आखिरी चट्टान तक — प्रश्न-अभ्यास
लेखक: मोहन राकेश | विधा: यात्रा-वृत्तांत | पुस्तक: गंगा (कक्षा 9 हिंदी)
मोहन राकेश (जन्म 1925, अमृतसर) हिंदी के बहुमुखी साहित्यकार थे। उन्होंने कहानी, उपन्यास, नाटक, डायरी और यात्रा-वृत्तांत जैसी अनेक विधाओं में लेखन किया। प्रमुख रचनाएँ: आषाढ़ का एक दिन (नाटक — संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार), आधे-अधूरे, आखिरी चट्टान तक (यात्रा-वृत्तांत)। सन् 1972 में 48 वर्ष की अल्पायु में निधन।
मेरे उत्तर मेरे तर्क — वस्तुनिष्ठ प्रश्न
5 प्रश्न
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?
🔥 बार-बार पूछा गया
लेखक ने सूर्यास्त का मनोहारी दृश्य कहाँ से देखा?
कारण: लेखक सैंड हिल पर रुककर सूर्यास्त देखना चाहता था, लेकिन वहाँ से अरब सागर की तरफ एक और ऊँचा टीला था जो दृश्य को ओट में लिए था। इसलिए लेखक एक के बाद एक कई टीले पार करता हुआ उस ऊँचे टीले पर पहुँचा और वहाँ से पूरे विस्तार की पृष्ठभूमि में सूर्यास्त का मनोहारी दृश्य देखा।
⭐ अति महत्वपूर्ण
“मैं कुछ देर भूला रहा कि मैं मैं ही हूँ।” यह कथन लेखक की किस मनःस्थिति को दर्शाता है?
कारण: तीनों ओर से क्षितिज तक फैले विशाल समुद्र को देखकर लेखक इतना अभिभूत हो गया कि वह अपने अस्तित्व को ही भूल गया। यह विस्मय की वह अवस्था थी जब प्रकृति की भव्यता के सामने व्यक्ति अपनी छोटी पहचान भूल जाता है और दृश्य का एक हिस्सा बन जाता है। यह मौन या भ्रम नहीं, बल्कि गहरा विस्मय था।
⭐ अति महत्वपूर्ण
“मैंने, सिर्फ मैंने उस चोटी को पहली बार सर किया हो।” इस कथन में कौन-सा भाव व्यक्त होता है?
कारण: लेखक ने थकी हुई टाँगों के बावजूद एक के बाद एक कई टीले पार किए और अंत में जब उस ऊँचे टीले से पश्चिमी क्षितिज का खुला विस्तार दिखा, तो उसे अपने प्रयत्न की सार्थकता का गहरा संतोष मिला। “सिर्फ मैंने” — यह कथन किसी पर्वतारोही की उस विजय-भावना जैसा है जब वह अपनी मेहनत और लगन के फल को महसूस करता है।
🔥 बार-बार पूछा गया
“शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति” वाक्य में वर्णन है—
कारण: जब लेखक काली चट्टान पर खड़ा होकर तीनों दिशाओं में क्षितिज तक फैले अरब सागर, हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी को एक साथ देख रहा था, तब उसने उस विशाल जल-विस्तार की असीम शक्ति और उस शक्ति के असीम विस्तार को एक साथ अनुभव किया। यह वाक्य सागर की अपार व्यापकता और उसकी अदम्य शक्ति दोनों को एक साथ प्रकट करता है।
⭐ अति महत्वपूर्ण
लेखक की कन्याकुमारी की यात्रा का वर्णन पढ़कर कहा जा सकता है कि—
कारण: लेखक मोहन राकेश ने इस यात्रा-वृत्तांत में केवल स्थान का भौगोलिक वर्णन नहीं किया, बल्कि समुद्र, लहरों, रेत, सूर्यास्त और सूर्योदय के दृश्यों के साथ-साथ अपने मन में उठने वाले विस्मय, रोमांच, भय, उदासी और आत्मिक खोज को भी जीवंत रूप से प्रकट किया है। यह यात्रा-वृत्तांत बाहरी और आंतरिक — दोनों यात्राओं का समन्वय है।
मेरी समझ मेरे विचार — विचार प्रश्न
5 प्रश्न
नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए—
🔥 बार-बार पूछा गया
यात्रियों का समूह सूर्यास्त का दृश्य देखने के लिए सैंड हिल की ओर बढ़ता जा रहा था लेकिन लेखक सैंड हिल पर पहुँचकर कुछ देर रुकने के बाद दूसरे टीले की ओर बढ़ने लगा। उसके ऐसा करने के पीछे मूल कारण क्या था?
