क्या लिखूँ?
लेखक: पदमलाल पुन्नालाल बख्शी | विधा: निबंध (Prose Essay)
✍️ आत्मपरक शैली
⭐ महत्वपूर्ण पाठ
लेखक परिचय
पदमलाल पुन्नालाल बख्शी
जन्म: सन् 1894, खैरागढ़, राजनंदगाँव, छत्तीसगढ़ (तत्कालीन मध्यप्रदेश)
निधन: सन् 1971
हिंदी साहित्य में स्थान: कुशल आलोचक, कवि, निबंधकार, हास्य-व्यंग्यकार। निबंध लेखन के लिए विशेष रूप से स्मरणीय।
📚 प्रमुख रचनाएँ
| विधा | रचनाएँ |
|---|---|
| निबंध संग्रह | पंच-पात्र, पदम-वन, प्रबंध पारिजात, कुछ बिखरे पन्ने |
| काव्य | अश्रुदल, शतदल |
| कहानी संग्रह | झलमला, त्रिवेणी |
| आलोचना | विश्व साहित्य, हिंदी कहानी साहित्य, हिंदी साहित्य विमर्श, हिंदी उपन्यास साहित्य |
| संपादन | सरस्वती और छाया पत्रिकाएँ |
बख्शी जी ने अपने लेखन में अध्यात्म, समाज-सुधार, लोकजीवन को प्रमुखता दी। उनकी रचनाओं में भारतीय और पाश्चात्य साहित्य के सिद्धांतों का सामंजस्य मिलता है।
पाठ का सारांश
Summary
इस निबंध में लेखक ने निबंध लेखन की रचना प्रक्रिया को रोचक और आत्मपरक शैली में समझाया है।
लेखक को नमिता और अमिता के लिए दो विषयों — ‘दूर के ढोल सुहावने’ और ‘समाज-सुधार’ — पर आदर्श निबंध लिखने हैं।
अंग्रेजी निबंधकार गार्डिनर के अनुसार — लिखने की एक विशेष मानसिक स्थिति होती है जिसमें भाव स्वतः उठते हैं। विषय महत्वपूर्ण नहीं, भाव महत्वपूर्ण है। (हैट vs खूँटी का उदाहरण)
लेखक विभिन्न विद्वानों के मत खोजता है — छोटा निबंध बड़े से अच्छा होता है; दो अंग हैं — सामग्री और शैली; पहले रूपरेखा बनानी चाहिए; भाषा में प्रवाह होना चाहिए।
फ्रांसीसी निबंधकार मानटेन ने जो देखा, सुना, अनुभव किया — वही लिख दिया। ये निबंध मन की स्वच्छंद रचनाएँ हैं — लेखक की सच्ची अनुभूति होती है।
खुसरो ने एक ही पद्य में चार विषय साध लिए। लेखक भी एक निबंध में दोनों विषयों का समावेश करने का निर्णय लेता है।
दूर से ढोल की कर्कशता नहीं पहुँचती, इसीलिए वह मधुर लगता है। इसी प्रकार — तरुण भविष्य को और वृद्ध अतीत को सुंदर देखते हैं।
मानव इतिहास में सदा सुधारों की आवश्यकता रही है। न दोषों का अंत है, न सुधारों का। जीवन प्रगतिशील इसीलिए है।
दोनों विषय आपस में जुड़ते हैं — तरुण और वृद्ध दोनों के स्वप्न सुखद हैं — “क्योंकि दूर के ढोल सुहावने होते हैं।”
मुख्य विचार-विश्लेषण
Core Themes
🎩 ‘हैट और खूँटी’ का प्रतीक
- हैट = लेखक के मनोभाव (भाव / विचार) — असली वस्तु
- खूँटी = विषय — केवल माध्यम, कोई भी चलेगा
- भाव: निबंध लेखन में लेखक के भावों की प्रधानता होती है, विषय केवल साधन है
यह प्रतीक गार्डिनर का मत है जिसे लेखक उद्धृत करता है। MCQ में यह याद रखें: सही उत्तर: (क) — विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता
📜 निबंध के दो प्रधान अंग
| अंग | अर्थ | कैसे प्राप्त करें? |
|---|---|---|
| सामग्री | विचार-समूह, तथ्य, जानकारी | मनन, अध्ययन, पुस्तकालय, अनुसंधान |
| शैली | अभिव्यक्ति का ढंग | भाषा में प्रवाह, छोटे-छोटे वाक्य, अलंकार, लोकोक्तियाँ |
🧓👦 तरुण बनाम वृद्ध — दूर के ढोल का दर्शन
| तरुण | वृद्ध |
|---|---|
| भविष्य उज्ज्वल लगता है | अतीत सुखद लगता है |
| क्रांति के समर्थक | अतीत-गौरव के संरक्षक |
| भविष्य को वर्तमान में लाना चाहते हैं | अतीत को वर्तमान में देखना चाहते हैं |
| संसार-संग्राम से दूर → संसार मनमोहक लगता है | बाल्यावस्था से दूर हट आए → अतीत स्मृति सुखद |
