---|---|---|---|
| वक्त-बेवक्त | विपरीतार्थक | उचित और अनुचित समय; कभी भी | मिट्ठू वक्त-बेवक्त ताई से खाने की माँग करता रहता था। |
| नियम-सिद्धांत | समानार्थक | अपने आचरण के नियम और मूल्य | जगन मास्टर ने अपने नियम-सिद्धांत बना रखे थे। |
| शादी-ब्याह | समानार्थक | विवाह-संस्कार से जुड़े उत्सव | गाँव में शादी-ब्याह में पूरा मोहल्ला शामिल होता था। |
| तीज-त्योहार | समानार्थक | विभिन्न पर्व और उत्सव | ताई को याद था कि पहले घर में तीज-त्योहार कितने धूम से मनते थे। |
⭐ अति महत्वपूर्ण
“ढीली धोती को दोनों हाथों से सँभालते हुए वह बाग में एक पेड़ से दूसरे पेड़ के पास, ‘मिट्ठू आ! मिट्ठू आ!!’ पुकारते हुए पसीना-पसीना होते रहे और मिट्ठू एक डाल से दूसरी डाल पर, एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर अपने पंख तौलने में मशगूल रहे।” — उपर्युक्त अनुच्छेद में से खोजिए —
| जो खोजना है | उत्तर |
|---|---|
| ऐसा शब्द जो ‘तंग’ का विपरीतार्थक है | ढीली (ढीली धोती) |
| ऐसा वाक्यांश जो एक मुहावरा है | पंख तौलना (उड़ने की कोशिश करना / क्षमता जाँचना) |
| ऐसा शब्द जो एक क्रिया है | पुकारते (पुकारना क्रिया का वर्तमान कृदंत रूप) |
| ऐसा शब्द जो एक संज्ञा है | धोती (वस्त्र — जातिवाचक संज्ञा) |
| ऐसा शब्द जो एक सर्वनाम है | वह (जगन मास्टर के लिए) |
| ऐसा शब्द जो एक विशेषण है | ढीली (धोती की विशेषता बताता है) |
| ऐसा शब्द जो एक कारक है | में (अधिकरण कारक — “बाग में”) |
| ऐसा शब्द जो एक कर्ता है | वह (जगन मास्टर — क्रिया करने वाला) |
✅ निश्चित प्रश्न
आप जानते ही हैं कि अर्थ के आधार पर वाक्यों के कई भेद होते हैं जैसे — विधानवाचक, निषेधवाचक, प्रश्नवाचक, विस्मयादिबोधक, आज्ञावाचक (विधिवाचक), इच्छावाचक, संदेहवाचक और संकेतवाचक। अब आप भी अपनी पुस्तक में से प्रत्येक प्रकार का एक-एक वाक्य चुनकर लिखिए।
| वाक्य-भेद | पुस्तक से उदाहरण |
|---|---|
| 1. विधानवाचक | जगन मास्टर ने पिंजरे का दरवाजा खोल दिया। |
| 2. निषेधवाचक | मिट्ठू ने कोई हरकत नहीं की। |
| 3. प्रश्नवाचक | मिट्ठू! अब कैसे कटेगी? |
| 4. विस्मयादिबोधक | मिट्ठू ने फिर तिरछी आँख से रोशनदान के बाहर की दुनिया की ओर देखा और ये गए! वो गए!! |
| 5. आज्ञावाचक | राम-राम कहो, सीताराम कहो। |
| 6. इच्छावाचक | जीते रहो बेटा, जुग-जुग जिओ! |
| 7. संदेहवाचक | ताई के सूनेपन का साथी न जाने किन अमराइयों में घूम रहा होगा। |
| 8. संकेतवाचक | जब खेती-बाड़ी नहीं, कारबार नहीं, तो नौकर-चाकर किस दम पर टिकते! |
शेखर जोशी (1932–2022)
अल्मोड़ा, उत्तराखंड
कहानी (यथार्थवादी सामाजिक कहानी)
वृद्धावस्था का एकाकीपन, पलायन, पशु-मानव संबंध, संवाद का अभाव
ताई (वृद्धा), मिट्ठू (तोता), जगन मास्टर, मास्टराइन, गनपत
लोकधर्मी, बोलचाल, संवादात्मक, ध्वन्यात्मक, व्यंग्यात्मक
ताई-मिट्ठू संबंध, जगन मास्टर का व्यक्तित्व, शीर्षक की सार्थकता — ⭐ अति महत्वपूर्ण

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