लेखक का स्वभाव दूसरों से अलग और अधिक गहरी अनुभूति की तलाश करने वाला था। सैंड हिल से सामने का पूरा विस्तार तो दिखाई दे रहा था, लेकिन अरब सागर की तरफ एक और ऊँचा टीला था जो उधर के विस्तार को ओट में लिए था।
लेखक चाहता था कि सूर्यास्त का दृश्य पूरे विस्तार की पृष्ठभूमि में देखा जाए — आधे-अधूरे दृश्य से संतुष्ट होना उसकी प्रकृति नहीं थी। इसलिए वह उस ऊँचे टीले की ओर बढ़ा। जब वहाँ पहुँचा तो देखा कि उससे भी ऊँचा एक और टीला है। यही क्रम चलता रहा।
लेखक की यह जिज्ञासा और “अधूरे से संतुष्ट न होने” की प्रवृत्ति ही उसे भीड़ से अलग करती है। यह यात्रा-वृत्तांत का एक प्रमुख भाव है — बाहरी और आंतरिक — दोनों खोज की यात्रा।
⭐ अति महत्वपूर्ण
लेखक ने कन्याकुमारी के स्थानीय लोगों के विषय में क्या-क्या बताया?
लेखक ने कन्याकुमारी के स्थानीय लोगों के बारे में निम्नलिखित बातें बताईं:
- शिक्षित युवाओं की बेकारी: कन्याकुमारी की आठ हजार की आबादी में कम-से-कम चार-पाँच सौ शिक्षित नवयुवक ऐसे थे जो बेकार थे। उनमें से लगभग सौ ग्रेजुएट थे।
- मुख्य धंधा: बेकार पढ़े-लिखे युवकों का मुख्य काम नौकरियों के लिए अर्जियाँ देना और आपस में बहस करना था।
- छोटे-मोटे काम: जो ग्रेजुएट युवक लेखक से मिला, वह वहाँ फोटो-एल्बम बेचता था। दूसरे युवक भी उसी तरह छोटे-मोटे काम करते थे।
- सीपियों का गूदा खाना: उस ग्रेजुएट युवक ने व्यंग्य में कहा — “हम लोग सीपियों का गूदा खाते हैं और दार्शनिक सिद्धांतों पर बहस करते हैं।”
- विवेकानंद चट्टान से प्रेरणा: युवक ने बताया कि उस चट्टान से उन्हें प्रेरणा तो मिलती है।
- स्थानीय युवतियाँ: दो स्थानीय नवयुवतियाँ सरकारी मेहमानों को अपनी टोकरियों से शंख और मालाएँ दिखला रही थीं।
🔥 बार-बार पूछा गया
“अपने प्रयत्न की सार्थकता से संतुष्ट होकर मैं टीले पर बैठ गया” इस पंक्ति में ‘प्रयत्न की सार्थकता’ से क्या अभिप्राय है?
