“धर्मश्च व्यवहारश्च चरित्रं राजशासनम्” –
धर्म, अच्छा व्यवहार, अच्छा चरित्र और राजा की आज्ञा का पालन करना चाहिए-
(अध्यापकः कक्षायां प्रविशति। सर्वे छात्राः उत्थाय तम् अभिवदन्ति।)
(शिक्षक कक्षा में प्रवेश करते हैं। सभी छात्र उठकर उनका अभिवादन करते हैं।)
छात्राः सादरं प्रणामाः मान्यवर!
हिंदी अनुवाद: मान्यवर, सादर प्रणाम!
अध्यापकः नमो नमः। एवं भासते भवन्तः किञ्चित् प्रष्टुम् इच्छन्ति!
हिंदी अनुवाद: नमस्कार! ऐसा प्रतीत होता है कि आप सब कुछ पूछना चाहते हैं!
छात्राः आम् महोदय!
हिंदी अनुवाद: जी हाँ, महोदय!
अध्यापकः शोभनम्! पृच्छन्तु!
हिंदी अनुवाद: उत्तम! पूछिए!
दक्षः महोदय! वयं भवतः कथनानुसारं ह्यः पुस्तकालयं गतवन्तः। तत्र वयम् ‘अर्थशास्त्रम्’ इति ग्रन्थं दृष्टवन्तः। अस्य ग्रन्थस्य विषये अस्माभिः बहुधा श्रुतम् आसीत्। अस्मिन् विषये वयम् अधिकं ज्ञातुम् इच्छामः।
हिंदी अनुवाद: महोदय! हम आपके कहे अनुसार कल पुस्तकालय गए थे। वहाँ हमने ‘अर्थशास्त्र’ नाम का ग्रन्थ देखा। इस ग्रन्थ के विषय में हमने बहुत सुना था। इस विषय में हम और अधिक जानना चाहते हैं।
अध्यापक: शोभनम्! अर्थशास्त्रं तु आचार्येण कौटिल्येन लिखितम्। तत्र आचारः, व्यवहारः, नागरिकाणां कर्तव्यानि इत्यादयः विषयाः विस्तरेण वर्णिताः सन्ति। भूमेः लाभाय संरक्षणाय च यावन्ति अर्थशास्त्राणि पूर्वाचार्यैः प्रस्तावितानि, प्रायशः तानि सर्वाणि संहृत्य एव इदम् अर्थशास्त्रं रचितम्।
हिंदी अनुवाद: बहुत अच्छा! अर्थशास्त्र आचार्य कौटिल्य द्वारा लिखा गया था। उसमें आचार, व्यवहार, नागरिकों के कर्तव्य इत्यादि विषयों का विस्तार से वर्णन किया गया है। पृथ्वी के लाभ और संरक्षण के लिए पूर्व आचार्यों द्वारा जितने भी अर्थशास्त्र प्रस्तावित किए गए थे, प्रायः उन सभी का संग्रह करके ही यह अर्थशास्त्र रचा गया है।
श्रुतिः अस्तु आचार्य! अद्य विविधेषु देशेषु अस्माकं देशे च यादृशी शासनव्यवस्था प्रचलिता, किं तादृशी एव शासनव्यवस्था अर्थशास्त्रे अपि उल्लिखिता?
हिंदी अनुवाद: ठीक है आचार्य जी! आज विभिन्न देशों में और हमारे देश में जैसी शासन व्यवस्था प्रचलित है, क्या वैसी ही शासन व्यवस्था अर्थशास्त्र में भी उल्लिखित है?
अध्यापकः नूनमस्ति। तथा हि इदं पद्यं तत्र उक्तम् —
हिंदी अनुवाद: निश्चित रूप से है। जैसा कि वहाँ यह पद्य कहा गया है —
स्वाम्यमात्य-जनपद-दुर्ग-कोश-दण्ड-मित्राणि प्रकृतयः। (६.२.२७)
श्रुतिः महोदय! अस्य कः अभिप्रायः?