दोनों की असंतुष्टि के कारण वर्तमान सदा क्षुब्ध रहता है और इसीलिए वर्तमान काल सुधारों का काल बना रहता है। यही दोनों विषयों को जोड़ता है।
🔄 समाज-सुधार का शाश्वत चक्र
- मानव इतिहास में कोई ऐसा काल नहीं जब सुधारों की आवश्यकता न रही हो
- भारत के महान सुधारक: बुद्धदेव महावीर स्वामी नागार्जुन शंकराचार्य कबीर नानक राजा राममोहन राय स्वामी दयानंद महात्मा गांधी
- जो कभी सुधार थे — वही आज दोष हो गए हैं। न दोषों का अंत है, न सुधारों का
- इसीलिए जीवन प्रगतिशील माना गया है
शब्दार्थ — शब्द-संपदा
Word Meanings
शब्दार्थ परीक्षा में 1–2 अंक के प्रश्नों में आते हैं। अर्थ के साथ-साथ उदाहरण वाक्य भी याद करें।
व्याकरण — समास
Samas
समास का अर्थ है संक्षेप। समास में दो या अनेक शब्दों के मेल से एक नए शब्द की रचना होती है। जैसे: गंगा + जल = गंगाजल, देश + भक्ति = देशभक्ति
महत्वपूर्ण पारिभाषिक शब्द:
- पूर्वपद — पहला पद (जैसे ‘गंगाजल’ में ‘गंगा’)
- उत्तरपद — दूसरा पद (जैसे ‘जल’)
- समस्त पद — मेल से बना नया शब्द (जैसे ‘गंगाजल’)
- समास विग्रह — समस्त पद के अंग अलग करना (जैसे: गंगाजल = गंगा का जल)
📊 समास के छह प्रमुख भेद
निबंधशास्त्र = निबंध का शास्त्र
महापुरुष = महान पुरुष
पंचतंत्र = पाँच तंत्रों का समूह
सुख-दुख = सुख और दुख
धीरे-धीरे, दिनोदिन
📋 पाठ से सामासिक पद — उदाहरण तालिका
| सामासिक पद | समास विग्रह | समास का नाम |
|---|---|---|
| निबंधशास्त्र | निबंध का शास्त्र | तत्पुरुष समास |
| निबंध-रचना | निबंध की रचना | तत्पुरुष समास |
| मनोभाव | मन का भाव | तत्पुरुष समास |
| समाज-सुधार | समाज का सुधार | तत्पुरुष समास |
| भाव-विस्तार | भाव का विस्तार | तत्पुरुष समास |
| जीवन-संग्राम | जीवन का संग्राम | तत्पुरुष समास |
| पूर्वपद | पूर्व का पद | तत्पुरुष समास |
| अतीत-गौरव | अतीत का गौरव | तत्पुरुष समास |
| नव-वधू | नई वधू | कर्मधारय समास |
| तर्क-पूर्ण | तर्क से पूर्ण | तत्पुरुष समास |
| नगर-नगर | नगर-नगर में | अव्ययीभाव समास |
| गाँव-गाँव | गाँव-गाँव में | अव्ययीभाव समास |
उपसर्ग एवं प्रत्यय
Prefix & Suffix
उपसर्ग — शब्दों के आरंभ में लगकर नए शब्द बनाते हैं। इनका स्वतंत्र प्रयोग नहीं होता।
प्रत्यय — शब्दों के अंत में लगकर नए शब्द बनाते हैं। इनका भी स्वतंत्र प्रयोग नहीं होता।
| प्रकार | उपसर्ग/प्रत्यय | मूल शब्द | नया शब्द | पाठ में उदाहरण |
|---|---|---|---|---|
| उपसर्ग | दुर् / दुस् | बोध | दुर्बोध | सेनापति ने कविता दुर्बोध कर दी |
| उपसर्ग | अन् | आदि | अनादि | अनादि काल से |
| उपसर्ग | वि | ज्ञ | विज्ञ | हिंदी के सब विज्ञ लेखक |
| उपसर्ग | प्र | गति | प्रगति | जीवन प्रगतिशील माना गया है |
| प्रत्यय | क | सुधार | सुधारक | कितने ही सुधारक हो गए हैं |
| प्रत्यय | आई | कठिन | कठिनाई | शीर्षक बनाने में कठिनाई होती है |
| प्रत्यय | ता | मधुर | मधुरता | — |
| प्रत्यय | ता | यथार्थ | यथार्थता | इस कथन की यथार्थता में |
| प्रत्यय | शील | प्रगति | प्रगतिशील | जीवन प्रगतिशील है |
| प्रत्यय | वान | प्रतिभा | प्रतिभावान | अमीर खुसरो प्रतिभावान थे |
निबंध लिखना बड़ी कठिन+आई = कठिनाई की बात है।
वर्तमान से दोनों को अ+संतोष = असंतोष होता है।
वाक्यों में कुछ अ+स्पष्ट = अस्पष्टता भी चाहिए।