‘प्रयत्न की सार्थकता’ से अभिप्राय है — कठिन परिश्रम का सफल परिणाम मिलने का संतोष।
लेखक ने सूर्यास्त का पूर्ण दृश्य देखने के लिए थकी हुई टाँगों के बावजूद एक के बाद एक कई रेत के टीले पार किए। हर टीले पर पहुँचकर लगता था कि बस एक और टीला पार करने पर पश्चिमी क्षितिज का खुला विस्तार दिखेगा। जब वास्तव में वह विस्तार सामने फैला दिखा और सूर्य पानी से थोड़ा ही ऊपर था — तब उस मेहनत और लगन का फल मिला। यही ‘प्रयत्न की सार्थकता’ है।
यह पंक्ति यह भी बताती है कि लक्ष्य प्राप्ति का आनंद उस लक्ष्य तक पहुँचने के कठिन मार्ग पर निर्भर करता है — जितना कठिन प्रयत्न, उतनी गहरी संतुष्टि।
⭐ अति महत्वपूर्ण
यात्रा-वृत्तांत में आए उन दृश्यों के विषय में लिखिए जिनका अनुभव लेखक के लिए बिल्कुल नया था।
इस यात्रा-वृत्तांत में लेखक को निम्नलिखित ऐसे अनुभव हुए जो उसके लिए बिल्कुल नए थे:
- तीन समुद्रों का संगम-स्थल: अरब सागर, हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी — तीनों के संगम पर खड़े होकर तीनों ओर क्षितिज तक पानी-ही-पानी देखना लेखक के लिए अभूतपूर्व था।
- विवेकानंद चट्टान पर बैठना: नुकीली चट्टानों और ऊँची-ऊँची लहरों के बीच रबड़ के पेड़ के तनों से बनी नाव में बैठकर उस चट्टान तक पहुँचना और वहाँ सूर्योदय देखना — यह रोमांच बिल्कुल नया था।
- रेत के अनगिनत रंग: समुद्र तट की रेत में उतने अनाम और विचित्र रंग — जैसे काली घटा और लाल आँधी का सम्मिश्रण — लेखक ने पहले कभी नहीं देखे थे।
- स्याह पड़ती रात में रेत में भटकने का भय: अँधेरे में रेत के टीलों के बीच भटकने का डर और समुद्र के बढ़ते पानी से दौड़कर बचना — यह जानलेवा रोमांच लेखक के लिए नया था।
- सूर्यास्त के रंगों का तेज़ बदलाव: सोना → लहू → बैंजनी → काला — सूर्य के डूबने पर पानी के रंगों का इतनी तेज़ी से बदलना कि किसी एक क्षण को एक नाम देना असंभव था।
इस प्रश्न में कम-से-कम तीन-चार नए अनुभवों का उल्लेख करें और पाठ से उदाहरण दें।
🔥 बार-बार पूछा गया
यात्रा-वृत्तांत से ऐसे दो अंश चुनकर लिखिए जिससे लेखक की मानसिक दृढ़ता और हार न मानने की प्रवृत्ति का पता चलता है।
लेखक की मानसिक दृढ़ता और हार न मानने की प्रवृत्ति निम्नलिखित दो अंशों से स्पष्ट होती है:
अंश 1 — टीले पार करने की जिद:
यह अंश दर्शाता है कि लेखक का शरीर भले ही थक रहा था, लेकिन उसका मन अडिग था। वह पश्चिमी क्षितिज का खुला विस्तार देखने की अपनी इच्छा को पूरा किए बिना नहीं माना।
अंश 2 — समुद्र तट पर खतरे के बीच निर्णय:
जब अँधेरा हो रहा था और रेत में भटकने का डर था, तब लेखक ने घबराने की बजाय त्वरित और साहसी निर्णय लिया। वह रेत के टीलों के बजाय सीधे समुद्र-तट के रास्ते लौटा — यह मानसिक दृढ़ता का परिचायक है।
दोनों अंशों में पाठ की वास्तविक पंक्तियाँ उद्धृत करना और उनकी व्याख्या करना — दोनों आवश्यक हैं।
व्याकरण की बात — क्रिया-विशेषण की पहचान
3 प्रश्न
जिस प्रकार संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्द ‘विशेषण’ कहलाते हैं, उसी प्रकार क्रिया की विशेषता बताने वाले शब्द ‘क्रिया-विशेषण’ कहलाते हैं।
उदाहरण: “मैं जल्दी-जल्दी चलने लगा।” — यहाँ ‘जल्दी-जल्दी’ क्रिया-विशेषण है जो ‘चलने लगा’ क्रिया की विशेषता बताता है।
| वाक्य | क्रिया-विशेषण | क्रिया, जिसकी विशेषता बताई जा रही है |
|---|---|---|
| मैं जल्दी-जल्दी चलने लगा। | जल्दी-जल्दी | ‘चलने लगा’ क्रिया की विशेषता |