हिंदी अनुवाद: महोदय! इसका क्या अर्थ है?
अध्यापकः अत्र स्वामी इत्यनेन शासनप्रमुखः, अमात्यः इत्यनेन मन्त्री, जनपदः इति जनानां वासयोग्यः भूभागः, दुर्गं नाम सुरक्षाचक्रम् (किला), कोशः नाम सर्वकारीयवित्तसंग्रहः (खजाना), दण्डः नाम प्रजानुशासनव्यवस्था (सेना/कानून व्यवस्था), मित्राणि इत्युक्ते सुहृद्देशाः च।
हिंदी अनुवाद: यहाँ स्वामी का अर्थ शासन प्रमुख (राजा), अमात्य का अर्थ मंत्री, जनपद का अर्थ लोगों के रहने योग्य भूभाग, दुर्ग का अर्थ सुरक्षा घेरा (किला), कोश का अर्थ सरकारी खजाना, दण्ड का अर्थ प्रजा-अनुशासन व्यवस्था (सेना) तथा मित्र का अर्थ सहयोगी देश हैं।
वागीशः श्रीमन्! अधुना मम जिज्ञासा वर्धते तदानीं न्यायव्यवस्था कीदृशी आसीत् इति।
हिंदी अनुवाद: श्रीमान्! अब मेरी जिज्ञासा बढ़ रही है कि उस समय न्याय व्यवस्था कैसी थी।
अध्यापकः धर्मः, व्यवहारः, चरित्रं, राजशासनं च इति न्यायस्य चत्वारः पादाः। एतैः एव विवादानां समाधानं भवति स्म।
हिंदी अनुवाद: धर्म, व्यवहार, चरित्र और राजशासन — ये न्याय के चार चरण (आधार) हैं। इन्हीं से विवादों का समाधान होता था।
वागीशः महोदय! धर्मः सत्ये प्रतिष्ठितः इत्यस्य कः अभिप्रायः?
हिंदी अनुवाद: महोदय! “धर्म सत्य पर आधारित है” इसका क्या अर्थ है?
अध्यापकः धर्मानुसारमेव न्यायः भवेत् इति अभिप्रायः।
हिंदी अनुवाद: इसका अर्थ है कि न्याय धर्म के अनुसार ही होना चाहिए।
श्रुतिः आचार्य! व्यवहारः कः? चरित्रं किम्? राजशासनं किम्?
हिंदी अनुवाद: आचार्य जी! व्यवहार क्या है? चरित्र क्या है? और राजशासन क्या है?
अध्यापकः वागीश! भवान् वदतु, भवान् अस्मिन् विषये किं चिन्तयति?
हिंदी अनुवाद: वागीश! आप बताइए, आप इस विषय में क्या सोचते हैं?
वागीशः व्यवहारः इत्युक्ते सन्देहस्थलेषु साक्षिभिः समाधानम्। चरित्रम् इत्युक्ते सतां व्यवहारः। राजशासनम् इत्यस्य च अभिप्रायः राज्ञा दत्तः निर्णयः।
हिंदी अनुवाद: व्यवहार का अर्थ है संदेह की स्थिति में गवाहों (साक्षियों) के माध्यम से समाधान। चरित्र का अर्थ है सज्जनों का आचरण/परंपरा। और राजशासन का अर्थ है राजा द्वारा दिया गया निर्णय।
धर्मश्च व्यवहारश्च चरित्रं राजशासनम्।
विवादार्थश्चतुष्पादः पश्चिमः पूर्वबाधकः॥
अत्र सत्ये स्थितो धर्मो व्यवहारस्तु साक्षिषु।
चरित्रं सङ्ग्रहे पुंसां राज्ञामाज्ञा तु शासनम्॥
हिंदी अनुवाद:
विवाद के समाधान के न्याय के चार चरण (आधार) हैं — धर्म, व्यवहार, चरित्र और राजशासन। इनमें से बाद वाला चरण पहले वाले चरण को बाधित (अभिभूत) करता है। यहाँ धर्म सत्य पर आधारित होता है, व्यवहार गवाहों (साक्षियों) पर निर्भर करता है, चरित्र सज्जन पुरुषों के आचरण/संग्रह पर आधारित होता है, तथा राजा की आज्ञा ही शासन (राजशासन) है।
अध्यापकः अतीव शोभनं वागीश!