यह अस्पष्ट+ता या दुर्+बोध+ता = दुर्बोधता गांभीर्य लाती है।
साहित्यिक विशेषताएँ
Literary Devices
लेखक स्वयं पाठकों से संवाद करता है, जो इसे जीवंत, आत्मीय और प्रभावशाली बनाती है।
| विशेषता / उपकरण | विवरण | उदाहरण / साक्ष्य |
|---|---|---|
| आत्मपरक शैली | लेखक स्वयं अपनी कठिनाइयाँ बताता है, प्रथम पुरुष में | “मुझे आज लिखना ही पड़ेगा…” |
| लोकोक्ति | प्रचलित वाक्य जो विशेष सीख देते हैं | दूर के ढोल सुहावने होते हैं |
| प्रतीक | किसी विचार को वस्तु के माध्यम से व्यक्त करना | हैट = भाव, खूँटी = विषय |
| अनमेली (Anmeli) | असंगत वाक्यों को जोड़कर हास्य उत्पन्न करना | खुसरो की — “खीर पकाई जतन से…” |
| उद्धरण (Quotation) | अन्य विद्वानों के कथनों का प्रयोग | गार्डिनर, मानटेन, शेक्सपियर के संदर्भ |
| तुलना / विपरीतार्थकता | दो विरोधी विचारों की तुलना | तरुण बनाम वृद्ध, अतीत बनाम भविष्य |
| हास्य-व्यंग्य | विनोदपूर्ण शैली में गहरी बात कहना | “पर मैं हूँ मास्टर। अपनी विद्वता का प्रदर्शन करने के लिए…” |
| भाषा की सरलता | सहज, बोधगम्य हिंदी | तत्सम और बोलचाल का मिश्रण |
इस निबंध की शैली को “आत्मपरक निबंध शैली” कहते हैं। यह शैली मानटेन परंपरा से प्रेरित है जिसमें लेखक अपनी व्यक्तिगत अनुभूतियाँ व्यक्त करता है।
पाठ में उल्लिखित प्रमुख व्यक्तित्व
Key Personalities
| नाम | परिचय | पाठ में संदर्भ |
|---|---|---|
| ए.जी. गार्डिनर | अंग्रेजी के प्रसिद्ध निबंध लेखक | लिखने की विशेष मानसिक स्थिति का कथन; हैट-खूँटी उदाहरण; शेक्सपियर-नामकरण की बात |
| मानटेन (Montaigne) | फ्रांसीसी लेखक — अंग्रेजी निबंध पद्धति के जन्मदाता | जो देखा, सुना, अनुभव किया — वही लिखा; स्वच्छंद निबंध पद्धति के प्रवर्तक |
| अमीर खुसरो | महान कवि, संगीतकार, प्रतिभाशाली व्यक्तित्व | एक ही पद्य में चार महिलाओं की इच्छाएँ पूरी कीं — अनमेली का उदाहरण |
| शेक्सपियर | अंग्रेजी के महान नाटककार | नाटकों के नामकरण में कठिनाई — इसीलिए एक नाटक का नाम ‘जैसा तुम चाहो’ रखा |
| बाणभट्ट | संस्कृत के प्रसिद्ध गद्यकार | कादंबरी में आधे पृष्ठ के वाक्य — विद्वता प्रदर्शन का उदाहरण |
| श्रीहर्ष | संस्कृत के प्रसिद्ध कवि | जान-बूझकर दुर्बोध गुत्थियाँ डालीं — गांभीर्य के लिए |
| सेनापति | हिंदी के कवि | अपनी कविता दुर्बोध की — गांभीर्य हेतु |
| महात्मा गांधी | भारत के राष्ट्रपिता | समाज-सुधारकों की सूची में |
मुख्य पंक्तियाँ एवं उनका भाव
Key Quotes
ये पंक्तियाँ भाव-विस्तार / व्याख्या / MCQ — किसी भी रूप में पूछी जा सकती हैं।
आया कुत्ता खा गया, तू बैठी ढोल बजा।।”
— अमीर खुसरो
पाठ का समग्र सारांश
Quick Revision
पदमलाल पुन्नालाल बख्शी | ललित निबंध | आत्मपरक शैली
निबंध रचना प्रक्रिया की कठिनाइयाँ और आदर्श निबंध लेखन के तरीके
भाव ही असली वस्तु हैं। मानटेन पद्धति — स्वानुभव पर आधारित लेखन सर्वश्रेष्ठ है
गार्डिनर, मानटेन, अमीर खुसरो, शेक्सपियर, बाणभट्ट, श्रीहर्ष
“दूर के ढोल सुहावने होते हैं” — पूरे निबंध का सूत्रवाक्य
भाव-विस्तार, व्याकरण (समास, उपसर्ग-प्रत्यय), MCQ, बोध-प्रश्न — सभी के लिए महत्वपूर्ण
इस पाठ से MCQ, भाव-विस्तार, समास-विग्रह और लेखक परिचय निश्चित रूप से पूछे जाते हैं। साथ ही मानटेन और गार्डिनर के विचारों का अंतर भी महत्वपूर्ण है।

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