⭐ अति महत्वपूर्ण
नीचे दिए गए वाक्य को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसमें क्रिया-विशेषण पद की पहचान कीजिए तथा दिए गए उदाहरण के अनुसार लिखिए।
वाक्य (क): बल खाती लहरें रास्ते की नुकीली चट्टानों से कटती हुई आती थीं।
| वाक्य | क्रिया-विशेषण | क्रिया, जिसकी विशेषता बताई जा रही है |
|---|---|---|
| बल खाती लहरें रास्ते की नुकीली चट्टानों से कटती हुई आती थीं। | कटती हुई | ‘आती थीं’ क्रिया की विशेषता — किस प्रकार आती थीं, यह बताता है |
यहाँ ‘कटती हुई’ लहरों के आने के ढंग की विशेषता बता रहा है — वे सीधी नहीं, बल्कि नुकीली चट्टानों से कटती हुई आती थीं।
⭐ अति महत्वपूर्ण
नीचे दिए गए वाक्य को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसमें क्रिया-विशेषण पद की पहचान कीजिए तथा दिए गए उदाहरण के अनुसार लिखिए।
वाक्य (ख): यात्रियों की कितनी ही टोलियाँ उस दिशा में जा रही थीं।
| वाक्य | क्रिया-विशेषण | क्रिया, जिसकी विशेषता बताई जा रही है |
|---|---|---|
| यात्रियों की कितनी ही टोलियाँ उस दिशा में जा रही थीं। | उस दिशा में | ‘जा रही थीं’ क्रिया की विशेषता — किस दिशा में जा रही थीं, यह बताता है |
‘उस दिशा में’ स्थानवाचक क्रिया-विशेषण है — यह बताता है कि यात्री किस दिशा में जा रहे थे।
⭐ अति महत्वपूर्ण
नीचे दिए गए वाक्य को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसमें क्रिया-विशेषण पद की पहचान कीजिए तथा दिए गए उदाहरण के अनुसार लिखिए।
वाक्य (ग): मैं देर तक भारत के स्थल-भाग की आखिरी चट्टान को देखता रहा।
| वाक्य | क्रिया-विशेषण | क्रिया, जिसकी विशेषता बताई जा रही है |
|---|---|---|
| मैं देर तक भारत के स्थल-भाग की आखिरी चट्टान को देखता रहा। | देर तक | ‘देखता रहा’ क्रिया की विशेषता — कितनी देर तक देखा, यह बताता है |
‘देर तक’ कालवाचक क्रिया-विशेषण है — यह बताता है कि लेखक कितने समय तक चट्टान को देखता रहा।
• कालवाचक — कब? (देर तक, अभी, जल्दी-जल्दी)
• स्थानवाचक — कहाँ? (उस दिशा में, दूर तक, पास)
• रीतिवाचक — कैसे? (कटती हुई, धीरे-धीरे, ध्यान से)
• परिमाणवाचक — कितना? (बहुत, थोड़ा, काफी)
अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न
5 प्रश्न
🔥 बार-बार पूछा गया
‘आखिरी चट्टान तक’ यात्रा-वृत्तांत की भाषा-शैली की विशेषताएँ बताइए।
मोहन राकेश के इस यात्रा-वृत्तांत की भाषा-शैली की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- सजीव और चित्रात्मक भाषा: लेखक ने समुद्र, लहरों, रेत और सूर्यास्त का इतना जीवंत चित्रण किया है कि पाठक को लगता है जैसे वह भी लेखक के साथ वहाँ खड़ा है।
- रंगों का भावात्मक प्रयोग: सोना → लहू → बैंजनी → काला — रंगों के माध्यम से भावनाओं को व्यक्त करना इस वृत्तांत की विशेषता है।
- उपमा और रूपक का प्रयोग: जैसे “सूर्य का गोला जैसे एक बेबसी में पानी के लावे में डूबता जा रहा था” — यह उपमा अत्यंत प्रभावशाली है।
- प्रवाहपूर्ण शैली: भाषा में एक निरंतर प्रवाह है जो पाठक को अंत तक बाँधे रखता है।
- आत्मानुभूति का समावेश: बाहरी दृश्यों के साथ-साथ लेखक की आंतरिक भावनाएँ — विस्मय, भय, उदासी, संतोष — भी व्यक्त होती हैं।
भाषा-शैली के प्रश्न में उदाहरण देना अनिवार्य है — पाठ से एक-दो पंक्तियाँ उद्धृत करें।

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