हिंदी अनुवाद: बहुत बढ़िया, वागीश!
श्रीवाणी: श्रीमन्! अद्यापि एतेषां पादानाम् अनुप्रयोगः भवति किम्?
हिंदी अनुवाद: श्रीमान्! क्या आज भी इन चरणों का प्रयोग होता है?
अध्यापक: भवति, वत्से! ‘यतो धर्मस्ततो जयः’ इति भारतीयउच्चतमन्यायालयस्य ध्येयवाक्यम् अस्ति। अस्मिन् वाक्ये वयं धर्मस्य प्रतिष्ठामेव पश्यामः। एवमेव ‘सत्यमेव जयते’, ‘धर्मचक्रप्रवर्तनाय’ इत्यादीनि प्रसिद्धानि ध्येयवाक्यानि यद्यपि तत्र तत्र अनुप्रयुक्तानि एव।
हिंदी अनुवाद: होता है, पुत्री! “यतो धर्मस्ततो जयः” (जहाँ धर्म है, वहाँ विजय है) भारत के सर्वोच्च न्यायालय का ध्येय वाक्य है। इस वाक्य में हम धर्म की ही प्रतिष्ठा देखते हैं। इसी प्रकार “सत्यमेव जयते” (सत्य की ही जीत होती है), “धर्मचक्रप्रवर्तनाय” आदि प्रसिद्ध ध्येय वाक्य भी अलग-अलग स्थानों पर प्रयुक्त किए गए हैं।
मुदिता: रोचकः खलु अयम् प्रसङ्गः। शासकानां कर्तव्यविषये अपि नूनं तत्र चर्चा कृता स्यात्?
हिंदी अनुवाद: यह प्रसंग वास्तव में बहुत रोचक है। क्या शासकों के कर्तव्य के विषय में भी वहाँ अवश्य चर्चा की गई होगी?
अध्यापकः उक्तमेव —
हिंदी अनुवाद: कहा भी गया है —
विद्याविनीतो राजा हि प्रजानां विनये रतः।
अनन्यां पृथिवीं भुङ्क्ते सर्वभूतहिते रतः॥ (१.२.५)
हिंदी अनुवाद: जो राजा विद्या से नम्र है, प्रजा के अनुशासन/कल्याण में लगा रहता है और सभी प्राणियों के हित में लीन रहता है, वह निष्कंटक पूरी पृथ्वी का उपभोग करता है (शासन करता है)।
राज्ञः जीवनं प्रजासेवने समर्पितं स्यात्। तस्य वैयक्तिकं प्रियं तत्र न मुख्यम्। एवं राज्ञः कर्तव्यानि उक्तानि।
हिंदी अनुवाद: राजा का जीवन प्रजा की सेवा में समर्पित होना चाहिए। उसका व्यक्तिगत प्रिय (स्वार्थ) वहाँ मुख्य नहीं होता। इस प्रकार राजा के कर्तव्य कहे गए हैं।
श्रुतिः आचार्य! अहमपि एकं श्लोकं स्मरामि —
हिंदी अनुवाद: आचार्य जी! मुझे भी एक श्लोक याद आ रहा है —
प्रजासुखे सुखं राज्ञः प्रजानां च हिते हितम्।
नात्मप्रियं हितं राज्ञः प्रजानां तु प्रियं हितम्॥ (१.१९.३९)
हिंदी अनुवाद: प्रजा के सुख में ही राजा का सुख है और प्रजा के हित में ही राजा का हित है। राजा के लिए अपना व्यक्तिगत प्रिय हितकर नहीं है, बल्कि प्रजा का प्रिय ही उसके लिए हितकर है।
मुदिता: नागराणां संरक्षणं व्यवस्थापनञ्च कथं अस्मिन् ग्रन्थे चिन्तितमस्ति?
हिंदी अनुवाद: नागरिकों का संरक्षण और व्यवस्थापन इस ग्रन्थ में किस प्रकार विचारित किया गया है?
अध्यापक: “कोषपूर्वाः सर्वारम्भाः” (२.८.१-२) इत्युक्तिः अस्ति तस्मात् कोशस्य व्यवस्था महत्त्वपूर्णा। सर्वेषां मनुष्याणां भोजनादीनां व्यवस्थापनं कोषस्य प्रयोजनम्।
हिंदी अनुवाद: “सभी कार्यों का आरम्भ खजाने (कोश) पर निर्भर करता है” — यह उक्ति है, इसलिए कोश (खजाने) की व्यवस्था महत्त्वपूर्ण है। सभी मनुष्यों के भोजन आदि की व्यवस्था करना कोश का मुख्य प्रयोजन है।
वागीश: अहो, उत्तमम्! किन्तु आचार्य! प्राचीनकाले कोषे धनं कथम् आयाति स्म?
हिंदी अनुवाद: अरे, बहुत उत्तम! किन्तु आचार्य जी! प्राचीन काल में खजाने में धन कैसे आता था?
अध्यापकः करव्यवस्था तस्मिन् तस्मिन् कालेऽपि आसीत्। धान्यषड्भागं पण्यदशभागं हिरण्यं च कररूपेण देयम् इति नियमः आसीत्।
हिंदी अनुवाद: कर (टैक्स) व्यवस्था उस समय भी थी। अनाज का छठा भाग (1/6), व्यापारिक वस्तुओं का दसवाँ भाग (1/10) और स्वर्ण/नकद कर के रूप में देना चाहिए — ऐसा नियम था।
अध्यापक: छात्राः! अर्थशास्त्रे अन्येऽपि तादृशाः विषयाः सन्ति ये अद्यापि महत्त्वपूर्णाः सन्ति। संविधानकर्तृभिः बहवः अंशाः ततः एव स्वीकृताः। अत्र मया केवलं भवतां जिज्ञासा-शमनार्थं दिङ्मात्रं उक्तम्। अग्रे भवद्भिः पुस्तकपठने प्रयत्नो विधेयः।
हिंदी अनुवाद: छात्रों! अर्थशास्त्र में अन्य भी ऐसे कई विषय हैं जो आज भी महत्त्वपूर्ण हैं। संविधान निर्माताओं द्वारा कई अंश वहीं से स्वीकार किए गए हैं। यहाँ मैंने केवल आप सब की जिज्ञासा शांत करने के लिए केवल दिशा-निर्देश (संकेत मात्र) दिया है। आगे आपको स्वयं पुस्तक पढ़ने का प्रयास करना चाहिए।
श्रीवाणी: श्रीमन्! वयं कृतज्ञाः। वयम् अवश्यमेव अर्थशास्त्रं भारतीयसंविधानं च पठित्वा परस्परं चर्चा च कृत्वा अधिकम् अधिगन्तुं प्रयत्नं करिष्यामः।
हिंदी अनुवाद: श्रीमान्! हम सब कृतज्ञ हैं। हम सब अवश्य ही अर्थशास्त्र और भारतीय संविधान को पढ़कर तथा आपस में चर्चा करके और अधिक जानने का प्रयास करेंगे।
अध्यापकः शुभमस्तु प्रेयांसः। सुखं जीवन्तु!
हिंदी अनुवाद: प्रिय छात्रों, तुम्हारा कल्याण हो! सुखपूर्वक जियो!


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